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लिंग (पेनिस) में दर्द क्या होता है​?

लिंग का दर्द लिंग के ऊपर, बीच या नीचे के हिस्से को प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा यह दर्द लिंग के ऊपर की स्किन को भी प्रभावित कर सकता है। लिंग में दर्द के साथ-साथ खुजली या जलन भी महसूस हो सकती है।

(और पढ़ें - यौन रोग के लक्षण)

लिंग में दर्द की तीव्रता उसके होने के कारण पर निर्भर करती है। अगर आपको चोट आदि लगी है, तो दर्द गंभीर हो सकता है और अचानक उभर सकता है। अन्य मामलों में पेनिस में दर्द हल्का होता है।

(और पढ़ें - चोट की सूजन का इलाज)

लिंग में किसी भी प्रकार का दर्द होना चिंता का कारण हो सकता है, खासकर अगर यह लिंग स्तंभन के दौरान होता है, पेशाब करने में दिक्कत पैदा करता है या पेनिस में छाले, लालिमा, सूजन या किसी प्रकार का डिस्चार्ज (स्त्राव) के साथ हो रहा हो।

(और पढ़ें - सेक्स के दौरान दर्द का कारण)

  1. लिंग में दर्द के लक्षण - Pain in penis Symptoms in Hindi
  2. लिंग (पेनिस) में दर्द के कारण - Pain in penis Causes in Hindi
  3. लिंग (पेनिस) में दर्द से बचाव - Prevention of Pain in penis in Hindi
  4. लिंग में दर्द का परीक्षण - Diagnosis of Pain in penis in Hindi
  5. लिंग (पेनिस) में दर्द का इलाज - Pain in penis Treatment in Hindi
  6. लिंग में दर्द की दवा - Medicines for Pain in penis in Hindi
  7. लिंग में दर्द के डॉक्टर

लिंग में दर्द के लक्षण - Pain in penis Symptoms in Hindi

लिंग में दर्द के लक्षण व संकेत क्या हो सकते हैं?

लिंग के कौन से हिस्से में दर्द है, उसके आधार पर दर्द के लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं -

  • लिंग का आंतरिक हिस्सा जो पेट की दीवार (abdominal wall) से जुड़ा होता है। लिंग के इस हिस्से को "पेनिस रूट" (penis root: जड़) कहा जाता है।
  • लिंग का मुख्य बाहरी हिस्सा, इसे "पेनिस शॉफ्ट" (penis shaft) कहा जाता है।
  • लिंग के ऊपर का हिस्सा, इसे "पेनिस हेड" (शिश्न मुंड; penis head) कहा जाता है।
  • लिंग की ट्यूब, जिसके माध्यम से लिंग के अंदर से वीर्य और मूत्र बाहर आते हैं। इसे "यूरेथ्रा" (Urethra) कहा जाता है।

(और पढ़ें - पेशाब में खून आने का कारण)

लिंग में दर्द के लक्षण अचानक से या धीरे-धीरे विकसित हो सकते हैं। दर्द तेज, मंद या रह-रह कर महसूस हो सकता है। यह कुछ घंटों से कुछ दिन तक लगातार रह सकता है या सिर्फ कुछ पलों के लिए भी हो सकता है।

कुछ मामलों में लिंग का दर्द रोजाना के काम करने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है, जैसे यौन संबंध बनाना, पेशाब करना, व्यायाम करना आदि। अन्य मामलों में लिंग का दर्द केवल एक मामूली तकलीफ ही बनता है और जल्दी ही ठीक हो जाता है।

(और पढ़ें - पेशाब न रोक पाने का इलाज)

डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?

लिंग में दर्द के साथ-साथ अन्य लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं। अगर लिंग में दर्द के साथ नीचे बताये लक्षण में से कोई भी महसूस हो रहा हो, तो तुरंत अपने डॉक्टर के पास जाएं -

(और पढ़ें - पेशाब में दर्द के घरेलू उपाय)

लिंग (पेनिस) में दर्द के कारण - Pain in penis Causes in Hindi

पेनिस (लिंग) में दर्द क्यों होता है?

