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हड्डियों के बीचों-बीच मौजूद नरम ऊतक को बोन मैरो कहा जाता है। यह रीढ़, कूल्हे और जांघों की हड्डियों में अधिक पाया जाता है। इसमें मूल कोशिकाएं (स्टेम सेल्स) मौजूद होती हैं जो लाल रक्त कोशिकाओं, सफेद रक्त कोशिकाओं और प्लेटलेट्स के अंदर विकसित होती हैं। ये कोशिकाएं ऑक्सीजन के प्रवाह, प्रतिरक्षा तंत्र के कार्य और रक्त के थक्के बनाने में काम आती हैं। 

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कई लोगों को बोन मैरो खाने में बहुत स्वादिष्ट लगता है और इसके कई तरह के स्वास्थ्य लाभ भी होते हैं। सब्जियों को भूनकर और मीट के व्यंजनों के साथ बोन मैरो खाया जाता है। यह मेटाबाॅलिज्म को बढ़ाने, डायबिटीज और हृदय रोगों के जोखिम को कम करने एवं मोटापे से संबंधित कैंसर के खतरे को कम करने में मदद करता है।

वैसे तो बोन मैरो पर अब तक कई अध्ययन हो चुके हैं, लेकिन अभी भी इस पर और अध्ययन किए जाने की जरूरत है। आज इस लेख के जरिए हम आपको बोन मैरो से सेहत को होने वाले फायदों के बारे में बताने जा रहे हैं।

कैंसर से लड़ता है

1950 के दशक में स्वीडन में रहने वाले एक ऑन्कोलॉजिस्ट ने ल्यूकेमिया (ब्लड कैंसर) से पीड़ित कुछ बच्चों को बोन मैरो खाने को दिया था। इस उम्मीद से कि रेडिएशन द्वारा नष्ट हुई सफेद रक्त कोशिकाओं की फिर से भरपाई हो जाएगी। बोन मैरो के सेवन के बाद कुछ बच्चों की हालत में तुरंत सुधार देखा गया था। कुछ बच्चों ने खुद में ऊर्जा महसूस की और उनके शरीर में सफेद रक्त कोशिकाएं सामान्य होने लगीं।

लगभग एक दशक तक चलने वाले इस शोध से पता चला कि बोन मैरो के सेवन से सफेद रक्त कोशिकाओं के उत्पादन को सामान्य किया जा सकता है। इस तरह बोन मैरो की मदद से कैंसर से बचा जा सकता है।

पाचन क्षमता को बेहतर करता है

विशेषज्ञों के अनुसार बोन मैरो को आहार में शामिल करने से पेट में गड़बड़ी, सीलिएक डिजीज, लीकी गट सिंड्रोम से बचा जा सकता है। जिन लोगों का अक्सर पेट खराब रहता है उन्हें बोन मैरो खाने से बहुत फायदा मिलता है।

बोन मैरो में पाए जाने वाले कोलेजन से पोषण मिलता है और आंतों में हुई क्षति की भरपाई भी होती है। यही नहीं बोन मैरो इम्यून सिस्टम को बेहतर कर, पाचन तंत्र से जुड़ी समस्याओं से लड़ने में मदद करता है।

जोड़ों के लिए फायदेमंद

बोन मैरो में कुछ ऐसे घटक होते हैं, जो जोड़ों के स्वास्थ्य को बेहतर रखते हैं। उदाहरण के तौर पर बोन मैरो में ग्लूकोसामिन नाम का घटक होता है जो कि प्राकृतिक रूप से कुछ बीमारियों जैसे ओस्टियोआर्थराइटिस, सूजन और जोड़ों के दर्द को दूर करने में सहायक होता है।

इस वजह से जोड़ों के कार्यों को सुचारू रूप से बनाए रखने के लिए कोलेजन महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कोलेजन, शरीर में सबसे अधिक पाया जाने वाला प्रोटीन है। 6 माह तक 147 एथलीटों पर हुए एक अध्ययन से पता चला है कि प्रतिदिन 10 ग्राम कोलेजन लेने से जोड़ों के दर्द में कमी आती है।

त्वचा बनती है स्वस्थ

त्वचा के लिए कोलेजन उपयोगी तत्व है। 69 महिलाओं पर 8 सप्ताह तक एक अध्ययन हुआ। उन्हें नियमित 2.5 से 5 ग्राम तक कोलेजन दिया गया ताकि त्वचा का लचीलापन और नमी बनी रहे। ठीक ऐसा ही एक अध्ययन छोटे चूहों पर भी किया गया था। अध्ययन से यह स्पष्ट हो गया कि बोन मैरो के सेवन से शरीर में उपयोगी तत्व पहुंचते हैं जो त्वचा को बेहतर बनाते हैं। साथ ही त्वचा का लचीलापन भी बनाए रखते हैं।

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