डॉपलर अल्ट्रासाउंड एक नॉन-इनवेसिव (गैर-आक्रामक) तरीका है। यह हाई फ्रीक्वेंसी साउंड वेव्स (या अल्ट्रासाउंड) का इस्तेमाल करके इस बात का पता लगाता है कि रक्त वाहिकाओं के माध्यम से कितनी मात्रा में लाल रक्त कोशिकाएं प्रसारित हो रही हैं। इसके अलावा साउंड वेव की आवृत्ति में बदलाव की दर को मापकर रक्त प्रवाह की गति का आकलन किया जाता है।

पेनाइल डॉपलर अल्ट्रासाउंड का उपयोग किसी व्यक्ति के लिंग के भीतर रक्त प्रवाह से जुड़ी जानकारी पता करने के लिए किया जाता है। यह एक ऐसा तरीका है, जिसका उपयोग स्तंभन दोष (ईडी) के लिए किया जाता है, यानी लिंग में तनाव बनाए रखने में असमर्थता के लिए।

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ईडी के कई कारण हैं, जिनमें से मुख्य कारण लिंग के रक्त प्रवाह में असंतुलन होना है। ऐसा तब होता है जब लिंग में खून सही से संचारित नहीं हो पाता है। इस टेस्ट के माध्यम से यह भी पता चल सकता है कि आपके लिंग में सामान्य से कम रक्त प्रवाह है या सामान्य से ज्यादा।

ईडी के अलावा, इस टेस्ट का उपयोग अन्य विकारों जैसे पेरोनी रोग, प्रियापिज्म, पेनाइल मासेज या पेनाइल ट्रॉमा के मूल्यांकन के लिए भी किया जा सकता है।

पेरोनी की बीमारी में लिंग की त्वचा के नीचे सपाट स्कार टिश्यू (प्लॉक) बनने लगते हैं। इसकी वजह से लिंग में तनाव के वक्त घुमाव आने लगता है।

प्रियापिज्म एक ऐसी स्थिति है, जिसमें लंबे समय तक यानी कई घंटों तक लिंग में तनाव बना रह सकता है। प्रियापिज्म मुख्यतः दो प्रकार का होता है : इस्केमिक और नॉन-इस्केमिक। इस्केमिक या कम-रक्त प्रवाह वाले प्रियापिज्म में, लिंग में पर्याप्त मात्रा में खून नहीं जाता है। नॉन-इस्केमिक या ज्यादा प्रवाह वाले प्रियापिज्म तब होता है जब लिंग में रक्त प्रवाह ठीक से विनियमित नहीं होता है।

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  1. पेनाइल डॉपलर अल्ट्रासाउंड कौन नहीं करा सकता है? - Who cannot have a Penile doppler ultrasound in Hindi?
  2. पेनाइल डॉपलर अल्ट्रासाउंड क्यों किया जाता है? - Why is Penile doppler test done in Hindi?
  3. पेनाइल डॉपलर अल्ट्रासाउंड के लिए तैयारी? - Penile doppler ultrasound preparation in Hindi
  4. पेनाइल डॉपलर अल्ट्रासाउंड की प्रक्रिया क्या है? - How to do a Penile doppler ultrasound in Hindi?
  5. पेनाइल डॉपलर अल्ट्रासाउंड में कैसा महसूस होगा? - How will a Penile doppler test feel in hindi?
  6. पेनाइल डॉपलर अल्ट्रासाउंड के परिणामों का क्या मतलब है? - Penile doppler ultrasound results mean in Hindi?
  7. पेनाइल डॉपलर अल्ट्रासाउंड के जोखिम और लाभ क्या हैं? - Penile doppler ultrasound risks and benefits in Hindi?
  8. पेनाइल डॉपलर अल्ट्रासाउंड के बाद क्या होता है? - What happens after a penile doppler ultrasound in Hindi?
  9. पेनाइल डॉपलर अल्ट्रासाउंड के साथ कौन से अन्य टेस्ट किए जा सकते हैं? - Other tests that can be done with a penile doppler ultrasound in Hindi?

डॉपलर पेनाइल टेस्ट को लेकर किसी तरह का मतभेद नहीं है।

यदि किसी व्यक्ति में इरेक्टाइल डिस्फंक्शन (ईडी) से संबंधित निम्नलिखित लक्षण हैं, तो ऐसे में आपका डॉक्टर पेनाइल डॉपलर अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दे सकते हैं :

  • लिंग में तनाव लाने में बार-बार असमर्थता
  • लिंग में तनाव लाने में पूरी तरह से असमर्थता
  • संतोषजनक यौन गतिविधि के लिए लिंग में तनाव बनाए रखने में असमर्थता

