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क्या आपको सीने में जकड़न का एहसास हो रहा है। जिसके चलते आप सारी रात सो नहीं पा रहे हैं। छाती की जकड़न पीड़ित को लगातार बेचैनी और सीने में कुछ भरे होने का एहसास करवाती है। जो बेहद पीड़ादायक स्थिति होती है। जैसे-जैसे प्रदूषण बढ़ रहा है वैसे-वैसे लोगों को सीने में जकड़न से और अधिक दो चार होना पड़ रहा है। यहां तक कि छोटे बच्चों को भी छाती में जकड़न खासी परेशान करती है। छाती में जकड़न की समस्या कई वजहों से होती है और सर्दी, फ्लू, ब्रोंकाइल इंफेक्शन, अस्थमा और फाइब्रोसिस इसमें शामिल है। इस तकलीफ के चलते आपको सीने में तंग महसूस होना, छाती में दर्द, सांस लेने में कठिनाई और सांस फूलना जैसी दिक्कतें महसूस होती है। अगर आपके साथ भी यह सारी समस्याएं है, तो आप बिल्कुल ठीक आर्टिकल पर आए हैं, क्योंकि हम यहां आपको बता रहे हैं, कि कौन से घरेलू उपचार और निदान आपको सीने में जकड़न की परेशानी से मुक्त करवा कर राहत प्रदान कर सकते हैं।

(और पढ़े - कफ (बलगम) का इलाज)

खुद का ध्यान रखने से जुड़े टिप्स:

यहां हम आपको कुछ टिप्स दे रहे हैं जो तुरंत छाती की जकड़न को कम करके आपको राहत की सांस देंगे।

  • पर्याप्त पानी पिएं, खुद को हाइड्रेट रखने से आपको संक्रमण से निपटने में मदद मिलेगी। (और पढ़े - शरीर में पानी की कमी के लक्षण)
  • खूब आराम करें। अधिक शारीरिक परिश्रम और सक्रियता से परहेज करें, यह आपकी स्थिति और बिगाड़ देगा।
  • आरामदायक बिस्तर पर सोएं और सोते वक्त आराम के लिए कुछ अतिरिक्त तकिए लगा लें। इन तकियों के सहारे सर ऊंचा रखें ताकि सांस लेने में दिक्कत कम से कम हो।
  • सीने में जकड़न वाली स्थिति के दौरान सिगरेट आदि न लें। इससे स्थिति और बिगड़ सकती है। (और पढ़े - धूम्रपान की लत का इलाज)
  1. सीने में जकड़न के लिए लें भांप - Take steam for chest congestion
  2. सीने में जकड़न के लिए लें गर्म पेय - Consume warm drinks for chest congestion
  3. सीने में जकड़न के लिए करें गरारे - Gargle for chest congestion
  4. सीने में जकड़न के लिए मसाले - Herbs for chest congestion
  5. सीने में जकड़न के लिए तेल - Essential oil for chest congestion
  6. सीने में जकड़न के लिए वैपोरब - Vaporub for chest congestion
  7. डॉक्टर से कब मिलें? - When to see a doctor

सीने में जकड़न के लिए घरेलू इलाज:

अधिकांश समस्याओं का समाधान हमारी रसोई में ही है, हमारे पूर्वजों की यह बात यूं ही नहीं है। दरअसल, मेडिकल स्टोर पर दवाइयों को खरीदने के लिए जाने से पहले ही आप घर और रसोई में कई औषधियां और निदान प्राप्त कर सकते हैं। हम यहां आपको कुछ ऐसे घरेलू इलाजों के बारे में बता रहे हैं जो आपके सीने की जकड़न को दूर करके आपको बेहतर ढंग से सांस लेने में मदद करेंगे।

भाप लेना:

बंद नासिका मार्ग और श्वसन तंत्र को खोलने का सबसे बेहतर तरीका है, भाप लेना। भाप की गर्मी से आपका बलगम पिघला कर रास्ता छोड़ता है और आप बेहतर ढंग से सांस ले पाते हैं। आप बिना किसी वैज्ञानिक पृष्ठभूमि के भी इस इलाज को अपने घर में बैठे-बैठे कर सकते हैं। अगर आप 42 से 44 डिग्री के तापमान पर गर्म पानी की वाष्प को बीस मिनट तक अपने नासिका मार्ग से अंदर लेते हैं तो श्वसन प्रक्रिया में बहुत बड़ा परिवर्तन आता है। यह बात 42 लोगों पर किए गए एक शोध से भी सामने आई है। यहां हम आपको ठीक से वाष्प (भाप) लेने का तरीका बता रहे हैं, जिससे आपको एक दम सही परिणाम प्राप्त होंगे।

