myUpchar सुरक्षा+ के साथ पुरे परिवार के हेल्थ खर्च पर भारी बचत
  1. सिस्टोस्कोपी क्या है?
  2. सिस्टोस्कोपी की ज़रुरत कब होती है?
  3. सिस्टोस्कोपी के लिए तैयारी
  4. सिस्टोस्कोपी कैसे की जाती है?
  5. सिस्टोस्कोपी के बाद देखभाल
  6. सिस्टोस्कोपी के बाद संभव जटिलताएं और जोखिम

सिस्टोस्कोपी क्या है? - What is Cystoscopy in Hindi?

सिस्टोस्कोपी (Cystoscopy) में मूत्रमार्ग (Urethra) और मूत्राशय (Bladder) के अंदर देखने के लिए एक सिस्टोस्कोप (Cystoscope) का उपयोग किया जाता  है। सिस्टोस्कोप एक लम्बा, पतला ऑप्टिकल उपकरण है, जिसके एक छोर पर एक आईपीस (Eyepiece), मध्य में एक कठोर या लचीली ट्यूब, और ट्यूब के दूसरे छोर पर एक छोटा लेंस और लाइट होते हैं। सिस्टोस्कोप के माध्यम से देखकर, यूरोलॉजिस्ट (Urologist; मूत्र रोग विशेषज्ञ) मूत्रमार्ग और मूत्राशय की लाइनिंग के विस्तृत चित्र देख सकता है। मूत्रमार्ग और मूत्राशय मूत्र पथ (Urinary Tract) का हिस्सा हैं।

सिस्टोस्कोपी की ज़रुरत कब होती है? - When is Cystoscopy required in Hindi?

यूरोलॉजिस्ट मूत्र पथ की समस्याओं (निम्नलिखित) के कारणों का पता लगाने के लिए सिस्टोस्कोपी करते हैं:

  1. मूत्र पथ में बार बार संक्रमण होना (Frequent Urinary Tract Infections, UTIs)
  2. मूत्र में रक्त (Blood In Urine, Hematuria)
  3. दिन में आठ से अधिक बार मूत्र त्याग करना
  4. मूत्र त्याग रोक पाने में असमर्थता
  5. मूत्र प्रतिधारण - मूत्राशय को पूरी तरह से खाली करने में अक्षमता (Urinary Retention)
  6. आकस्मिक मूत्र त्याग (Accidental Loss Of Urine)
  7. मूत्र त्याग करने से पहले, के दौरान या के बाद दर्द
  8. मूत्र त्याग शुरू करने या खत्म करने  या दोनों में परेशानी 
  9. मूत्र सैंपल (Urine Sample) में असामान्य कोशिकाएँ, जैसे कि कैंसर कोशिकाएँ, पाए जाना (और पढ़ें – कैंसर के लक्षण)

सिस्टोस्कोपी के दौरान, यूरोलॉजिस्ट मूत्रमार्ग या गुर्दे या मूत्राशय में स्टोन्स, असामान्य ऊतक, स्ट्रिक्चर, जंतु या कैंसर या ट्यूमर को देख सकते हैं। 

सिस्टोस्कोपी के दौरान, यूरोलॉजिस्ट मूत्राशय में रक्तस्राव और ब्लॉकेज जैसी समस्याओं का इलाज कर सकता है। यूरोलॉजिस्ट निम्न परेशानियों के लिए भी सिस्टोस्कोपी का उपयोग कर सकते हैं:

  1. मूत्राशय या मूत्रमार्ग में स्टोन
  2. असामान्य ऊतक, जंतु, और कुछ प्रकार के ट्यूमर निकालने या उनका इलाज करने के लिए
  3. जांच के लिए माइक्रोस्कोप द्वारा मूत्रमार्ग या मूत्राशय के ऊतकों के छोटे टुकड़े लेना (इस प्रक्रिया को बायोप्सी कहा जाता है)
  4. मूत्र रिसाव (यूरिनरी लीकेज; Urinary Leakage) के उपचार हेतु मूत्राशय या मूर्त्रमार्ग भित्ति (Bladder Or Urethra Wall) में कोई पदार्थ या दवा इंजेक्ट करना
  5. मूत्रनली (Ureter) से मूत्र सैंपल (Urine Sample) प्राप्त करने हेतु
  6. रेट्रोग्रेड पाइलोग्राफी (Retrograde Pyelography) करने के लिए (एक एक्स-रे प्रक्रिया जिससे ट्यूमर या किडनी स्टोन जैसी परेशानियों के कारणों का पता लगाया जा सकता है)
  7. बायोप्सी या स्टोन रिमूवल के लिए की गयी युरेटेरेस्कोपी (Ureterescopy) में लगाए हुए स्टेंट को हटाने के लिए 

