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भोजन विकार क्या है?

भोजन विकार को अंग्रेजी भाषा में ईटिंग डिसऑर्डर (Eating Disorder) कहा जाता है, इसमें खाना खाने से संबंधित कई असाधारण और खराब आदतें शामिल होती हैं। 

भोजन विकार में रोगी पर आमतौर से भोजन, शरीर का वजन या शरीर के आकार से जुड़ा कोई जुनून सवार हो जाता है और इसके परिणामस्वरूप गंभीर बीमारियां पैदा हो जाती हैं। यहां तक कि कुछ मामलों में मरीज की मृत्यु भी हो जाती है। 

भोजन विकार से जुड़े लोगों में कई प्रकार के लक्षण महसूस हो सकते हैं। हालांकि सबसे अधिक महसूस कि जाने वाले लक्षणों में भोजन ना करना, अधिक भोजन खाना, उल्टी करना या अधिक एक्सरसाइज करना आदि शामिल है। (और पढ़ें - उल्टी रोकने के घरलू उपाय)

वैसे तो भोजन विकार महिलाओं या पुरूषों दोनों को किसी भी उम्र में हो सकता है, लेकिन यह सबसे ज्यादा किशोरों और कम उम्र वाली महिलाओं को ही होता है। 20 साल की उम्र में कम से कम 13 प्रतिशत युवा किसी ना किसी भोजन विकार से ग्रस्त होते हैं। 

इलाज की मदद से भोजन से जुड़ी स्वस्थ आदतों को फिर से शुरू किया जा सकता है और भोजन विकार से हुई गंभीर जटिलताओं को भी ठीक किया जा सकता है।

(और पढ़ें - खाना खाने का सही तरीका)

  1. भोजन विकार (ईटिंग डिसऑर्डर) के प्रकार - Types of Eating Disorder in Hindi
  2. भोजन विकार (ईटिंग डिसऑर्डर) के लक्षण - Eating Disorder Symptoms in Hindi
  3. भोजन विकार (ईटिंग डिसऑर्डर) के कारण व जोखिम कारक - Eating Disorder Causes in Hindi
  4. भोजन विकार (ईटिंग डिसऑर्डर) से बचाव - Prevention of Eating Disorder in Hindi
  5. भोजन विकार (ईटिंग डिसऑर्डर) का परीक्षण - Diagnosis of Eating Disorder in Hindi
  6. भोजन विकार (ईटिंग डिसऑर्डर) का इलाज - Eating Disorder Treatment in Hindi
  7. भोजन विकार (ईटिंग डिसऑर्डर) की जटिलताएं - Eating Disorder Complications in Hindi
  8. भोजन विकार (ईटिंग डिसऑर्डर) के डॉक्टर

भोजन विकार (ईटिंग डिसऑर्डर) के प्रकार - Types of Eating Disorder in Hindi

भोजन विकार कितने प्रकार का होता है?

एनोरेक्सिया नर्वोसा, बुलिमिया नर्वोसा और बिंज ईटिंग डिसऑर्डर (अधिक खाने का विकार) ये तीनों भोजन विकार के सबसे आम प्रकार हैं। भोजन विकार के अन्य प्रकारों में रूमिनेशन डिसऑर्डर (Rumination disorder) और रिस्ट्रक्टिव फूड इन्टेक डिसऑर्डर (Restrictive food intake disorder) आदि शामिल हैं।

अधिक खाने का विकार (Binge-eating disorder):
बिंज ईटिंग डिसऑर्डर से ग्रस्त मरीज़ रोजाना अत्यधिक भोजन खाते हैं और भोजन पर कंट्रोल नहीं कर पाते। इस विकार में मरीज़ यहां तक कि भूखे ना होने के बावजूद भी जल्दी-जल्दी खाते हैं और उम्मीद से अधिक खा लेते हैं। मरीज़ अक्सर तब तक खाते रहते हैं जब तक उनको पेट भरने के बाद बैचेनी ना महसूस हो। 

