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सीआरपी यानी सी रिएक्टिव प्रोटीन (C-reactive protein) शरीर में सूजन व जलन को अंकित करता (दर्शाता) है। अगर शरीर में किसी प्रकार की सूजन, जलन आदि हो गई है, तो खून में सीआरपी का स्तर बढ़ जाता है। सी रिएक्टिव प्रोटीन का निर्माण लिवर की कोशिकाओं द्वारा किया जाता है।

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संक्रमण या अन्य मेडिकल स्थितियों की जांच करने के लिए डॉक्टर आपके सी रिएक्टिव प्रोटीन के स्तर की जांच कर सकते हैं। सीआरपी टेस्ट नैदानिक टेस्ट तो नहीं होता, लेकिन यह जांचकर्ताओं को ये जानकारी दे देता है कि मरीज के शरीर में सूजन/जलन है या नहीं। इस टेस्ट से मिली जानकारी का उपयोग अन्य कारकों के साथ संयोजन करके किया जाता है। जैसे लक्षण व संकेत, शारीरिक परीक्षण व अन्य टेस्ट के रिजल्ट के साथ जो सूजन व जलन संबंधी गंभीर स्थितियों को निर्धारित करते हैं। इसके बाद डॉक्टर आगे के अन्य टेस्ट कर सकते हैं।

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  1. सीआरपी ब्लड टेस्ट क्या होता है? - What is CRP Blood Test in Hindi?
  2. सीआरपी ब्लड टेस्ट क्यों किया जाता है - What is the purpose of CRP Blood Test in Hindi
  3. सीआरपी ब्लड टेस्ट से पहले - Before CRP Blood Test in Hindi
  4. सीआरपी ब्लड टेस्ट के दौरान - During CRP Blood Test in Hindi
  5. सीआरपी ब्लड टेस्ट के बाद - After CRP Blood Test in Hindi
  6. सीआरपी ब्लड टेस्ट के क्या जोखिम होते हैं - What are the risks of CRP Blood Test in Hindi
  7. सीआरपी ब्लड टेस्ट के परिणाम का क्या मतलब होता है - What do the results of CRP Blood Test mean in Hindi
  8. सीआरपी ब्लड टेस्ट कब करवाना चाहिए - When to get tested with CRP Blood Test in Hindi

सीआरपी टेस्ट क्या होता है?

सी रिएक्टिव प्रोटीन एक प्रकार का प्रोटीन होता है, जो लिवर द्वारा बनाया जाता है। शरीर में किसी ऊतक को चोट लगने, इंजेक्शन लगने या अन्य सूजन व जलन आदि की स्थिति होने के कुछ घंटे बाद ही यह खून में जारी हो जाता है।

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हार्ट अटैक या आघात के बाद, अनियंत्रित स्व-प्रतिरक्षित विकार के साथ, या सेप्सिस जैसे किसी गंभीर बैक्टीरियल संक्रमण आदि जैसी समस्याओं के दौरान स्पष्ट रूप से सीआरपी स्तर बढ़ जाता है।

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सूजन संबंधी स्थिति पर प्रतिक्रिया के रूप में सीआरपी का स्तर हजार गुना तक बढ़ सकता है, खून में इसका स्तर दर्द, बुखार व अन्य क्लीनिकल संकेत दिखने से पहले ही बढ़ जाता है।

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यह टेस्ट खून में सीआरपी के स्तर को मापता है, जो सूजन संबंधी तीव्र स्थितियों का पता लगाने और दीर्घकालिक स्थितियों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए काफी महत्वपूर्ण होता है।

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सीआरपी ब्लड टेस्ट क्यों किया जाता है?

