आप सभी को शायद ही पता होगा की बाइसेक्शुअल होना क्या होता है। और बहुत से लोगों के ये जानने की इच्छा रहती है की आखिर बाइसेक्शुअल होता क्या है? सभी इसके बारें में जानना चाहते हैं। और इसके बारें में आपको पता होना भी जरूरी है।
इस लेख के जरिये आप जानेंगे की बाइसेक्शुअल क्या होता है और इसकी टर्म को आसानी से समझने में मदद करेगा।
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- बाइसेक्शुअल क्या है?
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बाइसेक्शुअलिटी से जुडी कुछ बातें जो आपके लिए जाननी जरूरी है-
- 1. बाइसेक्शुअलिटी का मतलब हर किसी के लिए अलग होता है
- 2. कुछ लोग इसे सिर्फ पुरुष और महिला तक सीमित मानते हैं?
- 3. कुछ लोग इसे और बड़ा मानते हैं
- 4. बाइसेक्शुअलिटी का मतलब 50/50 नहीं होता
- 5. कुछ लोग सिर्फ़ सिजेंडर पुरुषों और महिलाओं की तरफ एट्रैक्ट होते हैं
- 6. कुछ लोग पूरे जेंडर स्पेक्ट्रम की तरफ आकर्षित होते हैं
- 7. कुछ लोग एक जेंडर की तरफ ज़्यादा खिंचाव महसूस करते हैं
- 8. अलग जेंडर के साथ रिलेशनशिप में होना आपको “स्ट्रेट” नहीं बनाता
- 9. अलग-अलग जेंडर के साथ अलग तरह का रिश्ता होना
- 10. आप किसकी तरफ आकर्षित हैं
- 11. बाइसेक्शुअल होना कोई “फेज़” है
- 12. अगर आपकी बाइसेक्शुअलिटी की परिभाषा बदल रही है, तो ये नॉर्मल है
- 13. अगर आपको लगता है कि अब आप बाइसेक्शुअल नहीं हैं, तो ये भी ठीक है
- 14. बाइसेक्शुअल शब्द का इस्तेमाल कई बार दूसरे शब्दों के साथ मिलाकर किया जाता है
- 15. सेक्शुअल एक्सपीरियंस और सेक्शुअल ओरिएंटेशन अलग चीज़ें हैं
- 16. अपनी सेक्शुअलिटी समझने के लिए कोई “टेस्ट” नहीं होता
- 17. वही पहचान चुनें जिसमें आप सबसे सहज महसूस करते हैं
- पैनसेक्शुअल और बाइसेक्शुअल में क्या अंतर है?
- बाइसेक्शुअलिटी से जुड़े मिथक और गलतफहमियाँ
- अपनों को बाइसेक्शुअलिटी समझाएँ
- अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- सारांश
बाइसेक्शुअल क्या है?
बाइसेक्शुअलिटी का मतलब है एक से ज़्यादा जेंडर की तरफ आपका एट्रैक्ट होना। जो लोग खुद को बाइसेक्शुअल मानते हैं, वो किसी अलग जेंडर के इंसान की तरफ भी और अपने ही जेंडर के इंसान की तरफ भी रोमांटिक या सेक्शुअल फीलिंग रख सकते हैं।
ये तो बस बेसिक डेफिनिशन है, लेकिन असल में बाइसेक्शुअल लोग बहुत अलग-अलग तरीके से अपनी पहचान और फीलिंग्स को समझते हैं। कुछ लोग लड़के और लड़की दोनों की तरफ बराबर एट्रैक्ट होते हैं, जबकि कुछ किसी एक जेंडर की तरफ ज़्यादा एट्रैक्ट महसूस करते हैं।
एक बाइसेक्शुअल इंसान लम्बे समय तक किसी सेम-जेंडर वाले पार्टनर के साथ भी रिलेशनशिप में रह सकता है या किसी अलग जेंडर वाले के साथ भी रह सकता है। कई बार उनके रिश्ते बदलते भी रहते हैं, लेकिन उनकी पहचान बाइसेक्शुअलिटी ही रहती है।
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बाइसेक्शुअलिटी से जुडी कुछ बातें जो आपके लिए जाननी जरूरी है-
बाइसेक्शुअलिटी से जुडी कुछ बातें निम्न है-
1. बाइसेक्शुअलिटी का मतलब हर किसी के लिए अलग होता है
- 3“बाइसेक्शुअल” शब्द का मतलब लोग अलग-अलग तरीके से समझते हैं। कुछ लोगों के लिए इसका मतलब है दो या उससे ज़्यादा जेंडर की तरफ अट्रैक्शन होना। लेकिन अगर आप अलग-अलग लोगों से पूछेंगे तो हर किसी की परिभाषा थोड़ी अलग मिलेगी।
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2. कुछ लोग इसे सिर्फ पुरुष और महिला तक सीमित मानते हैं?
