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एंटीन्यूक्लियर एंटीबॉडी टेस्ट क्या है?

शरीर को सूक्ष्म रोगाणुओं और बाहरी उत्तेजक पदार्थों से रक्षा करने का मुख्य काम प्रतिरक्षा प्रणाली का होता है। ये पैथोजन और बाहरी पदार्थ जैसे बैक्टीरिया और वायरस के आक्रमण से शरीर की रक्षा करती है। हालांकि, ऑटोइम्यून विकारों जैसे रूमेटाइड आर्थराइटिस या सिस्टमिक लुपस एरीथेमेटोसस (एसएलई) जैसी स्थितियों में यह स्वस्थ ऊतकों पर ही आक्रमण करने लगती है। जिसके कारण शरीर में एंटीन्यूक्लियर एंटीबॉडीज या एएनए बनने लगते हैं जिससे अंगों और ऊतकों में सूजन और दर्द होने लगता है।

एएनए टेस्ट रक्त में इन एंटीबॉडीज की पहचान करके इनकी मात्रा और पैटर्न का पता लगाने के लिए किया जाता है। चूंकि ये एंटीबॉडीज विशेष रूप से नुक्लियस को लक्ष्य बनाते हैं इसीलिए इन्हें एएनए एंटीबॉडीज कहा जाता है।

अन्य शारीरिक परीक्षणों और टेस्टों के साथ किए जाने पर एएनए कई सारे ऑटोइम्यून विकारों का पता लगाने में मदद कर सकता है।

एंटीन्यूक्लियर एंटीबॉडी टेस्ट को कई अन्य नामों से भी जाना जाता है, जिनमें एएनए, फ्लोरोसेंट, एफएएनए और एएनए स्क्रीन शामिल हैं।

  1. एंटीन्यूक्लियर एंटीबॉडी टेस्ट क्यों किया जाता है - ANA (Antinuclear Antibody) Test Kyu Kiya Jata Hai
  2. एंटीन्यूक्लियर एंटीबॉडी टेस्ट से पहले - ANA (Antinuclear Antibody) Test Se Pahle
  3. एंटीन्यूक्लियर एंटीबॉडी टेस्ट के दौरान - ANA Test Ke Dauran
  4. एंटीन्यूक्लियर एंटीबॉडी टेस्ट के परिणाम का क्या मतलब है - ANA (Antinuclear Antibody) Test Ke Parinam Ka Kya Matlab Hai

एंटीन्यूक्लियर एंटीबॉडी टेस्ट किसलिए  किया जाता है?

एएनए टेस्ट निम्न के परीक्षण के लिए किया जाता है:

ऑटोइम्यून विकार के सामान्य लक्षण और संकेत निम्न हैं:

  • हल्का बुखार
  • हर समय थकान महसूस होना 
  • थकान और कमजोरी 
  • एक या अधिक जोड़ों में दर्द (आर्थराइटिस की तरह)
  • त्वचा पर चकत्ते 
  • लाल चकत्ते (नाक और गालों पर चकत्ते होकर तितली जैसा आकार बन जाना, इस स्थिति को लुपस
  • त्वचा का प्रकाश के प्रति संवेदनशील होना
  • बाल झड़ना
  • मांसपेशियों में दर्द
  • हाथ पैरों में झुनझुनी या सुन्न पड़ना
  • विभिन्न अंगों और ऊतकों (किडनी, फेफड़े, हृदय, केंद्रीय तंत्रिका तंत्र और रक्त वाहिकाएं) में सूजन आना और किसी प्रकार की क्षति पहुंचना।

एंटीन्यूक्लियर एंटीबॉडी टेस्ट की तैयारी कैसे करें?

इस टेस्ट के लिए किसी विशेष तैयारी की आवश्यकता नहीं होती। हालांकि, यह जरूरी है कि यदि आप कोई भी दवा या सप्लीमेंट ले रहे हैं तो इनके बारे में डॉक्टर को बता दें। डॉक्टर आपको कुछ विशेष दवाएं लेने से मना कर सकते हैं जो कि टेस्ट के रिजल्ट को प्रभावित कर सकती हैं। लम्बे समय से यदि कोई संक्रमण या वायरल संक्रमण है तो ये भी टेस्ट के परिणामों को प्रभावित कर सकता है, इसीलिए यह जरूरी है कि अगर आपको कोई संक्रमण है तो आप डॉक्टर को बता दें। 

 

एंटीन्यूक्लियर एंटीबॉडी टेस्ट कैसे किया जाता है?