सिस्टोस्कोपी के लिए तैयारी - Preparing for Cystoscopy in Hindi

सर्जरी की तैयारी के लिए आपको निम्न कुछ बातों का ध्यान रखना होगा और जैसा आपका डॉक्टर कहे उन सभी सलाहों का पालन करना होगा: 

  1. सर्जरी से पहले किये जाने वाले टेस्ट्स/ जांच (Tests Before Surgery)
  2. सर्जरी से पहले एनेस्थीसिया की जांच (Anesthesia Testing Before Surgery)
  3. सर्जरी की योजना (Surgery Planning)
  4. सर्जरी से पहले निर्धारित की गयी दवाइयाँ (Medication Before Surgery)
  5. सर्जरी से पहले फास्टिंग खाली पेट रहना (Fasting Before Surgery)
  6. सर्जरी का दिन (Day Of Surgery)
  7. सामान्य सलाह (General Advice Before Surgery)
  8. ध्यान देने योग्य अन्य बातें (Other Things To Be Kept In Mind Before Cystoscopy)
    सिस्टोस्कोपी से पहले डॉक्टर द्वारा मरीज़ों को विशेष तैयारी करने के लिए कहा जा सकता है। अपने डॉक्टर द्वारा बताई हर सलाह का पालन करें। अगर आपको मूत्र पथ का संक्रमण (Urinary Tract Infection) है तो आपको सिस्टोस्कोपी से पहले एंटीबायोटिक दवाएं निर्धारित की जा सकती हैं। डॉक्टर के हर निर्देश जैसे कब मूत्राशय को खाली करना है या अन्य निर्देशों का पालन करें। यह प्रक्रिया आउट-पेशेंट (जब मरीज़ को प्रक्रिया के बाद अस्पताल में भर्ती होने की ज़रुरत नहीं होती) आधार पर की जा सकती है। प्रक्रिया में एनेस्थीसिया के लिए एनेस्थेटिक जेल का प्रयोग किया जा सकता है। 

इन सभी के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए इस लिंक पर जाएँ - सर्जरी से पहले की तैयारी

सिस्टोस्कोपी कैसे की जाती है? - How is Cystoscopy done?

इस प्रक्रिया के दौरान, महिलाएं पीठ के बल घुटने ऊपर की तरफ करके (टाँगे फैलाकर) लेटेंगी। पुरुष रोगी अपनी प्रक्रिया के दौरान अपनी पीठ के बल लेट सकते हैं या बैठ भी सकते हैं।

एक बार एनेस्थीसिया का प्रभाव शुरू हो जाए, यूरोलॉजिस्ट आराम से सिस्टोस्कोप की टिप को मूत्रमार्ग में डालते हैं और धीरे धीरे उसे मूत्रमार्ग से मूत्राशय की ओर ले जाते हैं। एक विसंक्रमित द्रव (Sterile Liquid)- पानी या खारा पानी, जिसे सेलाइन (Saline) कहते हैं- सिस्टोस्कोप से बहता है जो धीरे धीरे मूत्राशय को भर देता है और उसे स्ट्रेच (फैलाना) करता है जिससे मूत्राशय की भित्ति (Bladder Wall) अच्छे से देखी जा सके। यूरोलॉजिस्ट मूत्रमार्ग और मूत्राशय की लाइनिंग की जांच करेंगे। बायोप्सी करने या मूत्रमार्ग की परेशानियों के उपचार के लिए सिस्टोस्कोपे के साथ अन्य छोटे उपकरणों को भी डाला जा सकता है। 