कई लोग सोचते हैं कि बाइसेक्शुअल का मतलब सिर्फ पुरुष और महिला की तरफ अट्रैक्शन होता है। ऐसे में यह परिभाषा ट्रांसजेंडर या नॉनबाइनरी लोगों को नज़रअंदाज़ कर देती है। कई बार लोग मानते हैं कि ये शब्द ट्रांसजेंडर लोगों की पहचान को भी नज़रअंदाज़ कर देता है। इसी वजह से कुछ लोगों को पैनसेक्शुअल, क्वियर, या फ्लूइड जैसे शब्द ज़्यादा सही और इनक्लूसिव लगते हैं, क्योंकि ये अलग-अलग जेंडर और पहचान को भी शामिल करते हैं।
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3. कुछ लोग इसे और बड़ा मानते हैं
इतिहास में “बाइसेक्शुअल” शब्द का मतलब सिर्फ़ “पुरुष और महिला” नहीं था, बल्कि इसका मतलब था “सेम और डिफरेंट” – यानी अपने ही जेंडर के लोगों की तरफ एट्रैक्ट और उन जेंडर की तरफ भी जो आपसे अलग हों।
- होमोसेक्शुअल का मतलब है – अपने ही जेंडर की तरफ आकर्षण।
- हेट्रोसेक्शुअल का मतलब है – अपने से अलग जेंडर की तरफ आकर्षण।
तो बाइसेक्शुअलिटी में दोनों शामिल हो सकते हैं – यानी “सेम” और “डिफरेंट” दोनों।
4. बाइसेक्शुअलिटी का मतलब 50/50 नहीं होता
सिर्फ़ अपने ही जेंडर की तरफ एट्रैक्ट और सिर्फ़ अलग जेंडर की तरफ एट्रैक्ट को समझने से आपको बाइसेक्शुअलिटी का मतलब समझने में थोड़ी मदद मिल सकती है।
लेकिन ये गलती मत कीजिए कि बाइसेक्शुअल लोग “आधा गे” और “आधा स्ट्रेट” होते हैं। ऐसा बिल्कुल नहीं है। बाइसेक्शुअलिटी अपनी अलग पहचान है। ये गे या स्ट्रेट का मिला-जुला रूप नहीं, बल्कि खुद में एक पूरी और यूनिक पहचान है।
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5. कुछ लोग सिर्फ़ सिजेंडर पुरुषों और महिलाओं की तरफ एट्रैक्ट होते हैं
आपको ऐसे बाइसेक्शुअल लोग मिल सकते हैं जो कहते हैं कि उन्हें सिर्फ़ सिजेंडर पुरुषों और महिलाओं की तरफ ही एट्रैक्ट होतें हैं। लेकिन ध्यान रहे, ये हर बाइसेक्शुअल इंसान पर लागू नहीं होता है।
अक्सर ये डेफिनेशन जेंडर से जुड़ी गलतफहमियों पर बेस्ड होती है। सच तो ये है कि आप सिर्फ़ देखकर तय नहीं कर सकते कि कोई इंसान पुरुष है, महिला है या फिर सिजेंडर है।
इसलिए बाइसेक्शुअलिटी की समझ सिर्फ़ “मर्द और औरत” तक लिमिटेड नहीं है, बल्कि ये उससे कहीं ज़्यादा दूर तक हो सकती है।
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6. कुछ लोग पूरे जेंडर स्पेक्ट्रम की तरफ आकर्षित होते हैं
कई बाइसेक्शुअल लोग ट्रांस और नॉन-बाइनरी लोगों की तरफ भी आकर्षित होते हैं। साथ ही, बहुत से बाइसेक्शुअल लोग खुद भी ट्रांसजेंडर या नॉन-बाइनरी होते हैं।
इसीलिए बहुत से बाइ लोगों के लिए “बाइसेक्शुअल” शब्द पहले से ही काफी इनक्लूसिव है, जो पूरे जेंडर स्पेक्ट्रम को कवर करता है।
7. कुछ लोग एक जेंडर की तरफ ज़्यादा खिंचाव महसूस करते हैं
