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इरेक्टाइल डिस्फंक्शन के चलते कई लोग अपनी सेक्स लाइफ को लेकर परेशान रहते है। इस कारण वो अक्सर स्ट्रेस का भी शिकार हो जाते हैं। ऐसे में वो सेक्स टाइम को बढ़ाने के लिए और पेनिस में इरेक्शन लाने के लिए कई प्रकार की दवाओं का सेवन करते हैं, लेकिन उचित परिणाम नहीं मिलता है। ऐसे में उनके लिए आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों से बेहतर और कुछ नहीं हो सकता। अश्वगंधा व शतावरी जैसी आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां सेक्स टाइम को बढ़ाने का काम कर सकती हैं। 

इस लेख में आप सेक्स टाइम बढ़ाने की सबसे अच्छी आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों के बारे में जानेंगे -

  1. सेक्स टाइम बढ़ाने में फायदेमंद आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां
  2. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
  3. सारांश
यौन रोग के डॉक्टर

सेक्स टाइम बढ़ाने की सबसे अच्छी आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों के बारे में विस्तार से जानते हैं -

अश्वगंधा

 

अश्वगंधा एक प्राकृतिक जड़ी-बूटी है जो भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया में उगती है और इसे आयुर्वेदिक चिकित्सा में अक्सर इस्तेमाल किया जाता है। इसे कभी-कभी भारतीय जिनसेंग या विंटर चेरी भी कहा जाता है, और इसका वैज्ञानिक नाम Withania somnifera है। आमतौर पर इस पौधे की जड़ का उपयोग होता है, लेकिन इसके पत्ते और फूल भी आयुर्वेद में इस्तेमाल किए जा सकते हैं। अश्वगंधा के अर्क में लगभग 35 अलग-अलग केमिकल कंपोनेंट्स पाए जाते हैं, हालांकि अब तक इसका कोई एक विशेष एक्टिव इंग्रेडिएंट सही रूप से नहीं पहचाना गया है।

अश्वगंधा का उपयोग आयुर्वेदिक चिकित्सा में 'रसायन' के रूप में किया जाता है, यानी यह एक प्रकार की चिकित्सीय तैयारी है जिसका उद्देश्य सामान्य स्वास्थ्य को बढ़ाना, ऊर्जा के स्तर को बढ़ाना और ज़्यादा लंबे समय तक स्वस्थ रहने में मदद करना है।

अश्वगंधा को कामोत्तेजक यानी अफ़्रोडिज़ियक माना जाता है, यानी यह हर्ब सेक्स की इच्छा, सुख या एक्टिविटी बढ़ाने में मदद कर सकती है। हालांकि, वैज्ञानिक शोध यौन कैपेसिटी के इलाज में इसके प्रभाव का समर्थन नहीं करता, लेकिन यह कम यौन इच्छा में सहायक हो सकती है।

पुरानी दवा में अश्वगंधा का इस्तेमाल इन समस्याओं में भी किया जाता रहा है:

  • नींद न आना
  • एंग्जायटी
  • रूमेटिज़्म
  • कब्ज़
  • त्वचा संबंधी समस्याएँ जैसे फोड़े और अल्सर
  • गॉइटर 
  • पैरासिटिक कीड़े
  • साँप के काटने
  • फर्टिलिटी बढ़ाना

अश्वगंधा के क्या लाभ हैं?

अश्वगंधा के फायदों पर कई वैज्ञानिक शोध किए गए हैं। हालांकि, इनमें से ज़्यादातर अध्ययन टेस्ट ट्यूब या जानवरों पर हुए हैं, इसलिए इंसानों पर इसके प्रभाव को पूरी तरह समझने के लिए और रिसर्च की ज़रूरत है।

अब तक की जानकारी के आधार पर अश्वगंधा के लाभ इस प्रकार हैं:

  • सूजन कम करना
  • दर्द को कम करना
  • ऊर्जा बढ़ाना
  • तनाव और चिंता कम करना
  • नींद सुधारना
  • याददाश्त और दिमागी क्षमता बढ़ाना
  • ब्लड शुगर नियंत्रित करना
  • कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि रोकना

क्या अश्वगंधा का उपयोग स्तंभन दोष के इलाज के लिए किया जा सकता है?

