myUpchar प्लस+ सदस्य बनें और करें पूरे परिवार के स्वास्थ्य खर्च पर भारी बचत,केवल Rs 99 में -

आपने भी यह महसूस किया होगा ना कि जब आपको सर्दी होती है तो नाक में संकुचन की वजह से नाक बंद हो जाती है। इस वजह से सांस लेने में मुश्किल होने लगती है। ऐसे में कई बार इस बंद नाक को खोलने के लिए डॉक्टर नाक में डालने वाला स्प्रे (नेजल स्प्रे या नेजल ड्रॉप) लेने की सलाह देते हैं। बंद नाक के अलावा अगर नाक का ऑपरेशन हुआ हो, नाक में किसी तरह की एलर्जी या इंफेक्शन हो गया हो तब भी डॉक्टर नेजल ड्रॉप या स्प्रे इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं। इस तरह के स्प्रे या ड्रॉप में मौजूद दवा सीधे नाक में जाती है और ज्यादा जल्दी व बेहतर नतीजे देती है। आमतौर पर बंद नाक के इलाज के तौर पर 3 तरह के नेजल ड्रॉप या स्प्रे का इस्तेमाल होता है -

डीकंजेस्टेंट - यह बंद नाक को खोलने की एक ऐसी दवा है जो नाक के रास्ते में मौजूद म्यूकस यानी कफ, सूजन और जलन की समस्या को कम करने में मदद करती है।

सलाइन का घोल- नमक और पानी को मिलाकर तैयार किए गए घोल को मेडिकल टर्म में सलाइन कहते हैं। सलाइन, आपके नाक को गीला करने और कफ को तोड़ने में मदद करता है। साथ ही कफ को सूखने और खुरदरा होने से बचाता है, जिससे नाक सूखने (ड्राई नोज) की दिक्कत नहीं होती।
 
स्टेरॉयड का घोल- ये मार्केट में स्प्रे के रूप में मिलते हैं, जिसमें कॉर्टिकोस्टेरॉयड्स होता है और इनकी मदद से नाक में मौजूद कफ, सूजन और जलन को कम करने में मदद मिलती है।

बिना डॉक्टर की सलाह के न दें नेजल ड्रॉप या स्प्रे

वैसे नेजल स्प्रे या ड्रॉप जिसमें डीकंजेस्टेंट और स्टेरॉयड्स होते हैं उन्हें 2 साल के कम उम्र के बच्चों को देने की सलाह नहीं दी जाती। 2 साल से अधिक उम्र के बच्चों को भी बिना डॉक्टरी सलाह के इस तरह का नेजल ड्रॉप या स्प्रे नहीं देना चाहिए। आप चाहें तो बच्चे की बंद नाक को खोलने के लिए डॉक्टर की सलाह के बिना सिर्फ सलाइन वाला नेजल ड्रॉप दे सकते हैं।

हो सकते हैं कई गंभीर साइड इफेक्ट्स

बच्चों के लिए जो डीकंजेस्टेंट और स्टेरॉयड्स का इस्तेमाल किया जाता है, उनमें आमतौर पर ऑक्सीमेटाजॉलिन, जाइलोमेटाजॉलिन हाइड्रोक्लोराइड और स्यूडोएफेड्रिन होता है। अगर डॉक्टर की सलाह के बिना यह स्प्रे या ड्रॉप बच्चों को दिया जाए तो उनमें कई गंभीर साइड इफेक्ट्स जैसे- उच्च रक्तचाप और दिल की धड़कन बढ़ने जैसी घटनाएं हो सकती हैं।

  1. बच्चों को कैसे दें नेजल ड्रॉप? - How to give Nasal Drops to Children
  2. शिशुओं को सलाइन सलूशन नेजल ड्रॉप कैसे दें? - How to give Saline Solution Nasal Drop to Babies
  3. बच्चों को नेजल ड्रॉप और स्प्रे देने के फायदे - Benefits of Nasal Spray and Drop for Children
  4. नेजल ड्रॉप और स्प्रे देने के नुकसान - Side Effects of Nasal Drop and spray in Babies
  5. क्या हैं नेजल स्प्रे या ड्रॉप के बेहतर विकल्प? - Alternatives to Nasal Drop and Spray for Children
  6. नवजात शिशु और छोटे बच्चों की बंद नाक कैसे खोलें? - How to open Blocked Nose in Infants and Kids
  7. बच्चों की बंद नाक खोलने के लिए नेजल स्प्रे या ड्रॉप का इस्तेमाल के डॉक्टर

