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गैंग्लियोनेक्टोमी शरीर में तरल पदार्थ से भरी एक थैली को हटाने से जुड़ी सर्जिकल प्रक्रिया है। इस थैली को गैंग्लियन सिस्ट कहते हैं। यह थैली आमतौर पर शरीर के किसी जॉइंट (जोड़) या नसों में बनना शुरू होती है। सामान्यतः गैंग्लियन सिस्ट को हाथ, कलाई, नाखून या पैर के पीछे के हिस्से में देखा जाता है। इस समस्या के कारण जब मरीज को मूवमेंट करने में दिक्कत होने लगती है और वह सामान्य गतिविधियां नहीं कर पाता, तब सर्जरी के रूप में गैंग्लियोनेक्टोमी कराने की सलाह दी जाती है। गैंग्लियन सिस्टम की वजह से कई बार प्रभावित हिस्से में संवेदना महसूस होना भी बंद हो जाता है।  

गैंग्लियोनेक्टोमी जनरल या लोकल एनेस्थीसिया के तहत की जाने वाली सर्जरी है। सामान्यतः इसे ओपन या कीहोल सर्जिकल मेथड के जरिये अंजाम दिया जाता है। सर्जरी के पूरा होने में 20 से 45 मिनट का समय लगता है। ऑपरेशन के बाद मरीज को अस्पताल में कुछ समय रहना होता है। यह अवधि इस बात पर निर्भर करती है कि मरीज को किस प्रकार का एनेस्थीसिया दिया गया है और इसके प्रति शरीर ने कैसी प्रतिक्रिया दी है। गैंग्लियोनेक्टोमी के प्रभाव से पूरी तरह रिकवर होने में छह से आठ हफ्तों का समय लग सकता है। ऑपरेशन के बाद टांके हटवाने के लिए मरीज को एक से दो हफ्ते बाद सर्जन के पास जाना पड़ सकता है।

  1. गैंग्लियोनेक्टोमी क्या है - What is Ganglionectomy in Hindi?
  2. गैंग्लियोनेक्टोमी क्यों की जाती है - Why Ganglionectomy is done in Hindi?
  3. गैंग्लियोनेक्टोमी से पहले की तैयारी - Preparations before Ganglionectomy in Hindi
  4. गैंग्लियोनेक्टोमी कैसे की जाती है - How Ganglionectomy is done in Hindi?
  5. गैंग्लियोनेक्टोमी के बाद देखभाल - After Ganglionectomy in Hindi
  6. गैंग्लियोनेक्टोमी की जटिलताएं - Ganglionectomy Complication in Hindi

गैंग्लियोनेक्टोमी शरीर से गैंग्लियन सिस्ट को हटाने के लिए की जाने वाली सर्जरी है।

गैंग्लियन सिस्ट एक गैर-कैंसरकारी सूजन (तरल पदार्थ या जेली जैसे पदार्थ से भरी एक प्रकार की थैली) है। यह उन ऊतकों में विकसित होता है, जो जॉइंट या नसों को कवर करते हैं। वैसे तो सिस्ट शरीर के किसी भी हिस्से में पाया जा सकता है, लेकिन आमतौर पर यह कलाई, हाथ, नाखून और पैर के पीछे के हिस्से में पाया जाता है। गैंग्लियन सिस्ट का आकार अलग-अलग होता है और यह बदलता रहता है। ये सिस्ट त्वचा की सतह के पास या उसके अंदर गहराई में दोनों ही जगह मिल सकते हैं। दोनों ही स्थिति में सिस्ट (नसों और जोड़ों के) ऊतकों से अटैच होते हैं।

गैंग्लियन सिस्ट बनने की प्रक्रिया को किसी विशेष कारण या शारीरिक गतिविधि से जोड़कर नहीं देखा जाता है। कुछ सिस्ट अपनेआप ही गायब हो जाते हैं। वहीं, कुछ का मेडिकल ट्रीटमेंट किया जाता है। मिसाल के लिए एस्पिरेशन, जिसमें गैंग्लियन सिस्ट में छोटे-छोटे पंक्चर कर उसमें से तरल पदार्थ निकाला जाता है। हालांकि अगर इन नॉन-सर्जिकल मेथड से सिस्ट का सफलतापूर्वक उपचार नहीं हो पाता तो गैंग्लियोनेक्टोमी कराने की जरूरत पड़ सकती है। इस सर्जरी में गैंग्लियन सिस्ट को उसकी जड़ समेत हटा दिया जाता है जो इसे नस या जॉइंट से जोड़ती है। इससे सिस्ट के फिर से उभरने का खतरा काफी कम हो जाता है। 

अगर सिस्ट की जड़ पूरी तरह से नहीं हटती तो इस समस्या के फिर से पैदा होने की आशंका बढ़ जाती है। एस्पिरेशन इसका एक उदाहरण है। इस उपचार में सिस्ट की जड़ का केवल एक छोटा सा हिस्सा ही निकल पाता है, जिससे सब्सटेंस के आगे चलकर फिर से सामने आने की आशंका बनी रहती है।