अश्वगंधा को लेकर इरेक्टाइल डिसफंक्शन(ED) में अब तक बहुत ही सीमित रिसर्च की गई है, और उपलब्ध अध्ययनों के आधार पर यह कहना मुश्किल है कि यह समस्या का सीधा इलाज है।

2002 का एक अध्ययन (जानवरों पर): इसमें नर चूहों पर अश्वगंधा एक्सट्रैक्ट का असर देखा गया। नतीजे उल्टे निकले – चूहों में ED बढ़ गया और उनकी यौन इच्छा व परफॉर्मेंस घट गई।

2011 का अध्ययन (मानव पर): इसमें 86 पुरुष शामिल थे जिन्हें Psychogenic ED था (यानि वह ED जो ज़्यादातर यौन चिंता और परफॉर्मेंस फोबिया से जुड़ी होती है)। 60 दिनों तक कुछ पुरुषों को अश्वगंधा और कुछ को प्लेसीबो (डमी दवा) दी गई। परिणाम ये रहे कि अश्वगंधा लेने वालों को प्लेसीबो से अधिक फायदा नहीं हुआ।

2014 की फॉलो-अप स्टडी: उसी शोध समूह ने दोबारा किया और पुष्टि की कि अश्वगंधा ED में कोई विशेष लाभ नहीं देती।

क्या अश्वगंधा के कोई साइड इफेक्ट्स है? 

अश्वगंधा को आमतौर पर सुरक्षित माना जाता है, लेकिन हर हर्बल सप्लीमेंट की तरह इसके भी कुछ साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं, खासकर अगर इसे ज़्यादा मात्रा में लिया जाए या लंबे समय तक बिना डॉक्टर की सलाह के इस्तेमाल किया जाए।

सामान्य रूप से पाए जाने वाले साइड इफेक्ट्स:

डॉक्टर से बात कब करें?

यदि आपको ये निम्न समस्याएँ है तो डॉक्टर से बात करें -

  • डायबिटीज़: अश्वगंधा ब्लड शुगर का स्तर कम कर सकती है, जिससे दवा का असर ज़्यादा हो सकता है।
  • हाइपरथायरॉइडिज़्म: यह थायरॉयड हार्मोन का स्तर बढ़ा सकती है, जिससे स्थिति और बिगड़ सकती है।

अश्वगंधा किसे नहीं लेनी?

  • गर्भवती महिलाएँ: अधिक मात्रा में लेने पर यह भ्रूण के लिए हानिकारक हो सकती है।
  • स्तनपान कराने वाली महिलाएँ: स्तनपान के दौरान इसकी सुरक्षा को लेकर पूरी रिसर्च उपलब्ध नहीं है, इसलिए इससे बचना चाहिए।
  • सिडेटिव दवाइयाँ लेने वाले लोग: चूँकि अश्वगंधा खुद भी नींद लाने वाला असर कर सकती है, इसलिए अगर आप बेंजोडाइजेपाइन, बार्बिट्यूरेट या एंटीकॉन्वल्सेंट जैसी दवाएँ ले रहे हैं, तो इसे न लें।
  • हॉर्मोन-सेंसिटिव प्रोस्टेट कैंसर वाले पुरुष: अश्वगंधा शरीर में टेस्टोस्टेरोन लेवल बढ़ा सकती है, जिससे यह कैंसर और बढ़ सकता है।

(और पढ़ें - यौन-शक्ति को बढ़ाने वाले आहार)

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शिलाजीत

शिलाजीत एक तरह का काला और गाढ़ा, चिपचिपा सा प्राकृतिक पदार्थ है, जो कई सालों से पौधों और जड़ी-बूटियों के जमीन के नीचे दबने और धीरे-धीरे गलने-सड़ने से बनता है। ये ज़्यादातर ऊँचे पहाड़ों और चट्टानों की दरारों से निकलता है। सबसे पहले इसे हिमालय के इलाके में पाया गया था, लेकिन आज ये दुनिया के कई पहाड़ी क्षेत्रों में मिल जाता है। अब तो ये आसानी से आपकी नज़दीकी दवा की दुकानों और सप्लीमेंट्स में भी उपलब्ध होता है।