अगर डॉक्टर ऐसा करने की सलाह देते हैं तो 6 साल से ऊपर की उम्र के बच्चों को नेजल स्प्रे या ड्रॉप के तौर पर डीकंजेस्टेंट दिया जा सकता है। हालांकि, बच्चों को नेजल स्प्रे या ड्रॉप देते वक्त इन जरूरी बातों का ध्यान रखें -

  • नेजल ड्रॉप खरीदते वक्त ध्यान रखें कि बोतल पूरी तरह से सील्ड हो और उसमें मौजूद बल्ब सीरींज (जहां से दवा डाली जाती है, वह वाला हिस्सा) पूरी तरह से पैक्ड और रोगाणुविहीन हो।
  • अपने बच्चे को सीधा पकड़कर रखें या फिर आप चाहें तो उन्हें हल्का झुकाकर भी लिटा सकते हैं और इस दौरान बच्चे का सिर आपके एक हाथ पर आराम से होना चाहिए।
  • नेजल ड्रॉप की बोतल को अच्छी तरह से हिला लें और उसके बाद उसमें से 1 या 2 ड्रॉप डीकंजेस्टेंट को बच्चे की एक नासिका छिद्र में डाल दें।
  • बच्चे को इसी पोजिशन में करीब 1 मिनट तक रहने दें और उसके बाद अगर नाक से बाहर कोई अतिरिक्त ड्रॉप आया हो तो उसे पोंछ दें।

नवजात शिशु और बच्चों को सलाइन (नमक-पानी का घोल) वाला नेजल ड्रॉप देते वक्त ये जरूरी कदम उठाएं -

  • अपने बच्चे को सीधा पकड़कर रखें या फिर आप चाहें तो उन्हें हल्का झुकाकर भी लिटा सकते हैं। इस दौरान बच्चे का सिर आपके एक हाथ पर आराम से होना चाहिए। नवजात शिशु को सलाइन देते वक्त आप चाहें तो शिशु को कंबल में लपेट सकते हैं ताकि उनके हाथ और पैर सुरक्षित रहें।
  • नेजल ड्रॉप की बोतल को अच्छी तरह से हिला लें और 2-3 बूंद सलाइन को बच्चे की एक नासिका छिद्र में डाल दें।
  • कुछ सेकंड के लिए इंतजार करें ताकि सलाइन बच्चे की नाक में अंदर तक पहुंच जाए। अब बल्ब सीरिंज लें और बल्ब को अच्छी तरह से दबाकर उसमें मौजूद हवा को बाहर निकाल दें।
  • बल्ब को दबे हुए पोजिशन में ही रखें और बल्ब सीरिंज के टिप को बच्चे की उस नासिका छिद्र में डालें जिसमें आपने सलाइन ड्रॉप्स को डाला था।
  • जब बल्ब सीरिंज का टिप नाक के अंदर पहुंच जाए तो बल्ब जो दबा हुआ था उसे छोड़ दें। ऐसा करने से नाक के अंदर खिंचाव होगा और नाक में मौजूद हवा फिर से बल्ब सीरींज में आ जाएगी। साथ ही इस खिंचाव के दौरान नाक में मौजूद कफ और अतिरिक्त सलाइन भी बच्चे की नाक से बाहर आ जाएगा।
  • बल्ब सीरींज को एक बार फिर अच्छी तरह से दबाएं और उसमें मौजूद सलाइन और कफ को सिंक में फेंक दें।
  • बच्चे को 1-2 मिनट के लिए आराम से बैठने दें, उसे थोड़ा शांत कर लें और फिर इसी प्रक्रिया को नाक के दूसरे छेद में भी अपनाएं।
  • आप चाहें तो दिन भर में 2 या 3 बार इस तरह से बच्चे को नेजल ड्रॉप दे सकती हैं।

बच्चों और शिशुओं की अगर नाक बंद हो तो उसे खोलने के लिए नेजल स्प्रे या ड्रॉप देने के कई फायदे हैं -

  • नाक में जमा कफ को बाहर निकालने में मदद मिलती है।
  • नाक गिली हो जाती है, जिससे नाक में हो रही खुजली से राहत मिलती है।
  • नाक बंद होने पर सांस लेने में तकलीफ होने लगती है, लिहाजा ड्रॉप डालने से नाक से सांस लेना आसान हो जाता है।

अगर 6 साल से कम उम्र के बच्चों को ऐसा नेजल ड्रॉप या नेजल स्प्रे दिया जाए, जिसमें डीकंजेस्टेंट और स्टेरॉयड्स होता है तो इससे उन्हें कई तरह के नुकसान हो सकते हैं। जैसे -