कई बार लोगों को लगता है कि बाइसेक्शुअल कहलाने के लिए आपको दोनों या सभी जेंडर्स की तरफ बराबर आकर्षित होना चाहिए।
लेकिन ऐसा नहीं है। अगर आपको एक जेंडर की तरफ ज़्यादा खिंचाव है और दूसरे की तरफ थोड़ा कम, तब भी आपकी बाइसेक्शुअल पहचान बिल्कुल वैध है।
रिसर्च भी दिखाती है कि बहुत से बाइसेक्शुअल लोग किसी एक जेंडर की तरफ ज़्यादा आकर्षित होते हैं। इसका मतलब ये नहीं कि वो “कम बाइसेक्शुअल” हैं।
8. अलग जेंडर के साथ रिलेशनशिप में होना आपको “स्ट्रेट” नहीं बनाता
कई लोग सोचते हैं कि अगर वो किसी अलग जेंडर के साथ रिलेशनशिप में हैं तो शायद वो अब “बाइ” नहीं रहे।
जैसे अगर कोई महिला, किसी पुरुष के साथ मोनोगैमस (सिर्फ़ एक पार्टनर वाला) रिलेशनशिप में है, तो क्या इसका मतलब है कि वो अब बाइसेक्शुअल नहीं रही?
बिल्कुल नहीं। आपका पार्टनर कौन है, इससे आपकी पहचान नहीं बदलती। आपकी बाइसेक्शुअलिटी आपकी अपनी है, और वो रिलेशनशिप से गायब नहीं होती।
9. अलग-अलग जेंडर के साथ अलग तरह का रिश्ता होना
हो सकता है आपको एक जेंडर की तरफ ज़्यादा आकर्षण हो, लेकिन अलग-अलग जेंडर्स के लिए आपकी फीलिंग्स अलग हों।
जैसे – आप कई जेंडर्स के लोगों की तरफ रोमांटिक फीलिंग रख सकते हैं, लेकिन सेक्शुअल आकर्षण सिर्फ़ पुरुषों की तरफ हो। या फिर आपके अंदर किसी के लिए भी सेक्शुअल फीलिंग न हो, लेकिन रोमांटिक फीलिंग्स ज़रूर हों।
इसे क्रॉस (या मिक्स्ड) ओरिएंटेशन कहते हैं – यानी रोमांटिक और सेक्शुअल अट्रैक्शन अलग-अलग जेंडर्स के लिए होना।
10. आप किसकी तरफ आकर्षित हैं
अगर आपको लगता है कि आप बाइसेक्शुअलिटी की आम परिभाषा में फिट नहीं होते, तो चिंता मत कीजिए।
असलियत ये है कि बाइसेक्शुअल होने के कई अलग-अलग तरीके हैं और हर इंसान का एक्सपीरियंस अलग हो सकता है।
आपका जो भी अनोखा अनुभव है, वो बिल्कुल सही और मान्य है।
11. बाइसेक्शुअल होना कोई “फेज़” है
बाइसेक्शुअलिटी से जुड़ी सबसे बड़ी गलतफहमी ये है कि ये असल में होती ही नहीं।
लोग मानते हैं कि कोई बस “फेज़” से गुजर रहा है या फिर असल में गे है और बाइसेक्शुअलिटी को छुपा रहा है।
लेकिन हक़ीक़त ये है कि बहुत सारे लोग पूरी ज़िंदगी खुद को बाइसेक्शुअल मानते हैं।
हाँ, कुछ लोग पहले खुद को बाइ कहते हैं और बाद में गे पहचानते हैं, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि बाइसेक्शुअलिटी झूठी है। ये तो बस उनकी पर्सनल जर्नी है।
12. अगर आपकी बाइसेक्शुअलिटी की परिभाषा बदल रही है, तो ये नॉर्मल है
कभी-कभी हम सोचते हैं कि बाइसेक्शुअलिटी का मतलब एक है, लेकिन वक्त के साथ हमारी सोच बदल जाती है।
अगर आपको लगता है कि पहले आप इसे अलग तरह से समझते थे और अब इसका मतलब आपके लिए बदल गया है — तो ये बिल्कुल सामान्य है।
असल में ज़्यादातर लोग अपनी पहचान और फीलिंग्स को धीरे-धीरे समझते हैं और ये बदलाव उसी सफर का हिस्सा है।
