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हेल्थ को लेकर सावधान रहना सभी के लिए जरूरी है, चाहे वह बूढ़ा हो या बच्चा, लेकिन आमतौर पर जन्म से लेकर किशोरावस्था तक बच्चे खुद का अच्छा बुरा उतने अच्छे से नहीं समझ सकते हैं, जितना कि उसके माता-पिता या परिवार के अन्य बड़े सदस्य सोच सकते हैं। दूसरी तरफ बच्चे को कोई स्वास्थ्य संबंधी दिक्कत नहीं होगी, इस बात को लेकर कोई गारंटी नहीं दे सकता है। यही सोचकर कई लोगों के मन में इस तरह का प्रश्न आता है कि क्या बच्चों के लिए हेल्थ इन्शुरन्स लिया जा सकता है, और यदि ले सकते हैं तो इसके लिए सबसे बढ़िया तरीका क्या रहेगा? क्योंकि यदि उनके आगे किसी तरह की स्वास्थ्य संबंधी परेशानी आ गई, तो ऐसे में माता-पिता के लिए मानसिक परेशानी के साथ-साथ वित्तीय परेशानियां भी बढेंगी और उनके निपटान में भी समय लगेगा।

इस लेख में बताया गया है कि बच्चों को हेल्थ इन्शुरन्स की सुविधा कैसे मिल सकती है, कम से कम उम्र क्या होनी चाहिए, नवजात के लिए क्या नियम हैं इत्यादि।

  1. चाइल्ड हेल्थ इन्शुरन्स व उम्र - Child health insurance and age in Hindi
  2. बच्चे के​ लिए हेल्थ इन्शुरन्स व सुविधाएं - Health insurance and facilities for the child in Hindi
  3. बच्चों के लिए बेहतर हेल्थ इन्शुरन्स - Best health insurance for kids in Hindi
  4. क्या नवजात के लिए हेल्थ इन्शुरन्स लिया जा सकता है? - Are newborns covered by health insurance?
  5. चाइल्ड हेल्थ इन्शुरन्स की न्यूनतम आयु - Minimum age for child insurance in Hindi
  6. चाइल्ड हेल्थ इन्शुरन्स आवेदन का तरीका और प्रीमियम - Child Health Insurance mode of application and aremium in Hindi
  7. चाइल्ड हेल्थ इन्शुरन्स के लिए दस्तावेज - Documents for child health insurance in Hindi
  8. बच्चों के लिए हेल्थ इन्शुरन्स पॉलिसी क्यों जरूरी है? - Why is a health insurance policy necessary for children in Hindi
  9. बच्चों के लिए हेल्थ इन्शुरन्स लेने के फायदे - Benefits of taking health insurance for children in Hindi
  10. बच्चों के लिए स्वास्थ्य बीमा खरीदते समय याद रखने योग्य बातें - Things to Remember while Purchasing Health Insurance for Children in Hindi

हेल्थ इन्शुरन्स एक सुविधा है, जिसमें स्वास्थ्य का बीमा होता है और मुसीबत के समय यह बीमा आपको वित्तीय परेशानियों से बचाता है। यह ​बीमा कोई एक व्यक्ति अपने लिए ले सकता है या पूरे परिवार के लिए फैमिली फ्लोटर प्लान ले सकता है या एक हेल्थ इन्शुरन्स प्लान में परिवार के सभी सदस्यों के लिए अलग-अलग कवर भी ले सकता है। इसके अलावा आपने सीनियर सिटीजन हेल्थ इन्शुरन्स भी सुना होगा, जो विशेष रूप से बुर्जुगों के लिए डिजाइन किया गया है। कई बार विशेष बीमारियों के लिए भी हेल्थ इन्शुरन्स योजनाएं डिजाइन किए जाते हैं। यदि आप बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति जागरुक हैं, तो बता दें कि बच्चों के लिए हेल्थ इन्शुरन्स में कोई उम्र निर्धारित नहीं है, लेकिन एक बीमाकर्ता से दूसरे बीमाकर्ताओं के नियम व शर्तों में अंतर हो सकता है। वैसे, चाइल्ड इन्शुरन्स प्लान का लाभ उठाने के लिए स्टैंडर्ड उम्र 18 वर्ष है। इसके अलावा ऐसे कई प्लान हैं, जिनमें बच्चों को कवर किया जाता है।

(और पढ़ें - सबसे अच्छा हेल्थ इन्शुरन्स कौन सा है)