आयुर्वेद में शिलाजीत का इस्तेमाल हज़ारों सालों से किया जा रहा है। पुराने वैद्य इसे ताकत और सेहत बढ़ाने वाली चीज़ मानते थे। आजकल पश्चिमी देशों में भी लोग इसे सप्लीमेंट के रूप में लेने लगे हैं। माना जाता है कि इसमें कई तरह के ज़रूरी मिनरल्स और मिक्रो नुट्रिएंट्स होते हैं, जो शरीर को मज़बूत बनाते हैं। इसमें तांबा, चांदी, जस्ता, लोहा और सीसा सहित 84 से अधिक खनिज होते हैं। लोग कहते हैं कि ये बुढ़ापे को धीमा करने, पुरुषों की प्रजनन क्षमता सुधारने, थकान कम करने, और यहां तक कि गंभीर बीमारियों जैसे कैंसर से लड़ने में भी मददगार हो सकता है।

शिलाजीत के फायदे

संस्कृत में "शिलाजीत" का मतलब होता है "पहाड़ों को जीतने वाला और कमजोरी को खत्म करने वाला"। पुराने आयुर्वेदिक ग्रंथों में शिलाजीत को रसायन माना गया है। रसायन ऐसे पदार्थ होते हैं जो हमारे शरीर में प्लाज़्मा की गुणवत्ता को बेहतर बनाते हैं और इसके असर से शरीर के बाकी सारे टिश्यू भी मज़बूत होते हैं। आयुर्वेदिक मान्यता के हिसाब से शिलाजीत बीमारियों को ठीक करने और रोकने में मदद करता है, जिससे इंसान की उम्र लंबी हो सकती है।

आजकल सप्लीमेंट बनाने वाली कंपनियां इन फायदों को दिखाकर शिलाजीत को अलग-अलग रूपों में बेच रही हैं जैसे लिक्विड, पाउडर, गमीज़, गोलियां और टैबलेट। कई बार इसमें एडाप्टोजेन्स, जड़ी-बूटियां या मिनरल्स भी मिलाए जाते हैं ताकि असर और बढ़ सके। शिलाजीत के कई प्रकार और क्वालिटी होते हैं, जिनकी वजह से इसके रंग और स्वाद में भी फर्क आ सकता है।

डॉ. सैपर कहते हैं कि शिलाजीत पर हुए आधुनिक वैज्ञानिक शोध से ये तो पता चलता है कि इसमें कुछ उपचार करने वाले गुण हो सकते हैं। लेकिन इस बारे में बहुत ही कम जानकारी मौजूद है। और जो जानकारी मिलती भी है, वो ज़्यादा भरोसेमंद नहीं मानी जाती है।

वो बताते हैं, "शिलाजीत के असर को अलग-अलग बीमारियों और स्वास्थ्य स्थितियों पर परखने वाले बहुत कम रिसर्च हुए हैं। और जो हुए हैं, उनमें ज़्यादातर छोटे स्तर के हैं और उनमें रिसर्च करने के तरीकों को लेकर कई खामियां हैं।" उनके अनुसार, "सिर्फ इन रिसर्च के आधार पर ये नहीं कहा जा सकता कि शिलाजीत का क्लिनिकल स्थितियों में इस्तेमाल सही है या गलत।"

तो सवाल ये है कि शिलाजीत से जुड़े सेहत के फायदों के बारे में हमें असल में क्या पता है? इसी बारे में डॉ. सैपर बताते हैं।

1. इसमें फुल्विक एसिड होता है

शिलाजीत में फुल्विक एसिड काफी मात्रा में पाया जाता है। यह एक ऐसा रसायन है जो बैक्टीरिया, फंगस और दूसरे सूक्ष्मजीवों द्वारा मृत पौधों और जानवरों के अवशेषों को तोड़ने पर बनता है।

