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गंजापन क्या होता है?

सिर (खोपड़ी) से अत्याधिक बालों के झड़ने की समस्या को गंजापन के रूप में संदर्भित किया जाता है। उम्र के साथ बालों का झड़ना गंजेपन का सबसे आम और वंशानुगत कारण होता है। कुछ लोग अपने गंजेपन का इलाज करवाना और उसे छिपाना पसंद नहीं करते, तो कुछ लोग अपने गंजेपन को हेयर-स्टाईल, मेक-अप, टॉपी या स्कॉर्फ आदि से ढक लेते हैं। कुछ लोग अपने टूटते बालों को रोकने व उसे फिर से उगाने के लिए उपचार का सहारा लेते हैं।

  1. गंजेपन (गंजा होने) के लक्षण - Baldness Symptoms in Hindi
  2. गंजापन (गंजा) होने के कारण और जोखिम कारक - Baldness Causes & Risk Factors in Hindi
  3. गंजेपन (गंजा होने) से बचाव - Prevention of Baldness in Hindi
  4. गंजेपन का परीक्षण - Diagnosis of Baldness in Hindi
  5. गंजेपन (गंजा होने) का इलाज - Baldness Treatment in Hindi
  6. गंजापन की दवा - Medicines for Baldness in Hindi
  7. गंजापन की ओटीसी दवा - OTC Medicines for Baldness in Hindi
  8. गंजापन के डॉक्टर

गंजेपन (गंजा होने) के लक्षण - Baldness Symptoms in Hindi

गंजेपन के लक्षण व संकेत क्या हो सकते हैं?

  • सिर से धीरे-धीरे बाल झड़ने लगना – यह गंजेपन का सबसे सामान्य प्रकार है, जो पुरुषों और महिलाओं में उम्र के साथ होने लगता है। पुरुषों में बाल अक्सर माथे पर से झड़ना शुरू होता है, वहीं महिलाओं के माथे से भी बालों का एक भाग झड़ जाता है। लेकिन, महिलाएं अपनी हेयरलाइन के साथ उस हिस्से को कवर करके रखती हैं। 
  • गंजेपन के गोल और धब्बेदार निशान – कुछ लोगों में सिक्के के आकार के और चिकनी परत वाले धब्बे होते हैं। कुछ मामलों में बाल झड़ने से पहले उस जगह में खुजली और दर्द का अनुभव हो सकता है। इस प्रकार की समस्या अक्सर खोपड़ी को ही प्रभावित करती है, लेकिन कभी-कभी इसका असर दाढ़ी या भौहों में भी हो जाता है।
  • अचानक से बाल झड़ना – एक शारीरिक या मानसिक सदमा अचानक से बाल झड़ने का कारण बन सकता है। इसमें बाल धोने, कंघी करने या हल्के से पकड़ कर खींचने से भी मुट्ठीभर बाल हाथ में आ जाते हैं। गंजेपन के इस प्रकार में गंजेपन के धब्बे नहीं बनते, बल्की पूरी खोपड़ी के बाल कम होने लगते हैं।
  • पूरे शरीर के बाल झड़ना – कैंसर के लिए इस्तेमाल की जाने वाली कीमोथेरेपी के कारण पूरे शरीर के बाल प्रभावित हो कर उतरने लगते हैं। आमतौर पर बाल वापस उग जाते हैं।
  • दाद के धब्बे पूरी खोपड़ी पर फैलना – यह दाद के संक्रमण का संकेत होता है। इसके साथ बाल टूटना, लालिमा, सूजन और जलन जैसी समस्या हो सकती है।

डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?

अगर आप निम्न समस्याओं का अनुभव कर रहे हैं, तो डॉक्टर के पास जाना चाहिए:-

  • एक विशेष पैटर्न में बालों का झड़ना,
  • तेजी से बालों का झड़ना,
  • गंजापन फैलना,
  • पैच में गंजापन होना,
  • बाल झड़ने के साथ खुजली, त्वचा में जलन, लालिमा, दर्द या अन्य लक्षण भी दिखाई देना।
  • किसी दवा का सेवन करने के बाद बाल झड़ना।
  • अगर आप अपने बालों के झड़ने का इलाज करवाना चाहते हैं, तो डॉक्टर के पास जाएं।

(और पढ़ें - बाल झड़ने से रोकने के लिए तेल)

गंजापन (गंजा) होने के कारण और जोखिम कारक - Baldness Causes & Risk Factors in Hindi

गंजापन होने के कारण क्या होते हैं?

