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नील पड़ना एक बेहद आम समस्या है जो किसी को भी हो सकती है। रोज़मर्रा के काम करते हुए चोट लगने से शरीर में कहीं भी नील पड़ सकता है। चोट लगने के कारण रक्त वाहिकाओं को नुक्सान होता हैऔर उनमें मौजूद खून आस-पास के ऊतकों में रिसने लगता है जिससे त्वचा के ऊपर एक नीला या काला धब्बा दिखने लगता है।

इस लेख में नील क्यों पड़ता है, क्या करें और नील पड़ने पर डॉक्टर के पास कब जाएं के बारे में विस्तार से बताया गया है।

(और पढ़ें - प्राथमिक उपचार)

  1. नील क्या होता है - Neel kise kehte hai
  2. नील क्यों पड़ते हैं - Neel kyu padte hai
  3. नील पड़ने पर प्राथमिक उपचार - Neel padne par kya kare
  4. नील पड़ने पर डॉक्टर के पास कब जाएं - Neel padne par doctor ko kab dikhana chahiye

कई बार घर, ऑफिस या अन्य जगहों पर मौजूद किसी वास्तु से टकरा जाने के बाद त्वचा पर नीले या काले रंग का धब्बा दिखाई देने लगता है। ये धब्बा त्वचा को चोट लगने के कारण छोटी-छोटी रक्त वाहिकाओं को हुए नुक्सान की वजह से होता है। चोट लगने पर रक्त वाहिकाएं फट जाती हैं और उनमें मौजूद खून त्वचा के नीचे की सतह में रिस जाता है जो बाहर से नीले धब्बे जैसा दिखता है।

(और पढ़ें - जल जाने पर क्या करें)

नील पड़ना त्वचा की एक सामान्य चोट है जिससे त्वचा का रंग बदल जाता है और धब्बा पड़ जाता है। नील पड़ने के साथ त्वचा में उभार या सूजन होना रक्त वाहिकाओं के नुक्सान और शरीर की प्रतिक्रिया के कारण होते हैं। नील पड़ने को गुम चोट भी कहा जाता है।

नील पड़ने से प्रभावित क्षेत्र में छूने से दर्द और सूजन जैसे लक्षण होते हैं।

(और पढ़ें - सूजन कम करने के घरेलू उपाय)

नील तब पड़ता है जब चोट के कारण त्वचा के पास मौजूद रक्त वाहिकाएं फट जाती हैं जिससे त्वचा के नीचे मौजूद ऊतकों में खून का रिसाव हो जाता है। ज़्यादातर नील तब पड़ते हैं जब त्वचा से कोई वास्तु टकरा जाती है या त्वचा किसी चीज़ से टकरा जाती है। इसके सामान्य कारण निम्नलिखित हैं -

  • जोर से या ज़्यदा एक्सरसाइज करने वाले लोगों को नील पड़ने की समस्या हो सकती है क्योंकि उनकी रक्त वाहिकाओं में छोटे-छोटे कट पड़ जाते हैं।
  • बूढे लोगों को नील पड़ने की समस्या इसीलिए होती है क्योंकि उनकी त्वचा पतली हो जाती है और रक्त वाहिकाओं को सहारा देने वाले ऊतक नाजुक हो जाते हैं।
  • विटामिन सी की कमी के कारण भी नील पड़ सकते हैं। (और पढ़ें - विटामिन सी की कमी के लक्षण)
  • बिना किसी वजह होने वाले नील रक्तस्तव से सम्बंधित विकार के लक्षण हो सकते हैं। खासकर अगर नील के साथ बार-बार नाक से खून आना और मसूड़ों से खून आने की समस्या हो रही है। (और पढ़ें - मसूड़ों से खून आने के कारण)
  • हाथों और हथेलियों के पिछली तरफ त्वचा पतली होती है और उसे धूप से नुक्सान हुआ होता है, जिसकी वजह से वहां नील पड़ सकते हैं। (और पढ़ें - जलने पर प्राथमिक उपचार)
  • लिवर रोग, ल्यूकेमिया, हीमोफीलिया और आयरन की कमी से हुए एनीमिया के कारण भी नील पड़ने की समस्या हो सकती है। (और पढ़ें - एनीमिया के घरेलू उपाय)
  • कुछ प्रकार की दवाओं से नील पड़ सकते हैं, जैसे नॉनस्टेरॉइडल एंटी इंफ्लेमेट्री दवाएं (दर्द, सूजन, जलन और बुखार) या खून पतला करने वाली दवाएं या कैंसर के लिए दी जाने वाली कुछ दवाएं।