फुल्विक एसिड के कई पोटेंशियल फायदे टेस्ट ट्यूब में दिखाए गए हैं। लेकिन टेस्ट ट्यूब और इंसानी शरीर एक जैसे नहीं होते हैं। इसलिए यह कहना मुश्किल है कि ये फायदे हमारे शरीर पर भी वैसे ही असर करेंगे या नहीं।

और भले ही हम मान लें कि फुल्विक एसिड उपयोगी, सुरक्षित और असरदार है, लेकिन डॉ. सैपर हमें याद दिलाते हैं कि यह मान लेना सही नहीं होगा कि शिलाजीत भी वैसा ही असर करेगा।

यानी जब हम शिलाजीत के संभावित फायदों की बात करते हैं, तो ध्यान रखना ज़रूरी है कि इनमें से ज़्यादातर दावे फुल्विक एसिड पर किए गए अधूरे सबूतों पर आधारित हैं।

2. आयु को बढ़ावा दे सकता है

डॉ. सैपर के मुताबिक शिलाजीत को अक्सर एंटी-एजिंग सप्लीमेंट की तरह प्रचारित किया जाता है।

इसका कारण है इसमें मौजूद फुल्विक एसिड। यह एक एंटीऑक्सीडेंट है, यानी यह हमारी कोशिकाओं को ऑक्सीडेटिव तनाव से होने वाले नुकसान से बचा सकता है। यह सुनने में अच्छा लगता है। लेकिन दिक्कत यह है कि इसमें ऑक्सीडेटिव गुण भी होते हैं, खासकर अगर इसे ज़्यादा मात्रा में लिया जाए तो यह नुकसान भी पहुँचा सकता है।

कुछ छोटे अध्ययनों में पाया गया है कि शिलाजीत कोलेजन उत्पादन बढ़ा सकता है, थकान कम कर सकता है और मांसपेशियों की ताकत व रिकवरी में मदद कर सकता है। लेकिन इन नतीजों को पक्का मानने से पहले और रिसर्च की ज़रूरत है।

3. याददाश्त और दिमागी कमजोरी को रोक सकता है

शिलाजीत को एंटी-एजिंग सप्लीमेंट के तौर पर इसलिए भी प्रचारित किया जाता है क्योंकि शुरुआती सबूत बताते हैं कि यह दिमागी कैपेसिटी कम होने से बचा सकता है। 2023 में हुए एक लैब अध्ययन में पता चला कि उत्तरी चिली के पहाड़ों से मिले शिलाजीत ने अल्ज़ाइमर रोग की गति को धीमा करने में मदद दिखाई है।
अल्ज़ाइमर में एमिलॉइड नाम का प्रोटीन दिमाग में जमा होकर प्लाक बना देता है। ये प्लाक दिमाग की सेल्स को नुकसान पहुँचाते हैं, जिससे मेमोरी कमजोर होने लगती है। अध्ययन में पाया गया कि शिलाजीत में मौजूद फुल्विक एसिड इन चीज़ों में मदद कर सकता है:

  • पहले से बने एमिलॉइड को तोड़ना
  • ज्यादा एमिलॉइड बनने से रोकना
  • दिमाग सेल्स के कामकाज को बदलना और उन्हें सपोर्ट करना 

हालांकि ये नतीजे अच्छे हैं, लेकिन यह साबित करने के लिए अभी और शोध की ज़रूरत है कि शिलाजीत सच में दिमागी सेहत सुधार सकता है या नहीं।

4.  प्रजनन क्षमता में सुधार हो सकता है

आयुर्वेदिक चिकित्सा में शिलाजीत को कामोत्तेजक यानि सेक्स की इच्छा बढ़ाने वाला माना गया है। इसका उपयोग लंबे समय से पुरुष इनफर्टिलिटी के इलाज के लिए भी किया जाता रहा है।