  • मानसिक तनाव – किसी भी प्रकार का शारीरिक आघात (Physical Trauma), सर्जरी, कोई दुर्घटना या कोई गंभीर बीमारी अस्थायी रूप से बाल झड़ने का कारण बन सकती है। किसी प्रकार के आघात के 3 से 6 महीने बाद बाल झड़ना ध्यान आने योग्य (Noticeable) समस्या हो जाती है। जैसे ही शरीर ठीक होने लगता है, बाल फिर से उगने लगते हैं।
  • गर्भावस्था - गर्भावस्था दौरान महिलाओं के शरीर में बहुत सारे हार्मोनल परिवर्तन होते हैं, जो बालों के झड़ने का कारण बन सकते हैं। गर्भावस्था के दिनों के मुकाबले शिशु के जन्म लेने के बाद बाल झड़ना और अधिक आम बात हो जाती है। (और पढ़ें - गर्भावस्था के लक्षण)
  • प्रोटीन की कमी – यदि आहार में प्रोटीन की कमी हो जाती है, तो शरीर बालों की वृद्धि रोककर शरीर में बची प्रोटीन को बचाने की कोशिश करता है। यह प्रोटीन सेवन में कमी होने के दो या तीन महीने के बाद होने लगता है।
  • पुरुषों में गंजापन – 60 साल की उम्र के बाद 3 में से लगभग 2 पुरुषों को गंजेपन की समस्या हो जाती है, ज्यादातर बार पुरुषों में बाल झड़ने की समस्या पुरुष पैटर्न गंजापन (Male Pattern Baldness) के कारण होती है। इस तरह से गंजेपन की समस्या, जीन और हार्मोन के संयोजन के कारण भी होती है, आम तौर पर इसमें बाल एक क्लासिक पैटर्न में झड़ते हैं, जिसमें कान और माथे के बीच के हिस्सों (Temple) के बाल झड़ने लगते हैं।
  • महिलाओं में हार्मोन गर्भनिरोधक गोलियां अचानक से छोड़ देना या बदलना अक्सर हार्मोन में बदलाव का कारण बनता है, जिससे बाल झड़ने लगते हैं और अगर परिवार में गंजेपन की बीमारी पहले से ही हो तो इसकी संभावनाएं और अधिक बढ़ जाती हैं। रजोनिवृत्ति के दौरान महिलाओं के शरीर में होने वाले हार्मोनल संतुलन में परिवर्तन के कारण भी बालों के झड़ने की समस्या हो सकती है।
  • विटामिन बी की कमी – शरीर में विटामिन बी की कमी होना भी गंजेपन का एक कारण है।
  • एलोपीशिया (Alopecia) – यह एक अचानक से शुरू होने वाली स्थिति होती है, जो बच्चों और किशोरों में बाल झड़ने का कारण बनती है। इसमें अक्सर खोपड़ी के कुछ-कुछ हिस्सों में पूरी तरह से बाल उड़ जाते हैं, जिससे धब्बे दिखाई देते हैं। इस स्थिति में कई बार पूरी तरह से गंजापन भी आ जाता है, लेकिन इस समस्या से जुड़े 90% लोगों के बाल कुछ सालों में फिर से उग आते हैं। इस स्थिति में बालों के फिर से उगने और फिर से झड़ने का क्रम अप्रत्याशित हो सकता है।
  • खोपड़ी में संक्रमण – दाद (Ringworm) जैसे संक्रमण खोपड़ी की त्वचा और बालों पर हमला करते हैं, जिस कारण से त्वचा पर परतदार दाद बनने लगते हैं और बाल झड़ने लगते हैं। जब संक्रमण का इलाज हो जाता है, सामान्यत: बाल भी वापस उगने लगते हैं। (और पढ़ें - दाद के घरेलू उपाय)
  • अचानक से वजन घटना – शरीर का अचानक से वजन घटना शारीरिक आघात (Physical Trauma) का एक रूप होता है, जो बालों को पतला व कमजोर बना देता है। बाल झड़ने के साथ-साथ मुख्य रूप से वजन घटना, एनोरेक्सिया (Anorexia) या बुलीमिया (Bulimia) जैसे आहार विकारों का संकेत भी हो सकता है।
  • कीमोथेरेपी (Chemotherapy) - कैंसर के इलाज के लिए इस्तेमाल की जाने वाली कुछ प्रकार की दवाएं (जैसे- कीमोथेरेपी), बालों के झड़ने का कारण बन सकती हैं। कीमोथेरेपी बंद होने के बाद बाल फिर से उगने और बढ़ने लगते हैं।
  • कुछ दवाओं का साइड इफेक्ट - कुछ प्रकार की दवाएं हैं जो गंजेपन का कारण बन सकती हैं। इनमें में कुछ सबसे सामान्य दवाएं जैसे ब्लड प्रेशर और खून को पतला करने की दवाएं शामिल हैं। इसके साथ ही साथ संभावित रूप से कुछ एंटीडिप्रेसेंट्स (Antidepressants) दवाएं भी शामिल हो सकती हैं।
  • बाल खींचने की आदत – कुछ लोगों को अपने ही बाल नोंचने की आदत होती है और वे अपनी आदत से मजबूर होते हैं। जैसे कुछ लोग टीवी देखते या खेलते समय अपने बाल नोंचने रहते है (हारने की चिंता की स्थिति में)। लगातार खेलने और बाल खींचने की आदत बाल झड़ने का एक महत्वपूर्ण कारण बन सकती है। यह आदत पुरुषों से ज्यादा महिलाओं में होती है।
  • उम्र बढ़ना – महिलाओं में 60 साल के बाद बालों का कमजोर होना और झड़ना बहुत ही सामान्य होता है।