(और पढ़ें - नाक से खून आने पर क्या करना चाहिए)

चोट लगने के बाद नील को ठीक करने के लिए आप निम्नलिखित तरीक से प्राथमिक चिकित्सा कर सकते हैं -

  • नील वाले क्षेत्र को आराम दें।
  • बर्फ को तौलिये में लपेटकर नील पर रखें और 15 मिनट तक छोड़ दें। इस प्रक्रिया को हर घंटे करें। इसकी जगह आप जमे हुए मटर के दानों की थैली का उपयोग भी कर सकते हैं। इससे सूजन भी कम होती है।
  • अगर हो सके तो नील वाले क्षेत्र को हृदय के स्तर से ऊपर उठा कर रखें ताकि नील में खून जमा न हो। अगर नील हृदय के स्तर से नीचे है तो उसमें अधिक खून का रिसाव होगा और सूजन बढ़ जाएगी।
  • अगर आप दर्द या सूजन के लिए कोई दवा लेना चाहते हैं, तो अपने डॉक्टर से बात करें।
  • नील पर अपने हाथ से दबाव बनाएं।
  • जो लोग खून पतला करने वाली दवाएं लेते हैं, वे अपने डॉक्टर से बात कर लें।
  • बिना डॉक्टर से पूछे कोई दवा खाना न छोड़ें और न शुरू करें।

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निम्नलिखित स्तिथियों में अपने डॉक्टर के पास जाएं -

  • नील वाले क्षेत्र में सूजन और तेज दर्द।
  • अगर आपको अचानक नील पड़ने लगते हैं।
  • अगर आप खून पतला करने वाली दवाएं लेते हैं।
  • अगर छोटी सी चोट लगने के बाद 3 दिन तक भी नील में दर्द बंद नहीं होता।
  • अगर आपके परिवार के सदस्यों को आसानी से नील पड़ने या रक्तस्त्राव की समस्या है।
  • अगर आपको बिना किसी वजह नील पड़ रहे हैं। खासकर अगर नील आपकी पीठ, धड़ या चेहरे पर हैं।
  • अगर नील हाथों या पैरों के नाखून के अंदर है और उसमें दर्द हो रहा है।
  • अगर आपको आसानी से नील पड़ जाते हैं।
  • अगर नील 2 हफ़्तों में ठीक होना शुरू नहीं होता या 3 से 4 हफ़्तों में भी पूरी तरह ठीक नहीं हो पाता।
  • अगर आपको नील के ऊपर गांठ दिखाई दे रही है।
  • अगर आपको नाक या मसूड़ों जैसी किसी अन्य जगह से खून निकल रहा है।
  • अगर आपको लग रहा है कि नील के साथ आपको फ्रैक्चर हुआ है।

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नोट: प्राथमिक चिकित्सा या फर्स्ट ऐड देने से पहले आपको इसकी ट्रेनिंग लेनी चाहिए। अगर आपको या आपके आस-पास किसी व्यक्ति को किसी भी प्रकार की आपातकालीन स्वास्थ्य समस्या है, तो डॉक्टर या अस्पताल​ से तुरंत संपर्क करें। यह लेख केवल जानकारी के लिए है।

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