बुलिमिया नर्वोसा (Bulimia nervosa):
आम भाषा में इसे बुलिमिया कहा जाता है। यह गंभीर और संभावित रूप से जीवन के लिए हानिकारक स्थिति होती है। बुलिमिया नर्वोसा से ग्रस्त लोग थोड़े समय में अधिक और बार-बार खाते हैं और फिर अस्वस्थ तरीके से अतिरिक्त कैलोरी निकालने की कोशिश करते हैं जैसे जबरदस्ती उल्टी करना या अत्यधिक एक्सरसाइज करना। 

एनोरेक्सिया नर्वोसा (Anorexia nervosa):
इसे आम भाषा में एनोरेक्सिया कहा जाता है। यह संभावित रूप से जीवन के लिए हानिकारक भोजन विकार होता है, जिसमें असाधारण रूप से वजन घटना, वजन बढ़ने का डर रहना और शरीर का वजन व आकार असाधारण होने की धारणा बना लेना आदि शामिल है। एनोरेक्सिया से ग्रस्त लोग अपने शरीर के वजन और आकृति को कंट्रोल करने के लिए अत्यधिक प्रयास करते हैं जिससे उनके स्वास्थ्य और जीवन की गतिविधियों पर काफी प्रभाव पड़ता है। 

(और पढ़ें - वजन कम करने के लिए भोजन)

भोजन विकार (ईटिंग डिसऑर्डर) के लक्षण - Eating Disorder Symptoms in Hindi

ईटिंग डिसऑर्डर होने पर कौन से लक्षण महसूस होते हैं?

भोजन विकार से होने वाले लक्षण उसके प्रकार के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं जैसे:

एनोरेक्सिया:
एनोरेक्सिया से ग्रस्त लोग कैलोरी की मात्रा को बहुत ही कम कर देते हैं और वजन घटाने के अन्य तरीकों का भी इस्तेमाल करते हैं जैसे एक्सरसाइज करना, लेक्सेटिव व अन्य डाइटिंग प्रक्रियाओं का इस्तेमाल करना और उल्टी करना आदि। इस विकार में मरीज कम वजन होने पर भी अपना वजन कम करने का प्रयास करते रहते हैं। जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर समस्याएं पैदा कर देता है और कभी-कभी खुद को भूखा रखने के कारण यह जीवन के लिए घातक स्थिति बन सकती है। (और पढ़ें - एनोरेक्सिया का इलाज)

बुलिमिया:
बुलिमिया नर्वोसा विकार के मरीज आमतौर पर अपने शरीर के वजन और आकृति को लेकर काफी बैचेन रहते हैं। यहां तक की सामान्य वजन या थोड़ा बहुत ज्यादा वजन होने पर भी अपने शरीर के साथ बेहद कठोर व्यवहार करते हैं। (और पढ़ें - बुलिमिया नर्वोसा का इलाज)

बिंज ईटिंग डिसऑर्डर (अधिक खाने का विकार):
इस विकार में मरीज़ अधिक भोजन खाने की आदत होने के कारण घृणित या शर्मिंदा महसूस करने लगता है। लेकिन इस विकार वाले लोग एनोरेक्सिया या बुलिमिया विकार से ग्रस्त लोगों की तरह अधिक एक्सरसाइज करके या उल्टी आदि करके अपनी इस आदत की भरपाई करने की कोशिश नहीं करते। हालांकि अधिक खाने की आदत से शर्मिंदा होने के कारण मरीज़ को अकेले या छिपाकर खाने की आदत पड़ सकती है। अधिक खाने के विकार का दौर कम से कम हफ्ते में एक बार होता है। इस विकार से ग्रस्त लोगों का वजन सामान्य या उससे अधिक हो सकता है या फिर वे गंभीर मोटापे से ग्रस्त भी हो सकते हैं। (और पढ़ें - कीगल एक्सरसाइज क्या है)

डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?