गंजेपन के जोखिम कारक क्या होते हैं?

(और पढ़ें - बाल झड़ने के कारण)

गंजेपन (गंजा होने) से बचाव - Prevention of Baldness in Hindi

गंजेपन की रोकथाम कैसे की जाती है?

नीचे दी गई टिप्स बालों के झड़ने से रोकथाम करने में आपकी मदद कर सकती है।

  • संतुलित आहार का सेवन करें, जिसमें प्रचुर मात्रा में प्रोटीन और विटामिन भी शामिल हो
  • अगर आपको गंजेपन की समस्या है, खाना खाते समय और बनाते समय उसमें बाल गिराने से बचना चाहिए।
  • बार-बार अपने बालों को घुमाने, रगड़ने या खींचने की आदत से बचें।
  • धोने, कंघी व ब्रश आदि जैसे काम धीरे-धीरे करें।
  • बालों के लिए डाई, कलर व जेल आदि का प्रयोग करने से भी बचें।

(और पढ़ें - बाल झड़ने से रोकने के उपाय)

गंजेपन का परीक्षण - Diagnosis of Baldness in Hindi

गंजेपन का परीक्षण​ कैसे किया जाता है?

निदान से पहले आपके डॉक्टर आपका एक शारीरिक परीक्षण कर सकते हैं। इसके साथ ही डॉक्टर आपकी पिछली मेडिकल जानकारी ले सकते हैं और पारिवारिक बीमारियों के बारे में भी पूछ सकते हैं। इसके अलावा डॉक्टर कुछ अन्य टेस्ट भी कर सकते हैं, जिनमें

निम्न शामिल हो सकते हैं -

  • खून टेस्ट – यह बालों के झड़ने से जुड़ी समस्याओं को उजागर करने में मदद कर सकता है जैसे कि थायरॉयड रोग। 
  • स्कैल्प बायोप्सी – डॉक्टर खोपड़ी से कुछ नमूने निकाल सकते हैं, इससे यह निर्धारित करने में मदद मिल सकती है कि संक्रमण ही बालों के झड़ने का कारण है या नहीं।

कुछ प्रकार के गंजेपन के लिए प्रभावी उपचार उपलब्ध हैं, लेकिन गंजेपन से जुड़ी कुछ समस्याएं स्थायी होती हैं। एलोपीशिया जैसी कुछ स्थितियों में बाल अक्सर एक साल के भीतर बिना इलाज के अपने आप ही उगने और बढ़ने लगते हैं।

(और पढ़ें - बाल झड़ने से रोकने के शैम्पू)

गंजेपन (गंजा होने) का इलाज - Baldness Treatment in Hindi

गंजेपन का उपचार क्या है?