सामग्री:

  • पतीला
  • पानी
  • गैस
  • टॉवेल

कैसे करें:

  • एक पतीला लें
  • उसे पानी से आधा भर लें
  • इस पानी को कुछ मिनट तक खूब उबालें।
  • अब गैस बंद कर दें और एक साफ टॉवेल लें।
  • अपने सिर और गर्दन को टॉवेल से ढंके और गर्म पतीले पर इस तरह झुक जाएं कि आपकी नाक पानी से निकल रही भाप की दिशा में हो।
  • सुनिश्चित करें कि थोड़ी भी भांप बाहर न निकलें।
  • इस भांप को गहरी सांसे लेकर अंदर की ओर खींचे।
  • ऐसा तब तक करें जब तक पतीले से धुआं या भांप निकलता रहे।
  • पूर्ण राहत के लिए इस प्रयोग को प्रतिदिन दो से तीन बार तक करें।

टिप्स:

  • गर्म पानी से स्नान – कुछ देर के लिए गर्म पानी के बाथ टब में बैठकर या गर्म पानी से शॉवर लेकर भी आप भांप ले सकते हैं। इससे भी बेचैनी कम करने में काफी मदद मिलती है।
  • ह्यूमिडिफायर– बंद सीने, गले या जुकाम से पीड़ित लोग तुरंत राहत के लिए वैपोराइजर या ह्यूमिडिफायर का प्रयोग कर सकते हैं। अगर आपको अक्सर सीने में जकड़न की दिक्कत होती है तो एक उच्च गुणवत्ता का ह्यूमिडिफायर खरीदना एक बेहद समझदारी भरा निर्णय हो सकता है।

गर्म पेय:

पानी हर तरह की गंदगी को साफ कर देता है, फिर चाहे वह बलगम हो या गैर अवशोषित दवाओं का अपशिष्ट या फिर बिन पचा भोजन। पानी सीने की जकड़न को खोल कर फेफड़ों में हवा के प्रवाह को बढ़ाता है। अध्ययनों से पता लगा है कि गर्म पेय तुरंत ठंडक, सर्दी, जुकाम, थकान और खराब गले से राहत पहुंचाते हैं। आप राहत हासिल करने के लिए कई तरह के पेय ले सकते हैं, जैसे कि –

(और पढ़े - पानी कब कितना और कैसे पीना चाहिए)

नमक के पानी के गरारे:

उबाला हुआ पानी यदि चुटकी भर नमक के साथ मिलाकर गरारे करने में काम लिया जाए तो खराब गले से बेहद राहत मिलती है। इसकी वजह यह है कि नमक श्वसन मार्ग से फुर्ती से सारे बलगम को निकाल बाहर करता है। हालांकि इससे पूर्ण आराम नहीं मिलता है लेकिन काफी हद तक बलगम का निकल जाना भी छाती की जकड़न को कम करता है। नमक से गरारे करने के लिए आपको जरूरत होगी

सामग्री –

  • चुटकी भर नमक
  • एक कप पानी
  • गैस
  • पतीला

क्या करें:

  • एक कप पानी उबालें और इसमें एक चुटकी सादा नमक मिला लें।

 

कैसे करें:

  • इसकी एक घूंट भरें और मुंह खोल कर ऊपर देखते हुए गरारे करें और इसे थूक दें।
  • ऐसा तब तक करें जब तक आप सारे पानी का इस्तेमाल न कर लें।
  • इसे प्रतिदिन दिन में कुछ बार करें ताकि आप इस दिक्कत से राहत पा सकें।(और पढ़े - 

हर्ब और मसाले:

कुछ नियमित मसाले और भोज्य सामग्री जो कि भारतीय घरों में बेहद आम है। दरअसल, आयुर्वेदिक तौर पर औषधि है, उनमें से कुछ इस प्रकार है –

विटामिन सी: आप इसे बतौर एक एंटीऑक्सीडेंट तो जानते ही होंगे। अब चूंकि यह एक एंटीऑक्सीडेंट है तो यह संक्रमण से लड़ने के लिए भी जाना जाता है। विटामिन सी के चलते सर्दी, जुकाम और जकड़न की दिक्कत काफी हद तक कम हो जाती है। तो या तो आप विटामिन सी के सप्लीमेंट ले लीजिए या फिर साइट्रस एसिड वाले उन फलों का सेवन कीजिए जो कि विटामिन सी से भरपूर होते हैं।