मरीजों में सूजन संबंधी रोगों की जांच करने के लिए अक्सर सीआरपी टेस्ट किया जाता है, जैसे कुछ प्रकार के गठिया और स्व-प्रतिरक्षित विकार या इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज (सूजन संबंधी आंत्र रोग)। इस टेस्ट की मदद से यह देखा जाता है कि सूजन कितनी गतिशील है और उसके उपचार पर नजर रखने के लिए भी यह टेस्ट किया जाता है।

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सीआरपी टेस्ट का उपयोग सर्जरी व सर्जरी जैसी अन्य प्रक्रियाओं के बाद मरीज पर नजर रखने के लिए भी किया जाता है ताकि ठीक होने के समय के दौरान मरीज में संक्रमण आदि पर नजर रखी जा सके।

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सीआरपी परीक्षण कुछ विशेष बीमारियों का निदान करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। बल्कि सीआरपी संक्रमण व अन्य सूजन संबंधी समस्याओं के लिए एक मार्कर का काम करता है, जो डॉक्टरों को अन्य जरूरी टेस्ट व उपचार करने के लिए अलर्ट करता है।

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सीआरपी ब्लड टेस्ट से पहले क्या किया जाता है?

हालांकि, अगर सीआरपी टेस्ट के लिए आपके खून का सैम्पल लिया जाना है, तो टेस्ट से पहले आपको कुछ समय के लिए खाने-पीने से परहेज करना तथा डॉक्टर द्वारा दिए गए अन्य अनुदेशों का पालन करना पड़ सकता है।

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अगर आप किसी भी प्रकार की दवा या हर्बल उत्पाद का सेवन कर रहे हैं तो टेस्ट होने से पहले ही डॉक्टर को इस बारे में बता दें। अगर आपको एक ही समय में कई टेस्ट करवाने की जरूरत है, तो इस बारे में भी डॉक्टर से अवश्य बात करें।

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सीआरपी ब्लड टेस्ट के दौरान क्या किया जाता है?

सीआरपी टेस्ट के दौरान डॉक्टर टेस्टिंग के लिए खून का सैम्पल निकालते हैं, सैम्पल अक्सर कोहनी के अंदरूनी तरफ या हाथ के पीछे की नस से निकाला जाता है।

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सबसे पहले जिस नस से खून निकालना है, उसको एंटीसेप्टिक द्वारा साफ किया जाता है। उसके बाद बाजू के ऊपरी हिस्से पर पट्टी या इलास्टिक बैंड लगा दिया जाता है, जिससे नसों में खून बंद हो जाता है और नसें  उभरने लगती हैं। उसके बाद डॉक्टर या नर्स उस नस में इंजेक्शन लगाते हैं और खून का सैम्पल निकाल लेते हैं, सैम्पल को सुई से जुड़े सीरिंज या शीशी में जमा कर लिया जाता है।

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सीआरपी ब्लड टेस्ट के बाद क्या किया जाता है?

टेस्ट के बाद सुई की जगह पर हल्की चुभन सी महसूस हो सकती है और उस जगह पर नीला निशान भी पड़ सकता है, जो जल्द ही ठीक हो जाता है। जब सुई नस में डाली जाती है और खून निकाला जाता है उस दौरान कुछ लोगों को थोड़ा दर्द भी महसूस होता है। निशान पड़ने से रोकने के लिए सुई निकालते ही उस जगह को हल्के दबाव के साथ कुछ मिनटों के लिए मसल लेना चाहिए।

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उसके बाद खून के सैम्पल को लेबोरेटरी में टेस्टिंग के लिए भेज दिया जाता है। टेस्ट के रिजल्ट आने पर डॉक्टर मरीज को बुलाकर रिजल्ट पर उसके साथ चर्चा करते हैं।

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सीआरपी ब्लड टेस्ट के क्या जोखिम होते हैं?

सीआरपी टेस्ट के लिए जब खून का सैम्पल निकाला जाता है, तो सुई की जगह पर दर्द, सूजन व निशान आदि बन सकता है। यह कुछ समय बाद ठीक हो जाता है।

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सीआरपी टेस्ट आमतौर पर किया जाने वाला एक नियमित टेस्ट होता है, जिसमें जोखिम बहुत ही कम होते हैं। लेकिन खून का सैम्पल लेने से जुड़ी कुछ हल्की जटिलताएं हो सकती हैं, जिनमें निम्न शामिल हैं।

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  • अत्याधिक खून बहना,
  • चक्कर आना या सिर घूमना,
  •  निशान पड़ना,
  • सुई के छेद में संक्रमण होना, इत्यादि।

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सीआरपी ब्लड टेस्ट के रिजल्ट का क्या मतलब होता है?

