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व्यक्ति को "बाइसेक्सुअल" (bisexual) तब कहा जाता है जब वह पुरुष और महिलाओं, दोनों ही की तरफ मानसिक या शारीरिक रूप से आकर्षित होता है। बाइसेक्सुअल होना व्यक्ति के मन की इच्छाओं और व्यवहार की एक सामान्य स्थिति है। यह कोई रोग या संक्रामक बीमारी नहीं है।

यह बात अभी तक अज्ञात है कि कोई बाइसेक्सुअल क्यों होता है। लेकिन रिसर्च से ऐसे अंदेशे मिलें हैं कि किसी भी व्यक्ति का विपरीत, समान या दोनों ही लिंग के लोग के साथ मानसिक व शारीरिक आकर्षण जन्म के पूर्व से ही जैविक कारकों पर निर्भर करता है।

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इस लेख में विस्तार से बताया जा रहा है कि बाइसेक्सुअल होना क्या है, बाइसेक्सुअल होने के कारण व लक्षण क्या होते हैं और यदि आप या आपका कोई परिचित बाइसेक्सुअल हो तो आपको क्या करना चाहिए आदि।

  1. बाइसेक्सुअल क्या है - Bisexual kya hai
  2. बाइसेक्सुअल होने के कारण - Bisexual hone ke karan
  3. कैसे पहचाने की आप बाइसेक्सुअल हैं - Kaise pehchane ki aap bisexual hai
  4. कोई प्रियजन बाइसेक्सुअल हो तो क्या करना चाहिए - Koi priyajan bisexual ho to kya karna chahiye
  5. बायसेक्सुअल क्या होता है, कारण, लक्षण, क्या करें के डॉक्टर

एक से अधिक लिंग के लोगों के साथ शारीरिक, यौन और भावनात्मक आर्कषण महसूस करने वाले व्यक्ति को "बाइसेक्सुअल" कहते हैं।

समान और विपरीत लिंग के लोगों की सुंदरता को केवल सराहना बाइसेक्सुअल होना नहीं है। लेकिन अगर बात सराहने से आगे बढ़ कर महिला और पुरुष दोनों के साथ यौन सम्बन्ध बनाने तक पहुँच जाए, तो उसे बाइसेक्सुअल होना कहा जाता है।

जीव और सेक्स वैज्ञानिक अल्फ्रेड किन्ज़ी लैंगिकता के पैमाने के बारे में बताते हुए कहते हैं कि इसको काले और सफेद (विपरीत लिंग से आकर्षण और समान लिंग से आकर्षण) के आधार पर व्यक्त नहीं किया जा सकता है। यह इन दोनों ही अवस्था के बीच की स्थिति होती है। उन्होंने इसके लिए एक पैमाना बनाया जिसे "किन्ज़ी स्केल" कहा जाता है। यह पैमाना 0 से 6 तक होता है। 0 को विपरीत लिंग के प्रति आकर्षण और 6 को समान लिंग के प्रति आकर्षण कहा जाता है। तो इस पैमाने के हिसाब से बाइसेक्सुअल को किन्ज़ी स्केल पर 3 माना जाता है।

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कोई व्यक्ति बाइसेक्सुअल क्यों होता है?

किसी व्यक्ति के समलैंगिक (गे या लेस्बियन) और बाइसेक्सुअल होने के कारणों के बारे में कुछ भी सही तरह से मालूम नहीं चल सका है, लेकिन कुछ रिसर्च से पता चलता है कि जन्म से पहले के कुछ जैविक कारकों द्वारा "सेक्सुअल ओरिएंटेशन" (Sexual orientation - आप जिस लिंग के व्यक्ति के साथ संबंध बनाने के लिए आकर्षित होते हैं) की संभावना आंशिक रूप निर्धारित होती है। 

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सेक्सुअल ओरिएंटेशन कोई विकल्प नहीं है और ना ही इसको बदला जा सकता है। किसी भी थेरेपी, उपचार या अन्य उपाय से व्यक्ति की सेक्सुअल ओरिएंटेशन को नहीं बदला जा सकता है। इसके अलावा आप किसी भी व्यक्ति को बाइसेक्सुअल में परिवर्तित नहीं कर सकते हैं।