अदरक: सर्दियों में अदरक की चाय भोजन नली को उष्णता का सुहावना एहसास देती है। ऐसे में अदरक का सेवन आपको जकड़न से तुरंत राहत देता है। अब हम आपको बताते हैं कि अदरक का इस्तेमाल किस तरह से किया जाए –

  • कटी हुई अदरक को सलाद और अंकुरित मूंग के साथ नमक लगा कर खाएं।
  • अदरक की चाय पीएं।

लहसुन: लहसुन श्वसन तंत्र में बहुत सहायता करता है साथ ही सीने में जकड़न में भी राहत देता है। लहसुन में एंटीइंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। आपको इसके फायदे हासिल करने के लिए बस इसे छिल कर ऐसे ही खाना है। इसके अलावा भी कुछ चीजें हैं जो बेहद सहजता से उपलब्ध है और आप इन्हें घरेलू औषधि के तौर पर काम में ले सकते हैं।

  • बेरी
  • अमरूद
  • अनार

शहद: शहद केवल मिठास बढ़ा देने वाला एक खाद्य पदार्थ ही नहीं है बल्कि इसमें कई सारे मेडिकल गुण भी हैं। जैसे कि यह वजन कम करने के लिए जाना जाता है साथ ही संक्रमणों से भी लड़ता है। अगर आप शहद का सेवन करते हैं तो यह तुरंत वायुमार्ग को साफ करता है। साथ ही, इसमें एंटीऑक्सीडेंट और एंटीइंफ्लेमेटरी गुण भी हैं जो कि उन सारे बैक्टिरियल संक्रमण से लड़ता है जो श्वसन मार्ग में जकड़न को जन्म देते हैं। प्रति दिन शहद का एक चम्मच लेना आपको कोई नुकसान नहीं करता। हां यदि आपको श्वसन मार्ग की दिक्कत अधिक है तो आप इसे दिन में तीन से चार बार ले सकते हैं। शहद देने की सलाह 12 माह से कम के शिशुओं पर लागू नहीं होती।

सुगंधित तेल:

ये तेल अपने पौधे के औषधीय गुणों से युक्त होते हैं। ऐसे में इनमें प्राकृतिक रूप से सुगंध और गुण होते हैं। अपनी खुशबू के अलावा इसमें कई सारे मेडिकल गुण भी होते हैं। ऐसे में इन सुगंधित तेलों से कई सारे औषधीय लाभ हासिल किए जा सकते हैं। खास तौर से इंफ्लूएंजावायरस और श्वसन तंत्र संक्रमण में इन तेलों से कई लाभ प्राप्त किए जा सकते हैं। इनके लाभ किस तरह हासिल किए जाएं -

  • सीधे बोतल से सूंघ कर
  • भाप लेकर

किन-किन तेलों को किया जा सकता है उपयोग:

वैपोरब:

आपने कई बार वैपोरब के ऐसे टीवी विज्ञापन देखे होंगे जो छाती की जकड़न, सर्दी और जुकाम से आराम दिलाकर रात की बेहतर नींद देने का दावा करते हैं। वैपोरब में मैंथोल और कैंफर के तत्व होते हैं। जो न केवल बच्चों बल्कि वरिष्ठों के भी नासिका द्वार को खोलते हैं और उसमें वायु के उचित प्रवाह को सुनिश्चित करते हैं। साथ ही साथ बलगम को भी साफ करते हैं। दो से 11 साल के 138 बच्चों पर हुए एक अध्ययन के मुताबिक, वैपोरब की महज दो दिन मालिश करने से ही उनको सर्दी और सीने की जकड़न में लाभ हुआ। अच्छे परिणाम के लिए वैपोरब को पूरे सीने पर और गर्दन पर दिन में कई बार मलें।

 

डॉक्टर से कब मिलें:

अगर आपको कोई भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या है तो हमेशा डॉक्टर से मिल लेना एक समझदारी भरा निर्णय है। अगर आपको नीचे बताए गए कोई भी लक्षण दिख रहे हैं तो तुरंत डॉक्टरी सहायता जरूर लें।

  • घरेलू इलाज और ओवर द काउंटर दवाएं लेने के बाद भी सीने की जकड़न ठीक नहीं हो रही हो।
  • सांस लेने में बहुत दिक्कत हो रही हो।
  • सांस फूल रही हो या तेज चल रही हो।
  • सांस लेते हुए सीटी की आवाज आ रही हो।
  • खाने या पीने में दिक्कत हो रही हो।
  • शरीर का तापमान 37°C से ऊपर जा रहा हो।
  • त्वचा नीली दिखने लगती है।

(और पढ़े - बुखार का इलाज )

और पढ़ें ...

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