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डेक्रायोसिस्टोराइनोस्टमी एक सर्जिकल प्रोसीजर है, जिसका इस्तेमाल आंसू नली में रुकावट को ठीक करने के लिए किया जाता है। इस प्रोसीजर में एक आंख और नाक के बीच एक नया रास्ता बनाया जाता है, जिससे आंसू निकलते हैं। डेक्रायोसिस्टोराइनोस्टमी को सामान्य सर्जरी या एंडोस्कोपिक सर्जरी के रूप में किया जा सकता है। सर्जरी से पहले डॉक्टर आपकी आंख व नाक की जांच करते हैं और साथ ही आपके स्वास्थ्य की जांच भी की जाती है।

सर्जरी के लिए आपको जनरल एनेस्थीसिया का इंजेक्शन लगाया जा सकता है, जिससे आपको सर्जरी के दौरान गहरी नींद आ जाती है। कई मामलों में डॉक्टर सिर्फ सर्जरी वाले स्थान को ही सुन्न करने वाली दवा लगाते हैं, जिसे लोकल एनेस्थीसिया कहा जाता है। सर्जरी से बनाए गए नए रास्ते में एक ट्यूब डाल दी जाती है, ताकि इसे खुला रखा जा सके। हालांकि, कुछ समय बाद इस ट्यूब को हटा दिया जाता है।

सर्जरी के बाद आपको कुछ समय के लिए कोई कठिन शारीरिक गतिविधि न करने की सलाह देंगे और साथ ही आपको धूम्रपानशराब का सेवन करने से भी मना कर दिया जाएगा। सर्जरी वाले घाव को सूखा व साफ रखने के लिए भी विशेष ध्यान देने की सलाह दी जाएगी। सर्जरी के कुछ दिन बाद आपको फिर से अस्पताल बुलाया जाएगा, जिस दौरान टांकों और ट्यूब को निकाल दिया जाएगा।

(और पढ़ें - आंख की पलक में गांठ का इलाज)

  1. डेक्रायोसिस्टोराइनोस्टमी क्या है - What is Dacryocystorhinostomy in Hindi
  2. डेक्रायोसिस्टोराइनोस्टमी किसलिए किया जाता है - Why is Dacryocystorhinostomy in Hindi
  3. डेक्रायोसिस्टोराइनोस्टमी से पहले - Before Dacryocystorhinostomy in Hindi
  4. डेक्रायोसिस्टोराइनोस्टमी के दौरान - During Dacryocystorhinostomy in Hindi
  5. डेक्रायोसिस्टोराइनोस्टमी के बाद - After Dacryocystorhinostomy in Hindi
  6. डेक्रायोसिस्टोराइनोस्टमी की जटिलताएं - Complications of Dacryocystorhinostomy in Hindi

डेक्रायोसिस्टोराइनोस्टमी क्या है?

आंसू लैक्रिमल ग्रंथि में द्वारा बनाए जाते हैं, जो ऊपरी पलकों में स्थित होती है। ऊपरी पलकों से ये आंसू आंख की सतह पर हर जगह फैल जाते हैं। हमारी आंखों की पलकों में सूक्ष्म छिद्र होते हैं, जहां से आंसू निकलते हैं। जब हम पलक झपकाते हैं, तो आंसू इन सूक्ष्म छिद्रों की तरफ धकेल दिए जाते हैं।

इन छिद्रों से कुछ आंसू एक नली के माध्यम से लैक्रिमल ग्रंथि की थैली में पहुंच जाते हैं। आंसू नलियों को अश्रु नलिकाएं या टियर डक्ट (Tear duct) कहा जाता है और लैक्रिमल ग्रंथि नाक में मौजूद एक थैलीनुमा संरचना होती है। लैक्रिमल ग्रंथि की थैली से ये आंसू अश्रु नलिकाओं के माध्यम से निकलते हैं। आपका शरीर नाक से आंसूओं को फिर से अवशोषित कर लेता है। जब आंसू नलिकाएं किसी कारण से अवरुद्ध हो जाती हैं, तो इसके कारण से आंखों से अत्यधिक आंसू या अन्य पदार्थ (कीचड़ आदि) निकलने लगता है। ऐसी स्थिति में आंसू नलियों में संक्रमण भी हो सकता है।