भोजन विकार को खुद से मैनेज करना या काबू करना कठिन हो सकता है। भोजन का विकार आपके जीवन को भी नियंत्रित कर सकता है। यदि आपको इनमें से कोई भी समस्या महसूस हो रही हैं तो या आपको लगता है कि आपको भोजन विकार है तो आपको जल्द से जल्द डॉक्टर से मदद लेनी चाहिए।

अपने परिवार या जान पहचान के व्यक्ति को इलाज करवाने के लिए आग्रह करना:

दुर्भाग्य से भोजन विकार से ग्रस्त अधिकतर लोगों को ये नहीं लगता है कि उनको इलाज करवाने की जरूरत है। यदि आप अपने जान पहचान के व्यक्ति में भोजन विकार जैसे लक्षण देख रहे हैं तो आप उनसे डॉक्टर से बात करने के लिए आग्रह करें।

खाने के पैटर्न व आदतों पर नजर रखें क्योंकि ये भोजन से संबंधित किसी अस्वस्थ या असाधारण व्यवहार का संकेत दे सकते हैं। कुछ ऐसे संकेत जो भोजन विकार का इशारा देते हैं, जैसे:

  • भोजन छोड़ना या ना खाने के लिए बहाने बनाना (और पढ़ें - भूख न लगना)
  • स्वस्थ भोजन पर अत्यधिक ध्यान देना
  • जो भोजन परिवार खा रहा है उसको छोड़कर खुद का अलग भोजन बनाना
  • सामान्य सामाजिक गतिविधियों से दूर रहना
  • वजन बढ़ने को लेकर लगातार चिंतित रहना और अपने वजन की शिकायत करना (और पढ़ें - वजन कम करने के लिए योग)
  • ज्यादातर समय वजन कम करने के बारे में बात करना
  • बार-बार आईना देखना और खुद में गलतियां निकालना
  • वजन घटाने के लिए सप्लीमेंट्स या हर्बल डायट प्रोडक्ट्स का बहुत अधिक इस्तेमाल
  • अत्यधिक एक्सरसाइज करना (और पढ़ें - पेट कम करने के लिए एक्सरसाइज)
  • दांत की परत (एनेमल) उतरना जो बार-बार उल्टी आने का संकेत हो सकता है।
  • भोजन करने के दौरान टॉयलेट जाने के लिए भोजन बीच में ही छोड़ना
  • बार-बार अधिक मात्रा में मिठाई या अधिक वसा वाले भोजन खाना (और पढ़ें - वसा के स्रोत)
  • भोजन के दौरान सामान्य मात्रा से अधिक खाना
  • अपनी खाने की आदतों को लेकर शर्मिंदा, घृणित महसूस करना
  • छिप कर खाना

(और पढ़ें - समुद्री भोजन के फायदे)

भोजन विकार (ईटिंग डिसऑर्डर) के कारण व जोखिम कारक - Eating Disorder Causes in Hindi

भोजन विकार क्यों होता है?

ईटिंग डिसऑर्डर के सटीक कारण का पता नहीं है। अन्य मानसिक विकारों के साथ इसके कई कारण हो सकते हैं, जैसे:

अनुवांशिकी या जैविकी (Genetics and biology):
कुछ लोगों में ऐसे जीन होते हैं जो उनमें भोजन विकार को विकसित करने के जोखिम बढ़ा देते हैं। कुछ जैविक कारक जैसे मस्तिष्क के केमिकल में बदलाव भी भोजन विकार विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

मानसिक या भावनात्मक कारक:
भोजन विकार से ग्रस्त लोगों को मानसिक या भावनात्मक समस्याएं हो सकती हैं जो उनमें भोजन विकार को बढ़ावा देती है। उनमें आत्म सम्मान में कमी तथा चिड़चिड़ा व्यवहार हो सकता है इसके अलावा भोजन विकार से ग्रस्त मरीजों को रिश्ते निभाने में भी कठिनाई हो सकती है। (और पढ़ें - चिड़चिड़ापन का इलाज)

भोजन विकार का खतरा कब बढ़ जाता है? 

किशोर लड़कों व कम उम्र वाले पुरूषों के मुकाबले किशोर लड़कियों व कम उम्र वाली महिलाओं में एनोरेक्सिया और बुलिमिया जैसे विकार होने की संभावना अधिक होती है, लेकिन पुरूषों को भी भोजन विकार हो सकता है।

वैसे तो भोजन विकार किसी भी उम्र में हो सकता है लेकिन अक्सर यह किशोरावस्था या 20 साल से कम उम्र में ही होता है।

कुछ कारक है जो भोजन विकार के विकसित के जोखिम को  बढ़ा सकते हैं:

  • पारिवारिक समस्या: 
    उन लोगों में भोजन विकार होने की संभावना बहुत अधिक होती है जिनके परिवार में किसी को पहले से ही भोजन विकार हो। 
  • अन्य मानसिक स्वास्थ्य संबंधी विकार:
    जिन लोगों को ईटिंग डिसऑर्डर होता है उनमें अक्सर चिंता, डिप्रेशन या ओसीडी (Obsessive-compulsive disorder) जैसे विकार भी होते हैं। (और पढ़ें - डिप्रेशन से निकलने का उपाय)
  • डाइटिंग या भोजन की कमी होना: 
    डाइटिंग करना भोजन विकार को पैदा करने वाला एक जोखिम कारक हो सकता है। भोजन की कमी या भुखमरी मस्तिष्क को प्रभावित करती है जिससे मूड में बदलाव, चिंता और भूख कम लगने जैसी समस्याएं पैदा हो सकती है। ऐसे कई प्रमाण हैं जो बताते हैं कि भोजन विकार में महसूस होने वाले लक्षण वास्तव में भुखमरी के लक्षण होते हैं। भुखमरी या वजन घटना, कमजोर व्यक्तियों में मस्तिष्क के काम करने के तरीके को बदल देता है जिससे भोजन ना करने की आदत को बनाए रखना और भोजन से  जुड़ी सामान्य आदतों को फिर से बनाने में मुश्किल होना आदि समस्याएं  होने लगती हैं। (और पढ़ें - चिंता खत्म करने के लिए योगासन)
  • तनाव:
    कॉलेज छोड़ना, नौकरी बदलना या फिर पारिवारिक या रिश्तों से संबंधित मामले भी तनाव पैदा कर सकते हैं। जो भोजन विकार विकसित करने के जोखिम को बढ़ा देता है।

भोजन विकार (ईटिंग डिसऑर्डर) से बचाव - Prevention of Eating Disorder in Hindi

ईटिंग डिसऑर्डर की रोकथाम कैसे करें?

वैसे तो भोजन विकार को रोकने का कोई निश्चित तरीका नहीं है, लेकिन यहां कुछ तरीके हैं जिनकी मदद से बच्चे में भोजन संबंधी अच्छी आदतें विकसित की जा सकती हैं:

  • बच्चों के आस-पास डाइटिंग की बाते ना करें: 
    परिवार की डाइटिंग की आदतें बच्चों की भोजन संबंधी आदतों को प्रभावित करती हैं। परिवार के साथ एक साथ भोजन करने से बच्चों को डाइटिंग के नुकसान और भोजन संबंधी सही आदतें सिखाने का अच्छा अवसर मिलता है। (और पढ़ें -  डाइटिंग के बिना वजन कम करने का तरीका)
  • अपने बच्चे से बात करें: 
    उदाहरण के लिए इंटरनेट पर कुछ वेबसाइट ऐसी हैं जो खतरनाक विचारों को बढ़ावा देती हैं जैसे एनोरेक्सिया को एक भोजन विचार की बजाए जीवनशैली बताना। बच्चों के मन से ऐसी गलत धारणाओं को निकालने के लिए और भोजन संबंधी गलत आदतों के जोखिमों को बताने के लिए डॉक्टर से बात करना जरूरी होता है।  (और पढ़ें - वजन कम करने के लिए कितनी कैलोरी खाएं)

  • स्वस्थ शरीर की भावना पैदा करें:
    चाहे आपके बच्चे के शरीर की आकृति या आकार कैसा भी हो, कोशिश करें कि वह अपने शरीर को स्वस्थ समझें। आपके बच्चे के साथ उसकी खुद की छवि के बारे में बात करें और उसे समझाएं कि हर व्यक्ति के शरीर का आकार और आकृति अलग-अलग होती है यह आम बात है। बच्चे के सामने खुद के शरीर की आलोचना ना करें। खुद को स्वीकार करने और सम्मान करने की भावना बच्चे के आत्म सम्मान को बढ़ाती है। यह भावना बच्चे को किशोरावस्था के दौरान आने वाली कठिनाइयों का डटकर मुकाबला करने में मदद करती है।