गैंग्लियोनेक्टोमी तब की जाती है, जब गैंग्लियन सिस्ट के कारण व्यक्ति को परेशानी महसूस होने लगे और उसके दैनिक कार्य प्रभावित होना शुरू हो जाएं।

हालांकि, ज्यादातर गैंग्लियन सिस्ट के लक्षण नहीं होते। लेकिन कुछ ऐसे होते हैं जिसमें दर्द हो सकता है। कुछ मामलों में गैंग्लियन सिस्ट किसी नजदीकी नस पर दबाव भी बना सकते हैं जिससे उस विशेष एरिया में सेंसेशन महसूस करने की क्षमता कम हो जाती है। इसके अलावा, स्किन के अंदर कोई गांठ भी बन सकती है।

जिन लोगों में केवल एक लिम्ब (ऊपर या नीचे) होता है, उन्हें सर्जन शायद गैंग्लियोनेक्टोमी कराने का सुझाव न दें या विशेष सावधानी बरतने को कहें। ऐसी स्थिति में सर्जरी करने पर जटिलताओं का नकारात्मक प्रभाव संबंधित व्यक्ति के लिए ज्यादा हो सकता है।

गैंग्लियोनेक्टोमी से पहले निम्नलिखित तैयारियां की जाती हैं-

  • डॉक्टर मरीज को इमेजिंग टेस्ट कराने को कह सकता है। इनमें एक्स-रे, मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग (एमआरआई) और अल्ट्रासाउंड जैसे टेस्ट शामिल हैं। ये परीक्षण गैंग्लियन सिस्ट और बोन ट्यूमर के बीच अंतर स्पष्ट करने के मकसद से किए जाते हैं।
  • सर्जरी के लिए तय की गई तारीख से दो हफ्ते पहले मरीज को धूम्रपान (अगर करता है) छोड़ना होगा। हालांकि सबसे उचित यही होगा कि मरीज सर्जरी से छह से आठ हफ्ते पहले सिगरेट पीना छोड़ दे। ऐसा नहीं करने पर सर्जिकल प्रोसीजर के दौरान श्वसन संबंधी समस्याएं पैदा हो सकती हैं और रिकवरी में भी देरी होती है। 
  • सर्जन मरीज को ऑपरेशन की एक रात पहले से खाने या पीने से मना कर सकता है।
  • सर्जरी के दिन किसी परिजन या मित्र को अपने साथ रखना चाहिए, जो मरीज को घर से अस्पताल और बाद में वापस घर ला सके।

जैसा कि ऊपर बताया गया है कि गैंग्लियोनेक्टोमी को जनरल या लोकल एनेस्थीसिया देकर किया जाता है। जनरल एनेस्थीसिया से व्यक्ति नींद में चला जाता है। लोकल एनेस्थीसिया शरीर का कोई हिस्सा सुन्न कर देता है लेकिन सर्जरी के दौरान मरीज जाग रहता है।

निम्नलिखित सर्जरी मेथड में से किसी को भी अपनाते हुए गैंग्लियोनेक्टोमी की जा सकती है:

  • ओपन सर्जरी: इसमें सर्जन मरीज के उस जॉइंट या नस के आसपास चीरा लगाता है, जहां सिस्ट मौजूद है और उसे हटा देता है।
  • आर्थोस्कोपिक या कीहोल सर्जरी: इसमें सर्जन प्रभावित नस या जॉइंट पर छोटे कट लगाता है। फिर एंथ्रोस्कोप नामक एक कैमरे को कट के जरिये अंदर डाला जाता है ताकि गैंग्लियन सिस्ट को देखा जा सके। कैमरे की मदद से विजुअल फीड का इस्तेमाल करते हुए डॉक्टर सर्जिकल टूल्स को दूसरे कट्स के जरिये अंदर इनसर्ट करता है और सिस्ट को हटा देता है।

सर्जिकल प्रक्रिया पूरी होने के बाद चीरे को टांका लगाकर बंद कर दिया जाता है। इस पूरे प्रोसेस में 20 से 45 मिनट का समय लगता है।

इसके बाद मरीज कितने समय तक अस्पताल में रहता है, यह इस पर निर्भर करता है कि उसे किस प्रकार का एनेस्थीसिया दिया गया था। अगर सर्जरी लोकल एनेस्थीसिया देकर की जाती है तो मरीज को उसी दिन डिस्चार्ज कर दिया जाता है। जनरल एनेस्थीसिया की सूरत में मरीज को एक रात के लिए अस्पताल में रहना पड़ सकता है। यह निर्णय इस बात पर निर्भर करेगा कि सर्जरी वाले दिन एनेस्थीसिया दिए जाने के बाद मरीज के शरीर ने कैसी प्रतिक्रिया दी थी।

