सेरेब्रोवैस्कुलर डिजीज - Cerebrovascular disease in Hindi

Dr. Nabi Darya Vali (AIIMS)MBBS

March 16, 2021

March 18, 2021

कई बार आवाज़ आने में कुछ क्षण का विलम्ब हो सकता है!
सेरेब्रोवैस्कुलर डिजीज
कई बार आवाज़ आने में कुछ क्षण का विलम्ब हो सकता है!

सेरेब्रोवैस्कुलर डिजीज ऐसी स्थितियां, रोग और विकारों का समूह है, जो मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं और खून की आपूर्ति को प्रभावित करता है। यदि किसी तरह का ब्लॉकेज, असामान्य बनावट या ब्लीडिंग मस्तिष्क की कोशिकाओं तक पर्याप्त ऑक्सीजन जाने से रोकती है, तो इससे मस्तिष्क को नुकसान हो सकता है। सेरेब्रोवैस्कुलर डिजीज में स्ट्रोक, ट्रांसिएंट इस्केमिक अटैक, धमनीविस्फार और वैस्कुलर मैल्फॉर्मेशन शामिल हैं। यह विभिन्न कारणों की वजह से विकसित हो सकता है जैसे :

  • एथेरोस्क्लेरोसिस (धमनियां सिकुड़ जाना)
  • थ्रोम्बोसिस या एम्बोलिक आर्टेरियल ब्लड क्लॉट (मस्तिष्क की धमनी में खून का थक्का बनना)
  • सेरेब्रल वीनस थ्रोम्बोसिस (मस्तिष्क की नस में खून का थक्का बनना)

हालांकि, सेरेब्रोवैस्कुलर के जोखिम को कम करने के लिए उचित कदम उठाया जा सकता है। इस लेख में, हम सेरेब्रोवैस्कुलर के लक्षण, कारण और उपचार के बारे में जानेंगे।

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सेरेब्रोवैस्कुलर डिजीज के लक्षण - Symptoms of cerebrovascular disease in hindi

सेरेब्रोवैस्कुलर डिजीज के लक्षण दो बातों पर निर्भर करते हैं - ब्लॉकेज और इसका मस्तिष्क के ऊतकों पर क्या प्रभाव पड़ा है। अलग-अलग कारकों की वजह से लक्षण में भी विभिन्नता हो सकती है, लेकिन सेरेब्रोवैस्कुलर डिजीज के सामान्य लक्षणों में शामिल हैं :

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सेरेब्रोवैस्कुलर रोग के कारण - Cerebrovascular disease causes in hindi

सेरेब्रोवैस्कुलर रोग के कारणों में शामिल हो सकते हैं :

  • स्ट्रोक : सेरेब्रोवैस्कुलर रोग का सबसे आम प्रकार स्ट्रोक है, जिसमें स्थायी रूप से महसूस करने की क्षमता या मोटर फंक्शन (हाथ-पैर हिलाने में दिक्कत) में कमी आ जाती है। स्ट्रोक को दो सामान्य श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है - मस्तिष्क में खून बहना या इस्केमिक (मस्तिष्क में रक्त प्रवाह सही से न होना) (और पढ़ें - ब्रेन स्ट्रोक होने पर क्या करें)
  • ट्रांसिएंट इस्केमिक अटैक : टीआईए स्ट्रोक की तरह एक स्थिति है, लेकिन इसके लक्षण 24 घंटों के अंदर पूरी तरह से ठीक हो जाते हैं। टीआईए को कभी-कभी 'मिनी स्ट्रोक' भी कहा जाता है।
  • एन्यूरिज्म : धमनी की दीवारों (आर्टेरी वॉल) में कमजोरी आने की वजह से एन्यूरिज्म होता है, जिसके परिणामस्वरूप रक्त वाहिकाओं में उभार आ जाता है। (और पढ़ें - मस्तिष्क धमनीविस्फार के लक्षण)
  • वैस्कुलर मैल्फॉर्मेशन : इसमें धमनियों या नसों में असामान्यताएं आ जाती है।
  • वैस्कुलर डिमेंशिया : कॉग्निटिव इम्पेयरमेंट (जैसे नई चीजें सीखने, याद रखने में परेशानी होना) जो कि आमतौर पर स्थायी होती है।

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सेरेब्रोवैस्कुलर रोग का इलाज - Cerebrovascular disease treatment in Hindi

सेरेब्रोवैस्कुलर का उपचार इसके प्रकार पर निर्भर करता है। हालांकि, उपचार का उद्देश्य मस्तिष्क के रक्त प्रवाह में सुधार करना है।

सेरेब्रोवैस्कुलर डिजीज में तुरंत उपचार की आवश्यकता होती है। इस स्थिति में तेजी से मरीज का मूल्यांकन और उपचार शुरू कर देना चाहिए, क्योंकि लक्षणों के दिखने के बाद एक समयावधि के अंदर स्ट्रोक की दवाएं लेने की जरूरी होती है।

  • एक्यूट स्ट्रोक के मामले में, आपातकालीन टीम की जरूरत होती है जो खून के थक्कों को तोड़ने के लिए 'टिश्यू प्लास्मिनोजेन एक्टीवेटर' (टीपीए) की मदद लेते हैं।
  • ब्रेन हेमरेज के मामले में, न्यूरोसर्जन के पास जाने की जरूरत होती है। वे ब्लीडिंग की वजह से दिमाग पर पड़ने वाले दबाव को कम करने के लिए सर्जरी कर सकते हैं।
  • कैरोटिड एंडरटेरेक्टॉमी में कैरोटिड धमनी में चीरा लगाकर प्लाक को निकाल लिया जाता है। इससे खून का बहाव फिर से सामान्य होने लगता है। इसके बाद सर्जन धमनी की ग्राफ्टिंग करते हैं या टांके लगा देते हैं।

सेरेब्रोवैस्कुलर डिजीज के ज्यादातर मामलों का इलाज दवाओं से किया जाता है। इनमें शामिल हो सकते हैं :

यह दवाएं आमतौर पर उन लोगों को दी जाती हैं, जिनकी धमनियां 50 प्रतिशत से कम ब्लॉक या सिकुड़ चुकी हैं। अधिक गंभीर मामलों में, प्लाक या ब्लॉकेज को हटाने के लिए सर्जरी या स्टेंट (पतला ट्यूब) का इस्तेमाल किया जाता है।

यदि मस्तिष्क के कार्य पहले से ही प्रभावित हो चुके हैं तो स्थिति के अनुसार कुछ थेरपी जैसे फिजिकल थेरेपी, ऑक्यूपेशनल थेरेपी और स्पीच थेरेपी की आवश्यकता हो सकती है।

(और पढ़ें - धमनियों को साफ करने के उपाय)



सेरेब्रोवैस्कुलर डिजीज के डॉक्टर

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