कुछ प्रारंभिक अध्ययनों ने सुझाव दिया है कि शिलाजीत की खुराक टेस्टोस्टेरोन के लेवल को बढ़ा सकती है और स्पर्म की संख्या में वृद्धि कर सकती है। लेकिन ये अध्ययन एक दशक से भी ज़्यादा पुराने हैं और इनके नमूने बहुत छोटे हैं। पुरुष सेक्स हार्मोन और फर्टिलिटी पर शिलाजीत के प्रभाव को जानने के लिए और अधिक शोध की आवश्यकता है।

अन्य लाभ :

  • वायरस से लड़ने में मदद कर सकता है
  • कैंसर से लड़ने में मदद कर सकता है
  • हड्डियों के स्वास्थ्य को बढ़ावा दे सकता है
  • आयरन की कमी से होने वाले एनीमिया को रोक सकता है
  • तनाव से राहत मिल सकती है

दुष्प्रभाव

शिलाजीत के उपयोग से जुड़े दुष्प्रभावों के बारे में अधिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। फुल्विक एसिड और शिलाजीत कभी-कभी गले में खराश, सिरदर्द और चक्कर आने का कारण बनते हैं।

अन्य दुष्प्रभाव है : 

  • हार्मोनल असंतुलन।
  • स्यूडोहाइपरएल्डोस्टेरोनिज़्म।
  • एलर्जी संबंधी प्रतिक्रियाएँ।

शिलाजीत किसे नहीं लेना चाहिए?

यदि आप निम्न से सम्बंधित हो तो शिलाजीत न लें -

  • क्या आप गर्भवती हैं, स्तनपान करा रही हैं या गर्भवती होने की कोशिश कर रही हैं
  • हृदय रोग , ब्लड प्रेसर की समस्या हो , रक्त पतला करने वाली दवा ले रहे हों
  • इसकी सुरक्षा पर अधिक शोध नहीं हुआ है, इसलिए बच्चों को शिलाजीत न देना ही बेहतर है।

(और पढ़ें - गर्भावस्था के दौरान पेट दर्द)

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शतावरी

हिमालय की गोद में प्रकृति द्वारा प्रदान किए गए कई अनमोल उपहार मौजूद हैं। हिमालयी क्षेत्र में प्राकृतिक जड़ी बूटियों की भरमार है और शायद ही मनुष्‍य की जरूरत की ऐसी कोई जड़ी बूटी होगी जो हिमालय में मौजूद न हो। शतावरी भी हिमालय और हिमालयी क्षेत्रों में पाई जाने वाली जड़ी बूटियों में से एक है।

शतावरी आयुर्वेद में सबसे पुरानी जड़ी बूटियों में से एक है और भारतीय औषधियों पर लिखे गए अधिकतर प्राचीन ग्रंथों में भी शतावरी का उल्‍लेख मिलता है। 

शतावरी एक ऐसी जड़ी बूटी है जो स्‍त्री प्रजनन प्रणाली में सुधार लाने में मदद करती है। आयुर्वेद में शतावरी को ‘सौ रोगों में प्रभावकारी’ बताया गया है। इसके अलावा तनाव-रोधी और एंटीऑक्‍सीडेंट गुणों से युक्‍त होने के कारण शतावरी तनाव एवं बढ़ती उम्र से संबंधित समस्‍याओं के इलाज में बहुत असरकारी जड़ी बूटी मानी जाती है। इस जड़ी बूटी के महत्‍व का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आयुर्वेद में शतावरी को ‘जड़ी बूटियों की रानी’ कहा जाता है।

शतावरी के फायदे

  • शतावरी औषधी सेक्स जीवन का अनुभव बेहतर बना देती है। यह सेक्स की इच्छा को बढ़ाती है और सेक्स पावर को उच्चतम स्तर पर ले जाती है।
  • शतावरी को गर्भवती महिलाओं के लिए एक श्रेष्ठ टॉनिक माना जाता है। यह गर्भवती महिला के अंगों को गर्भ धारण के लिए तैयार करती है और गर्भपात से भी बचाती है। यह मां के दूध के उत्पादन को नियमित करती है और उसकी गुणवत्ता को बढ़ाती है।
  • गर्भवती महिलाओं को शतावरी खिलाना चाहिए क्युंकि उसमें अधिक मात्रा में फोलेट होता है। 
  • फोलेट से गर्भ में बच्चों में रीढ़ की हड्डी और दिमाग की समस्या नहीं होती। इसीलिए जो महिलाएं गर्भवती होने वाली हैं उन्हें इसका विशेष रूप से सेवन करना चाहिए। 

