श्वसन दर मनुष्य द्वारा प्रति मिनट ली गई सांसों की संख्या है. वयस्कों के लिए सामान्य श्वसन दर 12 से 20 श्वास प्रति मिनट होती है. बच्चों के लिए सामान्य श्वसन दर उम्र के अनुसार बदलती रहती है. श्वसन ऑक्सीजन और कार्बन-डाई-ऑक्साइड रिलीज का प्रोसेस है. जब आप आराम कर रहे हो, तो एक मिनट के दौरान आप जितनी सांसें लेते हैं, उसकी गिनती करके आप अपनी सांस लेने की दर को माप सकते हैं.
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आज इस लेख में जानेंगे कि श्वसन दर क्या और कितनी होती है. साथ ही इसे मापने का क्या तरीका है-
श्वसन दर क्या है?
जब कोई व्यक्ति सांस लेता है, तो ऑक्सीजन उनके फेफड़ों में प्रवेश करती है और अंगों तक जाती है. जब सांस छोड़ते हैं, तो कार्बन-डाई-ऑक्साइड शरीर से बाहर निकलती है. एक सामान्य श्वसन दर ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड के प्रोसेस को नियंत्रित रखती है. ये पूरी प्रक्रिया एक प्रणाली द्वारा नियंत्रित होती है, जिसे श्वसन ड्राइव कहा जाता है.
श्वसन दर हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकती है. इसकी एक सीमा होती है, जिसे डॉक्टर सामान्य मानते हैं, जैसे - स्वस्थ वयस्कों के लिए सामान्य श्वसन दर 12 से 20 श्वास प्रति मिनट के बीच होती है. इस सांस लेने की दर में कार्बन-डाई-ऑक्साइड फेफड़ों से उसी दर से बाहर निकलती है. 12 से नीचे या 20 से ऊपर की श्वास दर खतरे का संकेत हो सकती है. श्वसन ड्राइव को तीन प्रकार से बांटा गया हैं.
तंत्रिका केंद्रीय नियंत्रण: तंत्रिका केंद्रीय नियंत्रण प्रणाली वेंटिलेशन दर और हवा का सेवन की मात्रा निर्धारित करती है. यह सांस छोड़ने, सांस लेने और सांस लेने के पैटर्न को बताती है.
सेंसरी इनपुट सिस्टम: सेंसरी इनपुट सिस्टम केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को यह जानने देता है कि कितनी मात्रा में और किस दर पर सांस लेनी है. यह अड़चन जैसे केमिकल परिवर्तनों को भी पहचानता है.
मांसपेशीय तंत्र: मांसपेशीय तंत्र अन्य प्रणालियों के संकेतों के अनुसार फेफड़ों को गतिमान करता है. यह श्वास के प्रोसेस को नियंत्रित करता है.
श्वसन दर कम या ज्यादा होने के कई कारण हो सकते हैं. असामान्य श्वसन दर होने से कई तरह की चीजों का संकेत मिल सकता है. कई बार काम और ज्यादा श्वसन आपके गतिविधियों के कारण होती है, जैसे कि व्यायाम या वॉकिंग, यह एकदम सामान्य होता है.
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श्वसन दर को कैसे मापें
श्वसन दर को तीन चरणों में मापा जा सकता है, जैसे -
- 1 मिनट के लिए टाइम सेट करें.
- इसे मापने के लिए आराम करना चाहिए या बैठना या लेटना चाहिए.
- श्वसन दर मापने से पहले से किसी भी जोरदार गतिविधि से बचें.
- टाइमर शुरू करें और 1 मिनट में ली गई सांसों की मात्रा को मापें. यह गिनकर किया जा सकता है कि आपकी चेस्ट कितनी बार उठती है.
मापी गई श्वसन दर को प्रभावित करने वाले कुछ आम कारक हैं. जैसे -
- भावनात्मक स्थिति
- शारीरिक फिटनेस
- आंतरिक तापमान
- रोग और स्वास्थ्य की स्थिति
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श्वसन दर बढ़ने के कारण
शारीरिक परिश्रम के बाद अधिक तेजी से सांस लेना सामान्य है. हालांकि, कभी-कभी तेज श्वास प्रत्येक सांस को खींचने के लिए संघर्ष कर सकता है. वहीं कुछ स्थितियों में श्वसन दर घट भी सकती है. आइए, श्वसन दर के बढ़ने के कारणों के बारे में जानते हैं-
बुखार या शरीर का अधिक गरम होना: जब शरीर अधिक गर्म हो जाता है, तो उसका मेटाबॉलिक प्रोसेस बढ़ जाता है और उसे अधिक ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है. तेज सांस लेने के कारण शरीर को अधिक ऑक्सीजन लेने में मदद मिल सकती है. यह एक व्यक्ति को गर्मी छोड़ने और उनके शरीर के तापमान को नीचे लाने में भी मदद करता है.
