हाइपोथर्मिया​ क्या है?

हाइपोथर्मिया तब होता है जब शरीर तेज़ी से गर्मी खोता है और ठंडा हो जाता है। इस दौरान शरीर का तापमान 35 डिग्री सेल्सियस (95 डिग्री फेरनहाइट) से नीचे गिर जाता है। सामान्य शरीर का तापमान 37 डिग्री सेल्सियस (98.6 ℉) है। आमतौर पर, हाइपोथर्मिया तब होता है जब शरीर का तापमान ठंडे वातावरण के कारण काफी कम हो जाता है। हाइपोथर्मिया अक्सर ठंडे मौसम में या ठन्डे पानी में जाने से होता है। यह 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे के इनडोर तापमान में रहने से भी हो सकता है। साथ ही शरीर में थकान और पानी की कमी होने से भी हाइपोथरमिया होने का जोखिम बढ़ जाता है। हो सकता है इसके कारण आपको बहुत नींद आए, आप कन्फ्यूज्ड रहें, और खराब महसूस करें।

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चूंकि यह धीरे-धीरे होता है और आपकी सोच को प्रभावित करता है इसिलिये आपको पता ही नहीं लगता कि आपको मदद की ज़रूरत हैऔर यह और खतरनाक हो जाता है। हाइपोथर्मिया का परीक्षण डॉक्टर द्वारा चिकित्सीय इतिहास, लक्षणों और शरीर के तापमान के आधार पर किया जाता है।

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आपको उन परिस्थितियों से बचना चाहिए जो आपको हाइपोथर्मिया के खतरे में डाल सकती हैं। सर्दी में बाहर जाने पर सुरक्षात्मक दस्ताने, मोजे और टोपी पहनें।

हाइपोथर्मिया का उपचार इसकी गंभीरता पर निर्भर करता है। हल्के हाइपोथर्मिया का उपचार गर्म कंबल, हीटर और गर्म पानी की बोतलों का उपयोग कर ठंड से बच कर किया जाता है। मध्यम से गंभीर हाइपोथर्मिया का आमतौर पर अस्पताल में इलाज किया जाता है, जहां डॉक्टर शरीर को गर्म करने के लिए विशेष तकनीकों का उपयोग करते हैं।

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यदि शरीर का तापमान 32 डिग्री सेल्सियस (90 डिग्री फ़ेरेनहाइट) से नीचे गिरता है, तो हाइपोथर्मिया घातक हो सकता है।

  1. हाइपोथर्मिया के प्रकार - Types of Hypothermia in Hindi
  2. हाइपोथर्मिया के लक्षण - Hypothermia Symptoms in Hindi
  3. हाइपोथर्मिया के कारण - Hypothermia Causes in Hindi
  4. हाइपोथर्मिया के बचाव के उपाय - Prevention of Hypothermia in Hindi
  5. हाइपोथर्मिया का निदान - Diagnosis of Hypothermia in Hindi
  6. हाइपोथर्मिया का इलाज - Hypothermia Treatment in Hindi
  7. हाइपोथर्मिया की जटिलताएं - Hypothermia Risks & Complications in Hindi
  8. हाइपोथर्मिया के डॉक्टर

हाइपोथर्मिया कितने  प्रकार का होता है?

हाइपोथर्मिया को हल्के, मध्यम या गंभीर रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है:

  • हल्का हाइपोथर्मिया (32-35 डिग्री सेल्सियस)

  • मध्यम हाइपोथर्मिया (28-32 डिग्री सेल्सियस)

  • गंभीर हाइपोथर्मिया (28 डिग्री सेल्सियस से नीचे)

हाइपोथर्मिया के लक्षण क्या हैं?

हाइपोथर्मिया के शुरुआती संकेत निम्नलिखित हैं :

बीमारी बढ़ने पर लक्षण :

डॉक्टर को कब दिखाएं?

हाइपोथर्मिया एक आपात स्थिति है। अगर आपको संदेह है कि आपको या किसी और को हाईपोथर्मिया है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

हाइपोथर्मिया क्यों होता है?