यहाँ कुछ आम कारण बताये जा रहे हैं जिनकी वजह से पेनिस में दर्द हो सकता है -

  • मूत्रमार्ग (मूत्राशय की ट्यूब या यूरेथ्रा) में संक्रमण की वजह से पेशाब करने में दर्द हो सकता है। यूरेथ्राइटिस अक्सर यौन संचारित संक्रमण के कारण होता है। यह लिंग में मवाद पैदा कर सकता है और गंभीर दर्द व सूजन का कारण बन सकता है।
  • किटाणुओं की वजह से मूत्राशय में संक्रमण (जिसे "सिस्टाइटिस" कहते हैं; cystitis) होने के कारण भी लिंग में दर्द हो सकता है।
  • पौरुष ग्रंथि में संक्रमण या सूजन (जिसे "प्रोस्टाटाईटिस" कहते हैं; prostatitis) के कारण भी लिंग में दर्द हो सकता है, जो खासकर स्खलन के दौरान होता है। (और पढ़ें - प्रोस्टेट कैंसर का इलाज)
  • मूत्राशय में या गुर्दे से मूत्राशय में पेशाब ले जाने वाली किसी ट्यूब (Ureters) में पथरी होने से भी लिंग में दर्द पैदा हो सकता है। (और पढ़ें - पथरी का इलाज)
  • अगर लिंग की चमड़ी अत्याधिक टाइट है और शिश्न मुंड (पेनिस हेड) से वापस नहीं जाती, तो इस समस्या को "फिमॉसिस" (Phimosis) कहा जाता है। यह 6 साल तक के बच्चों में काफी आम होती है, लेकिन बड़े होने के बाद यह समस्या नहीं होनी चाहिए। अगर यह पीछे नहीं हटती तो यह शिश्न-मुंड (पेनिस हेड) तथा ऊपरी चमड़ी में संक्रमण का कारण बन सकती है, क्योंकि यह कीटाणु तथा फंगस (कवक) आदि के लिए गर्म और नम जगह का काम करती है, जिसमें वे आसानी से बढ़ सकते हैं। इससे पेनिस में दर्द हो सकता है, खास तौर से संभोग के दौरान। (और पढ़ें - सेक्स के दौरान दर्द)
  • कई बार शिश्न-मुंड (पेनिस हेड) के ऊपर की चमड़ी टाइट होने के बावजूद पीछे खिंच तो जाती है लेकिन वापिस ऊपर नहीं आ पाती। ऐसे में वह मुंड के पीछे इकट्ठा होकर फंस जाती है, जिससे लिंग की नसें रुक जाती हैं और पेनिस हेड में सूजन आ जाती है। शिश्न मुंड में इतनी सूजन आ सकती है कि त्वचा फिर वापस उसके ऊपर न जा पाए। इसे स्थिति को "पैराफिमॉसिस" (paraphimosis) के नाम से जाना जाता है और यह काफी दर्दनाक होती है। पैराफिमॉसिस को ठीक करने के लिए तुरंत ऑपरेशन करने की जरूरत होती है। (और पढ़ें - यूरिन इन्फेक्शन का इलाज)
  • लिंग पर किसी प्रकार का आघात या चोट भी दर्द का कारण बन सकती है। ऐसी चोट कई कारणों से लग सकती है, जैसे -
    • जानवर या मानव के काटने की वजह से।
    • पैंट की जिप में लिंग के फंस जाने से।
    • फिमॉसिस के कारण अगर चमड़ी अधिक टाइट हो, तो संभोग के दौरान चमड़ी कट या फट सकती है और उसमें से खून बहने लग सकता है। (और पढ़ें - सेक्स के दौरान की जाने वाली गलतियां)
  • लिंग स्तंभन के दौरान अक्सर लिंग के टेढ़ेपन (जिसे "पेरोनी रोग" कहते हैं; Peyronie's disease) के कारण दर्द हो सकता है। यह ज़ोरदार यौन क्रिया के दौरान लिंग के मुड़ने के कारण होता है।
  • 4 घंटे से ज़्यादा तक रहने वाले दर्दनाक लिंग स्तंभन को "प्रियापिज्म" (Priapism) के नाम से जाना जाता है। प्रियापिज्म के कई कारण होते हैं, अगर इसका जल्दी से जल्दी इलाज ना किया जाए तो यह स्थायी स्तंभन दोष (इरेक्टाइल डिसफंक्शन या नपुंसकता) की स्थिति पैदा कर सकता है। (और पढ़ें - स्तंभन दोष के लक्षण)
  • ज़ोरदार सेक्स के दौरान लिंग में फ्रैक्चर भी हो सकता है। ऐसा तब होता है, जब तना हुआ लिंग अचानक से मुड़ जाए और "कार्पोरा" (corpora; एक प्रकार के ऊतक जो पेनिस के अंदर होते हैं) की दीवार क्षतिग्रस्त हो जाए। ऐसा होने के दौरान एक कड़कने जैसी आवाज आ सकती है और अचानक से तेज दर्द शुरू हो सकता है। ऐसा होने के तुरंत बाद ही लिंग में सूजन आ जाती है और दर्द बहुत बढ़ जाता है। (और पढ़ें - sex kaise kare)
  • लिंग की नसों में "क्लॉटिंग" (खून के थक्के जमना; Thrombosis) भी लिंग में दर्द का एक कारण हो सकता है, लेकिन ऐसा बहुत ही कम होता है।
  • पेनिस कैंसर उन पुरुषों में ज़्यादा होता है जिनको फिमोसिस की समस्या होती है (जिनका खतना (circumcision) हो चुका होता है, उनको पेनिस कैंसर का खतरा कम होता है)। फिमोसिस की वजह से कैंसर पेनिस के ऊपर की स्किन (फोरस्किन; foreskin) के नीचे छिपा रहता है। पेनिस कैंसर का पता तब चलता है जब इसके लक्षण महसूस होने शुरू हो जाते हैं, जैसे पेनिस में दर्द, खून बहना, और बदबूदार स्राव। लेकिन पेनिस में दर्द के सभी मामलों में से कैंसर की वजह से पेनिस में दर्द के मामले एक बहुत छोटा भाग हैं।
  • चंद मामलों में लिंग में दर्द अन्य तरह के दर्द से जुड़ा होता है, जैसे कमर में दर्द या पेडू में दर्द (पेल्विक दर्द)।