बीमारी या इन्फेक्शन: साइनस, निमोनिया व इन्फ्लूएंजा जैसी बीमारियों और इंफेक्शन के कारण श्वसन दर बढ़ सकती है.
हृदय रोगों के कारण: हृदय संबंधी समस्याएं तेज सांस लेने के प्रमुख कारणों में से हैं, खासकर जब लक्षण कई दिनों तक बने रहते हैं. जब हृदय मांसपेशियों और अंगों को पर्याप्त ऑक्सीजन युक्त रक्त पंप नहीं कर पाता है, तो शरीर ऑक्सीजन की मात्रा को बढ़ाने के लिए तेजी से और तेज श्वास को ट्रिगर करके प्रतिक्रिया करता है. ऐसे में हार्ट फेल्योर तब होता है, जब हृदय शरीर के बाकी हिस्सों की ऑक्सीजन की मांग को पूरा नहीं कर पाता है.
अन्य कारण: डिहाइड्रेशन, अस्थमा, लंग्स कंडीशन, एंजायटी, पैनिक अटैक, उत्तेजक दवाओं का ओवरडोज और लंबे समय तक फेफड़ों में रुकावट जैसी स्थितियां श्वसन दर के तेज होने या बढ़ने के लिए जिम्मेदार हो सकती हैं.
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श्वसन दर घटने के कारण
इसके लिए निम्न कारक जिम्मेदार हो सकते हैं-
शराब: शराब केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करती है. आप जितना अधिक इसका सेवन करते हैं उतनी ही श्वसन दर घटती रहती है.
नशीले पदार्थ और ड्रग्स: केंद्रीय तंत्रिका तंत्र पर नशीले पदार्थों का बड़ा प्रभाव हो सकता है. कुछ दवाएं डिप्रेसेंट के रूप में कार्य कर सकती हैं, जबकि अन्य उत्तेजक के रूप में कार्य करती हैं. ब्लड प्रेशर से लेकर श्वसन दर तक इसका प्रभाव पूरे सिस्टम पर देखा जा सकता है. मारिजुआना, भ्रम पैदा करने वाली दवाएं और ओपिओइड सभी श्वसन दर को घटाने या कम करने के लिए जानी जाती हैं.
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हाइपोथायरायडिज्म: हाइपोथायरायडिज्म फेफड़ों की मांसपेशियों को कमजोर कर सकता है, जिससे सांस लेना मुश्किल हो जाता है. यह आपकी सामान्य श्वसन दर को धीमा कर सकता है.
मस्तिष्क की चोट या स्ट्रोक: ब्रेन में लगी चोट या स्ट्रोक की सामान्य जटिलताओं में से एक श्वसन प्रणाली की शिथिलता है. स्ट्रोक के कारण श्वसन दर में परिवर्तन मामूली से गंभीर हो सकता है.
स्लीप एप्निया: यह ऐसी स्थिति है, जिसमें नींद के दौरान आपके सांस लेने का तरीका बाधित हो जाता है. इससे श्वसन दर घटने लगती है.
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सारांश
श्वसन दर हर एक व्यक्ति में अलग होती है. बच्चों से लेकर वयस्कों में यह अलग-अलग होती हैं. आमतौर पर 12 से 20 श्वास प्रति मिनट स्टैंडर्ड मानी जाती है. आप आराम से 1 मिनट का टाइमर लगाकर अपनी श्वास को कांउट कर सकते हैं. आपको अगर सांस लेने में कठिनाई हो, तो डॉक्टर को दिखाना चाहिए और इसका सही तरह से इलाज करवाना चाहिए. तेज, उखड़ी हुई सांस एक मेडिकल कंडीशन हो सकती है, हालांकि इसकी गंभीरता भिन्न हो सकती हैं. तेजी से सांस लेने पर या सही तरह से सांस न आने पर डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें.
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श्वसन दर किसे कहते हैं, नार्मल कितनी होती और मापने का तरीका के डॉक्टर
Dr. Mothiganesh gnanasekaran
श्वास रोग विज्ञान
1 वर्षों का अनुभव
Dr. Sayli Sawant
श्वास रोग विज्ञान
6 वर्षों का अनुभव
Dr. Devesh Kanoongo
श्वास रोग विज्ञान
18 वर्षों का अनुभव