(और पढ़ें - आंख से कीचड़ आने का कारण)

डेक्रायोसिस्टोराइनोस्टमी को डीसीआर (DCR) प्रोसीजर भी कहा जाता है, जिसकी मदद से आंसू नलियों की ब्लॉकेज का इलाज किया जाता है। डेक्रायोसिस्टोराइनोस्टमी में आमतौर पर आंसू निकलने के लिए आंख और नाक के बीच एक नया रास्ता बना दिया जाता है। इस सर्जरी को दो अलग-अलग प्रक्रियाओं से किया जा सकता है, जो इस प्रकार हैं -

  • एक्सटरनल डीसीआर (बाहरी डेक्रायोसिस्टोराइनोस्टमी) -
    इस सर्जिकल प्रोसीजर में नाक के एक तरफ एक छोटा सा छिद्र किया जाता है। इस छिद्र की मदद से नाक में मौजूद आंसूओं की थैली से आंसू निकलने लगते हैं।
     
  • एंडोस्कोपिक डीसीआर -
    इस प्रक्रिया में टेलीस्कोप नाम के एक उपकरण का इस्तेमाल किया जाता है। इस उपकरण की मदद से नाक के अंदरूनी हिस्से में देखकर रुकावट वाले हिस्से को ढूंढ लिया जाता है। इसके बाद सर्जरी की मदद से आंसू नली को खोल दिया जाता है।

(और पढ़ें - एंडोस्कोपी कैसे होती है)

डेक्रायोसिस्टोराइनोस्टमी क्यों की जाती है?

डीसीआर प्रोसीजर आमतौर पर रुकी हुई आंसू नलियों को खोलने के लिए की जाती है। रुकी हुई आंसू नलियों से आमतौर पर निम्न लक्षण उभर सकते हैं -

  • आंखों से अत्यधिक पानी आना
  • आंखों के आसपास पपड़ी जमने लगना
  • आंखों में जलन व अन्य तकलीफ होना
  • आंख से चिपचिपा पदार्थ निकलना
  • आंखों में सूजन
  • आंखों के आसपास की त्वचा को छूने पर दर्द होना

यदि आपको निम्न समस्याएं महसूस हो रही हैं, तो डॉक्टर डेक्रायोसिस्टोराइनोस्टमी सर्जरी करवाने की सलाह दे सकते हैं -

  • लैक्रिमल थैली के आसपास की त्वचा में सूजन होना
  • अत्यधिक आंसू आना, जिससे आपको देखने में समस्या हो रही हो
  • आंखों से अधिक आंसू आने के कारण सामाजिक रूप से परेशानियां हो रही हों
  • लैक्रिमल ग्रंथि की नलिकाओं में कहीं पर ठोस पदार्थ जम जाना, जिसे डेक्रायोलिथ फॉर्मूलेशन कहा जाता है
  • लैक्रिमल थैली में असाधारण रूप से चर्बी बढ़ना
  • नाक के अंदरूनी हिस्से में मांस बढ़ना, जिसे नेजल पॉलिप कहा जाता है
  • नाक में चोट लगना
  • आंख के सफेद हिस्से में संक्रमण या अन्य किसी कारण से लालिमा, जलन व खुजली आदि होना (और पढ़ें : आंख आने के कारण)

डेक्रायोसिस्टोराइनोस्टमी किसे नहीं करवानी चाहिए?

कुछ लोगों को डेक्रायोसिस्टोराइनोस्टमी सर्जरी करवाने से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं होने का खतरा बढ़ सकता है, इसलिए डॉक्टर उन्हें यह सर्जरी न करवाने की सलाह देते हैं। इसमें आमतौर पर निम्न समस्याओं से ग्रस्त लोग शामिल हैं -

(और पढ़ें - आंख में संक्रमण के लक्षण)

डेक्रायोसिस्टोराइनोस्टमी से पहले क्या तैयारी की जाती हैं?