(और पढ़ें - सेक्स करने के फायदे)

लिंग (पेनिस) में दर्द से बचाव - Prevention of Pain in penis in Hindi

लिंग में दर्द होने से कैसे रोकें?

कुछ आसान सावधानियां बरत कर आप पेनिस में दर्द होने की संभावना कम कर सकते हैं -

  • यौन संबंध बनाने के दौरान हमेशा कंडोम का इस्तेमाल करें।
  • जिसको कोई संक्रमण हो उसके साथ यौन संबंध न बनाएं। (और पढ़ें - सुरक्षित सेक्स कैसे करें)
  • सेक्स के दौरान ऐसी मूवमेंट या पोजीशन से बचें जिनमें लिंग में ज्यादा घुमाव या मोड़ आता हो। (और पढ़ें - सेक्स पोजीशन)
  • यदि आपको लिंग की ऊपरी चमड़ी (फोरस्कि; Foreskin) में किसी प्रकार का बार-बार होने वाला संक्रमण है, तो रोज उसकी अच्छे से सफाई करें और इसका इलाज करायें। (और पढ़ें - संक्रमण के लक्षण)

(और पढ़ें - सुरक्षित सेक्स के तरीके)

लिंग में दर्द का परीक्षण - Diagnosis of Pain in penis in Hindi

लिंग में दर्द का परीक्षण​/ निदान कैसे किया जाता है?

शारीरिक परीक्षण के साथ-साथ डॉक्टर मरीज से उसकी कुछ व्यक्तिगत व मेडिकल जानकारी आदि के बारे में पूछ सकते हैं। इसके अलावा कुछ अन्य टेस्ट की जरूरत पड़ सकती है, जो नीचे बताये गए हैं -

आपको हर टेस्ट करवाने की ज़रुरत नहीं पड़नी चाहिए। डॉक्टर आपकी मेडिकल स्थिति की अनुसार टेस्ट का चयन करेंगे।

(और पढ़ें - जननांग मस्सों के उपाय)

लिंग (पेनिस) में दर्द का इलाज - Pain in penis Treatment in Hindi

लिंग में दर्द का उपचार क्या है?

पेनिस में दर्द का इलाज इसके होने ले कारण के अनुसार अलग-अलग हो सकता है, जिनमें निम्न प्रमुख हैं -

  • कई मामलों में सिर्फ दर्द कम करने की दवा की ही ज़रुरत पड़ती है।
  • प्रियापिज्म (priapism) होने की स्थिति में एक सुई के द्वारा लिंग में जमा खून बाहर निकालना लिंग स्तंभन को कम करने में मदद कर सकता है। दवाओं की मदद से भी लिंग में जाने वाले खून की मात्रा को कम किया जा सकता है।
  • एंटीबायोटिक दवाओं की मदद से मूत्र पथ में संक्रमण तथा कुछ यौन संचारित रोगों का इलाज किया जा सकता है, जैसे क्लैमाइडिया, गोनोरिया, सिफलिस आदि। एंटीबायोटिक और एंटीफंगल दवाओं द्वारा लिंग में सूजन (बैलनाइटिस; Balanitis) का इलाज किया जा सकता है। अगर कोई यौन संचारित रोग है, तो यह बहुत जरूरी है कि दोनो यौन साथियों का इलाज किया जाए।
  • इंजेक्शन से "पेरोनी रोग के प्लाक" (Peyronie’s disease plaque; लिंग के अंदर ऊतकों का जमाव) का इलाज किया जा सकता है और गंभीर मामलों में सर्जरी द्वारा उनको निकाल दिया जाता है।
  • हरपीज का इलाज करने के लिए एंटीवायरल दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है।
  • यदि लिंग के ऊपरी भाग की त्वचा टाइट है (यानी फिमोसिस है; Phimosis), तो उंगलियों की मदद से त्वचा को स्ट्रेच करने से उसको ढीला किया जा सकता है। अगर ये समस्या बच्चे को है तो लिंग पर स्टेरॉयड क्रीम लगाना भी मददगार हो सकता है। कुछ मामलों में सर्जरी की भी आवश्यकता पड़ सकती है।
  • लिंग के अगले भाग पर बर्फ लगाने से सूजन को कम किया जा सकता है। डॉक्टर लिंग के अगले हिस्से पर हल्का दबाव रखने का सुझाव दे सकते हैं। लिंग के अंदर जमे हुऐ द्रव व खून को निकालने के लिए डॉक्टर कुछ दवाएं इंजेक्शन से दे सकते हैं, और सूजन कम करने के लिए ऊपरी चमड़ी में छोटा सा चीरा भी लगा सकते हैं। (और पढ़ें - सूजन का इलाज)
  • जैसे कि पहले ही बताया जा चुका है, लिंग में दर्द के बहुत कम मामले पेनिस कैंसर की वजह से होते हैं। लेकिन अगर पेनिस कैंसर ही दर्द का कारण है, तो इसका इलाज करने के लिए सर्जन (ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर) लिंग का कैंसरग्रस्त हिस्सा निकाल सकते हैं। लिंग कैंसर के उपचार में रेडिएशन थेरेपी या कीमोथेरेपी आदि प्रक्रियाओं का इस्तेमाल भी किया जा सकता है।