ईडी के उपचार के लिए उपयोग किए जाने वाले वैसोडिलेटर (रक्त वाहिकाओं को चौड़ा करके रक्त प्रवाह में वृद्धि करने वाली) दवाओं के प्रति आपकी प्रतिक्रिया की जांच करने के लिए डॉक्टर पेनाइल डॉपलर अल्ट्रासाउंड कराने का सुझाव दे सकते हैं।

कई बार पेरोनी रोग (Peyronie’s disease) के निदान के लिए भी डोपलर पेनाइल किया जा सकता है। पेरोनी रोग एक गैर-कैंसरकारी स्थिति है, जिसमें लिंग पर फाइब्रस स्कार टिश्यू विकसित होने लगता है, जिसकी वजह से लिंग में कर्व यानी असामान्य या घुमाव आ जाता है और इस स्थिति में लिंग में तनाव के साथ-साथ तेज दर्द भी होता है। इसके लक्षणों में शामिल हैं :

  • लिंग में गांठ
  • लिंग में तनाव लाने के दौरान तेज दर्द
  • लिंग में असामान्य मात्रा में घुमाव होना
  • हल्का तनाव आना
  • सेक्स के दौरान परेशानी होना

इसके अतिरिक्त, यह टेस्ट 'प्रियापिज्म' की जांच में भी मदद करता है। इस्केमिक प्रियापिज्म एक दुर्लभ स्थिति है, जिसमें लिंग में बहुत कम या रक्त प्रवाह नहीं होता है और दर्द व कड़ापन बना रहता है। इसके लक्षणों में निम्नलिखित शामिल हैं :

नॉन-इस्केमिक प्रियापिज्म आमतौर पर इस्केमिक प्रियापिज्म जितना दर्दनाक नहीं है, लेकिन इसमें निम्नलिखित लक्षण देखे जा सकते हैं:

  • यौन रुचि या उत्तेजना के बिना चार घंटे से अधिक समय तक लिंग में तनाव रहना
  • लिंग में पर्याप्त मात्रा में तनाव न होना

यदि आप इरेक्टाइल डिस्फंक्शन के लिए दवाइयां ले रहे हैं, तो डॉक्टर पेनाइल डॉपलर अल्ट्रासाउंड से एक दिन पहले या टेस्ट वाले दिन ईडी की दवाइयां छोड़ने की सलाह दे सकते हैं।

टेस्ट से कम से कम 30 मिनट पहले से लेकर दो घंटे पहले तक निकोटीन प्रोडक्ट जैसे कि सिगरेट या चबाने वाले तंबाकू लेने से बचें। ऐसा इसलिए क्योंकि निकोटीन रक्त वाहिकाओं को संकुचित कर सकता है, जिससे टेस्ट के परिणाम गलत आ सकते हैं।

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इस टेस्ट के लिए निम्नलिखित प्रक्रिया अपनाई जाती है :

  • डॉक्टर टेस्ट से पहले आपको प्रत्येक स्टेप के बारे में बताते हैं।
  • वह आपको कमर से नीचे के कपड़े उतारने के लिए कहेंगे। इसके बाद आपको एक मेज पर लेटने के लिए कहा जाएगा।
  • डॉक्टर एक छोटी सुई का उपयोग करके आपके लिंग के किनारे पर वैसोडिलेटर ड्रग्स इंजेक्ट करेंगे। यह ड्रग्स आपके लिंग में रक्त प्रवाह को बढ़ाएगा और तनाव लाने में मदद करेगा।
  • इसके बाद डॉक्टर अल्ट्रासाउंड प्रोब (एक डिवाइस) पर विशेष जेल लगाते हैं और इसे आपके लिंग पर लगाते हैं।
  • जैसे ही डॉक्टर जांच को आगे बढ़ाते हैं, आपको अल्ट्रासाउंड मशीन से तेज आवाजें सुनाई दे सकती हैं। यह ध्वनियां लिंग के अंदर रक्त प्रवाह के बारे में संकेत देती हैं।

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पेनाइल डॉपलर अल्ट्रासाउंड एक दर्दरहित प्रक्रिया है। हालांकि, यदि आपको नसों से संबंधित समस्या है, तो इंजेक्शन के जरिये दवा इंजेक्ट करने के बाद कई घंटों तक तेज दर्द हो हो सकता है। इंजेक्शन के बाद चक्कर आने का भी जोखिम हो सकता है, जो आमतौर पर कुछ समय बाद कम हो जाता है।

इसके अलावा यदि आप किसी असुविधा का अनुभव करते हैं, तो इस बारे में जल्द से जल्द अपने डॉक्टर को सूचित करें।

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डॉक्टर निम्नलिखित मापदंडों की मदद से इरेक्टाइल डिस्फंक्शन का निदान करते हैं : 

