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बालों का झड़ना आम समस्या मानी जाती है. पोषक तत्वों की कमी, बालों की देखभाल न कर पाना या फिर कोई मेडिकल कंडीशन की वजह से बाल झड़ सकते हैं. बालों का झड़ना तभी तक सामान्य होता है, जब तक प्रतिदिन 50-100 बाल झड़ते हैं. अगर इससे अधिक बाल झड़ रहे हैं, तो स्थिति को गंभीर माना जाता है. इस स्थिति में व्यक्ति को गंजेपन तक का भी सामना करना पड़ सकता है. बाल झड़ने के सामान्य कारणों के बारे में तो हर कोई जानता ही है, लेकिन क्या आप जानते हैं कुछ इंफेक्शन यानी संक्रमण भी बालों के झड़ने का कारण बन सकते हैं. कुछ संक्रमण ऐसे हैं, जो बालों के झड़ने में योगदान दे सकते हैं.

बालों के झड़ने का इलाज जानने के लिए कृपया यहां दिए लिंक पर क्लिक करें.

आज इस लेख में आप उन संक्रमणों के बारे में विस्तार से जानेंगे, जो बालों के झड़ने का कारण बनते हैं -

(और पढ़ें - बाल झड़ने का आयुर्वेदिक इलाज)

  1. बाल झड़ने का कारण बनने वाले इंफेक्शन
  2. सारांश
किन संक्रमण से बाल झड़ते हैं? के डॉक्टर

वैसे तो बाल झड़ने के कई कारण हो सकते हैं, लेकिन कुछ संक्रमण की वजह से भी बाल झड़ सकते हैं. दरअसल, जब कोई संक्रमण बालों या स्कैल्प पर हमला करता है, तो उस स्थिति में बाल झड़ सकते हैं. कुछ मामलों में तो लोगों को गंजेपन तक का भी सामना करना पड़ सकता है. बाल झड़ने का कारण बनने वाले कुछ इंफेक्शन इस प्रकार हैं -

रिंगवर्म

रिंगवर्म बालों के झड़ने का एक कारण बन सकता है. रिंगवर्म एक फंगल संक्रमण है. यह संक्रमण शरीर के किसी भी हिस्से पर हो सकता है. अगर रिंगवर्म इंफेक्शन स्कैल्प पर विकसित होता है, तो इस स्थिति में बालों का झड़ना शुरू हो सकता है. 

दरअसल, जब रिंगवर्म का फंगस बालों के रेशों यानी फाइबर में मिल जाता है, तो बाल सख्त होने लगते हैं और आसानी से टूट जाते हैं. इससे स्कैल्प की त्वचा पर गंजापन दिख सकता है. इस स्थिति में स्कैल्प पर पपड़ीदार पैच दिख सकते हैं. इन पैच पर खुजली, रेडनेस और सूजन हो सकती है.

माइक्रोस्पोरम ऑडौइनी नामक फंगस रिंगवर्म का कारण हो सकता है. इसके अलावा, ट्राईकोफाईटन टॉन्सिल भी रिंगवर्म का कारण बन सकता है. रिंगवर्म संक्रामक होता है. यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में आसानी से फैल सकता है. यह त्वचा से त्वचा के संपर्क में आने से हो सकता है या फिर संक्रमित व्यक्ति के कंघी, टॉवल आदि को इस्तेमाल करने से हो सकता है.

कुछ प्रकार के रिंगवर्म संक्रमण अपने आप ठीक हो जाते हैं. इसके लिए किसी उपचार की जरूरत नहीं होती है. कुछ मामलों में ग्रीसियोफुल्विन नामक एंटी-फंगल का उपयोग किया जाता है.