शतावरी के पोषक तत्व

90 ग्राम शतावरी में लगभग 20 कैलोरी होती है। इसके अलावा, अन्य नुट्रिएंट्स तत्व निम्न प्रकार से होते हैं -

शतावरी के नुकसान

शतावरी से निम्नलिखित समस्याएं हो सकती हैं :

  • गैस -
    शतावरी में एक कार्बोहाइड्रेट होता है जिसे रेफिनोज़ कहते हैं। इसे पचाने के लिए पेट में इसका खमीर बनता है। इस क्रिया के दौरान गैस बनती है जो शरीर से बाहर निकलती है। 

  • गर्भावस्था और स्तनपान -
    शतावरी हार्मोनल स्तर को संतुलित करती है और इसे काफी समय से जन्म नियंत्रण के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान सामान्य मात्रा में शतावरी खाना सुरक्षित माना जाता है। परन्तु चिकित्सीय रूप से खाने के लिए पहले डॉक्टर की सलाह लें। 

  • एलर्जी -
    जिन लोगों को प्याज या उसके प्रकार से एलर्जी है उन्हें शतावरी से भी एलर्जी हो सकती है।  

  • किडनी में पथरी -
    शतावरी में प्यूरीन होता है। शरीर में प्यूरीन यूरिक एसिड बनाने के लिए टूटता है जिससे शरीर में प्यूरीन की मात्रा बढ़ सकती है। जिन लोगों को यूरिक एसिड से जुड़ी समस्याएं हैं जैसे किडनी में पथरी या गाउट उन्हें शतावरी नहीं खानी चाहिए। ऐसे लोगों को प्यूरीन युक्त खाना नहीं खाना चाहिए।

(और पढ़ें - पथरी में क्या क्या खाना चाहिए)

सफेद मूसली

 

सफेद मूसली एक ऐसी शक्तिवर्धक जड़ी-बूटी है जिसका मुख्य इस्तेमाल सेक्स पावर बढ़ाने के लिए किया जाता है। सफेद मूसली के फायदे सिर्फ सेक्स क्षमता बढ़ाने तक ही सीमित नहीं है बल्कि यह गठिया, डायबिटीज, यूटीआई आदि बीमारियों को दूर करने में भी उपयोगी है।

सफेद मूसली आमतौर पर बरसात के मौसमों में जंगलों में अपने आप उगती है लेकिन इसकी उपयोगिता को देखते हुए अब पूरे देश में सफेद मूसली की खेती की जाती है। इसके औषधीय गुणों को देखते हुए अब बाज़ार में सफेद मूसली के पाउडर और कैप्सूल भी मिलने लगे हैं। सेक्स संबंधी समस्याओं में यह बहुत ज्यादा फायदेमंद है और कुछ जगहों पर इसे “हर्बल वियाग्रा”  के नाम से भी जाना जाता है। हालांकि अभी भी सफेद मूसली के फायदों और नुकसान से जुड़े पर्याप्त चिकित्सकीय प्रमाण उपलब्ध नहीं है।

सफेद मूसली के फायदे

1- सेक्स पावर बढ़ाने में उपयोगी 

आप किसी से भी सफेद मूसली के फायदे के बारे में बात करेंगे तो वो आपको झट से यही बतायेगा कि सफेद मूसली यौन शक्ति बढ़ाती है वहीं कुछ लोग तो इसका इस्तेमाल हर्बल वियाग्रा के तौर पर करते हैं। जानवरों पर किये एक शोध में पाया गया कि  सफेद मूसली पाउडर में ऐसे गुण होते हैं जो कामोत्तेजना बढ़ाने के साथ साथ टेस्टोस्टेरोन जैसे  सेक्स हार्मोन का लेवल बढ़ा सकते हैं। इसलिए सेक्स कैपेसिटी बढ़ाने के लिए सफ़ेद मूसली का उपयोग करना सही है।