  • पीक सिस्टोलिक वेलोसिटी ऑफ दि केवर्नोजल आर्टेरी : पीएसवी पर असामान्य परिणाम का मतलब है कि इरेक्टाइल डिस्फंक्शन धमनियों से अपर्याप्त रक्त प्रवाह (रक्त वाहिकाएं जो हृदय से अंगों तक खून ले जाती हैं) की वजह से हुआ है। इसे आर्टेरियल इंसफिशिएंसी भी कहा जाता है।
    • नॉर्मल : >35 सेंटीमीटर / सेकंड (सेमी / सेकंड)
    • ग्रे जोन : 25-35 सेमी / सेकंड
    • एब्नॉर्मल : <25 सेमी / सेकंड
  • रेजिस्टिव इंडेक्स ऑफ दि केवर्नोजल आर्टेरी : आरआई धमनी अपर्याप्तता की स्थिति में भी वीनस लीक का पता लगा सकता है।
    • नॉर्मल : >0.9
    • वीनस लीक : <0.75
  • आर्टेरियल कॉम्प्लिएंस ऑफ दि केवर्नोजल आर्टेरी :
    • व्यास में 60% -75% की वृद्धि
  • एंड डिआस्टोलिक वेलोसिटी ऑफ दि केवर्नोजल आर्टेरी : ईडीवी 'वीनस लीक' (लिंग में तनाव बनाए रहने में असमर्थता) के बारे में जानकारी देता है। वीनस लीक वीनो-ऑक्लुसिव मैकेनिज्म में असंतुलन आने की वजह से होता है। वीनो-ऑक्लुसिव की वजह से नसें सिकुड़ जाती हैं और खून अंदर फंस जाता है। वीनस लीक तब होता है जब नसें संकुचित नहीं होती हैं और खून लिंग से शरीर की ओर बहता है, जिसकी वजह से इरेक्टाइल डिस्फंक्शन होता है। हालांकि, यदि धमनियों के माध्यम से रक्त प्रवाह धीमा या बंद हो जाता है तो ऐसे में ईडीवी का परिणाम गलत आ सकता है।
    • नॉर्मल : <3-5 सेमी / सेकंड
    • वीनस लीक : >5 सेमी / सेकंड

डीप डोर्जल वीन : यह भी एक तरह का पैरामीटर है, जिसके जरिये वीनस लीक का पता लगाया जा सकता है

  • नॉर्मल : <3 सेमी / सेकंड
  • मॉडेरेट इंक्रीज : 10-20 सेमी / सेकंड
  • मार्क्ड इंक्रीज : >20 सेमी / सेकंड

डॉक्टर यह भी निर्धारित कर सकते हैं कि आपको इन फ्लो ईडी है या आउट फ्लो ईडी।

पेनाइल डॉपलर अल्ट्रासाउंड द्वारा अन्य स्थितियों का भी पता लगाया जा सकता है जैसे :

  • प्रियापिज्म
  • लिंग में टेढ़ापन
  • पेनाइल मासेज
  • पेनाइल ट्रॉमा
  • पेनाइल फाइब्रोसिस

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पेनाइल डॉपलर अल्ट्रासाउंड का लाभ निम्नलिखित है :

  • इस टेस्ट की सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि यह गैर-आक्रामक है।

पेनाइल डॉपलर अल्ट्रासाउंड के जोखिम निम्नलिखित है :

  • टेस्ट के बाद कई घंटों तक लगातार इरेक्शन (प्रियापिज्म) होने का जोखिम रहता है। दवा को इंजेक्शन के जरिये शरीर में इंजेक्ट करने के बाद भी यदि तीन घंटे से ज्यादा समय तक लिंग में तनाव रहता है तो ऐसे में डॉक्टर से परामर्श करें।

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यह टेस्ट हो जाने के बाद आप तुरंत घर या जहां आप जाना चाहें, जा सकते हैं और सामान्य तरीके से दिनचर्या के काम-काज निपटा सकते हैं। लेकिन एक बात का बहुत ध्यान देने की जरूरत होती है, जब तक डॉक्टर अनुमति न दें तब तक हस्तमैथुन या सेक्स न करें।

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यह स्थितियों पर निर्भर करता है कि पेनाइल डॉपलर अल्ट्रासाउंड के साथ अन्य कौन से टेस्ट किए जा सकते हैं। उदाहरण के लिए इस टेस्ट के साथ निम्नलिखित टेस्ट किए जा सकते हैं :

  • नॉक्चर्नल पेनाइल ट्यूमसेंस टेस्ट (Nocturnal penile tumescence test )
  • न्यूरोलॉजिकल टेस्ट (Neurologic exam)

ध्यान रहे : इन टेस्ट के सभी परिणामों को चिकित्सकीय रूप से आपस में सहसंबद्ध होना चाहिए। उपरोक्त जानकारी पूरी तरह से शैक्षिक दृष्टिकोण से प्रदान की गई है। यह किसी भी डॉक्टर द्वारा सुझाए गए मेडिकल सलाह का विकल्प नहीं है।

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संदर्भ

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