इसके उपचार का मुख्य लक्ष्य गंजापन कम करना, इसे रोकना और बालों की वृद्धि में मदद करना होता है।

गंजेपन के उपचार में दवाएं, सर्जरी, विग (नकली बाल) और हेयरपीस शामिल होते हैं। एक अच्छा परिणाम पाने के लिए इन सभी तरीकों को एक साथ इस्तेमाल किया जाता है।

गंजेपन का सबसे सामान्य प्रकार, पुरुष पैटर्न गंजापन (Male-Pattern Baldness) होता है, इनको उपचार की जरूरत नहीं पड़ती क्योंकि ये समस्या उम्र के साथ-साथ होती है और शरीर के लिए कोई गंभीर खतरा पैदा नहीं करती।

इलाज के कुछ विकल्प इस प्रकार हैं - 

1. दवाएं -

  • मिनोक्सिडिल (Minoxidil) - इस दवा को सिर में लगाया जाता है। यह दवा बालों को कमजोर होने से रोकती है और साथ ही बालों को बढ़ने के लिए उत्तेजित करती है। (और पढ़ें - बाल बढ़ाने के उपाय)
  • फिनेस्टेराइड (Finasteride) - इस दवा का इस्तेमाल गंजेपन की समस्या वाले पुरुषों के लिए किया जाता है। ये दवाएं गोलियों में आती हैं, जो ज्यादातर पुरुषों में बाल झड़ने की समस्या को कम कर देती हैं। साथ ही ये बालों को फिर से उगने के लिए भी उत्तेजित करती हैं।

नोट: उपरोक्त में से किसी भी दवाई को शुरू करने से पहले एक बार डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

2. बालों का प्रत्यारोपण (Hair Transplant) -

इसमें शरीर के उन भागों से त्वचा उठाई जाती है, जहां बाल उगते हैं और उस त्वचा को गंजेपन वाली जगह पर स्थापित कर दिया जाता है। इससे शरीर पर मामूली निशान पड़ जाते हैं और संक्रमण की संभावना भी होती है। इस प्रक्रिया के लिए काफी समय की आवश्यकता पड़ती है, और यह महंगी भी हो सकती है।

3. विग और हेयरपीस -

अगर गंजापन मेडिकल उपचार से प्रतिक्रिया ना दे तो विग ट्राई करना एक सस्ता विकल्प हो सकता है। इससे स्थायी या अस्थायी दोनो प्रकार के गंजेपन को कवर करने के लिए प्रयोग किया जाता है। अच्छी गुणवत्ता और प्राकृतिक दिखने वाली विग और हेयरपीस उपलब्ध हैं।

4. सुप्प्लिमेंट्स (आहार पूरक) -

अगर आप पहले ही अच्छी तरह से पोषित हैं, तो पोषक उत्पादों का सेवन करना मददगार नहीं हो सकता। 

Dr. Divya Agrawal

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गंजापन की दवा - Medicines for Baldness in Hindi

गंजापन के लिए बहुत दवाइयां उपलब्ध हैं। नीचे यह सारी दवाइयां दी गयी हैं। लेकिन ध्यान रहे कि डॉक्टर से सलाह किये बिना आप कृपया कोई भी दवाई न लें। बिना डॉक्टर की सलाह से दवाई लेने से आपकी सेहत को गंभीर नुक्सान हो सकता है।

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गंजापन की ओटीसी दवा - OTC medicines for Baldness in Hindi

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References

  1. Healthy Male. Hair loss and balding. Monash University; Australian Government Department of Health.
  2. Dinesh Gowda, V Premalatha, and DB Imtiyaz. Prevalence of Nutritional Deficiencies in Hair Loss among Indian Participants: Results of a Cross-sectional Study. Int J Trichology. 2017 Jul-Sep; 9(3): 101–104. PMID: 28932059
  3. Indian Journal of Endocrinology and Metabolism. Association of androgenetic alopecia with metabolic syndrome: A case–control study on 100 patients in a tertiary care hospital in South India. Endocrine Society of India. [internet]
  4. Mrinal Gupta, Venkataram Mysore. Classifications of Patterned Hair Loss: A Review. J Cutan Aesthet Surg. 2016 Jan-Mar; 9(1): 3–12. PMID: 27081243
  5. Health Harvard Publishing. Harvard Medical School [Internet]. Treating female pattern hair loss. Harvard University, Cambridge, Massachusetts.
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