आपकी बांह की नस में सुई लगाकर ब्लड सैंपल ले लिया जाएगा। सुई लगने से आपको कुछ सेकेंड तक हल्का सा दर्द हो सकता है। सैंपल लेने के बाद, ब्लीडिंग रोकने के लिए एक रुई या बैंडेज लगा दी जाती है। इसके बाद सैंपल एक शीशी या टेस्ट ट्यूब में डाल कर लैब में टेस्ट के लिए भेज दिया जाता है।

इस टेस्ट में कोई गंभीर जोखिम नहीं होता है, लेकिन इसमें चक्कर आने और इंजेक्शन लगी जगह पर नील पड़ने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। हालांकि ये लक्षण जल्द ही गायब हो जाते हैं। इसके अलावा कुछ मामलों में इंजेक्शन वाली जगह पर संक्रमण भी हो जाता है।

एंटीन्यूक्लियर एंटीबॉडी टेस्ट के परिणाम क्या बताते हैं?

एएनए टेस्ट के रिजल्ट उम्र, लिंग, व्यक्ति के पिछले स्वास्थ्य और टेस्ट के तरीके के अनुसार अलग आ सकते हैं। इसीलिए यह जरूरी है कि परिणामों की सही जानकारी के लिए आप डॉक्टर से बातचीत करें। 

पॉजिटिव एएनए टेस्ट का मतलब है कि शरीर में एएनए मौजूद हैं। इन्हें टाइटर (Titre) में मापा जाता है। 1:160 से अधिक टाइटर का मतलब है कि परिणाम पॉजिटिव हैं। 

पॉजिटिव रिजल्ट के निम्न कारण हो सकते हैं:

ऑटोइम्यून कनेक्टिव टिशू डिजीज 

  • रूमेटाइड आर्थराइटिस: रूमेटाइड आर्थराइटिस से ग्रस्त एक-तिहाई लोगों में एएनए टेस्ट के पॉजिटिव रिजल्ट देखे जाते हैं।
  • एसएलई: एसएलई के मरीजों में एएनए के परिणाम पॉजिटिव आएंगे पर ऐसा जरूरी नहीं कि हर व्यक्ति जिसके शरीर में एएनए हो उसे एसएलई भी हो। 
  • स्क्लेरोडर्मा: लगभग, 60-85% जो इस स्थिति से ग्रस्त हैं उनके एएनए के परिणाम पॉजिटिव आते हैं। 
  • स्जोग्रेन सिंड्रोम: स्जोग्रेन सिंड्रोम से ग्रस्त लगभग 80% लोगों में एएनए टेस्ट के परिणाम पॉजिटिव आते हैं। 
  • जुवेनाइल इडियोपैथिक आर्थराइटिस (बच्चों में आर्थराइटिस)
  • पॉलीमायोसिटिस
  • रेनॉड सिंड्रोम (एक मेडिकल स्थिति जिसमें धमनियों में ऐंठन आने से रक्त प्रवाह कम हो जाता है)

ऑटोइम्यून डिजीज 

नेगेटिव रिजल्ट का मतलब होता है कि व्यक्ति के शरीर में कोई ऑटोइम्यून विकार नहीं है। हालांकि, क्योंकि ऑटोइम्यून डिजीज एपिसोडिक तरीके से बढ़ती हैं इसीलिए लक्षण दिखने पर ये टेस्ट दोबारा करवाना चाहिए। इसके अलावा, अगर कोई ऑटोइम्यून विकार ठीक होने की स्थिति में है तब भी रिजल्ट नेगेटिव आ सकते हैं।

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References

  1. Petri M, Orbai A-M, Alarcón GS, Gordon C, Merrill JT, Fortin PR, et al. Derivation and validation of the Systemic Lupus International Collaborating Clinics classification criteria for systemic lupus erythematosus.. Arthritis Rheum. 2012 Aug;64(8):2677-86. PMID: 22553077
  2. UW Health. Antinuclear Antibodies (ANA). University of Wisconsin Hospitals; Wisconsin, United States. [internet].
  3. Health Link. Antinuclear Antibodies (ANA). British Columbia. [internet].
  4. University of Rochester Medical Center. Antinuclear Antibody. Rochester, New York. [internet].
  5. MedlinePlus Medical Encyclopedia: US National Library of Medicine; ANA (Antinuclear Antibody) Test