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फिजियोथेरेपी को हिंदी में भौतिक चिकित्सा कहा जाता है। फिजियोथेरेपी उपचार की विभिन्न तकनीकों की सहायता से शरीर के किसी भी अंग में लगी चोट, अक्षमता या कोई अन्य स्वास्थ्य समस्या के कारण उन अंगों के मूवमेंट में होने वाली परेशानी को दूर किया जाता है।

इस लेख में विस्तार से बताया गया है कि फिज़ियोथेरेपी क्या है, इसे कैसे किया जाता है और इसके क्या फायदे और नुकसान हो सकते हैं।

  1. फिजियोथेरेपी क्या है - Physiotherapy kya hai in hindi
  2. फिजियोथेरेपी (भौतिक चिकित्सा) में क्या होता हैं - Physiotherapy me kya hota hai in hindi
  3. फिजियोथेरेपी (भौतिक चिकित्सा) के फायदे - Physiotherapy ke fayde in hindi
  4. फिजियोथेरेपी (भौतिक चिकित्सा) के नुकसान - Physiotherapy ke nuksan in hindi

फिजियोथेरेपी करने वाले विशेषज्ञ को फिजियोथेरेपिस्ट (भौतिक चिकित्सक) कहा जाता है। फिजियोथेरेपिस्ट आपको चोटजोड़ों के दर्द, हड्डियों और मुलायम टिश्यू के दर्द, हृदय, छाती और फेफड़े, दिमाग और तंत्रिका-तंत्र से संबंधित परेशानियों से भी बचा सकते हैं।

फिज़ियोथेरेपी या फिजिकल थेरेपी एक स्वास्थ्य देखभाल का पेशा है जिसका उद्देश्य आपके शरीर की अधिकतम कार्य क्षमता को विकसित करना, जीवन भर क़ायम रखना और सुधारना है। यह पद्धति आपके शरीर के सामान्य क्रियाकलाप फिर से बहाल करने और आपको किसी भी बीमारी या चोट से होने वाली अक्षमता से बचाती है।

फिजियोथेरेपिस्ट आपके स्वास्थ्य इतिहास और शारीरिक परीक्षण के द्वारा निदान के तरीके और उसकी प्रबंधन योजना बनाता है और जब भी जरूरत हो लैब टेस्ट और इमेजिंग अध्ययन को अपनी रिपोर्ट में शामिल करता है।

फिजिकल थेरेपी के कई प्रकार हैं, जैसे

  • कार्डियोपल्मोनरी (हृदय तथा फेफड़ों संबंधी)
  • गेरिएट्रिक्स (वृद्धावस्था और उसके रोगों से संबद्ध चिकित्‍सा शास्‍त्र की शाखा)
  • न्यूरोलॉजिकल(स्नायु या तंत्रिका विज्ञान संबंधी)
  • स्पोर्ट्स (खेल से संबंधी उपचार का तरीका)
  • मैन्युअल (हाथों की सहायता से उपचार जैसे मालिश इत्यादि)
  • ऑर्थोपेडिक (हड्डी विज्ञान संबंधी)
  • पीडियाट्रिक्स (बच्चों का इलाज करने की विद्या) इत्यादि।

फिजियोथेरेपिस्ट किन समस्याओं का इलाज करते हैं?

एक पेशेवर के तौर पर फिजियोथेरेपिस्ट, निम्नलिखित समस्याओं के लिए फिजियोथेरेपी उपचार देने के विशेषज्ञ होते हैं - 

  • चोट और शारीरक अक्षमता से बचाव
  • तीव्र और पुराने दर्द जैसी स्थितियों से बचाव
  • शारीरक प्रदर्शन को सुधारना और उचित स्तर पर बनाए रखना
  • चोट और बीमारी के असर और शारीरिक अक्षमता में सुधार लाने
  • चोट के फिर से उभर आने की संभावना के बारे में जागरूक करना

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इसके अलावा भी फिजियोथेरेपिस्ट मरीजों को कई प्रकार की स्वस्थ्य समस्याओं के बारे में उपयोगी सलाह देते हैं।