(और पढ़ें - बाल झड़ने से रोकने के घरेलू उपाय)

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फॉलिक्युलिटिस

फॉलिक्युलिटिस इंफेक्शन की वजह से भी बालों का झड़ना शुरू हो सकता है और गंजेपन तक पहुंच सकता है. फॉलिक्युलिटिस में बालों के फॉलिकल्स में सूजन आ जाती है. इस स्थिति में स्कैल्प पर दाने दिख सकते हैं. जब फॉलिक्युलिटिस का शुरुआती चरण होता है, तो हेयर फाइबर मौजूद हो सकते हैं. वहीं, जैसे-जैसे फॉलिक्युलिटिस इंफेक्शन गंभीर होता जाता है, हेयर फाइबर को नुकसान पहुंचने लगता है. इसकी वजह से बाल झड़ते हैं और सिर पर बड़े-बड़े पैच नजर आने लगते हैं. फॉलिक्युलिटिस की समस्या जीवाणु संक्रमण के कारण होती है.

सामान्य फॉलिक्युलिटिस के इलाज के लिए बेसिट्रेसिन, मायसिट्रैकिन या नियोमाइसिन जैसी एंटीबायटिक्स का उपयोग किया जा सकता है.

(और पढ़ें - बाल झड़ने की दवा)

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पिएड्रा

पिएड्रा भी बालों के झड़ने का कारण बन सकता है. यह इंफेक्शन तब होता है, जब बालों के रेशे (हेयर फाइबर) किसी फंगस से संक्रमित हो जाते हैं. जैसे-जैसे संक्रमण गंभीर होता जाता है, बालों के रोम कमजोर होने लगते हैं. इसकी वजह से बाल आसानी से टूटने लगते हैं. इस स्थिति में स्कैल्प पर पैच नजर आ सकते हैं. 

आपको बता दें कि पिएड्रा दो प्रकार का होते हैं - ब्लैक पिएड्रा और व्हाइट पिएड्रा. ब्लैक पिएड्रा फंगस पिएड्रिया हॉर्टे के कारण होता है. वहीं, व्हाइट पिएड्रा ट्राइकोस्पोरन बेइगेली के कारण होता है. दोनों ही प्रकार के पिएड्रा संक्रमण स्कैल्प, शरीर और जननांग क्षेत्रों के बालों को प्रभावित कर सकते हैं.

उपचार के रूप में आमतौर पर प्रभावित हिस्से के बालों को पूरी तहर से शेव कर दिया जाता है. इसके अलावा, कीटोकोनाजोल या टर्बिनाफिन जैसे एंटी-फंगल का उपयोग किया जा सकता है.

(और पढ़ें - बाल झड़ने से रोकने की होम्योपैथिक दवा)

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सेबोरेहिक डर्मेटाइटिस

सेबोरेहिक डर्मेटाइटिस भी बालों के झड़ने का एक कारण बन सकता है. यह त्वचा की स्थिति होती है, जो संक्रमण की वजह से प्रभावित हो जाती है. जब यह संक्रमण स्कैल्प की त्वचा को प्रभावित करता है, तो स्कैल्प पर सूजन आ जाती है. स्कैल्प और बालों पर जलन व खुजली महसूस हो सकती है. ऐसे में बालों का झड़ना शुरू हो सकता है. जब समस्या गंभीर होती जाती है, तो गंजापन तक हो सकता है.

सेबोरहाइक डर्मेटाइटिस के लिए कई उपचार हैं. इसका सबसे आसान उपचार मेडिकेटेड एंटी-डैंड्रफ शैंपू है. सेबोरहाइक डर्मेटाइटिस के लिए शैंपू में सल्फर, सेलेनियम सल्फाइड, जिंक पाइरिथियोन, टार या सैलिसिलिक एसिड हो सकता है.

(और पढ़ें - बाल झड़ने पर क्या लगाना चाहिए)

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वैसे तो बालों के झड़ने के कई कारण होते हैं, लेकिन ऊपर बताए गए इंफेक्शन की वजह से भी बाल झड़ सकते हैं. दरअसल, जब कोई संक्रमण स्कैल्प या बालों के रोम या रेशों को प्रभावित करते हैं, तो इससे बाल कमजोर पड़ सकते हैं और बालों का झड़ना शुरू हो सकता है. इस स्थिति में व्यक्ति को गंजेपन तक का भी सामना करना पड़ सकता है.

(और पढ़ें - टेलोजेन एफ्लुवियम का इलाज)

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