  • बच्चों के डॉक्टर से मदद प्राप्त करें:
    अपने बच्चों को समय-समय पर डॉक्टर से दिखाते रहें, ऐसा करने से डॉक्टर भोजन विकार के संकेतों का पहले ही पता लगा लेते हैं। डॉक्टर बच्चे से उनकी भोजन संबंधी आदतों के बारे में पूछ सकते हैं। इस दौरान बच्चे की लंबाई व वजन की भी जांच की जाती है और उसके बॉडी मास इंडेक्स का पता लगाया जाता है। डॉक्टर यदि इनमें किसी प्रकार का बदलाव देखते हैं, तो इस बारे में बच्चे के मां-बाप को सूचना देते हैं।  (और पढ़ें - लंबाई बढ़ाने के तरीके)

​यदि आपके परिवार के सदस्य या किसी दोस्त में आपको भोजन विकार से संबंधित लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो इस बारे में उसे समझाने की कोशिश करें। ऐसा करने से उसके स्वास्थ्य पर किसी प्रकार का खराब प्रभाव पड़ने से पहले स्थिति में सुधार किया जा सकता है। हालांकि भोजन विकार विकसित होने से रोकना संभव नहीं है, लेकिन मरीज को इस बारे में बताना और डॉक्टर के पास जाने से लिए प्रेरित करने से इस स्थिति का इलाज किया जा सकता है। 

 (और पढ़ें - अधिक खाने का इलाज)

भोजन विकार (ईटिंग डिसऑर्डर) का परीक्षण - Diagnosis of Eating Disorder in Hindi

भोजन विकार का परीक्षण कैसे होता है?

भोजन विकार का परीक्षण आपके खाने की आदतों और अन्य संकेत व लक्षणों के आधार पर किया जाता है। यदि आपके डॉक्टरों को यह महसूस होता है कि आपको भोजन विकार है तो वे इसकी पुष्टि करने के लिए शारीरिक परीक्षण करेंगे और अन्य टेस्ट करवाने के सुझाव देंगे। इस स्थिति की जांच करने के लिए आपको डॉक्टरों के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के पास भी जाना पड़ सकता है। 

परीक्षण करने के लिए सामान्य टेस्ट व जांच प्रक्रियाओं में निम्न शामिल हो सकते हैं:

  • शारीरिक परीक्षण: 
    डॉक्टर आपके भोजन करने के संबंधित समस्याओं का पता लगाने के लिए आपका शारीरिक परीक्षण करेंगे। इसके अलावा डॉक्टर कुछ लैब टेस्ट करवाने का ऑर्डर भी दे सकते हैं। (और पढ़ें - सीटी स्कैन कैसे करते हैं)
  • मानसिक जांच (Psychological evaluation): 
    मानसिक स्वास्थ्य के विशेषज्ञ आपकी खाने की आदतों, विचारों और भावनाओं के बारे में पूछ सकते हैं। इस परीक्षण के दौरान आपको एक प्रश्नावली (Psychological self-assessment questionnaires.) दी जा सकती है जिसे आपको पूरा भरना पड़ सकता है। (और पढ़ें - एसजीपीटी टेस्ट
  • अन्य अध्ययन: 
    भोजन विकार से जुड़ी अन्य जटिलताओं का पता करने के लिए अन्य टेस्ट भी किए जा सकते हैं।

(और पढ़ें - क्रिएटिनिन टेस्ट क्या है)

भोजन विकार (ईटिंग डिसऑर्डर) का इलाज - Eating Disorder Treatment in Hindi

भोजन विकार का इलाज कैसे किया जाता है?

भोजन विकार का उपचार आमतौर पर एक टीम द्वारा किया जाता है। इस टीम में आमतौर पर प्राइमरी केयर प्रोवाइडर (प्रारंभिक देखभाल कर्ता), मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ और डाइटीशियन आदि शामिल होते हैं और इन सभी को भोजन विकार की स्थिति के बारे में काफी अनुभव होता है।

भोजन विकार का इलाज इसके विशिष्ट प्रकार पर निर्भर करता है। लेकिन आमतौर पर इसके इलाज में पोषक तत्वों से संबंधित शिक्षा, साइकोथेरेपी (मनोरोग चिकित्सा) और दवाएं आदि शामिल हैं। यदि भोजन विकार से आपका जीवन भी खतरे में आ गया है तो आपको अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता भी पड़ सकती है। (और पढ़ें - मानसिक रोग दूर करने के उपाय)