13. अगर आपको लगता है कि अब आप बाइसेक्शुअल नहीं हैं, तो ये भी ठीक है
क्या एक बार बाइसेक्शुअल पहचान लेने के बाद हमेशा बाइ ही रहना ज़रूरी है? बिल्कुल नहीं। अगर पहले आप खुद को बाइसेक्शुअल मानते थे और अब ऐसा महसूस नहीं करते, तो इसमें कुछ गलत नहीं है।
कई लोगों की सेक्शुअलिटी फ्लूइड होती है, यानी समय और अनुभव के साथ बदल सकती है।
कभी-कभी ऐसा भी होता है कि आप खुद के बारे में और सेक्शुअलिटी के बारे में ज़्यादा सीखते हैं और समझते हैं कि आप शुरुआत से ही बाइसेक्शुअल नहीं थे।
ये किसी शर्म की बात नहीं है, बल्कि खुद को समझने की यात्रा का हिस्सा है। और खुद को बेहतर जानना हमेशा एक पॉज़िटिव चीज़ है।
14. बाइसेक्शुअल शब्द का इस्तेमाल कई बार दूसरे शब्दों के साथ मिलाकर किया जाता है
कुछ लोग “बाइसेक्शुअल” और “पैनसेक्शुअल” या “क्वियर” जैसे शब्दों में कोई फर्क नहीं मानते।
यहाँ तक कि कुछ लोग खुद को एक से ज़्यादा पहचान के साथ भी जोड़ते हैं।
अक्सर ये इस पर निर्भर करता है कि वो किससे बात कर रहे हैं या अपनी सेक्शुअलिटी का कौन-सा पहलू बताना चाहते हैं।
लेकिन याद रखें — ये सारे शब्द हमेशा एक-दूसरे की जगह नहीं लिए जा सकते।
उदाहरण के लिए, कोई शख्स खुद को क्वियर कहता है, लेकिन बाइसेक्शुअल नहीं, और उसके पीछे उसकी खास वजह हो सकती है। इसीलिए हर इंसान की पसंद और पहचान का सम्मान करना ज़रूरी है।
15. सेक्शुअल एक्सपीरियंस और सेक्शुअल ओरिएंटेशन अलग चीज़ें हैं
पॉलीअमरस (यानि कई पार्टनर वाले) लोग हर तरह की सेक्शुअल ओरिएंटेशन के हो सकते हैं – गे, स्ट्रेट, बाइसेक्शुअल और भी।
वैसे ही मोनोगैमस (यानि सिर्फ़ एक पार्टनर वाले) लोग भी हर ओरिएंटेशन में मिलते हैं।
यानी बाइसेक्शुअलिटी का ये मतलब नहीं कि कोई इंसान वफादार होगा या नहीं, या मोनोगैमस होगा या नहीं। ये सब हर इंसान की अपनी पसंद और पर्सनैलिटी पर निर्भर करता है।
16. अपनी सेक्शुअलिटी समझने के लिए कोई “टेस्ट” नहीं होता
कभी लगता है कि बाकी सबको तो अपनी सेक्शुअलिटी अच्छे से पता है — क्या उन्होंने कोई गुप्त टेस्ट दे रखा है?
सच ये है कि ऐसा कोई टेस्ट होता ही नहीं।
लेकिन अच्छी बात ये है कि आपके पास खुद ही वो “चाबी” है जिससे आप अपनी सेक्शुअलिटी समझ सकते हैं।
बस अपने आकर्षण, अपने अनुभव और इस बात पर ध्यान दीजिए कि जेंडर आपके लिए मायने रखता है या नहीं।
आख़िर में, आप खुद ही अपनी सेक्शुअलिटी को परिभाषित कर सकते हैं।
17. वही पहचान चुनें जिसमें आप सबसे सहज महसूस करते हैं
तो क्या ये सारी जानकारी पढ़कर आपको लगता है कि आप “टेक्निकली” बाइसेक्शुअल हैं — भले ही ये शब्द आपको पसंद न आए?
या फिर आपको ऐसा लगता है कि आप असल में बाइसेक्शुअल नहीं हैं, भले ही आपने हमेशा खुद को ऐसा माना हो?
