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लैग्योनैरिस रोग क्या है?

निमोनिया के गंभीर प्रकार को ही लैग्योनैरिस रोग (legionnaires' disease) कहा जाता है। इसमें संक्रमण के कारण फेफड़ों में सूजन आ जाती है। लैग्योनेला (legionella) बैक्टीरिया की वजह से लैग्योनैरिस रोग होता है। लैग्योनैरिस रोग एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक नहीं फैलता है। अधिकतर लोगों को यह रोग सांस के द्वारा बैक्टीरिया शरीर में जाने के कारण होता है। अधिक उम्र के वयस्क, धूम्रपान करने वाले और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले व्यक्तियों को लैग्योनैरिस रोग होने की संभावनाएं अधिक होती है। 

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लैग्योनैरिस रोग के लक्षण क्या हैं?

अगर आप लैग्योनेला के बैक्टीरिया से संक्रमित हो चुके हैं तो इसके लक्षण और रोग को उभरने में आमतौर में 2 से 10 दिनों का समय लग सकता है। यह रोग फ्लू की तरह ही होता है। लैग्योनैरिस रोग के प्रारंभिक लक्षणों में रोगी को सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, ठंड लगना और 104 फारेनहाइट तक तेज बुखार होने की समस्या हो सकती है। 

शुरुआती लक्षणों के दो से तीन दिनों के बाद लैग्योनैरिस रोग पूरी तरह से व्यक्ति को अपनी चपेट में ले लेता है। ऐसे में रोगी को खांसी होना, सांस लेने में मुश्किल के साथ ही सीने में दर्दजी मिचलाना, उल्टी और दस्त होने लगते हैं। 

लैग्योनेला बैक्टीरिया पांटिएक बुखार का भी कारण होता है, यह स्थिति हल्के फ्लू व लैग्योनैरिस रोग के जैसी गंभीर नहीं होती है। अगर पांटिएक बुखार का इलाज न किया जाए तो भी यह अपने आप ही ठीक हो जाता है। लेकिन लैग्योनैरिस रोग का इलाज न किया जाए तो यह रोगी के लिए घातक साबित हो सकता है। 

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लैग्योनैरिस रोग क्यों होता है? 

जैसा की आपको पहले ही बताया जा चुका है लैग्योनैरिस रोग एक विशेष बैक्टीरिया लैग्योनेला के कारण होता है। यह बैक्टीरिया फेफड़ों को प्रभावित करता है और निमोनिया का कारण बनता है। लैग्योनेला बैक्टीरिया गर्म ताजे पानी में जीवित रहता है, जो निम्न जगह पर पाया जाता है- 

  • हॉट टब 
  • स्पा 
  • स्विमिंग पूल 
  • अस्पताल या अन्य बिल्डिंग जहां पर एयर कंडिशनिंग यूनिट होती है 
  • सार्वजनिक नहाने के स्थान 
  • ह्यूमिडिफायर (humidifiers: नमी बनाने वाला यंत्र) 
  • फुव्वारे
  • नहर, नदी, तलाब आदि 

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यह बैक्टीरिया घर से बाहर जीवित रह सकते हैं, लेकिन यह घर के अंदर तेजी से अपनी संख्या में बढ़ोतरी करते हैं। जब आप बैक्टीरिया से संक्रमित पानी की अति सूक्ष्म बूंदों को सांस के द्वारा अंदर लेते हैं तो आप इस रोग से ग्रसित हो जाते हैं। यह रोग सीधे तौर पर एक व्यक्ति से दूसरे तक नहीं फैलता है।

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लैग्योनैरिस रोग​​ का इलाज कैसे होता है?

जब डॉक्टर लैग्योनैरिस रोग की पहचान कर लेते हैं तो वह रोगी का एंटीबायोटिक दवाओं से इलाज करते हैं। आगे कुछ एंटीबायोटिक्स के बारे में बताया गया, जो लैग्योनैरिस रोग में मरीज को दी जाती हैं। 
  • फ्लुओरोक़ुइनोलोनेस (Fluoroquinolones)
  • मैक्रोलाइड्स (Macrolides)
  • मौक्सिफ्लौक्सासिन (Moxifloxacin) 

डॉक्टर रोगी की स्थिति के आधार पर इलाज को चुनते हैं। 

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