क्या आप जानते हैं कि वजन कम करने के लिए भी भरपूर नींद बहुत ज़रूरी है? स्वस्थ जीवनशैली के लिए पर्याप्त नींद लेना बेहद महत्वपूर्ण है। अच्छी नींद से आपका मस्तिष्क शांत रहता है और ये आंखों के नीचे काले घेरे हटाने का उपाय है, लेकिन आजकल व्यस्त जीवनशैली की वजह से ज़्यादातर लोग पर्याप्त नींद नहीं ले पाते। नींद की कमी की वजह से कई स्वास्थ्य समस्याएं भी होती है और इसकी वजह से बच्चों और वयस्क में वजन बढ़ने लगता है। इस लिहाज से वजन को संतुलित बनाए रखने में नींद भी कारगर साबित हो सकती है।

आज इस लेख में आप विस्तार से जानेंगे कि किस प्रकार सोने से भी वजन को नियंत्रित किया जा सकता है -

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  1. वजन कम करने में नींद क्यों है इतनी ज़रूरी?
  2. कम नींद वजन बढ़ने का बड़ा कारण क्यों बनती है?
  3. पर्याप्त नींद आपकी भूख और क्रेविंग्स को कैसे कंट्रोल करती है?
  4. पूरी नींद लेने से आप बेहतर खाने के फैसले क्यों ले पाते हैं?
  5. जल्दी सोने से लेट-नाइट स्नैकिंग कैसे रुकती है?
  6. पर्याप्त नींद लेने से मेटाबॉलिज़्म कैसे बेहतर होता है?
  7. अच्छी नींद आपकी फिजिकल एक्टिविटी कैसे बढ़ाती है?
  8. सारांश
सोते हुए भी हो सकता है वजन कम? के डॉक्टर

नींद सिर्फ थकान मिटाने के लिए नहीं होती, ये आपके वजन कम करने की पूरी जर्नी में बहुत बड़ा रोल निभाती है। कई लोग डाइट और एक्सरसाइज तो कर लेते हैं, लेकिन नींद को इग्नोर कर देते हैं, और यहीं वजन घटाने का असली चक्का जाम हो जाता है। आजकल ज्यादातर लोग ठीक से नहीं सो पाते। CDC के मुताबिक, लगभग 39% लोग हर रात 7 घंटे से कम सोते हैं, यानी उनकी नींद लगातार कम होती जा रही है। इससे शरीर और दिमाग दोनों पर असर पड़ता है, और वजन कंट्रोल करना मुश्किल हो जाता है।

नींद आपके शरीर को रिपेयर करती है, हार्मोन बैलेंस करती है, मेटाबॉलिज़्म को सही रखती है और भूख को भी कंट्रोल करने में मदद करती है। इसलिए अगर आप वाकई वजन कम करना चाहते हैं, तो अच्छी नींद आपके लिए उतनी ही ज़रूरी है जितनी सही डाइट और वर्कआउट।

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कम नींद यानी 6 से 7 घंटे से कम सोना लगातार आपके वजन पर बहुत गहरा असर डालता है। रिसर्च में बार-बार ये सामने आया है कि जो लोग कम सोते हैं, उनका BMI ज़्यादा होता है और उनमें वजन बढ़ने का खतरा भी अधिक रहता है। एक बड़े विश्लेषण में लगभग 3 लाख लोगों को शामिल किया गया था, जिसमें पाया गया कि जो लोग हर रात 7 घंटे से कम सोते थे, उनमें मोटापे का खतरा 41% ज़्यादा था। वहीं जो लोग 7 से 9 घंटे तक सोते थे, उनमें ऐसा खतरा नहीं देखा गया।

2018 में हुई कई स्टडीज़ ने ये भी बताया कि कम नींद अलग-अलग उम्र में मोटापे का रिस्क बढ़ा देती है।

  • इंफैंसी में लगभग 40% खतरा बढ़ जाता है।
  • छोटी उम्र के बच्चों में 57% तक खतरा बढ़ सकता है।
  • मिड-चाइल्डहुड में ये खतरा 123% तक पहुंच जाता है।
  • और टीनएजर्स में लगभग 30% तक।

कम नींद इतना बड़ा असर इसलिए डालती है, क्योंकि ये आपकी भूख बढ़ा देती है। जब आप ठीक से नहीं सोते, तो आपके भूख वाले हार्मोन गड़बड़ा जाते हैं।
घ्रेलिन बढ़ जाता है, जिससे आपको ज्यादा भूख लगती है।
लेप्टिन कम हो जाता है, जिससे पेट भरा हुआ महसूस नहीं होता।