यदि आप अपने बच्चे के​ लिए बेहतरीन हेल्थ इन्शुरन्स ढूंढ रहे हैं, तो सबसे अच्छा रहेगा कि आप ​ऐसे फैमिली हेल्थ इन्शुरन्स प्लान के बारे में पता करें, जिसमें बच्चों को वह सारे लाभ मिलें, जो बड़ों को मिल सकते हैं। ऐसी योजनाएं आमतौर पर बच्चों सहित परिवार के 4 से 7 सदस्यों को कवर करती हैं। इन्शुरन्स कंपनियां इन पॉलिसी के माध्यम से कैशलेस क्लेम, रिइम्बर्समेंट और टैक्स बेनिफिट भी देती हैं।

इसके अलावा यदि आपको लगता है कि मौजूदा प्लान में बच्चों को जोड़ने के बाद हेल्थ पॉलिसी में लिया गया कवर कम पड़ जाएगा, तो आप इसे बढ़ा सकते हैं। बता दें, कवर या बीमा कवर वह राशि है, जिसका आप बीमा कंपनी से अधिकतम लाभ ले सकते हैं। हालांकि, ​कवर बढ़ाने के साथ ही आपका प्रीमियम भी बढ़ जाएगा।

(और पढ़ें - टॉप अप हेल्थ इन्शुरन्स क्या है)

कैशलेस क्लेम

इसमें नेटवर्क अस्पताल से इलाज कराने पर वहां किसी तरह से पेमेंट करने की जरूरत नहीं होती है। हालांकि, कुछ छोटी-मोटी फॉर्मलिटीज करनी होती हैं, जैसे यदि प्लान करके बच्चे को भर्ती कराया जाना है तो ऐसे में आमतौर पर 48 घंटे पहले या अचानक से भर्ती कराया गया है तो ऐसे में भर्ती होने के 24 घंटे के अंदर बीमा कंपनी या टीपीए को जानकारी देनी होती है। इलाज पूरा हो जाने के बाद अस्पताल के खर्चों से संबंधित सभी दस्तावेजों को टीपीए या बीमा कंपनी को भेजना होता है और फिर कंपनी इन डॉक्यूमेंट्स की जांच करती है और उस अस्तपाल से बात करके क्लेम सेटलमेंट कर लेती है। ध्यान रहे, वास्तव में कितने समय पहले अपने टीपीए/बीमा कंपनी को जानकारी देनी है इसके बारे में आप अपना पॉलिसी बॉन्ड पढ़ें।

रिइम्बर्समेंट

इसमें अस्पताल का पूरा बिल चुकाने की जरूरत होती है। हालांकि, डिस्चार्ज से जुड़े पेपर के साथ-साथ इलाज से संबंधित सभी पेपर को टीपीए/बीमा कंपनी को जमा करना होता है। यदि टीपीए को दस्तावेज दिए हैं तो वे उन्हें बीमा कंपनी को भेजेंगे, जहां इनकी जांच की जाएगी और यदि सीधे बीमा कंपनी में पेपर्स भेजे हैं तो आमतौर इस प्रक्रिया में समय कम लगेगा। पेपर चेक करने के बाद बीमा कंपनी हॉस्पिटल से संपर्क करती है और यदि सब कुछ नियम व शर्तों के तहत है, तो अस्पताल का पूरा बिल या कुछ मामलों में बिल का कुछ प्रतिशत बीमित व्यक्ति को लौटा दिया जाता है। दो बातें ध्यान रहें, रिइम्बर्समेंट के मामले में तुरंत पैसा नहीं मिलता, य​​ह कुछ दिनों के अंतर पर मिलता है। दूसरा, टीपीए की व्यवस्था सभी हेल्थ इन्शुरन्स कंपनी के पास नहीं होती है। ऐसे में सीधे बीमा कंपनी के एजेंट या कंपनी के कस्टमर केयर को कॉन्टैक्ट करना होता है।

आमतौर पर आपने देखा होगा कि नौकरी लगते ही लोग बीमा पॉलिसी ले लेते हैं, लेकिन जैसे-जैसे परिवार बढ़ता है यानी बच्चे हो जाते हैं तो माता-पिता के मन में अलग से हेल्थ इंश्योरेंस प्लान लेने का खयाल आता है। या हो सकता है कि वे मौजूदा हेल्थ इंश्योरेंस प्लान को खत्म करके नई व ऐसी पॉलिसी लेने की सोच रहे हों, जिसमें बच्चों को भी कवरेज मिले। लेकिन बता दें, कि आप पहले से चल रही हेल्थ बीमा पॉलिसी में ही बच्चों का नाम जोड़ सकते हैं। हालांकि, कई पॉलिसीधारक इस बारे में नहीं जानते हैं, लेकिन य​ह सुविधा आसान और किफायती भी है।

