डीहाइड्रोएपियनड्रोस्टेरोन (डीएचईए) एक हार्मोन है, जिसे शरीर की अधिवृक्क ग्रंथियां यानी एड्रेनल ग्लैंड्स बनाती हैं. ये ग्लैंड्स ठीक किडनी के ऊपर होते हैं. इसे एंड्रोस्टेनोलोन भी कहा जाता है. यह हार्मोन शरीर में महिला और पुरुष से संबंधित सेक्स हार्मोन बनाने में मदद करता है.

बढ़ती उम्र के साथ डीएचईए का स्तर नीचे जाने लगता है. इसके अलावा, डिप्रेशन और रजोनिवृत्ति के बाद भी डीएचईए का स्तर घट जाता है. ऐसे में इसे बढ़ाने के लिए बाजार में डीएचईए का सिंथेटिक वर्जन टैबलेट, कैप्सूल, पाउडर, क्रीम और जेल के रूप में उपलब्ध है. डीएचईए सप्लीमेंट वाइल्ड याम या सोया से बनाते हैं.

आज इस लेख हम डीहाइड्रोएपियनड्रोस्टेरोन से जुड़ी हर तरह की जानकारी हासिल करेंगे -

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  1. डीहाइड्रोएपियनड्रोस्टेरोन के फायदे
  2. डीहाइड्रोएपियनड्रोस्टेरोन की सही खुराक क्या है?
  3. डीहाइड्रोएपियनड्रोस्टेरोन के नुकसान
  4. सारांश
डीहाइड्रोएपियनड्रोस्टेरोन के फायदे व खुराक के डॉक्टर

वैसे तो स्वास्थ्य के लिहाज से डीएचईए सप्लीमेंट्स लेने की सलाह दी जाती है, लेकिन इस संबंध में अभी रिसर्च की कमी है. इसलिए, स्पष्ट तौर पर यह बताना मुश्किल है कि डीएचईए सप्लीमेंट्स लेना कितना फायदेमंद है. आइए, उपलब्ध शोध व जानकारी के आधार पर डीहाइड्रोएपियनड्रोस्टेरोन के फायदों के बारे में विस्तार से जानें -

एड्रेनल ग्रंथि से जुड़ी समस्याओं से राहत

कुछ लोगों में एड्रेनल की कमी होती है. इसके चलते एड्रेनल ग्लैंड्स पर्याप्त मात्रा में डीएचईए नहीं बना पाते हैं. डीएचईए की कम मात्रा की वजह से थकान, कमजोरी और ब्लड प्रेशर में बदलाव हो सकता है. इस स्थिति से बचने के लिए डीएचईए सप्लीमेंट के सेवन की सलाह डॉक्टर सलाह दे सकते हैं. कुछ शोध में देखा गया है कि डीएचईए सप्लीमेंट एड्रेनल के स्तर में थोड़ा सुधार कर सकते हैं.

हड्डियों में सुधार

डीएचईए का लो स्तर होने पर हड्डी के घनत्व यानी बोन डेंसिटी भी घट सकती है. ऐसे में डीएचईए सप्लीमेंट का सेवन करके बोन डेंसिटी को बढ़ाने और हृदय को स्वस्थ रखने में मदद मिल सकती है.

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एजिंग से बचाव

स्किन एजिंग की प्रक्रिया एक उम्र के बाद तेजी से बढ़ने लगती है. इसकी गति को कम करने में भी डीएचईए कुछ हद तक असरदार हो सकता है. ऐसा माना जाता है कि त्वचा पर डीएचईए युक्त प्रोडक्ट लगाने से बढ़ती उम्र में महिलाओं की स्किन की गुणवत्ता में सुधार हो सकता है, लेकिन इस संबंध में अभी शोध की कमी है.

योनि के पतले होते टिश्यू के लिए लाभदायक

रजोनिवृत्ति के बाद महिलाओं में एस्ट्रोजन हार्मोन कम होने लगता है. इसके चलते योनि के टिश्यू पतले हो जाते हैं. इसके इलाज के लिए डॉक्टर डीएचईए लेने की सलाह दे सकते हैं. रजोनिवृत्ति के बाद शारीरिक संबंध बनाते समय होने वाले दर्द को 15% तक कम करने के लिए कुछ हद तक डीएचईए का उपयोग किया जा सकता है.

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डिप्रेशन

ओरली रोजाना 30-500 मिलीग्राम डीएचईए लेने से डिप्रेशन के लक्षणों में थोड़ा-सा सुधार हो सकता है. ध्यान रहे कि जब तक डॉक्टर इसे लेने की सलाह न दें, तब तक इसका सेवन करने से बचना चाहिए. साथ ही हम स्पष्ट कर दें कि इस संबंध में भी वैज्ञानिक शोध की कमी है.