यानी जितना कम सोएंगे, उतना ज़्यादा खाने की इच्छा होगी, खासकर मीठा और फैट वाले खाने की। कम नींद आपके स्ट्रेस हार्मोन को भी बढ़ा देती है और ये फैट स्टोर करने का काम करता है। इसके अलावा एक और हार्मोन IGF-1 भी कम नींद में दब जाता है, जिससे शरीर फैट ज्यादा जमा करता है।

अगर किसी को स्लीप एप्निया जैसी समस्या है, तो वजन बढ़ने से ये और खराब हो जाती है। और फिर नींद बिगड़ने से वजन और बढ़ने लगता है। इस तरह एक चक्र बन जाता है, कम नींद से वजन बढ़ता है और बढ़ा हुआ वजन नींद और खराब कर देता है।

जब आप पूरी नींद लेते हैं, तो आपका शरीर खुद-ब-खुद भूख और कैलोरी इनटेक को बैलेंस रखने में मदद करता है। लेकिन जैसे ही नींद कम होने लगती है, आपका दिमाग और शरीर दोनों “ज्यादा खाने मोड” में चले जाते हैं। कई रिसर्च में पाया गया है कि कम नींद लेने वाले लोगों की भूख ज्यादा बढ़ जाती है और वे दिनभर में ज़रूरत से ज्यादा कैलोरी खा लेते हैं।

2022 की एक रिसर्च में तो ये बात साफ सामने आई कि कम सोने वाले लोग रोज़ाना करीब 500 कैलोरी ज्यादा खा लेते हैं। एक दूसरी स्टडी (2019) ने दिखाया कि नींद पूरी न होने पर लोगों में भूख बढ़ जाती है, खाने की इच्छा तेज़ हो जाती है, पोर्शन बड़े हो जाते हैं और खासकर चॉकलेट व फैटी फूड की क्रेविंग बहुत ज्यादा बढ़ जाती है।

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जब आप रात में अच्छी तरह सोते हैं, तो आपका दिमाग शांत रहता है और खाने से जुड़े फैसले भी समझदारी से ले पाते हैं। लेकिन जैसे ही नींद पूरी नहीं होती, आपके ब्रेन का काम करने का तरीका बदल जाता है। कम नींद आपकी डिसीजन मेकिंग को कमजोर कर देती है, जिससे हेल्दी खाना चुनना मुश्किल हो जाता है और ज्यादातर लोग जल्दी-जल्दी, कैलोरी-भरे और कम पौष्टिक फूड्स की ओर खिंच जाते हैं।

रिसर्च बताती है कि जब किसी व्यक्ति की नींद कम होती है, तो उसे खाने से मिलने वाली फीलिंग ज्यादा तीव्र महसूस होती है। यानी हाई-कैलोरी फूड्स (जैसे पिज़्ज़ा, बर्गर, आइसक्रीम) ज़्यादा आकर्षक लगने लगते हैं। 2019 की एक स्टडी में पाया गया कि कम सोए हुए लोगों के दिमाग में हाई-कैलोरी फूड्स की तस्वीरें देखते ही रिवॉर्ड वाला हिस्सा ज्यादा एक्टिव हुआ। इतना ही नहीं, वे उन खाने की चीज़ों के लिए ज़्यादा पैसे खर्च करने को भी तैयार थे, जबकि ठीक से सोए हुए लोगों में ऐसा नहीं देखा गया।

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अगर आप समय पर सो जाते हैं, तो अनजाने में होने वाली रात की बेवजह खाने की आदत काफी हद तक कम हो जाती है। क्योंकि जब आप देर तक जागते रहते हैं, तो आपका जागने का टाइम बढ़ जाता है, और उसी के साथ बढ़ जाता है खाने का मौका भी। खासकर जब डिनर किए कई घंटे हो जाते हैं, तो भूख लगना स्वाभाविक है।

मान लीजिए आप 6 बजे डिनर करते हैं और रोज़ 1 बजे सोते हैं। इतने लंबे गैप में आपको भूख लगेगी ही, और फिर शुरू होता है लेट-नाइट स्नैकिंग का सिलसिला। यही स्नैकिंग आपके वजन बढ़ने, BMI बढ़ने और फैट बर्निंग कम होने का एक बड़ा कारण बनती है।