1. शराब और ड्रग्स

शराब पीने या नशीले पदार्थों के सेवन से ठंड महसूस करने की क्षमता प्रभावित होती है। आप बहुत ठंडे मौसम में बाहर बेहोश हो सकते हैं। शराब विशेष रूप से खतरनाक है क्योंकि इससे व्यक्ति को शरीर के भीतर से गर्म होने का भ्रम होता है जबकि हकीकत में, शराब पीने से रक्त वाहिकाएं फैल जाती हैं जिससे शरीर गर्माहट और तेज़ी से खो देता है।

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2. दवाएं

कुछ एंटीड्रिप्रेसेंट्स, सेडेटिव्स और एंटीसाइकोटिक दवाएं शरीर की तापमान को नियंत्रित करने की क्षमता को प्रभावित कर सकती हैं। यदि आप ऐसी दवाएं ले रहे हैं, तो अपने डॉक्टर से बात करें, खासकर तब जब आप अक्सर ठंड में बाहर काम करते हैं या किसी ठंडी जगह पर रहते हैं।

3. बीमारियां

कुछ बीमारियां शरीर की उपयुक्त तापमान बनाए रखने या ठंड महसूस करने की क्षमता को प्रभावित कर सकती हैं। इन बीमारियों में निम्न शामिल हैं:

  • हाइपोथायरायडिज्म, जो तब होता है जब आपका थायराइड ग्रंथि बहुत कम हार्मोन पैदा करती है
  • मधुमेह
  • गठिया
  • निर्जलीकरण (डिहाईड्रेशन)

पार्किंसंस रोग, जो एक तंत्रिका तंत्र विकार है जो शारीरिक क्रियाओं को प्रभावित करता है। 

जोखिम कारक :

  • आप कहाँ रहते हैं: जहां आप रहते हैं वो जगह भी शारीरिक तापमान के गिरने के जोखिम को बढ़ा सकती है। उन क्षेत्रों में रहना जहां तापमान अक्सर बहुत कम रहता है, अत्यधिक ठंड के संपर्क में आने के जोखिम को बढ़ाता है।
  • जो लोग गंभीर रूप से बीमार हैं, खासकर कार्डियोवैस्कुलर बीमारी से पीड़ित लोग। 
  • आयु : शिशुओं और बुजुर्ग वयस्कों को हाइपोथर्मिया का सबसे ज़्यादा जोखिम होता है। यह उनके शरीर की तापमान को नियंत्रित करने की कम क्षमता के कारण होता है। ऐसे लोगों को ठंड के मौसम के लिए तैयार रहना चाहिए। हाइपोथर्मिया से बचने के लिए घर पर एयर कंडीशनिंग भी नियंत्रित करनी चाहिए।
  • मानसिक बीमारी और डिमेंशिया: मानसिक बीमारियां, जैसे स्किज़ोफ्रेनिया और बापोलर डिसऑर्डर, से हाइपोथर्मिया का जोखिम बढ़ जाता है। डिमेंशिया या स्मृति हानि भी हाइपोथर्मिया के जोखिम को बढ़ा सकती है। हो सकता है किसी मानसिक बीमारी से ग्रस्त लोग ठंड के मौसम के लिए उचित रूप से कपड़े न पहनें। वे यह भी महसूस नहीं करते कि उनका शरीर ठंडा पड़ रहा है और परिणामस्वरूप ठंडे मौसम में बहुत लंबे समय तक बाहर रहते हैं।
  • कुपोषित लोग
  • बहुत ज़्यादा थकान

हाइपोथर्मिया से कैसे बचें?