कोई बात नहीं। सबसे अहम बात ये है कि आप वही शब्द या पहचान चुनें जिसमें आप सबसे आरामदायक और सही महसूस करते हैं।
पैनसेक्शुअल और बाइसेक्शुअल में क्या अंतर है?
बाइसेक्शुअलिटी और पैनसेक्शुअलिटी को अक्सर लोग एक जैसा समझ लेते हैं। लेकिन दोनों में फर्क है।
- बाइसेक्शुअल का मतलब है – एक से ज्यादा जेंडर की तरफ आकर्षण होना।
- पैनसेक्शुअल का मतलब है – सभी जेंडर्स की तरफ आकर्षण होना, चाहे वो सिजेंडर हों, ट्रांसजेंडर, नॉन-बाइनरी, एजेंडर या कोई और।
पहली नजर में दोनों शब्द एक जैसे लग सकते हैं, लेकिन असल में इनमें थोड़ा अंतर है। बाइसेक्शुअल यानी कई जेंडर्स की तरफ एट्रैक्ट, जबकि पैनसेक्शुअल यानी सभी जेंडर्स की तरफ एट्रैक्ट होते हैं।
LGBTQ कम्युनिटी में कई लोग इन दोनों शब्दों को मिलाकर भी इस्तेमाल करते हैं। कुछ लोग खुद को बाइसेक्शुअल मानते हैं, तो कुछ पैनसेक्शुअल, और कुछ दोनों शब्दों से कनेक्ट करते हैं।
बाइसेक्शुअलिटी से जुड़े मिथक और गलतफहमियाँ
बाइसेक्शुअल लोगों को अक्सर अपनी पहचान को लेकर कई गलतफहमियों का सामना करना पड़ता है।
मिथक: बाइसेक्शुअल लोग सिर्फ पुरुष या महिला के साथ डेट करते हैं।
"बाइ" शब्द का मतलब भले ही "दो" होता है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि बाइसेक्शुअल लोग सिर्फ दो जेंडर्स की ओर एट्रैक्ट होते हैं। ज़्यादातर बाइसेक्शुअल लोग अपने ही जेंडर के साथ-साथ दूसरे जेंडर्स की ओर भी एट्रैक्शन महसूस करते हैं।
मिथक: बाइसेक्शुअल लोग कंफ्यूज़्ड होते हैं या अपनी पहचान से इनकार कर रहे होते हैं।
एक आम गलतफहमी ये है कि बाइसेक्शुअलिटी सिर्फ एक "फेज़" है और बाद में ये लोग गे या लेस्बियन बन जाते हैं। लेकिन हकीकत ये है कि बाइसेक्शुअलिटी न तो ट्रांज़िशन है और न ही कोई एक्सपेरिमेंट, बल्कि ये एक मान्य और सच्ची पहचान है।
एक स्टडी में पाया गया कि जो LGBTQ यूथ पहले खुद को बाइसेक्शुअल बताते थे, उनमें से सिर्फ 18% बाद में गे या लेस्बियन के तौर पर सामने आए। यानी, भले ही कुछ लोग अपनी पहचान पहले बाइसेक्शुअल के रूप में करें और बाद में बदलें, लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि बाइसेक्शुअलिटी असली पहचान नहीं है।
मिथक: बाइसेक्शुअल लोग ज़्यादा चीटिंग करते हैं।
सेक्शुअल प्रेफरेंस का चीटिंग या बेवफाई से कोई लेना-देना नहीं है। ऐसा कोई सबूत नहीं है कि बाइसेक्शुअल लोग अपने पार्टनर को धोखा देने में दूसरों से ज़्यादा होते हैं।
मिथक: सिर्फ महिलाएँ ही बाइसेक्शुअल होती हैं।
ये भी एक बड़ी गलतफहमी है। पुरुष भी बाइसेक्शुअल हो सकते हैं, लेकिन वे इस बारे में खुलकर कम बताते हैं। एक स्टडी के अनुसार, सिर्फ 12% बाइसेक्शुअल पुरुषों ने खुद को ओपनली बाइसेक्शुअल कहा, जबकि ये आंकड़ा सभी बाइसेक्शुअल्स में 28% और गे पुरुषों में 77% था।
सर्वे में ये भी पाया गया कि जहाँ 33% लोगों को लगता है कि बाइसेक्शुअल महिलाओं को समाज में कुछ हद तक स्वीकार किया जाता है, वहीं सिर्फ 8% लोगों ने यही बात बाइसेक्शुअल पुरुषों के बारे में कही है। इसी वजह से ऐसा लगता है कि महिलाएँ पुरुषों की तुलना में ज़्यादा बाइसेक्शुअल होती हैं, जबकि असल में ये फर्क समाज की सोच की वजह से है।
