एडेनोकार्सिनोमा - Adenocarcinoma in Hindi

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September 21, 2020

November 05, 2020

एडेनोकार्सिनोमा
एडेनोकार्सिनोमा

एडेनोकार्सिनोमा एक प्रकार का कैंसर है जो शरीर में बलगम पैदा करने वाली ग्रंथियों की कोशिकाओं में शुरू होता है। शरीर के कई अंगों में यह ग्रंथियां हो सकती हैं, साथ ही एडेनोकार्सिनोमा की समस्या भी उन में से किसी भी अंग में हो सकती है। सामाान्य रूप से यह स्तन कैंसर, कोलोरेक्टल कैंसर, फेफड़ों का कैंसर, अग्नाशय का कैंसर और प्रोस्टेट कैंसर के रूप में सामने आ सकता है। इसके अलावा कई प्रकार के कैंसर भी अंगों को प्रभावित कर सकते हैं। अमेरिकन कैंसर सोसायटी के अनुसार कैंसर के निम्न प्रकारों में भी एडेनोकार्सिनोमा कारक हो सकता है।

इस लेख में हम एडेनोकार्सिनोमा के लक्षण, कारण और उसके उपचार माध्यमों के बारे में जानेंगे।

एडेनोकार्सिनोमा के लक्षण - Adenocarcinoma symptoms in hindi

जैसा कि उपरोक्त पंक्तियों में बताया गया है कि एडेनोकार्सिनोमा कई अंगों को प्रभावित कर सकता है, ऐसे में उन्हीं अंगों के आधार पर इसके लक्षण भी देखने को मिल सकते हैं। आइए अंगों के आधार पर एडेनोकार्सिनोमा के लक्षणों को जानते हैं।

ब्रेस्ट कैंसर

  • स्तन में सूजन
  • स्तन के आकार में परिवर्तन
  • स्तन की चमड़ी का पक जाना
  • निप्पल से खून निकलना
  • निप्पल की त्वचा लाल या पपड़ीदार होना

कोलोरेक्टल कैंसर

  • पेट में दर्द या ऐंठन
  • दस्त या कब्ज की ​शिकायत होना
  • गैस या पेट में सूजन होना, ऐसा महसूस होना जैसे पेट हमेशा फूला हुआ हो
  • मल का पतला होना
  • अचानक से वजन घटने की समस्या

लंग कैंसर

अग्न्याशय का कैंसर

  • भूख न कम लगना
  • पीठ दर्द
  • पेट फूला हुआ महसूस करना
  • पेट में जलन
  • मतली और उल्टी
  • मल में अतिरिक्त वसा के संकेत (मल से बदबू आती है और तैरती है)

 प्रोस्टेट कैंसर

एडेनोकार्सिनोमा का कारण - Adenocarcinoma causes in hindi

एडेनोकार्सिनोमा विभिन्न कारणों से विकसित हो सकता है। शोधकर्ताओं को अभी तक इसके मुख्य कारण के बारे में जानकारी नहीं है। हालांकि, कुछ जोखिम कारकों और एडेनोकार्सिनोमा के बीच संबंधों को देखा गया है। शरीर के किसी अंग में कैंसर है तो उसके कारण भी भिन्न हो सकते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि धूम्रपान करने या तंबाकू उत्पादों के सेवन करने के कारण भी एडेनोकार्सिनोमा का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा कुछ निम्नलिखित स्थितियां भी इसका मुख्य कारण हो सकती हैं।

  • काम पर या घर में हानिकारक विषाक्त पदार्थों के संपर्क में आ जाना
  • रेडिएशन थेरपी का साइड इफेक्ट, विशेष रूप से फेफड़ों में

एडेनोकार्सिनोमा का निदान - Diagnose of Adenocarcinoma in hindi

एडेनोकार्सिनोमा के निदान के लिए डॉक्टर सबसे पहले आपकी मेडिकल हिस्ट्री जानने की कोशिश करेंगे। इससे यह निर्धारित करने में आसानी होती है कि रोगी को किस प्रकार के शारीरिक परीक्षण की आवश्यकता है? कैंसर के निदान के लिए उसके स्थान के आधार पर कई तरह के परीक्षण किए जा सकते हैं। मुख्य रूप से निदान की जिन तीन विधियों को प्रयोग में लाया जाता है, वह निम्नलिखित हैं।