मान लीजिए आप अपनी इंडिविजुअल हेल्थ पॉलिसी में बच्चों को जोड़ना चाहते हैं, तो इसके लिए आपको सबसे पहले अपनी हेल्थ पॉलिसी को फैमिली फ्लोटर प्लान में बदलवाना होगा। इसके बाद उसमें बच्चों को जोड़ा जा सकता है। अब रही बात फैमिली फ्लोटर प्लान की तो यह भी एक हेल्थ इन्शुरन्स ही है, जिसमें पूरे परिवार को कवर मिलता है। इसकी विशेषता यह है कि एक ही पॉलिसी में सभी सदस्य कवर हो जाते हैं। यहां तक कि सम-इनश्योर्ड (बीमा राशि) भी एक ही होती है और एक ही प्रीमियम भी जमा होता है। दूसरी विशेषता यह है कि मान लीजिए फैमिली फ्लोटर प्लान में सम-इनश्योर्ड 20 लाख है, तो ऐसे में परिवार का एक सदस्य भी पूरे सम-इनश्योर्ड का लाभ ले सकता है और पूरा ​परिवार मिलकर भी सम-इनश्योर्ड का फायदा ले सकता है। ऐसे में बच्चों को भी वही फायदा मिलेगा, जो परिवार के अन्य सदस्य को मिलेगा। बता दें, ऐसा करना नई पॉलिसी लेने से आसान और किफायती है।

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जन्म से लेकर एक माह तक के बच्चे को नवजात कहा जाता है। ऐसे बच्चों के लिए अलग से हेल्थ इन्शुरन्स नहीं लिया जा सकता है, क्योंकि जीवन के शुरुआती समय में कई तरह के जोखिम बने रहते हैं।

वास्तव में, नवजातों में पैदा होने के दौरान प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होती है, जो पूरी तरह से विकसित होने में कुछ समय लेती है। जब तक प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर है तब तक कई बीमारियों से लड़ने की शरीर की क्षमता सीमित या कम रहती है, और यही वजह है कि नवजातों में स्वास्थ्य संबंधी जोखिम कुछ माह तक बने रह सकते हैं। लेकिन हां, आप चाहें तो फैमिली फ्लोटर, या ग्रुप हेल्थ इन्शुरन्स पॉलिसी के साथ नवजात को जोड़ा जा सकता है।

(और पढ़ें - इम्यूनिटी बढ़ाने के उपाय)

मैटरनिटी इन्शुरन्स के माध्यम से

पहले मैटरनिटी इन्शुरन्स को समझते हैं- यह एक ऐसी बीमा योजना है, जो केवल गर्भवती महिला व उसके बच्चे के स्वास्थ्य को कवर करती है। हालांकि, ज्यादातर इसे राइडर के तौर पर लिया जाता है, जिसका मतलब है कि एक्ट्रा प्रीमियम देकर एक्ट्रा सुविधा लेना। इसमें नॉर्मल डिलीवरी व ऑपरेशन दोनों तरह के खर्चों को कवर किया जाता है। अब चूंकि इसमें बच्चे के स्वास्थ्य को भी कवर किया जाता है ऐसे में आप कह सकते हैं कि नवजातों को हेल्थ इन्शुरन्स पॉलिसी में जोड़ा जा सकता है।

हालांकि, मैटरनिटी प्लान के तहत बच्चे के जन्म से शुरुआती 90 दिनों तक कवरेज मिलती है। इस अवधि के पूरा हो  जाने के बाद, माता-पिता अतिरिक्त प्रीमियम का भुगतान करके अपने बच्चे को नियमित स्वास्थ्य पॉलिसी में जोड़ सकते हैं।

