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हाल ही में डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों पर विश्वस्तर पर एक सर्वेक्षण हुआ, जिसमें पता चला कि भारत में मिलने वाला डिब्बाबंद खाद्य पदार्थ स्वास्थ्य के मामले में सबसे ज्यादा हानिकारक होता है। इस सूची में सबसे हेल्दी पैकेटबंद खाने के मामले में पहले नंबर पर यूनाइटेड किंगडम है, जबकि अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया का स्थान क्रमशः दूसरा और तीसरा है। सर्वे में भारत से जो नमूने लिए गए हैं उनमें ऐसे तत्व पाए गए हैं जो मोटापा और टाइप-2 डायबिटीज का प्रमुख कारण हैं। इसके अलावा यह हृदय रोग के जोखिमों को भी बढ़ाते हैं। 

भारत में डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों के नमूनों में एनर्जी डेंसिटी काफी ज्यादा (362 कैलोरी प्रति 100 ग्राम) थी। यदि इनमें शुगर की मात्रा की बात करें तो भारत (7.3 ग्राम प्रति 100 ग्राम) दूसरे उच्चतम स्थान पर है, जबकि पहले स्थान पर चीन (8.5 ग्राम प्रति 100 ग्राम) है। इस सर्वे के परिणाम 'ओबेसिटी रिव्यूज जर्नल' में प्रकाशित किए गए थे। 

स्वास्थ्य और चिकित्सा में अनुसंधान संस्थान - जॉर्ज इंस्टीट्यूट फॉर ग्लोबल हेल्थ के एक बयान के अनुसार, सर्वेक्षण में दुनियाभर के 12 देशों और प्रदेशों के 4,00,000 से अधिक खाद्य और पेय उत्पादों का विश्लेषण किया गया था।

सर्वे में शामिल किए गए देशों को हेल्थ स्टार रेटिंग प्रणाली का उपयोग करके रैंक किया गया था, जिसमें ऊर्जा, नमक, चीनी, सैचुरेटेड फैट के साथ-साथ प्रोटीन, कैल्शियम और फाइबर जैसे पोषक तत्वों के स्तर को मापा गया था और सभी देशों को आधे से लेकर 5 स्‍टार दिए गए थे, ये रेटिंग उनके देश में मिलने वाले पैकेज्‍ड फूड में मौजूद पोषक तत्‍वों के आधार पर की गई थी। इस रैंकिंग में भारत को 2.27 स्‍टार मिले, जबकि चीन को 2.43 और चिली को 2.44 स्टार दिए गए। लेकिन चीन के पैकेटबंद फूड और ड्रिंक्‍स में सैचुरेटेड फैट की सबसे ज्‍यादा हानिकारक मात्रा पाई गई, जबकि यहां की ड्रिंक्स हैल्‍दी थी।

दक्षिण अफ्रीका की ड्रिंक्स को 1.92 और फूड को 2.87 स्टार मिले, जोकि काफी खराब रेटिंग है। सर्वे के शीर्ष स्थान की बात करें तो, यूके (2.83) के पैकेज्‍ड फूड सैंपल, सबसे ज्‍यादा हैल्‍दी पाए गए। इसके बाद अमेरिका (2.82) और ऑस्‍ट्रेलिया (2.81) का स्थान आता है।

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सर्वे की प्रमुख लेखिका एलिजाबेथ डनफोर्ड ने अपने बयान में कहा है कि 'वैश्विक स्तर पर हम प्रोसेस्ड फूड के आदी हो रहे हैं। मार्केट ऐसे डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों से भरी पड़ी है जो शरीर में वसा, चीनी, नमक इत्यादि की मात्रा को बढ़ाते हैं। इन पदार्थों में ऐसे तत्व हैं जो आसानी से बीमार बना सकते हैं। दुर्भाग्य से विकासशील देश इस बारे में विचार नहीं कर पा रहे हैं और उन्हें पोषण से रहित खाद्य पदार्थों का सेवन करने का खामियाजा उठाना पड़ रहा है।' सर्वे के लिए 2013 से 2018 के बीच पैकेज्ड फूड और बेवरेज के नमूने एकत्र किए गए थे। इस सर्वे में ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, चिली, चीन, भारत, हांगकांग, मैक्सिको, न्यूजीलैंड, स्लोवेनिया, दक्षिण अफ्रीका, यूके और यूएसए शामिल थे। 

इस सर्वे के बाद यह कहना गलत नहीं होगा कि भारत में डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों का सेवन करने वालों को सावधान व जागरूक रहने की जरूरत है। इसके अलावा मोटापे और गैर-संक्रामक रोगों के खतरे को कम करने के लिए, नीति निर्माताओं और उद्योग के प्रमुख लोगों को भी खाद्य पदार्थों में पोषक तत्‍वों की मात्रा बढ़ाने पर विचार करना चाहिए।

रिसर्च के प्रमुख बिंदु

  • सोडियम: कनाडा के डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों और पेय पदार्थों में सबसे अधिक सोडियम की मात्रा (291 मिलीग्राम /100 ग्राम) थी, इसके बाद यूएसए (279 मिलीग्राम / 100 ग्राम) का स्थान था।
  • सैचुरेटेड फैट: चीन के डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों और पेय पदार्थों में सबसे अधिक सैचुरेटेड फैट सामग्री (3.4 ग्राम /100 ग्राम) पाई गई।
  • शुगर: चीन के डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों और पेय पदार्थों में सबसे अधिक शुगर (8.3 ग्राम /100 ग्राम) थी, इसके बाद भारत (7.3 ग्राम/100 ग्राम) का स्थान था।
  • एनर्जी की मात्रा: भारत के डिब्बाबंद खाद्य और पेय पदार्थों में एनर्जी की मात्रा सबसे अधिक (362 कैलोरी/100 ग्राम) थी।

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