फर्टिलिटी और कामेच्छा में सुधार

डीएचईए सप्लीमेंट खराब प्रजनन क्षमता वाली महिलाओं के अंडाशय की कार्यप्रणाली में थोड़ा-सा सुधार कर सकता है. इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) से पहले डीएचईए को लेने से गर्भधारण करने की संभावना थोड़ी बेहतर हो सकती है, लेकिन इस संबंध में भी कोई वैज्ञानिक शोध उपलब्ध नहीं है.

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वैसे तो डीएचईए को कम समय तक और सही खुराक में इस्तेमाल करना सुरक्षित बताया गया है. इससे जुड़े शोध में इसके दो सालों तक के उपयोग को सुरक्षित माना गया है, लेकिन इसकी डोज 50mg तक ही होनी चाहिए. इससे अधिक मात्रा में डीएचईए लेने से मुंहासे और पेट दर्द हो सकता है.

अन्य रिसर्च बताते हैं कि कम समय तक  50-100 mg तक रोजाना डीएचईए लेना भी हानिकारक नहीं माना गया है, लेकिन इससे ज्यादा खुराक लंबे समय तक लेने से कैंसर जैसे जोखिम हो सकते हैं. दरअसल, ये एंड्रोजन के स्तर को बढ़ाकर शरीर में स्टेरॉयड प्रभाव दिखाता है. इससे प्रोस्टेट, ब्रेस्ट और ओवेरियन कैंसर हो सकता है.

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डीहाइड्रोएपियनड्रोस्टेरोन का लंबे समय तक उपयोग हानिकारक हो सकता है, जैसे कि त्वचा पर लगाने के लिए इसे एक साल तक रोजाना इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन योनि के पतले टिश्यू की समस्या के लिए इसे सिर्फ तीन महीने तक ही उपयोग करने की सलाह दी जाती है. आइए, जानें डीहाइड्रोएपियनड्रोस्टेरोन के नुकसान, सावधानियां और अन्य जरूरी बातों के बारे में-

  • डीएचईए रक्त के थक्के बनने की प्रक्रिया को धीमा कर सकता है और रक्तस्राव के जोखिम को बढ़ा सकता है. साथ ही इसे लहसुन, अदरक, जिन्कगो और पैनाक्स जिनसेंग जैसे आहार के साथ लेने से भी रक्तस्राव का जोखिम ज्यादा हो सकता है.
  • डीएचईए से महिलाओं को तैलीय त्वचा, मुंहासे और पुरुषों की तरह छाती पर अनचाहे बाले हो सकते हैं, इस समस्या को हिर्सुटिज्म कहा जाता है.
  • डीएचईए का उपयोग मानसिक विकारों को भी गंभीर कर सकता है.
  • डायबिटीज में भी इसके सेवन से बचना चाहिए, क्योंकि यह इंसुलिन की कार्यप्रणाली को प्रभावित कर सकता है. इसलिए अगर कोई डायबिटीज का मरीज डीएचईए ले रहा है, तो उसे ब्लड शुगर पर करीब से नजर रखनी चाहिए.
  • मूड डिसऑर्डर से गुजर रहे लोगों के लिए भी इसे अच्छा नहीं माना जाता है.
  • पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम की परेशानी से जूझ रहे लोगों की स्थिति डीएचईए लेने से और खराब हो सकती है.
  • लिवर संबंधी समस्या को भी डीएचईए और बिगाड़ सकता है.
  • गर्भवती या स्तनपान करवा रही महिलाओं को डीएचईए का उपयोग न करने के लिए कहा जाता है.
  • डीएचईए से उच्च घनत्व वाले लिपोप्रोटीन (एचडीएल) यानी अच्छे कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम हो सकता है.
  • इससे कैंसर का जोखिम बढ़ सकता है.
  • हाई कोलेस्ट्रॉल या हृदय में रक्त की आपूर्ति को प्रभावित करने वाले हृदय रोग हो, तो भी इससे बचने की सलाह दी जाती है.

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डीएचईए हार्मोन शरीर में कई तरह से कार्य करता है, जिसके चलते यह काफी अहम भूमिका निभाता है. इसके फायदे में एजिंग को कम करना, फर्टिलिटी की परेशानी से राहत, कामेच्छा में सुधार शामिल हैं, लेकिन इसकी खुराक डॉक्टर से पूछे बिना और अधिक मात्रा में लेने से कई नुकसान भी हो सकते हैं. इसलिए, सही सलाह पर ही डीएचईए का सेवन और टॉपिकल उपयोग करें.

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