ग्रुप हेल्थ इन्शुरन्स के माध्यम से

पहले ग्रुप हेल्थ इन्शुरन्स और रेगुलर हेल्थ इन्शुरन्स में अंतर समझते हैं- रेगुलर हेल्थ इन्शुरन्स में आमतौर पर बीमारियों के इलाज के लिए वेटिंग पीरियड होता है, जिसका मतलब है कि कुछ निश्चित समय निकल जाने के बाद ही आप इन्शुरन्स के पैसे के ह​कदार होंगे। जबकि ग्रुप हेल्थ इन्शुरन्स में ऐसा नहीं होता है, इसमें मेडिकल जांच की जरूरत नहीं होती है और इसमें प्रीमियम भी कम होता है। चूंकि इसमें बड़ी संख्या में एक साथ लोगों का बीमा किया जाता है, इसलिए बीमा देने वाली कंपनी को बड़े पैमाने पर फायदा होता है। अब रही बात कि यह क्या-क्या कवर करता है, तो बता दें कि ग्रुप हेल्थ इन्शुरन्स में आमतौर पर अचानक से अस्पताल में भर्ती होना, कोविड, गंभीर बीमारियां, मैटरनिटी इत्यादि कवरेज दिया जाता है और जैसा कि ऊपर बताया है कि मैटरनिटी में मां व नवजात दोनों को कवर किया जाता है।

चूंकि पैदा होने के कुछ समय, दिनों या हफ्तों तक बच्चे में स्वास्थ्य से जुड़े जोखिम बने रहते हैं, ऐसे में एक निश्चित समय के बाद हेल्थ इन्शुरन्स कंपनियां नवजात के लिए न्यूनतम उम्र का निर्धारण करती हैं, हालांकि, बीमा कंपनियों के लिए उम्र की सीमा अलग-अलग हो सकती है, लेकिन आमतौर पर वे 90 दिनों के बाद बच्चे को कवर में शामिल करती हैं। यदि आप अपने बच्चे के लिए अलग से हेल्थ इन्शुरन्स प्लान लेना चाहते हैं तो myUpchar बीमा प्लस पॉलिसी ले सकते हैं। यह पॉलिसी लेने के लिए किसी भी व्यक्ति की उम्र कम से कम 10 वर्ष होना अनिवार्य है। हालांकि, अधिकतर बीमा कंपनिया किसी भी व्यक्ति को अलग से हेल्थ इन्शुरन्स तभी देती हैं, जब उसकी उम्र कम से कम 18 वर्ष हो या फैमिली हेल्थ प्लान में 18 वर्ष से अधिक उम्र का कोई व्यक्ति शामिल हो।

बच्चे को अपनी मौजूदा हेल्थ पॉलिसी में जोड़ने के लिए अलग से आवेदन करने की जरूरत पड़ती है, जो कि हर साल किए जाने वाले नवीनीकरण (रिन्यू) के समय किया जा सकता है। यदि हेल्थ इन्शुरन्स कंपनी पहले दिन से बच्चे को कवर करने के लिए सहमत है, तो कंपनी को बच्चे के जन्म के एक सप्ताह के अंदर इस बारे में जानकारी दे देनी चाहिए।

जब आप नवजात को मौजूदा हेल्थ पालिसी से जोड़ेंगे, तो इस दौरान आपको इस बात का ध्यान रखना होगा कि मौजूदा प्रीमियम में कुछ बदलाव होंगे। सरल शब्दों में कहें तो, प्रीमियम थोड़ा बढ़ जाएगा।

(और पढ़ें - सबसे सस्ता हेल्थ इन्शुरन्स)

नवजात के ​मामले में कवर के लिए बच्चे के जन्म से जुड़े दस्तावेज देने होंगे। आमतौर पर इसमें असली जन्म प्रमाणपत्र, अस्पताल से मिलने वाले बच्चे के जन्म संबधी पेपर, अस्पताल से डिस्चार्ज रिपोर्ट शामिल होते हैं।

छोटे बच्चों में वयस्कों की तुलना में बीमारियों का जोखिम अधिक बना रहता है। इसका मुख्य कारण उनकी जीवनशैली है, जिसमें समय पर खानपान न करना, अक्सर बाहर का खाना, साफ-सफाई वाले भोजन के प्रति सजग न रहना, इत्यादि शामिल हैं। इसलिए, यदि आप बच्चों को हेल्थ इन्शुरन्स पॉलिसी में जो​ड़ने की सोच रहे हैं, तो यह आपका अच्छा निर्णय हो सकता है।

(और पढ़ें - हेल्थ इन्शुरन्स में क्या-क्या कवर होता है)