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आप युवावस्था में ही इस बात के बारे में जान सकते हैं कि आप किसके प्रति (महिला या पुरुष) आकर्षित होते हैं। यहां पर आकर्षित होने का मतलब यह नहीं है कि आप में यौन इच्छाएं हैं, बल्कि मतलब है कि आप यह पहचान पाते हैं कि किस लिंग के लोग आपको आकर्षित करते हैं। कई लोग बताते हैं कि उन्होंने किशोरावस्था से पहले ही पता चल गया था कि वह गे, लेस्बियन या बाइसेक्सुअल हैं। 

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सेक्सुअल ओरिएंटेशन आमतौर पर जीवन में शुरूआती दौर में ही निर्धारित हो जाती है, लेकिन जीवन के किसी भी पड़ाव में आपकी इच्छाओं में बदलाव होना कोई असामान्य बात नहीं है। इसे "फ्लयूडिटी" (Fluidity) कहा जाता है।

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कैसे पहचानें कि आप बाइसेक्सुअल हैं या नहीं?

बाइसेक्सुअल होना एक प्राकृतिक बात है और इसका यह मतलब बिलकुल न निकाले कि आप में कोई दोष है। कुछ लोगों को अपनी सेक्सुअल ओरिएंटेशन के बारे में सही तरह से समझ पाने में कई साल लग जाते हैं। इसके निर्धारण में लोग खुद से कई तरह के सवाल करते हैं और वह कभी खुद को "हैट्रोसेक्सुअल" (heterosexual: इतरलिंगी - वितरीत लिंग के प्रति आकर्षण) तो कभी "होमोसेक्सुअल" (homosexual: समलैंगिक - समान लिंग के प्रति आकर्षण) समझते हैं। 

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कुछ लोग अपनी सेक्सुअल ओरिएंटेशन को समझने के लिए अपने लिए हैट्रोसेक्सुअल या होमोसेक्सुअल में से एक "लेबल" का चयन करते हैं, और अगर वह उन्हें ठीक न लगे तो दूसरा लेबल आज़माते हैं। यदि आप एक लेबल में खुद को सहज न महसूस करें, तो ऐसे में आप दूसरा लेबल भी अपना सकते हैं। कुछ लोग दोनों में से किसी भी लेबल का इस्तेमाल नहीं करते। आप किसी भी लेबल का चयन करें या न करें, यह सब ठीक है। 

कुछ लोग अपने बाइसेक्सुअल होने का इज़हार सबके सामने समाज और भेदभाव के डर की वजह से नहीं करते हैं। अगर आप खुद को बाइसेक्सुअल महसूस करते हैं तो आपको इस बारे में अपने नजदीकी व विश्वसनीय मित्रों और परिवार वालों से बात करनी चाहिए, ताकि इस स्थिति में वह आपकी मदद कर सकें। 

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कैसे पहचानें कि कोई प्रियजन बाइसेक्सुअल है या नहीं?

कई बार कुछ लोग गे, लेस्बियन और बाइसेक्सुअल को उनके व्यवहार और पहनावे के आधार पर पहचानने का अनुमान लगाते हैं। लेकिन किसी भी व्यक्ति की सेक्सुअल ओरिएंटेशन का उनके पहनावे के आधार पर अनुमान लगाना गलत है। सामान्य व्यक्ति के व्यवहार और पहनावे के अलग-अलग तरीकों की तरह ही होमोसेक्सुअल और बाइसेक्सुअल होगें का भी पहनावा और व्यवहार होता है। इससे उनको समाज में अलग दृष्टि से देखना बेहद गलत है और उन्हें मानसिक पीड़ा पहुंचाता है।

अगर आप जानना चाहते हैं कि आपका कोई प्रियजन समलैंगिक या बाइसेक्सुअल है तो इसका सिर्फ एक ही तरीका है  - उनसे पूछें। केवल वो ही आपको बता सकते हैं कि उनकी सेक्सुअल ओरिएंटेशन क्या है। अगर वो आपको बताना न चाहें तो ज़बरदस्ती न करें। और अगर वो बता दें, तो जो भी उनकी सेक्सुअल ओरिएंटेशन हो, आप उनका समर्थन करें। इसके बारे में आगे और बताया जा रहा है।

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किसी की भी सेक्सुअल ओरिएंटेशन को दूसरो द्वारा तय नहीं किया जा सकता है। इसके बारे में होमोसेक्सुअल या बाइसेक्सुअल व्यक्ति खुद ही जान पाता है। आप खुद को किस स्थिति में महसूस करते हैं, यह आपकी मन की स्तिथि पर निर्भर करता है। (और पढ़ें - बेहतर सेक्स लाइफ के लिए योगा)