2- शीघ्रपतन रोकने में उपयोगी

खराब जीवनशैली और खानपान की वजह से अधिकांश लोग शीघ्रपतन की समस्या से ग्रसित रहते हैं। कई लोग संकोच के कारण डॉक्टर के पास भी नहीं जाते हैं और इंटरनेट पर शीघ्रपतन रोकने के उपाय खोजते रहते हैं। ऐसे लोगों के लिए सफेद मूसली एक अच्छी औषधि है। इसे आप शीघ्रपतन की दवा के रुप में इस्तेमाल कर सकते हैं।

3- इरेक्टाइल डिसफंक्शन

सेक्स के दौरान लिंग में उत्तेजना या तनाव की कमी होना इरेक्टाइल डिसफंक्शन की समस्या कहलाती है। स्ट्रेस, डिप्रेशन या किसी लम्बी बीमारी की वजह से यह समस्या किसी को भी हो सकती है। सफेद मूसली सेक्स की इच्छा को बढ़ाती है साथ ही यह इरेक्टाइल डिसफंक्शन की समस्या को भी ठीक करने में मदद करती है। अक्सर डायबिटीज या अन्य किसी बीमारी के कारण इरेक्टाइल डिसफंक्शन का खतरा बढ़ जाता है ऐसे में सफ़ेद मूसली के सेवन से आप इस खतरे को अच्छे तरीके से रोक सकते हैं।

4- नपुंसकता से बचाव

शोध के अनुसार सफेद मूसली वीर्य का उत्पादन बढ़ाती है और वीर्य की गुणवत्ता में सुधार लाती है। ऐसा माना जाता है कि इसके नियमित सेवन से नपुंसकता के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। कौंच के बीज के साथ सफेद मूसली का सेवन नपुंसकता के इलाज में काफी उपयोगी माना जाता है।

5- स्पर्म क्वालिटी में सुधार

कई विशेषज्ञों का मानना है कि सफेद मूसली स्पर्म काउंट बढ़ाने में मदद करती है , हालांकि इसके साइंटिफिक प्रमाण नहीं मिलते हैं। लेकिन यह बात पूरी तरह सच है कि सफेद मूसली के सेवन से स्पर्म की गुणवत्ता में सुधार होता है और इससे शुक्राणुओं की गतिशीलता बढ़ती है जिससे शुक्राणु पूरी तरह स्वस्थ रहते हैं।

6- स्वप्नदोष की कमजोरी दूर करने में सहायक

स्वप्नदोष एक आम समस्या है और इसके होने के पीछे कई वजहें हो सकती हैं। अगर आप ‘स्वप्नदोष की आयुर्वेदिक दवा’ खोज रहे हैं तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सफेद मूसली के सेवन से स्वप्नदोष की समस्या पर तो ज्यादा असर नहीं पड़ता है लेकिन यह स्वपनदोष के बाद होने वाली शारीरिक कमजोरी को दूर करने में बहुत ही लाभकारी है। अगर आप भी बार बार स्वप्नदोष होने की वजह से कमजोरी महसूस कर रहे हैं तो सफेद मूसली का सेवन ज़रुर करें।

अन्य लाभ 

  • सेक्स क्षमता बढ़ाने के अलावा शरीर की ताकत बढ़ाना, सफेद मूसली के प्रमुख फायदों में शामिल है।
  • इम्युनिटी बढ़ाने में सहायक 
  • वजन घटाने में सहायक
  • मूत्र संबंधी रोगों को दूर करने में सहायक
  • कैंसर से बचाव

सफेद मूसली के नुकसान

यह सच है कि सफेद मूसली के फायदे बहुत ज्यादा हैं लेकिन अगर आप ज़रुरत से ज्यादा मात्रा में या गलत तरीके से इसका सेवन कर रहे हैं तो आपको सफेद मूसली के नुकसान झेलने पड़ सकते हैं। आइये जानते हैं:

  • भूख में कमी
  • कफ में बढ़ोतरी
  • गर्भावस्था एवं स्तनपान
  • पाचन तंत्र पर प्रभाव 

(और पढ़ें - अश्वगंधा के फायदे)

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अश्वगंधा की सर्वोत्तम खुराक क्या है?