डेक्रायोसिस्टोराइनोस्टमी प्रोसीजर करने से पहले कुछ तैयारियां की जा सकती हैं, जो इस प्रकार हैं -

नैदानिक परीक्षण

  • डेक्रायोसिस्टोराइनोस्टमी सर्जरी से पहले डॉक्टर आपकी आंखों की जांच करेंगे। इस दौरान सुई की मदद से आंसू नलियों में पानी डाला जाता है, ताकि रुकावट का पता लगाया जा सके।
  • टेलीस्कोपिक उपकरणों की मदद से नाक के अंदरूनी हिस्से की जांच की जाती है।
  • संक्रमण आदि का पता लगाने के लिए ब्लड टेस्ट किया जाता है
  • नाक के अंदरूनी हिस्से की संरचनात्मक जानकारी प्राप्त करने के लिए ईसीजी, सीटी स्कैन और एमआरआई स्कैन आदि।

दवाएं

  • सर्जरी से पहले डॉक्टर आपके द्वारा ली जाने वाली दवाओं से बारे में पूछते हैं।
  • यदि आप एस्पिरिन, आइबुप्रोफेन या अन्य कोई रक्त पतला करने वाली दवा ले रहे हैं, तो डॉक्टर कुछ समय के लिए इन्हें बंद करवा सकते हैं।
  • यदि आपको किसी दवा से एलर्जी या अन्य कोई साइड इफेक्ट होता है, तो डॉक्टर को इस बारे में बता दें।

(और पढ़ें : खून के थक्के जमने का कारण)

आहार

  • सर्जरी वाले दिन डॉक्टर आपको खाली पेट रहने के लिए कह सकते हैं। ऐसा आमतौर पर इसलिए किया जाता है, ताकि सर्जरी के दौरान आपको उल्टी या जी मिचलाना आदि लक्षण न हों।
  • यदि आप शारीरिक रूप से अधिक कमजोर हैं या फिर खाए-पिए बिना नहीं रह सकते हैं, तो डॉक्टर आपको विशेष आहार दे सकते हैं।

जीवनशैली

  • यदि आप धूम्रपान या शराब का सेवन करते हैं, तो डॉक्टर आपको सर्जरी से पहले ही इन्हें कुछ दिन के लिए या स्थायी रूप से छोड़ने की सलाह दे सकते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि ये सर्जरी के बाद आपके स्वस्थ होने की प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं और आपको सर्जरी के बाद ठीक होने में अधिक समय लगता है।

सहमति पत्र

  • सर्जरी से पहले आपको एक सहमति पत्र दिया जाएगा, जिस पर हस्ताक्षर करके आप सर्जन को सर्जरी करने की अनुमति दे देते हैं। हालांकि, सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करने से पहले उसे एक बार अच्छे से पढ़ लेना चाहिए।

जिस दिन आप सर्जरी के लिए जाएं, उस दिन अपने साथ किसी करीबी रिश्तेदार या मित्र को ले जाएं, ताकि सर्जरी के बाद वे आपको घर वापस लौटने में मदद कर सकें।

(और पढ़ें - उल्टी रोकने के घरेलू उपाय)

डेक्रायोसिस्टोराइनोस्टमी कैसे की जाती है?

डीसीआर प्रोसीजर को निम्न के अनुसार किया जाता है -

  • यदि आपको जनरल एनेस्थीसिया दिया जाता है, तो सर्जरी के दौरान आप सो जाएंगे। यदि आपको लोकल एनेस्थीसिया दिया जाता है, तो आप सर्जरी के दौरान जागते रहेंगे। नाक को सुन्न करने के लिए आमतौर पर एक विशेष पैकिंग मैटीरियल को नाक में डाला जाता है।
  • पैकिंग मैटीरियल में सुन्न करने वाली दवा के साथ अन्य दवाएं भी होती हैं, जो सर्जरी के दौरान रक्तस्राव को रोकने में मदद करती हैं।
  • सर्जरी वाले स्थान को सुन्न करने के लोकल एनेस्थीसिया का इंजेक्शन भी लगाया जा सकता है। (और पढ़ें - इंजेक्शन कैसे लगाते हैं)

