ब्लड गाढ़ा - Thick Blood in Hindi

Dr. Ayush PandeyMBBS,PG Diploma

May 19, 2022

May 19, 2022

ब्लड गाढ़ा
ब्लड गाढ़ा

शरीर में खून का निर्माण अलग-अलग सेल्स, प्रोटीन व क्लॉटिंग जैसे फैक्टर्स से मिल कर बना होता है. खून के सही प्रकार में होने के लिए इन सभी चीजों का संतुलित मात्रा में होना जरूरी है. इनमें से किसी भी चीज के असंतुलित होने पर ब्लड गाढ़ा होना शुरू हो जाता है. इस स्थिति को मेडिकल टर्म में हाइपरकोएगुलेबिलिटी (Hypercoagulability) कहा जाता है.

इसके पीछे कई फैक्टर्स हो सकते हैं, जैसे सर्कुलेशन के समय ब्लड सेल्स का अधिक होना, ब्लड क्लॉटिंग को प्रभावित करने वाली किसी बीमारी का होना और ब्लड में क्लॉट प्रोटीन का ज्यादा मात्रा में होना. त्वचा में खुजली होना इसका लक्षण है और प्रोटीन एस की कमी होना इस समस्या का कारण हो सकता है. इसे एंटीप्लेटलेट थेरेपी या फिर एंटीकोएग्युलेशन थेरेपी से ठीक किया जा सकता है.

आज लेख में हम जानेंगे की खून गाढ़ा होने के लक्षण क्या होते हैं और ऐसा होने के पीछे कारण क्या-क्या हैं -

(और पढ़ें - खून का पतला होना)

ब्लड गाढ़ा होने के लक्षण - Thick Blood Symptoms in Hindi

अमूमन इस समस्या का पता तब तक नहीं चलता, जब तक कि ब्लड क्लाॅट न देखने को मिलें. ब्लड क्लाॅट की समस्या नसों में उभरती है, जिसके कारण दर्द होता है. इससे ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित होता है और जहां यह उभरता है उसके आसपास का भाग भी काफी प्रभावित होता है.

कुछ लोगों को ब्लड क्लॉटिंग की समस्या वंशानुगत हो सकती है. इसलिए, अगर परिवार के किसी व्यक्ति को यह डिसऑर्डर रहा है, तो परिवार में किसी अन्य सदस्य को भी ब्लड क्लाॅट की समस्या हो सकती है. चक्कर आना, धुंधला दिखना आदि ब्लड क्लाॅट के कुछ लक्षण हैं. ब्लड क्लॉट के सभी लक्षण नीचे बताए गए हैं -

इनके अलावा, अगर निम्न में से कोई भी लक्षण महसूस होता है, तो डॉक्टर के पास जाकर टेस्ट जरूर करवाना चाहिए -

  • बिना किसी वजह से ब्लड क्लॉट होना.
  • बिना कारण बार-बार ब्लड क्लॉट की समस्या होना.
  • पहले तीन महीने में ही मिसकैरेज होना और खासकर जब ऐसा बार-बार हो.

(और पढ़ें - ब्लड टेस्ट)

ब्लड गाढ़ा होने के कारण - Thick Blood Causes in Hindi

लक्षण पता होने के साथ-साथ ये जानना भी जरूरी है कि खून गाढ़ा क्यों हो रहा है. इसके कारण निम्न प्रकार से हो सकते हैं -

  • कैंसर.
  • ल्यूप्स, जिसके कारण शरीर में ज्यादा एंटी बॉडीज बन सकती हैं और उसके चलते ब्लड क्लॉट बनने लगते हैं.
  • फैक्टर वी में म्यूटेशन होना.
  • प्रोटीन सी की कमी होना.
  • प्रोटीन एस की कमी होना.
  • प्रोथोम्बिन (Prothrombin) 20210 म्यूटेशन.
  • धूम्रपान, जिससे टिश्यू क्षतिग्रस्त हो सकते हैं और उन फैक्टर्स का निर्माण कम होता है, जो ब्लड क्लॉट नहीं बनने देते हैं.

(और पढ़ें - रक्तस्राव का इलाज)

ब्लड गाढ़ा होने का इलाज - Thick Blood Treatment in Hindi

खून के गाढ़ा होने का इलाज इसके कारणों पर निर्भर करता है, जिसके बारे में नीचे बताया गया है -

पॉलीसिथेमिया वेरा

पॉलीसिथेमिया वेरा एक प्रकार का ब्लड कैंसर होता है. इसके चलते भी खून गाढ़ा हो सकता है. हालांकि, डॉक्टर इस समस्या को बिल्कुल ठीक नहीं कर सकते, लेकिन रक्त के प्रवाह में जरूर कुछ सुधार ला सकते हैं. इसके लिए अधिक से अधिक शारीरिक गतिविधि को करने का सुझाव दिया जाता है, जो इस प्रकार हैं -

  • रोज हल्की-फुल्की स्ट्रेचिंग करना, खासकर हाथ और पैरों की.
  • सर्दियों में हाथ और पैरों को अच्छी तरह से कवर करके रखना.
  • ज्यादा गर्मी से बचना.
  • अधिक से अधिक तरल पदार्थ लेना, ताकि शरीर हाइड्रेटेड रहे.
  • नहाते समय हल्के गुनगुने पानी में स्टार्च मिलना.

शारीरिक स्थिति होने पर

अगर कोई ऐसी शारीरिक स्थिति है, जिससे ब्लड गाढ़ा हो रहा है, जैसे फैक्टर वी म्यूटेशन, तो कुछ दवाओं के जरिए उपचार कर सकते हैं. इन दवाओं के बारे में नीचे बताया गया है -

  • एंटी प्लेटलेट थेरेपी - इसमें ऐसी दवाएं दी जाती हैं, जो रक्त कोशिकाओं में थक्के बनने से रोकती हैं, जिन्हें प्लेटलेट्स कहा जाता है. ये एक साथ चिपक कर थक्का बनने से रोकती हैं. इसके तहत एस्पिरिन (बफरिन) जैसी दवा दी जा सकती है.
  • एंटीकोएग्युलेशन थेरेपी - इसमें रक्त के थक्कों को रोकने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली दवाएं लेना शामिल है, जैसे कि वार्फरिन (कौमडिन).
  • थ्रोम्बोलाइटिक्स - आपातकालीन अवस्था में डॉक्टर "क्लॉट-बस्टिंग" दवाओं का उपयोग कर सकते हैं.

(और पढ़ें - सीआरपी ब्लड टेस्ट)

सारांश – Summary

ब्लड का गाढ़ा होना शरीर के ऑर्गन और उनके फंक्शन के लिए हानिकारक हो सकता है, इसलिए इस स्थिति में सुधार करना और इसे ठीक करना बहुत ज्यादा जरूरी है. प्रोथोम्बिन 20210 म्यूटेशन ब्लड गाढ़ा होने का कारण हो सकता है. ढंग से सांस न ले पाना और चक्कर आना जैसे इसके लक्षण दिखाई दे सकते हैं. इसके इलाज के लिए एंटीकोएग्युलेशन थेरेपी ली जा सकती है, लेकिन किसी भी तरह के लक्षण दिखाई देने पर पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है.

(और पढ़ें - एएफपी ब्लड टेस्ट)