यदि आप अपने किसी प्रियजन की बाइसेक्सुअलिटी के बारे में जानना चाहते है तो आपको सबसे पहले उन्हें सहज करने के बाद ही इस बारे में पूछना चाहिए और यह उनका निजी मामला है, इसलिए इस बारे में बताना या ना बताना केवल उनकी इच्छा पर ही निर्भर करता है। इसके बारे में पूछने के लिए आप उन पर किसी भी प्रकार का दबाव नहीं डाल सकते हैं। आज के दौर में कई बड़े शहरों में बाइसेक्सुअल लोगों के समूह बन गए हैं।

नीचे कुछ सुझाव दिए गए हैं जिससे आप खुद की या बाइसेक्सुअल प्रियजन की मदद कर सकते हैं।

  1. बाइक्सुअलिटी के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त करें – पने प्रियजन से इस बारे में बात करने से पहले आप खुद बाईसेक्सुअलिटी के बारे में जानें और इसे समझने की कोशिश करें। साथ ही इस बात को भी समझिये कि बाइसेक्सुअल लोगों को हमारे समाज में कितने भेद-भाव का सामना करना पड़ता है। सामान्यतः बाइसेक्सुअलिटी को समाज में मान्यता नहीं दी जाती है, ऐसे में बाइसेक्सुअल लोगों को समाज में हीन दृष्टि से देखा जाता है। जबकि यह बाइसेक्सुअल होना पूरी तरह से प्राकृतिक बात है। (और पढ़ें - सेक्स के दौरान की जानें वाली गलतियां)
     
  2. प्रोत्साहन दें – बाइसेक्सुअल होने के बारे में खुल्ले में बताना बेहद ही हिम्मत वाली बात होती है। ऐसे लोगों की सराहना करें और उनको बताएं कि आप उनके बारे में सकारात्मक सोच रखते हैं।
     
  3. बाइसेक्सुअल व्यक्ति को 'गे और हैट्रोसेक्सुअल' न समझें – जब कोई खुद को बाइसेकसुअल कहे तो आपको उनको गे या हैट्रोसेक्सुअल न समझें। बेशक यह सच हो कि कई बार होमोसेक्सुअल अपने बारे में लोगों को न बताने के लिए खुद को बाइसेक्सुअल कह देते हैं, लेकिन इन सब बातों के बारे में विचार न करते हुए आपको केवल व्यक्ति की बातों पर ही विश्वास करना चाहिए। बाइसेक्सुअलिटी के बारे में आज भी कई लोग विश्वास नहीं करते हैं। लेकिन इन लोगों को समाज में आने के लिए बेहद साहसी होने की जरूरत पड़ती है। अगर आपका कोई प्रियजन बाइसेक्सुअल है तो उनके साथ आदर और सम्मान से बात करें। आपको यह समझना ज़रूरी है कि एक बाइसेक्सुअल व्यक्ति वाकई में समलैंगिक या इतरलिंगी नहीं होता है। (और पढ़ें - सेक्स से जुड़े भ्रम)
     
  4. हैट्रोसेक्सुअल 'बन जाने' का सुझाव देना गलत है – आपको बाइसेक्सुअल व्यक्ति को हैट्रोसेक्सुअल रहने का सुझाव नहीं देना चाहिए। इनको किस लिगं के प्रति आकर्षण होगा इस बात का निर्धारण नहीं किया जा सकता है। (और पढ़ें - शादी के लिए सही उम्र)
     
  5. बाइसेक्सुअल व्यक्ति का लंबे समय तक समर्थन दें – बाइसेक्सुअल व्यक्ति को समझना, उसकी मदद करना और उसके समर्थन देने से, बाइसेक्सुअल व्यक्ति के व्यवहार में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलते हैं। अगर वह इस स्थिति में किसी परेशानी में हैं तो उनसे बात करें और उनके प्रति सहानुभूति प्रकट करें। (और पढ़ें - सेक्स पोजीशन)

बाइसेक्सुअल पति या पत्नी के साथ कैसा व्यवहार करें

यदि आपको यह मालूम हो गया है कि आपका पार्टनर बाइसेक्सुअल है और आप उसके साथ रहना चाहते हैं तो आपको उनका साथ देना होगा। इस दौरान आपको अपने साथी से इस बारे में खुल कर बात करनी होगी और उनको समझना होगा। इसके अलावा उनको भावनात्मक रूप से मजबूत बनाने के लिए प्रयास करना होगा। उनके साथ समय बिताएं और हो सके तो किसी काउंसलर के पास जाएं। 

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