हालांकि, डेक्रायोसिस्टोराइनोस्टमी प्रोसीजर को दो अलग-अलग प्रकारों से किया जा सकता है, जैसे -

एक्सटरनल डेक्रायोसिस्टोराइनोस्टमी प्रोसीजर

  • इसमें सर्जन नाक के एक तरफ 10 से 15 मिलीमीटर लंबा चीरा लगाएंगे
  • चीरे के अंदर से ऊतकों को हटाकर हड्डी तक पहुंचा जाता है और फिर हड्डी में भी छिद्र कर दिया जाता है।
  • इसकी मदद से लैक्रिमल ग्रंथि से नाक तक आंसू पहुंचाने का एक नया रास्ता बन जाता है।
  • बनाए गए नए रास्ते में एक ट्यूब डाली जाती है, जो घाव के ठीक होने तक रास्ते को खोलकर रखती है।
  • ट्यूब लगाने के बाद चीरे वाली त्वचा को मिलाकर बंद कर दिया जाता है और टांके लगा दिए जाते हैं। 

एंडोस्कोपिक डेक्रायोसिस्टोराइनोस्टमी

एंडोस्कोपिक डीसीआर की प्रक्रिया भी लगभग एक्सटरनल डेक्रायोसिस्टोराइनोस्टमी के समान ही होती है। हालांकि, कुछ बदलाव हो सकते हैं जैसे -

  • इसमें नाक के अंदरूनी हिस्से में कोई चीरा नहीं लगाया जाता है।
  • आंसू नली में होने वाली रुकावट तक पहुंचने के लिए एंडोस्कोप उपकरण का इस्तेमाल किया जाता है।

इस प्रक्रिया में लगभग एक घंटे का समय लगता है। बनाए गए रास्ते को बंद होने से रोकने के लिए जो ट्यूब लगाई गई थी, उसे अस्पताल से छुट्टी मिलने से पहले काटकर बराबर कर दिया जाएगा। सर्जरी होने के लगभग 6 हफ्तों बाद इस ट्यूब को पूरी तरह से निकाल दिया जाता है।

सर्जरी के बाद आपको कुछ समय के लिए नाक से थोड़ा बहुत खून आना, आसपास नील पड़ना और अन्य कुछ तकलीफें महसूस हो सकती हैं। हालांकि, दो से चार हफ्तों के बीच ये परेशानियां खत्म हो जाती हैं। कई बार मरीज को सर्जरी वाले दिन ही छुट्टी मिल जाती है, जबकि कुछ लोगों को एक या दो दिन के लिए अस्पताल में भर्ती रहना पड़ सकता है, जो उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करता है।

यदि आपको बार-बार नाक से खून बहने की समस्या हो रही है, तो आपको नाक में फिर से पैकेजिंग मेटीरियल लगाया जा सकता है।

(और पढ़ें - नील पड़ने पर क्या करें)

डेक्रायोसिस्टोराइनोस्टमी के बाद की देखभाल

डीसीआर प्रोसीजर के बाद आपको कुछ समय के लिए आंख से पानी आने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। यह समस्या आमतौर पर तब तक रहती है, जब तक ट्यूब को निकाला नहीं जाता और सर्जरी वाले स्थान की सूजन कम नहीं हो जाती है। सर्जरी के बाद घर आने से पहले डॉक्टर आपको कुछ विशेष देखभाल करने की सलाह दे सकते हैं, जिनमें निम्न शामिल हैं -