अपनों को बाइसेक्शुअलिटी समझाएँ
बाइसेक्शुअलिटी से जुड़ी कई गलतफहमियों की वजह से परिवार, दोस्तों या पार्टनर को अपनी पहचान बताना कई बार मुश्किल हो सकता है। सबसे ज़रूरी बात ये है कि आपको किसी को भी अपनी सेक्शुअल ओरिएंटेशन तब तक बताने की ज़रूरत नहीं है, जब तक आप खुद तैयार न हों। लेकिन कई लोगों को अपने करीबियों से इस बारे में बातचीत करना मददगार लगता है।
अगर आप तय करते हैं कि आप दूसरों को बताएंगे, तो आपके परिवार या दोस्त आपसे कई सवाल पूछ सकते हैं। ऐसे में आप कुछ भरोसेमंद ऑनलाइन रिसोर्स पहले से तैयार करके रख सकते हैं। इन्हें शेयर करने से उनके सवालों के जवाब उन्हें आसानी से मिल जाएंगे, उनकी गलतफहमियाँ दूर होंगी और आपको बार-बार सब कुछ समझाने का बोझ भी कम होगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
आपके सवालों के जवाब यहाँ पाएं।
क्या बायसेक्शुअल होना सिर्फ़ एक “फेज़” होता है?
नहीं। यह एक आम गलतफहमी है। बायसेक्शुअलिटी असली और मान्य पहचान है। कई लोग पूरी ज़िंदगी खुद को बायसेक्शुअल मानते हैं।
सारांश
बायसेक्सुअल ऐसा व्यक्ति होता है जिसे लड़कों और लड़कियों दोनों के प्रति यौन या भावनात्मक आकर्षण हो सकता है। यह आकर्षण एक समय पर किसी एक लिंग की ओर ज़्यादा हो सकता है और समय के साथ बदल भी सकता है। बायसेक्शुअलिटी के पीछे कोई एक निश्चित कारण नहीं होता। यह biological, psychological , और सामाजिक कारणों से मिल कर बना हुआ हो सकता है। यह इंसान की सोच, भावनाओं और अनुभवों से जुड़ा होता है, न कि किसी बाहरी प्रभाव से। व्यक्ति खुद महसूस करता है कि वह लड़कों और लड़कियों दोनों के प्रति कैसा आकर्षण रखता है। हो सकता है कि वह दोनों के साथ रोमांटिक रिश्ते या भावनात्मक जुड़ाव महसूस करे। अगर आप बायसेक्सुअल हैं या ऐसा महसूस करते हैं, तो सबसे ज़रूरी बात है खुद को स्वीकार करना और समझना कि यह बिल्कुल नॉर्मल है। चाहें तो किसी भरोसेमंद दोस्त, परिवारजन या काउंसलर से बात करें।
यौन रोग के डॉक्टर
Dr. Hakeem Basit khan
सेक्सोलोजी
15 वर्षों का अनुभव
Dr. Zeeshan Khan
सेक्सोलोजी
9 वर्षों का अनुभव
Dr. Nizamuddin
सेक्सोलोजी
5 वर्षों का अनुभव
Dr. Tahir
सेक्सोलोजी
20 वर्षों का अनुभव
संदर्भ
- Bisexual Resource Center [Internet]. Massachusetts. US; What is bisexuality
- American Institute of Bisexuality [Internet]. US; The Kinsey Scale
- Psychology Today [Internet]. Sussex Publishers. New York. US; The Invisible Sexuality
- Centers for Disease Control and Prevention [internet]. Atlanta (GA): US Department of Health and Human Services; Dental dam use
- William L. Jeffries. Beyond the Bisexual Bridge. American Journal of Preventive Medicine. 2014; 47(3): 320-329.
- Human Rights Campaign [Internet]. Washington DC. US; Health Disparaties among Bisexual People
- California’s Counselling and Psychological Services: University of Califrnia [Internet]. Santa Cruz. California. US; A resource Guide to Coming out as Bisexual