(और पढ़ें - स्तंभन दोष का इलाज)

Dr. Giri Prasath

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लिंग में दर्द की दवा - Medicines for Pain in penis in Hindi

लिंग में दर्द के लिए बहुत दवाइयां उपलब्ध हैं। नीचे यह सारी दवाइयां दी गयी हैं। लेकिन ध्यान रहे कि डॉक्टर से सलाह किये बिना आप कृपया कोई भी दवाई न लें। बिना डॉक्टर की सलाह से दवाई लेने से आपकी सेहत को गंभीर नुक्सान हो सकता है।

Medicine NamePack SizePrice (Rs.)
Acicet TabletAcicet 200 Mg Tablet Dt49.0
AciherpinAciherpin 200 Mg Tablet57.0
AcivexAcivex 200 Mg Tablet Dt78.0
AxovirAxovir 250 Mg Injection258.0
Lovir (Eli Lilly)Lovir 400 Mg Tablet124.0
NeoclovirNeoclovir 250 Mg Injection218.0
TriclovirTriclovir 400 Mg Tablet120.0
TrikaseTrikase 800 Mg Tablet233.0
VazovirVazovir 500 Mg Injection670.0
Vir InjectionVir 250 Mg Injection471.0
AcivAciv 400 Mg Tablet110.0
AcivirAcivir 200 Mg Tablet Dt66.0
AclovirAclovir 200 Mg Tablet55.0
AtcAtc 800 Mg Capsule38.0
CyclopizCyclopiz 200 Mg Tablet55.0
DocvirDocvir 400 Mg Tablet Dt51.0
GlenviraxGlenvirax 200 Mg Tablet18.0
HerperaxHerperax 200 Mg Tablet36.0
HerpesafeHerpesafe 400 Mg Tablet Dt66.0
HerpexHerpex 100 Mg Tablet81.0
HerpikindHerpikind 200 Mg Tablet72.0
HerzovirHerzovir 250 Mg Injection465.0
LovirLovir 200 Mg Tablet365.0
NorbitaNorbita 400 Mg Tablet12.0
OcuvirOcuvir 120 Mg Suspension128.0
OptiviralOptiviral 200 Mg Tablet51.0
PsyvirPsyvir 400 Mg Tablet137.0
RivolRivol 200 Mg Tablet60.0
ViraxVirax 800 Mg Tablet211.0
ZosterZoster 5%W/W Cream15.0
ZoviraxZovirax 200 Mg Tablet33.0
ZovistarZovistar 200 Mg Tablet56.0
ZoylexZoylex 500 Mg Injection670.0
Zoylex RdZoylex Rd 250 Mg Injection529.0
RhovirRhovir 800 Mg Tablet204.0
ZovirZovir 400 Mg Tablet129.0
ClovirClovir 5% Ointment37.63
OpthovirOpthovir 3% Ointment46.66
SetuvirSetuvir 5% Cream36.4
ToxinexToxinex 3% Eye Ointment65.0
ViraVira Eye Ointment38.25
VirinoxVirinox 3% W/W Eye Ointment43.5
VirucidVirucid 3% Eye Ointment49.95
YavirYavir 3% Eye Ointment38.0
AcyclovirAcyclovir 5% W/W Eye Ointment67.17
ClovidermCloviderm 5% Ointment18.75
EyevirEyevir 3% Eye Ointment45.0
Primacort PlusPrimacort Plus 5% Cream66.67

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