अश्वगंधा की खुराक आपकी बीमारी के अनुसार अलग-अलग होती है। दैनिक खुराक 125 मिलीग्राम से 5 ग्राम तक हो सकती है। आप दिन में 1 से 3 बार बराबर मात्रा में ले सकते हैं। फर्टिलिटी स्वास्थ्य के लिए अश्वगंधा की नार्मल खुराक लगभग 5 ग्राम रोजना है। इसे लेने से पहले अपने स्वास्थ्य डॉक्टर से सलाह अवश्य लें।

शतावरी महिलाओं और पुरुषों दोनों के लिए फायदेमंद है क्या?

हाँ, शतावरी महिलाओं के हार्मोन संतुलन, प्रजनन क्षमता और दूध उत्पादन को बढ़ाने में मदद करती है। पुरुषों में यह यौन शक्ति और सहनशक्ति को बेहतर बनाती है।

क्या इन जड़ी-बूटियों से शीघ्रपतन की समस्या दूर हो सकती है?

हाँ, अश्वगंधा और सफेद मूसली जैसी जड़ी-बूटियां शीघ्रपतन को रोकने में सहायक हो सकती हैं क्योंकि ये तनाव कम करती हैं और यौन स्टैमिना को बढ़ाती हैं।

क्या आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों के कोई साइड इफेक्ट भी हैं?

हाँ, अगर इनका सेवन जरूरत से ज्यादा या बिना डॉक्टर की सलाह के किया जाए तो पेट खराब, गैस, चक्कर, एलर्जी और हार्मोनल असंतुलन जैसी समस्याएँ हो सकती हैं।

क्या गर्भवती महिलाएं शतावरी और अश्वगंधा ले सकती हैं?

शतावरी को गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान सुरक्षित माना जाता है, लेकिन डॉक्टर की सलाह लेना ज़रूरी है। वहीं, अश्वगंधा गर्भवती महिलाओं के लिए सुरक्षित नहीं मानी जाती।

इरेक्टाइल डिस्फंक्शन और शीघ्रपतन जैसी समस्याओं से परेशान लोग अक्सर दवाओं का सहारा लेते हैं, लेकिन उनसे सही फायदा नहीं मिलता। ऐसे में अश्वगंधा, शिलाजीत, शतावरी और सफेद मूसली जैसी जड़ी-बूटियाँ प्राकृतिक और सुरक्षित विकल्प हो सकती हैं।

अश्वगंधा को तनाव कम करने, ऊर्जा बढ़ाने और यौन इच्छा सुधारने वाली जड़ी-बूटी माना जाता है, हालांकि ED में इसके प्रभाव को लेकर वैज्ञानिक प्रमाण सीमित हैं। शिलाजीत खनिजों से भरपूर है और इसे ताकत, प्रजनन क्षमता और एंटी-एजिंग गुणों के लिए जाना जाता है, लेकिन इस पर और रिसर्च की ज़रूरत है। शतावरी को “जड़ी-बूटियों की रानी” कहा गया है, जो खासकर महिलाओं की प्रजनन प्रणाली, हार्मोनल बैलेंस और यौन जीवन सुधारने में मदद करती है। वहीं, सफेद मूसली को “हर्बल वियाग्रा” कहा जाता है क्योंकि यह सेक्स पावर बढ़ाने, शीघ्रपतन रोकने, स्पर्म क्वालिटी सुधारने और नपुंसकता से बचाव में उपयोगी है।

लेख में यह भी साफ किया गया है कि इन जड़ी-बूटियों के फायदे तो हैं, लेकिन इनके कुछ दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं, खासकर अगर इनका सेवन अधिक मात्रा में या बिना डॉक्टर की सलाह के किया जाए। इसलिए इन्हें आयुर्वेदिक सप्लीमेंट की तरह इस्तेमाल करने से पहले विशेषज्ञ की राय लेना जरूरी है।

 

Dr. Hakeem Basit khan

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