बायोप्सी

इस प्रकार के परीक्षण के लिए सामान्य रूप से रोगी के शरीर से छोटा सा हिस्सा लेकर उसको माइक्रोस्कोपिक परीक्षण के लिए भेजते हैं। इससे यह पता करने में आसानी होती है ​कि यह कैंसर है या नहीं। इसके अलावा इस चीज की भी जांच की जाती है कि उस हिस्से में कहीं पर कैंसर तो विकसित नहीं हो रहा है?

सीटी स्कैन

इस स्कैन के माध्यम से शरीर के प्रभावित हिस्से की थ्री-डी छवि प्राप्त करने के साथ असामान्य मांस की भी जांच की जा सकती है। इस माध्यम से एडेनोकार्सिनोमा का पता लगाया जा सकता है।

एमआरआई

इस परीक्षण के माध्यम से शरीर के अंगों की विस्तृत छवियां प्राप्त की जा सकती हैं। इसके अलावा शरीर में बढ़ रहे मांस और असामान्य ऊतकों का भी पता लगाया जा सकता है।आमतौर पर कैंसर की पुष्टि करने के लिए डॉक्टर बायोप्सी करते हैं। शरीर में अन्य स्थितियों की जानकारी प्राप्त करने के लिए डॉक्टर ब्लड टेस्ट कराने की भी सलाह दे सकते हैं। कुछ रोगियों में निदान के लिए लैप्रोस्कोपी का भी उपयोग किया जा सकता है। इस प्रक्रिया में शरीर के भीतर पतले स्कोप के माध्यम से अंगों और असामान्य ऊतकों की जांच की जा सकती है।

एडेनोकार्सिनोमा का इलाज - Treatment of Adenocarcinoma in hindi

ट्यूमर के आकार और उसके प्रकार के आधार पर एडेनोकार्सिनोमा का उपचार किया जाता है।शरीर के जिस हिस्से में कैंसर की समस्या है, इसी के आधार पर आवश्यकतानुसार सर्जरी अथवा रेडिएशन थेरपी को प्रयोग में लाया जाता है। डॉक्टर को यदि लगता है कि ​कैंसर शरीर के अन्य हिस्सों में भी फैल चुका है ​तो वह कीमोथेरेपी के माध्यम से इसका इलाज कराने की सलाह दे सकते हैं।

एडेनोकार्सिनोमा के उपचार में जिन पद्धतियों को प्रयोग में लाया जाता है वह निम्नलिखित हैं।

  • सर्जरी के माध्यम से कैंसर और उसके आसपास के ऊतकों को हटाने का प्रयास किया जाता है।
  • कीमोथेरेपी का उपयोग करते हुए पूरे शरीर से कैंसर कोशिकाओं को नष्ट किया जाता है।
  • किसी एक स्थान पर कैंसर कोशिकाओं का पता चलने पर उसे रेडिएशन के माध्यम से नष्ट किया जाता है।

इम्यूनोथेरेपी

इम्यूनोथेरेपी में कुछ विशेष प्रकार की दवाओं को प्रयोग में लाया जाता है। ये दवाएं प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करती हैं, जिससे वो कैंसर की कोशिकाओं को नष्ट कर सकें। ज्यादातर इम्यूनोथेरेपी में देखा गया है कि यह रोगी के जीवन को सुरक्षित रखने में मदद कर सकती हैं। हालांकि, कैंसर को खत्म करने में यह बहुत प्रभावी साबित नहीं हुई है। कीमोथेरेपी या रेडिएशन के मुकाबले इनके साइड इफेक्ट्स कम होते हैं। हालांकि, कुछ लोगों में इसके गंभीर दुष्प्रभाव भी देखने को मिल सकते हैं। इम्यूनोथेरेपी कितनी प्रभावी है, यह कैंसर के चरण, व्यक्ति के स्वास्थ्य और स्थिति आदि पर निर्भर करता है।



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