स्वस्थ भोजन खाना: 
आपके वजन की चिंता ना करते हुआ आपके परिवार के सदस्य भी आपके अनुसार आपके भोजन प्लान को डिज़ाइन कर सकते हैं ताकि भोजन संबंधी स्वस्थ आदतों को प्राप्त कर सकें।

साइकोथेरेपी (Psychotherapy):
साइकोथेरेपी को टॉक थेरेपी (Talk therapy) भी कहा जाता है, जो आपकी खाने संबंधी गलत आदतों को सही आदतों में बदलने में आपकी मदद करती है। इसमें कई प्रकार की थेरेपी शामिल होती है, जैसे: 

  • फैमिली बेस्ड थेरेपी (परिवार पर आधारित थेरेपी): फैमिली बेस्ड थेरेपी को एफबीटी भी कहा जाता है। यह थेरेपी भोजन विकार से ग्रस्त बच्चों व किशोरों के परिवार को उपचार में शामिल करने पर आधारित उपचार होता है।
    • इस थेरेपी में परिवार द्वारा यह सुनिश्चित भी किया जाता है कि भोजन विकार से ग्रस्त बच्चा या परिवार का कोई दूसरा सदस्य भोजन संबंधी अच्छी आदतों का पालन कर रहा है या नहीं और अपने स्वस्थ वजन को बनाकर रख रहा है या नहीं। (और पढ़ें - कम खाना खाने के नुकसान)
       
  • कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी:
    इस थेरेपी को सीबीटी भी कहा जाता है, आमतौर पर बुलिमिया और अधिक खाने के विकार में इस थेरेपी का उपयोग किया जाता है।
    • इस थेरेपी में आपको खानें की आदतों पर नजर रखने और उनको सुधारने के तरीके सिखाए जाते हैं।
    • इसके अलावा इस थेरेपी में समस्याओं को समाधान करने का कौशल और तनावपूर्ण स्थितियों का सामना करने के तरीके सिखाए जाते हैं। (और पढ़ें - ज्यादा खाना खाने के नुकसान)

दवाएं:
दवाईयां भोजन विकार का इलाज नहीं कर पाती। हालांकि कुछ दवाएं हैं जो अधिक खाने के विकार को कंट्रोल करने में और भोजन के लिए बैचेनी जैसी अन्य स्थितियों को मैनेज करने में मदद करती है। डिप्रेशन की रोकथाम करने वाली और चिंता की रोकथाम करने वाली दवाएं भी काफी मददगार हो सकती हैं क्योंकि भोजन विकार से आमतौर पर ये दोनों लक्षण जुड़े होते हैं। (और पढ़ें - दवा की जानकारी)

अस्पताल में भर्ती होना:
यदि भोजन विकार से कोई गंभीर स्थिति पैदा हो गई है जैसे एनोरेक्सिया के कारण कुपोषण हो जाना तो डॉक्टर मरीज को अस्पताल में भर्ती होने की सलाह देते हैं। कुछ क्लिनिक विशेष रूप से भोजन विकार का ही इलाज करते हैं। कुछ अस्पताल में भर्ती करने की बजाए दिन में विशेष कार्यक्रम बनाते हैं। ये कार्यक्रम विशेष रूप से भोजन विकार के लिए बनाए जाते हैं और उनके इलाज की अवधि भी लंबी होती है।

(और पढ़ें - एंटीऑक्सीडेंट युक्त आहार)

भोजन विकार (ईटिंग डिसऑर्डर) की जटिलताएं - Eating Disorder Complications in Hindi

भोजन विकार से कौन सी समस्याएं होती हैं?

भोजन विकार से कई प्रकार की जटिलताएं पैदा हो जाती हैं लेकिन इनमें से कुछ जीवन के लिए हानिकारक भी हो सकती हैं। भोजन विकार जितना गंभीर और अधिक समय तक रहेगा उससे पैदा होने वाली जटिलताएं उतनी ही गंभीर होने की संभावनाएं होंगी। भोजन विकार से होने वाली जटिलताओं में आमतौर पर निम्न भी शामिल हो सकती हैं:

(और पढ़ें - डिप्रेशन के लिए योग)

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