अगर बच्चे की नाक बंद हो तो जरूरी नहीं कि आप उसे सलाइन से युक्त नेजल ड्रॉप या स्प्रे ही दें। आप चाहें तो बच्चे को आराम दिलाने के लिए यहां बताए जा रहे विकल्पों का भी इस्तेमाल कर सकते हैं -

ह्यूमीडिफायर (हवा में नमी बनाए रखने वाला उपकरण) - आप चाहें तो घर में एक ह्यूमीडिफायर का इस्तेमाल कर सकते हैं, जिससे हवा में नमी बनी रहे। ऐसा करने से सिकुड़ा हुआ नेजल पैसेज खुल जाता है और बच्चे के लिए सांस लेना आसान हो जाता है।

पानी पिलाएं - इस बात का ध्यान रखें कि आपके बच्चे के शरीर में पानी की कमी ना हो और उसे नियमित रूप से पानी पिलाते रहें, ऐसा करने से बच्चे की सर्दी की समस्या जल्दी ठीक हो जाएगी।

एंटीपाइरेटिक (बुखार ठीक करने वाली दवा) - आमतौर पर अगर बच्चे को सर्दी-जुकाम और खांसी हो जाए तो उसे बदन में दर्द और बुखार भी हो जाता है। लिहाजा डॉक्टर से बात करें कि क्या आप बच्चे को पैरासिटामॉल और आइबूप्रोफेन जैसी दवा दे सकते हैं।

सर्दी-खांसी, फ्लू या फिर किसी और तरह की ऐलर्जी की वजह से नवजात शिशु और छोटे बच्चों में कंजेशन की दिक्कत हो जाती है और इस वजह से कई बार उनकी नाक भी बंद हो जाती है। ऐसे में बच्चे को सांस लेने में दिक्कत होने लगती है, कुछ खिलाने या पिलाने पर बच्चे को खांसी आने लगती है, खाने या बोलने में दिक्कत महसूस होने लगती है आदि। चूंकि सर्दी और फ्लू वायरस से होते हैं इसलिए एंटीबायोटिक देने से कोई फायदा नहीं होता। लिहाजा बच्चे की बंद नाक खोलने के लिए आप नेजल स्प्रे या ड्रॉप के अलावा इन तरीकों का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

  • अगर बच्चा उम्र में थोड़ा बड़ा है तो उसे नियमित रूप से अपनी नाक को साफ करना सिखाएं। ऐसा करने से नाक में जमा कफ और बलगम बाहर आएगा और बच्चे की नाक बंद नहीं होगी।
  • नेजल बल्ब की मदद से आप बच्चे के नाक में जमा म्यूकस यानी बलगम को बाहर खींचकर निकाल सकते हैं।
  • अगर बच्चा 3 महीने या इससे अधिक उम्र का है तो बच्चे को अपना दूध या फिर डिब्बे का दूध पिलाते रहें। पानी भी दे सकते हैं। अगर बच्चे की उम्र 1 साल से अधिक है तो आप उसे गर्म सूप भी दे सकते हैं।
  • बच्चे को स्टीम दें। ऐसा करने से भी बच्चे की बंद नाक खोलने में मदद मिलेगी।
  • अगर बच्चे की उम्र 1 साल से अधिक है तो आप उसे आधा चम्मच या 1 चम्मच शहद भी दे सकते हैं।
Dr. Yeeshu Singh Sudan

Dr. Yeeshu Singh Sudan

पीडियाट्रिक

Dr. Veena Raghunathan

Dr. Veena Raghunathan

पीडियाट्रिक

Dr. Sunit Chandra Singhi

Dr. Sunit Chandra Singhi

पीडियाट्रिक

और पढ़ें ...
ऐप पर पढ़ें
कोरोना मामले - भारतx

कोरोना मामले - भारत

CoronaVirus
4421 भारत
266आंध्र प्रदेश
10अंडमान निकोबार
1अरुणाचल प्रदेश
26असम
32बिहार
18चंडीगढ़
10छत्तीसगढ़
523दिल्ली
7गोवा
144गुजरात
90हरियाणा
13हिमाचल प्रदेश
109जम्मू-कश्मीर
4झारखंड
151कर्नाटक
327केरल
14लद्दाख
165मध्य प्रदेश
748महाराष्ट्र
2मणिपुर
1मिजोरम
21ओडिशा
5पुडुचेरी
76पंजाब
288राजस्थान
621तमिलनाडु
321तेलंगाना
1त्रिपुरा
31उत्तराखंड
305उत्तर प्रदेश
91पश्चिम बंगाल

मैप देखें