सी रिएक्टिव प्रोटीन को प्रति लीटर खून में मिलीग्राम (mg/L) सीआरपी के माप से मापा जाता है। सामान्य रूप से सीआरपी का स्तर अधिक होने की तुलना में कम होना बेहतर रहता है, क्योंकि यह शरीर में कम सूजन/जलन का संकेत देता है।

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अगर सीआरपी स्तर की रीडिंग 1 से 2.9 मिलीग्राम प्रति लीटर के बीच हो तो इसका मतलब होता है कि आप मध्यम जोखिम पर हैं। सीआरपी का स्तर 3 मिलीग्राम प्रति लीटर से ऊपर होने पर हृदय संबंधी रोगों के लिए उच्च जोखिम हो जाते है। रीडिंग 10 से ऊपर हो जाने पर यह अन्य टेस्टिंग करवाने का संकेत देता है ताकि इतनी अधिक सूजन होने के कारण का पता लगाया जा सके।

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10 मिलीग्राम प्रति लीटर के स्तर को विशेष रूप से उच्च माना जाता है, जो निम्न स्थितियों के संकेत दे सकता है:

सीआरपी का स्तर निम्न कारणों से गिरता है:

यह नोट कर लें कि अगर आप गर्भनिरोधक गोलियां लेती हैं, तो सीआरपी का स्तर बढ़ सकता है। गर्भावस्था में सीआरपी का स्तर बढ़ना एक जटिलता का संकेत दे सकता है, लेकिन सीआरपी और गर्भावस्था की भूमिका को पूरी तरह से समझने के लिए अधिक अध्ययन आवश्यक है।

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यदि आप गर्भवती हैं या आपको कोई अन्य दीर्घकालिक जलन व सूजन संबंधी समस्या है, तो सीआरपी टेस्ट द्वारा आपके लिए ह्रदय रोग के जोखिम का सटीक रूप से आकलन कर पाने की संभावना कम होती है। अगर आप किसी भी प्रकार की दवा लेते हैं, तो सीआरपी टेस्ट से पहले उनके बारे में डॉक्टर से बात करें, क्योंकि कुछ प्रकार की दवाएं सीआरपी टेस्ट के रिजल्ट को प्रभावित कर सकती हैं। कुछ ऐसे परीक्षण भी हैं, जो सीआरपी की जगह पर किए जा सकते हैं। इसलिए आप सीआरपी ब्लड टेस्ट को पूरी तरह से छोड़ भी सकते हैं।

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यह याद रखें कि यह टेस्ट हृदय संबंधी रोगों के जोखिमों की पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं करवा पाता। यह निर्धारित करते समय कि कौन-सा अनुवर्ती परीक्षण आपके लिए सर्वोत्तम है, डॉक्टर आपकी जीवनशैली, पारिवारिक स्वास्थ्य की पिछली जानकारी व अन्य मेडिकल स्थितियों पर विचार करते हैं। डॉक्टर निम्न टेस्टों में से भी किसी का ऑर्डर दे सकते हैं।

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सीआरपी ब्लड टेस्ट कब करवाना चाहिए?

अगर आपको निम्न समस्याएं हो रही हैं तो डॉक्टर सीआरपी टेस्ट करवाने का सुझाव दे सकते हैं:

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  • कोई सूजन या जलन संबंधी विकार
  • स्व- प्रतिरक्षित विकार
  • कुछ प्रकार के गठिया (और पढ़ें - गठिया के घरेलू उपाय)
  • सूजन संबंधी आतों के रोग
  • संक्रमण की संभावनाओं की जांच करने के लिए (खासकर सर्जरी के बाद)

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