इसके अलावा, सोने से ठीक पहले खाना, खासकर भारी खाना, आपकी नींद की क्वालिटी खराब कर देता है। नींद खराब होगी तो अगला दिन भी कमजोर होगा, और फिर नींद की कमी वजन बढ़ने की वजह बन जाती है। जिन लोगों को एसिडिटी, अपच या स्लीप डिसऑर्डर की समस्या है, उनके लिए तो सोने से पहले खाना बिल्कुल बंध करना चाहिए।

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जब आप रोज़ ठीक से सोते हैं, तो आपका मेटाबॉलिज़्म यानी शरीर का एनर्जी बनाने का सिस्टम सही चलता है। लेकिन जैसे ही नींद कम होने लगती है, आपका मेटाबॉलिज़्म धीमा पड़ने लगता है, जिससे शरीर कैलोरी उतनी तेज़ी से बर्न नहीं कर पाता।

2020 की एक स्टडी में पाया गया कि जो युवा रोज़ 7 घंटे से कम सोते थे, उनमें मेटाबॉलिक सिंड्रोम का खतरा ज़्यादा पाया गया। मेटाबॉलिक सिंड्रोम का मतलब है कई समस्याओं का एक साथ होना – जैसे हाई शुगर, बढ़ा हुआ पेट का फैट, हाई BP और शरीर में ऐसी गड़बड़ियाँ जो दिल की बीमारी और टाइप 2 डायबिटीज का रिस्क बढ़ा देती हैं।

कम नींद आपके फैट ऑक्सिडेशन को भी कम कर देती है। फैट ऑक्सिडेशन मतलब शरीर का फैट को तोड़कर एनर्जी बनाना। जब ये प्रक्रिया धीमी हो जाती है, तो फैट शरीर में जमा होना शुरू हो जाता है। रिसर्च बताती है कि नींद की कमी शरीर के स्ट्रेस सिस्टम को एक्टिव कर देती है, जिससे फैट बर्निंग और भी धीमी हो जाती है।

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नींद और शारीरिक गतिविधि का रिश्ता दोनों तरफ से जुड़ा हुआ है। अगर नींद कम है तो एक्सरसाइज करने का मन नहीं करता, और अगर एक्सरसाइज नहीं है तो नींद भी ढंग से नहीं आती। इसलिए दोनों साथ-साथ चलती हैं और एक-दूसरे को सपोर्ट करती हैं।

कई रिसर्च में ये पाया गया है कि नियमित एक्सरसाइज करने से नींद जल्दी आती है और नींद की क्वालिटी भी बेहतर होती है, चाहे उम्र कोई भी हो। वहीं, जब नींद पूरी नहीं होती तो दिनभर थकान महसूस होती है, बॉडी स्लो हो जाती है और एक्सरसाइज करने की मोटिवेशन भी कम हो जाती है। ऐसे में आप दिनभर कम एक्टिव रहते हैं और कम कैलोरी खर्च करते हैं, जिससे वजन कम करना मुश्किल हो जाता है।

कम नींद आपके एथलेटिक परफॉर्मेंस को भी कमजोर कर देती है। आपकी रिएक्शन टाइम, बॉडी कंट्रोल, स्ट्रेंथ, स्टैमिना, यहाँ तक कि प्रॉब्लम सॉल्व करने की क्षमता भी घट जाती है। साथ ही चोट लगने का खतरा बढ़ जाता है और बॉडी को रिकवरी में ज्यादा समय लगता है।

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अगर आप वजन कम करने की कोशिश कर रहे हैं और फिर भी रिज़ल्ट नहीं मिल रहे, तो इसका एक बड़ा कारण आपकी नींद की कमी भी हो सकती है। कम नींद आपकी भूख बढ़ा देती है, खाने की पसंद बिगाड़ देती है, कैलोरी इनटेक बढ़ा देती है और दिनभर की एक्टिविटी कम कर देती है। ये सब मिलकर वजन बढ़ाने का काम करते हैं।

अगर आपके वेट लॉस के प्रयास काम नहीं कर रहे, तो अपनी नींद की आदतों पर एक नजर डालना जरूरी है। ज्यादातर लोगों को रोज़ाना लगभग 7 से 9 घंटे की नींद चाहिए होती है। इतनी नींद लेने से शरीर और दिमाग दोनों बेहतर तरीके से काम करते हैं।

Dr. Bepari Hafsa

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