बच्चों के लिए हेल्थ इन्शुरन्स आमतौर पर निम्नलिखित तरीके से फायदेमंद हो सकता है।

1. कम प्रीमियम : बच्चों के लिए हेल्थ इन्शुरन्स आप चाहें राइडर के तौर पर लें या अलग से, दोनों में प्रीमियम कम होता है।
2. बड़े स्तर पर कवरेज : आमतौर पर, बच्चों के लिए कवरेज सुविधाओं में कोई प्रतिबंध नहीं है और उन्हें बड़े स्तर पर कवरेज दिया जाता है।
3. अतिरिक्त सुविधाएं : बच्चों को विशेषज्ञों से परामर्श, पोषण और आहार की जानकारी आदि सुविधाएं अतिरिक्त सेवा के रूप में मिल सकती हैं।
4. नो क्लेम बोनस : बच्चों के लिए कुछ हेल्थ इंश्योरेंस प्लान नो क्लेम बोनस की पेशकश करते हैं। इसका मतलब यह हुआ कि यदि आप क्लेम नहीं करते हैं तो हेल्थ इन्शुरन्स कंपनी प्रीमियम पर रियायत दे सकती है या आपका सम-इनश्योर्ड बढ़ा सकती है।

(और पढ़ें - मैटरनिटी इन्शुरन्स के फायदे)

बच्चों के लिए स्वास्थ्य बीमा खरीदते समय आपको नीचे दी गई महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना चाहिए :

  • उम्र का रखें ध्यान : जब बच्चों के लिए स्वास्थ्य बीमा योजना खरीदने की बात आती है, तो हमेशा कम से कम उम्र पर स्वास्थ्य बीमा लेने की सलाह दी जाती है।
  • व्यक्तिगत योजनाएं : बच्चों के परिपक्व (मैच्योर) होने पर उनके लिए व्यक्तिगत स्वास्थ्य बीमा योजना लेना ही उचित है। क्योंकि इसमें ज्यादा कवरेज मिलता है, हालांकि, प्रीमियम की राशि भी अधिक होगी। जीवन के शुरुआती वर्षों या 20 साल के आसापास बच्चे अक्सर अपने करियर की ओर फोकस रहते हैं और स्वास्थ्य बीमा खरीदने की ओर उनका ध्यान नहीं जाता या यूं कहिए कि इस बारे में उन्हें सही से जानकारी नहीं होती है। इसलिए, माता-पिता होने के नाते आप पहल कर सकते हैं और सही बीमा योजना खरीदने में उनकी सहायता कर सकते हैं।
  • फैमिली हेल्थ इन्शुरन्स : अगर आपके बच्चों की उम्र 21 या 25 साल से कम है (कंपनी की पॉलिसी के मुताबिक), तो आप उन्हें अपने फैमिली हेल्थ इन्शुरन्स प्लान में शामिल कर सकते हैं। इसका फायदा यह होगा कि आपको परिवार के प्रत्येक सदस्य के लिए पॉलिसी नहीं लेनी होगी और न ही अलग से प्रीमियम देना होगा।
  • क्रिटिकल इलनेस प्लान : यदि आप अपने बच्चे के किसी गंभीर बीमारी की चपेट में आने को लेकर चिंतित हैं, तो आप क्रिटिकल इलनेस इन्शुरन्स के बारे में विचार कर सकते हैं। यदि बीमारी स्पष्ट हो जाती है, तो ऐसे में बीमा कंपनी की तरफ से एक निश्चित भुगतान किया जाता है।
  • कर्मचारी समूह बीमा : यदि आप एक वेतनभोगी (सैलरी पाने वाले) व्यक्ति हैं, तो हो सकता है कि आपके नियोक्ता (employer) द्वारा ग्रुप बीमा किया गया हो। आमतौर पर, कई नियोक्ता अपनी पॉलिसी में वेतनभोगी के साथ ही उसके बच्चों सहित पूरे परिवार के सदस्यों को कवर करने का विकल्प देते हैं। हालांकि, यदि आप भविष्य में कंपनी से अलग होने की सोचते हैं, तो इस पॉलिसी का लाभ नहीं उठा सकते हैं। इसलिए केवल इस प्रकार की योजनाओं पर निर्भर रहने की सलाह नहीं दी जाती है।

फिलहाल, मौजूदा दौर में बहुत सी हेल्थ इन्शुरन्स कंपनियां हैं, जो कि 200 के आसपास पॉलिसी बेच रही हैं। ऐसे में हर कंपनी या पॉलिसी के नियमों में विभिन्नता हो सकती है इसलिए निर्णय लेते समय प्रीमियम, सावधानी, नियम व शर्तें, क्या कवर मिलेगा और क्या नहीं मिलेगा इन जानकारियों को अच्छे से पढ़ें और समझें।

(और पढ़ें - डे केयर ट्रीटमेंट में कौन-कौन सी बीमारियां कवर होती हैं)

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