फिजियोथेरेपिस्ट शरीर की कार्यप्रणाली के ज्ञान को अपने क्लीनिकल ​​कौशल के साथ जोड़ कर आपके लक्षणों की जाँच और उनका उपचार करते हैं। इसके लिए वे कई प्रकार की तकनीकों का प्रयोग करते हैं, जो आपकी चोट के प्रकार या समस्या जिसका इलाज किया जाना है पर निर्भर करता हैं।

फ़िज़ियोथेरेपिस्ट क्या तकनीकें इस्तेमाल करते हैं?

कुछ सबसे सामान्य तकनीकें निम्नलिखित हैं -

  • हाथों से थेरेपी देना -
    जोड़ों और मुलायम उत्तक में मोड़ने से संचरण में सुधार होता है, शरीर से द्रव पदार्थ का निकास होता है और अकड़न या मांसपेशियों में ऐंठन से आराम देता हैं।
     
  • इलेक्ट्रिकल नर्व स्टिमुलेशन (Electrical nerve stimulation) -
    बहुत कम मात्रा में इलेक्ट्रिक करंट को प्रभावित अंग में छोड़ा जाता है, यह दर के संकेतों को दबाने और रोकने में मदद करता हैं।
     
  • एक्यूपंक्चर -
    सुइयां हमारे तंत्रिका तंत्र यानि नर्वस सिस्टम को उत्तेजित करती है और दर्द को कम करती है, मांसपेशियों को आराम देती है, रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यून सिस्टम) को मजबूत करती है और शरीर के कार्यों को नियमित करती हैं। (और पढ़ें - एक्यूपंक्चर के लाभ)
     
  • थेरेपिस्ट द्वारा स्वयं करके दिखाना -
    मरीजों को सही तरीके से मूवमेंट करना सिखाने से उनको स्वयं का इलाज करने में मदद मिलती है।
     
  • फंक्शनल टेस्टिंग (Functional testing) -
    इसमें मरीज की शारीरिक क्षमता का आंकलन किया जाता है। 
     
  • डिवाइस प्रोविज़न (Device provision) -
    सुरक्षा, सहायता, और सहयोग करने वाली डिवाइस और उपकरण के बारे में बताना, और उनका उपयोग करना।

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कुछ रोगों के इलाज के लिए फिजिकल थेरेपी दशकों से उपयोग होती आ रही है। इस थेरेपी का मुख्य उद्देश्य दर्द से परेशान मरीजों को आराम प्रदान करके उन्हें सामान्य जीवन जीने योग्य बनाना है।

फिजिकल थेरेपी के कई लाभ हैं, जिनमे से कुछ निम्नलिखित हैं -

फिजियोथेरेपी उपचार के कुछ साइड इफेक्ट्स या नुकसान भी हो सकते हैं। कुछ सामान्य नुकसान निम्न है -

  • दर्द -
    उपचार के दौरान जब आप स्वस्थ हो रहे हों उस दरम्यान आपका दर्द बढ़ सकता है। इस तरह के दर्द को कम करने के लिए फिजियोथेरेपी के सत्र से पहले दवा दी जा सकती है। (और पढ़े - नसों में दर्द के घरेलू उपाय)
     
  • सूजन -
    यह बहुत सामान्य है क्योंकि उत्तक, मांसपेशिया और लिगामेंट्स (अस्थि-बंधन) में मजबूती के लिए उनमें खिंचाव उत्त्पन्न किया जाता है। इसी के चलते सूजन और फिर दर्द भी हो सकता है। (और पढ़े - सूजन कम करने के घरेलू उपाय)

नोट - ये लेख केवल जानकारी के लिए है। myUpchar किसी भी सूरत में किसी भी तरह की चिकित्सा की सलाह नहीं दे रहा है। आपके लिए कौन सी चिकित्सा सही है, इसके बारे में अपने डॉक्टर से बात करके ही निर्णय लें।

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