इस प्रक्रिया को पूरा करने में 15 मिनट से आधा घंटा तक लग सकता है। अगर प्रक्रिया का प्रयोग स्टोन को हटाने या बायोप्सी करने के लिए किया जा रहा है तो समय ज़्यादा भी हो सकता है। 

जैसे जैसे द्रव से मूत्राशय भरता है, रोगी को कठिनाई महसूस हो सकती है और मूत्रत्याग की इच्छा हो सकती है। यूरोलॉजिस्ट प्रक्रिया के दौरान थोड़ा द्रव निकाल देंगे। प्रक्रिया के समाप्त होने के बाद, यूरोलॉजिस्ट मूत्राशय से निकाल देंगे या मरीज़ खुद मूत्रशय को खाली कर देंगे। 

सिस्टोस्कोपी के बाद देखभाल - What to do after Cystoscopy?

  1. प्रक्रिया के बाद मरीज़ मूत्रत्याग करने में हल्की जलन, मूत्र में रक्तस्त्राव, मूत्रत्याग करने में मूत्राशय या गुर्दे के आसपास बेचैनी या बार बार मूत्रत्याग करने की इच्छा महसूस कर सकते हैं। आम तौर पर ये समस्याएं 24 घंटों में ठीक हो जाएँगी। यदि परेशानियां गंभीर हैं या एक दिन में ठीक नहीं होती तो अपने चिकित्सक से संपर्क करें।
  2. सिस्टोस्कोपी के बाद, दो घंटे के लिए हर घंटे 16 अउंस पानी पियें।
  3. संक्रमण न हो इसके लिए आपको 1 या 2 दिन के लिए एंटीबायोटिक निर्धारित की जा सकती है। संक्रमण के लक्षण जैसे दर्द, ठंड लगना या बुखार दिखने पर चिकित्सक से परामर्श करें।
  4. जलन से निजात पाने के लिए हलके गरम पानी से नहाएं। बेचैनी या दर्द से आराम पाने के लिए मूत्रमार्ग के छिद्र पर एक कपड़े या टॉवल को हलके गरम पानी से गीला करके सिकाई करें। 
  5. दर्द ज़्यादा होने पर दर्द निवारक दवाएं ली जा सकती हैं। 
  6. आम तौर पर सिस्टोस्कोपी के बाद मरीज़ सीधा घर जा सकते हैं। हालांकि अस्पताल में कितने समय रहना है यह इस पर निर्भर करता है कि प्रक्रिया के बाद एनेस्थीसिया का प्रभाव कितना है। अपने चिकित्सक की हर सलाह का पालन अवश्य करें।

सिस्टोस्कोपी के बाद संभव जटिलताएं और जोखिम - Risks and Complications of Cystoscopy in Hindi

सिस्टोस्कोपी से जुड़े जोखिम निम्न हैं:

  1. मूत्र पथ में संक्रमण 
  2. असामान्य रक्तस्त्राव 
  3. मूत्रत्याग के दौरान जलन या दर्द
  4. पेट में दर्द होना (और पढ़ें – पेट दर्द का घरेलू इलाज)
  5. मूत्रमार्ग, मूत्राशय, या मूत्रनली में चोट लग जाना
  6. स्कार ऊतक (Scar Tissue) के गठन के कारण मूत्रमार्ग का संकुचन
  7. आसपास के ऊतकों की सूजन के कारण मूत्रत्याग करने में अक्षमता
  8. एनेस्थीसिया से जुड़ी जटिलताएं

निम्न समस्याएं या जटिलताएं होने पर तुरंत अपने चिकित्सक से संपर्क करें:

  1. मूत्र त्याग करने में असमर्थ होना और मूत्राशय का भरा हुआ लगना
  2. मूत्र त्याग करने में दर्द या जलन (जो 2 दिन से ज़्यादा समय तक रहे)
  3. मूत्र का रंग लाल होना या मूत्र में रक्त के थक्के होना
  4. बुखार (जिसमें ठण्ड भी लग सकती है) (और पढ़ें – बुखार के घरेलू उपचार)
  5. अत्यधिक बेचैनी का अनुभव होना 
और पढ़ें ...