सर्जरी के लिए लगाए गए चीरे को ठीक होने में दो से छह हफ्तों का समय लग सकता है। इस दौरान घाव की किस तरह देखभाल करनी है, यह गैंग्लियन सिस्ट की लोकेशन पर निर्भर करता है। निम्नलिखित जानकारी से पता चलता है कि गैंग्लियोनेक्टोमी के बाद मरीज को क्या होता है और उसे क्या प्रोसीजर फॉलो करना पड़ सकता है:

  • अगर सर्जरी जनरल एनेस्थीसिया के तहत की गई है तो मरीज को 24 घंटों तक थकान और चक्कर आना महसूस हो सकता है। ऐसे में अस्पताल से लौटने के बाद घर में आराम करना चाहिए। लेकिन केवल बिस्तर पर पड़े रहना नहीं चाहिए। बेहतर है कि मरीज थोड़ा घूमे-फिरे भी। इस तरह धीरे-धीरे मूव करने से ब्लड क्लॉटिंग के खतरे को रोका जा सकता है।
  • सर्जरी बाजू पर किए जाने पर सर्जन मरीज से कहेगा कि वह अपने हाथ को 24 से 48 घंटों तक आराम दे। हालांकि हाथ में सूजन न हो, इसलिए इस दौरान उंगलियां, कोहनी और कंधें मूव करते रहने को कहा जा सकता है।
  • अगर ऑपरेशन पैर में हुआ है तो डॉक्टर मरीज को सलाह देगा कि वह अपने पैर को उठाकर रखे और उसे एक तकिये पर रखे ताकि सूजन में सुधार हो सके।
  • सर्जरी के कारण बांधी गई पट्टी प्रोसीजर के 48 घंटों बाद ही हटाई जानी चाहिए।
  • अगर घाव वाली जगह पर सूजन हो तो उसे कम करने के लिए बर्फ का इस्तेमाल कर सकते हैं।
  • चीरे वाली जगह पर दर्द का अनुभव हो सकता है। इसके लिए सर्जन दवाएं प्रेस्क्राइब करेगा। इन्हें डॉक्टरी निर्देशों के तहत लेना चाहिए।
  • घाव के ठीक होने के बाद उस पर लोशन अप्लाई करना चाहिए ताकि चोट के निशान भी ठीक हो सकें। इससे वहां मौजूद नस को भी उत्तेजित होने में मदद मिलेगी।
  • ऑपरेशन के बाद मरीज काम पर लौट सकता है। लेकिन यह इस पर निर्भर करेगा कि उसके शरीर के किस हिस्से में सर्जरी हुई है और वह किस प्रकार की नौकरी करता है। अगर मरीज ज्यादा वजन उठाने वाला काम करता है तो काम पर लौटने से पहले उसे कम से कम तीन हफ्तों तक आराम करना होगा।
  • टांके हटने के बाद व्यक्ति तैराकी और खेल खेलना जारी रख सकता है। हालांकि एक विशेष समय के बाद जोड़ों में दर्द होने के कारण मरीज संभवतः विशेष प्रकार की एक्टिविटी परफॉर्म करने या खेलने में दीर्घकालिक कठिनाई महसूस कर सकता है।

गैंग्लियोनेक्टोमी, लंप या गांठ को हटाने और गैंग्लियन सिस्ट के कारण होने वाली किसी भी परेशानी को कम करने में मदद करती है। इतना ही नहीं, यह सर्जरी गैंग्लियन सिस्ट को फिर से उभरने से रोकने का सबसे बेहतर उपाय माना जाता है।

डॉक्टर को कब दिखाना है?

सर्जरी के बाद चीरे वाली जगह पर निम्नलिखित में से कुछ भी महसूस होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए:

  • दर्द का बढ़ना जो दवाओं से भी कम या दूर न हो
  • घाव से रिसाव
  • सूजन होना
  • मवाद निकलना
  • लालिमा बढ़ना

वहीं, खतरों की बात करें तो गैंग्लियोनेक्टोमी के निम्नलिखित जोखिम हो सकते हैं:

  • सर्जरी वाली जगह पर दर्द होना, जो कई महीनों तक बना रह सकता है
  • असामान्य रूप से संक्रमण होना
  • गैंग्लियन सिस्ट के नजदीक नस को क्षति पहुंचना
  • घाव वाले हिस्से से ब्लीडिंग होना
  • कुछ मामलों में गैंग्लियन सिस्ट की समस्या फिर सामने आ सकती है

सर्जरी के बाद टांके हटवाने के लिए मरीज को हर एक या दो हफ्तों में डॉक्टर से अपॉइंटमेंट लेना पड़ सकता है।

डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई तमाम जानकारी केवल पाठकों को शिक्षा देने के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है। यह किसी भी प्रकार से एक क्वालिफाइड डॉक्टर द्वारा दी जाने वाली मेडिकल सलाह का विकल्प नहीं है।

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