  • बाहर यात्रा की योजना बनाते समय मौसम पूर्वानुमान सुनें।
  • आगे की योजना बनाएं: बाहरी श्रमिकों के लिए शरीर को गर्म रखने के लिए ब्रेक शेड्यूल करें, ब्रेक के समय अंदर रहें, बाहर रहने के समय को सीमित करें।
  • सही से कपड़े पहनना हाइपोथर्मिया से बचने का सबसे सरल उपाय है। ठंड के दिनों में कई परतों वाली पोशाक पहनें, भले ही आपको बाहर बहुत ठंड ना लगे। सर्दियों के दौरान शरीर के सभी अंगों को ढकें, और टोपी, दस्ताने और स्कार्फ पहनें। इसके अलावा, ठंडे दिनों में बाहर व्यायाम करते समय सावधानी बरतें। पसीना शरीर को ठंडा कर सकता है और हाइपोथर्मिया के जोखिम को बढ़ा सकता है। हाइपोथर्मिया को रोकने के लिए शरीर का तापमान सामान्य रखना महत्वपूर्ण है।
  • सूखे रहें (गीले कपड़े शरीर को तेजी से ठंडा करते हैं)।
  • जैसे ही आपको सर्दी लगे तभी किसी गर्म स्थान पर जाएं।
  • शराब, सिगरेट, कैफीन और कुछ दवाएं ठंड लगने के जोखिम को बढ़ाती हैं।
  • हाइपोथर्मिया घर में भी हो सकता है: सुनिश्चित करें कि घर में पर्याप्त हीटिंग है, खासकर वृद्ध लोगों के लिए।
  • अत्यधिक पसीने वाली गतिविधियों से बचें।

हाइपोथर्मिया का परीक्षण कैसे होता है?

  • इसका परीक्षण आम तौर पर व्यक्ति के लक्षणों और उस परिस्थिति के आधार पर किया जाता है जिसमें वह पाया गया था। हालांकि, उससे कुछ स्पष्ट नहीं होता तो कोर बॉडी तापमान को विशेष लो-रीडिंग थर्मामीटर से मापा जा सकता है (सामान्य चिकित्सा थर्मामीटर 32-34 डिग्री सेल्सियस से नीचे का तापमान नहीं माप पाते)।
  • हल्का हाइपोथर्मिया: 32-35 डिग्री सेल्सियस।
  • गंभीर हाइपोथर्मिया: 32 डिग्री सेल्सियस से नीचे।

हाइपोथर्मिया का इलाज क्या है?

हाइपोथर्मिया के उपचार का लक्ष्य आपके शरीर के तापमान को सामान्य करना है। आपातकालीन देखभाल से पहले, प्रभावित व्यक्ति या उनकी देखभाल करने वाले व्यक्ति को स्थिति का समाधान करने के लिए निम्न कदम उठाने चाहियें :

1. पीड़ित व्यक्ति की अच्छे से देखभाल करें

रक्त प्रवाह बहाल करने के प्रयास में उनके हाथ पैरों को न रगड़ें। शरीर को अत्यधिक हिलाना कार्डियक अरेस्ट का कारण बन सकता है। उन्हें ठंड से बचाएं।

2. पीड़ित व्यक्ति के गीले कपड़े उतार दें।

गीले कपड़े, टोपी, दस्ताने, जूते, और मोजे उतार दें। यदि आवश्यक हो, तो व्यक्ति को हिलाने से बचने के लिए गीले कपड़ों को काट दें। व्यक्ति के मुंह को छोड़ कर पूरा शरीर कंबल से ढकें। यदि कंबल उपलब्ध नहीं हैं, तो उन्हें गर्मी देने के लिए अपने शरीर का उपयोग करें। उसे हवा के झोंकों से बचाएं।

थर्मामीटर उपलब्ध होने पर व्यक्ति का तापमान देखें। यदि व्यक्ति होश में है, तो उसे गर्म पेय या सूप देने का प्रयास करें, जो शरीर के तापमान को बढ़ाने में मदद कर सकते हैं। शराब और कैफीन से बचें, क्योंकि इनसे शरीर तेज़ी से गर्माहट खोता है। यदि व्यक्ति बेहोश है तो उसको तरल पदार्थ न दें।