  • यदि आपको घर जाने तक भी सर्जरी वाली आंख पर लगाया गया पैड उतारा नहीं गया है, तो डॉक्टर आपको इसे अगले दिन आराम से उतारने की सलाह दे सकते हैं।
  • आंख को साफ पानी से धोएं और साफ कपड़े के साथ हल्के-हल्के दबा कर सुखा लें। ध्यान रहे, सर्जरी वाली आंख को कपड़े या किसी चीज से रगड़ें नहीं।
  • यदि एक्सटरनल डेक्रायोसिस्टोराइनोस्टमी की गई है, तो आपको सर्जरी वाले घाव को साफ व सूखा रखने की सलाह दी जाती है।
  • यदि एंडोस्कोपिक डेक्रायोसिस्टोराइनोस्टमी सर्जरी की गई है, तो डॉक्टर आपको कुछ हफ्तों तक विशेष नेजल स्प्रे की मदद से नाक को साफ करने की सलाह देते हैं।
  • यदि सर्जरी के बाद भी नाक से रक्तस्राव हो रहा है, तो नाक की सर्जरी वाली जगह के दूसरी तरफ ठंडी सिकाई करें।
  • सर्जरी के बाद दर्द या अन्य तकलीफ होने पर आपको दर्दनिवारक दवाएं दी जा सकती हैं, जैसे पैरासिटामोल और कौडीन आदि।
  • संक्रमण के खतरे को रोकने के लिए एंटीबायोटिक दवाएं दी जा सकती हैं।

सर्जरी के बाद डॉक्टर आपको कुछ चीजों से परहेज करने की सलाह भी दे सकते हैं, जिनमें निम्न शामिल है -

  • एक हफ्ते तक नाक को साफ करने की कोशिश न करना (जैसे नाक में उंगली डालना या तेज सांस छोड़कर नाक को साफ करना)
  • नाक से छींक न मारना (डॉक्टर आपको मुंह खोलकर छींक मारने की सलाह देते हैं।)
  • जल्दी ठीक करने वाली होम्योपैथिक दवाएं न लेना
  • दो हफ्ते तक मेकअप न करना
  • दो हफ्तों तक अधिक तनाव वाली शारीरिक गतिविधियां न करना जैसे तैराकी आदि।
  • दस दिनों तक रक्त को पतला करने वाली दवाएं न लेना जैसे एस्पिरिन
  • सर्जरी के बाद एक हफ्ते तक कोई विमान यात्रा न करना
  • सर्जरी के बाद चौबीस घंटों तक गरम खाद्य या पेय पदार्थों का सेवन न करना (उन्हें ठंडा करके खाएं)
  • शराब व अन्य किसी नशीले पदार्थ का सेवन न करना (और पढ़ें - नशे की लत से छुटकारा कैसे पाएं)

वैसे तो एंडोस्कोपिक डेक्रायोसिस्टोराइनोस्टमी की सफलता की संभावना एक्सटरनल डेक्रायोसिस्टोराइनोस्टमी की तुलना में थोड़ी कम है, लेकिन इससे निम्नलिखित फायदे हो सकते हैं -

  • इसमें छोटा चीरा लगाना पड़ता है
  • इससे किसी प्रकार का स्कार नहीं बनता है

डॉक्टर को कब दिखाएं?

यदि आपको निम्न में से कोई समस्या हो रही है, तो डॉक्टर को दिखा लेना चाहिए -

(और पढ़ें - बुखार कम करने के घरेलू उपाय)

डेक्रायोसिस्टोराइनोस्टमी से क्या जोखिम हो सकते हैं?

डीसीआर प्रोसीजर के साथ आमतौर पर निम्न जोखिम व जटिलताएं देखी जा सकती हैं -

  • चेहरे पर एक बड़ा निशान (स्कार) बनना (और पढ़ें : घाव के निशान मिटाने की होम्योपैथिक दवा)
  • अत्यधिक रक्तस्राव
  • सर्जरी असफल रहना
  • ट्यूब ठीक जगह पर न लग पाना या बाद में हिल जाना
  • सर्जरी वाली जगह पर संक्रमण होना
  • नाक के अंदर के ऊतक असामान्य रूप से जुड़े होना

(और पढ़ें - रक्तस्राव रोकने के उपाय)

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