3. गर्म पट्टी करें

जितनी जल्दी हो सके व्यक्ति को गर्म, शुष्क आश्रय में ध्यानपूर्वक ले जाएं।

व्यक्ति को निवाए (बहुत गर्म नहीं) पानी की बोतल, पट्टी या गर्म तौलिया लगाएं। केवल छाती, गर्दन, या ग्रोइन पर पट्टी करें, बाहों या पैरों पर नहीं। बाहों या पैरों पर पट्टी करने से ठंडा खून दिल, फेफड़ों और मस्तिष्क की ओर जाता है, जो घातक हो सकता है। हीटिंग पैड या लैंप का उपयोग न करें।

बहुत गर्म पानी त्वचा को जला सकता है और कार्डियक अरेस्ट का कारण बन सकता है।

(और पढ़ें - कार्डियक अरेस्ट और हार्ट अटैक में अंतर)

4. चिकित्सकीय इलाज

गंभीर हाइपोथर्मिया का चिकित्सकीय इलाज गर्म तरल पदार्थ (अक्सर नमकीन) नसों में इंजेक्शन लगा कर किया जाता है। डॉक्टर रक्त को दोबारा गर्म करते है (एक प्रक्रिया जिसमें वे रक्त निकालते हैं, उसे गर्म करते हैं, और फिर शरीर में वापस डाल देते हैं)।

मास्क और नेजल ट्यूबों (नाक में डाली जाने वाली ट्यूब) के माध्यम से एयरवे रिवार्मिंग भी की जा सकती है। कैविटी लैवेज (पंप के माध्यम से पेट को गर्म करना), जिसमें पेट में नमक का गर्म पानी पंप हो जाता है, भी मददगार हो सकता है।

यदि हाइपोथर्मिक व्यक्ति बेहोश है, या नाड़ी और श्वास के कोई संकेत नहीं है, तो तुरंत एम्बुलेंस को कॉल करें। सीपीआर एक ऐसे व्यक्ति के लिए आपातकालीन प्रक्रिया है जिसके दिल की गति और श्वास रुक जाती है। आपातकालीन सहायता आने तक सीपीआर परिसंचरण (सर्कुलेशन) और सांस लेने में मदद कर सकती है। यदि नाड़ी और सांस के कोई संकेत नहीं है तो सीपीआर (कार्डियोपुलमोनरी पुनर्वसन) तत्काल दिया जाना चाहिए। सीपीआर शुरू करने से पहले एक मिनट तक पल्स ढूंढें। हो सकता है दिल की दर बहुत धीमी हो और अगर ऐसा है तो आपको सीपीआर शुरू नहीं करना चाहिए।

सांस या नाड़ी के संकेतों की अनुपस्थिति में सीपीआर तब तक किया जाना चाहिए, जब तक एम्बुलेंस नहीं आती है।

(और पढ़ें - प्राथमिक चिकित्सा क्या है)

 

हाइपोथर्मिया से होने वाली समस्याएं क्या हैं?

जटिलताओं से बचने के लिए तत्काल चिकित्सा महत्वपूर्ण है। जितना अधिक आप प्रतीक्षा करेंगे, हाइपोथर्मिया से उतनी अधिक जटिलताएं उत्पन्न होंगी जो कि निम्नलिखित हैं :

  • गैंग्रीन, या ऊतक नष्ट होना
  • ट्रेंच फुट (पानी में पैर डालने के कारण तंत्रिका और रक्त वाहिका नष्ट होना)
  • फ्रॉस्टबाइट, या ऊतकों का नष्ट होना, सबसे आम जटिलता है जो तब होती है जब शरीर के ऊतक जम जाते हैं
  • तंत्रिकाओं और रक्त वाहिकाओं को क्षति (और पढ़ें - न्यूरोपैथी क्या है)

कुछ मामलों में हाइपोथर्मिया जानलेवा भी सकता है।

Dr. Kapil Sharma

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Dr. Mayank Yadav

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Dr. Nilesh shirsath

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