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फर्मेन्टेड फूड यानी किण्वित भोजन, खमीरीकरण की प्रक्रिया से तैयार किए गए खाद्य पदार्थ हैं जो सेहत के लिए काफी फायदेमंद माने जाते हैं। फर्मेंटेशन यानी किण्वन काफी पुरानी और बहुत ज्यादा प्रयोग में लायी जाने वाली भारतीय कुकिंग की एक प्रकिया है। लेकिन फर्मेंटेशन के गुणों के विषय में बहुत ही कम लोग जानते हैं। इस प्रकिया का उपयोग अचार, इडली-डोसा, ढोकला, जलेबी, ब्रेड आदि बनाने में इस्तेमाल किया जाता है। इस प्रकिया से तैयार किए गए भोजन स्वादिष्ट तो होते ही हैं साथ ही सेहत के लिए भी काफी फायदेमंद माने जाते हैं।

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तो आखिर फर्मेंटेशन क्या होता है, इसमें क्या गुण होते हैं, इस प्रकिया से कौन कौन से भोजन तैयार किए जाते हैं, फर्मेंटेशन या खमीरीकरण से तैयार किए गए खाद्य पदार्थ कौन-कौन सी बीमारियों में फायदेमंद होते हैं, इस बारे में हम आपको इस लेख में बता रहे हैं, जानने के लिए आगे पढ़ें।

  1. फर्मेंटेशन क्या होता है - What is Fermentation in Hindi?
  2. फर्मेन्टेड फूड के फायदे - Fermented foods Benefits in Hindi
  3. किण्वित भोजन के लाभ - Benefits of Fermented food in Hindi
  4. किण्वित भारतीय आहार - Fermented Indian foods in Hindi
  5. फर्मेंटेड फूड के नुकसान - Side effect of Fermented food in Hindi
  6. फर्मेंटेड फूड के फायदे और नुकसान के डॉक्टर

फर्मेन्टेशन को भारत में आम बोल चाल की भाषा में खमीर उठना कहा जाता है। बैक्टीरिया, यीस्ट या फंगस जैसे सूक्ष्मजीव ऑर्गैनिक कंपाउंड जैसे- स्टार्च, चीनी आदि को अल्कोहल या एसिड में बदल देते हैं। ये अल्कोहल या एसिड प्रिजर्वेटिव (संरक्षक) की तरह काम करता है जो खाने के स्वाद को हल्का खट्टा बना देता है और भोजन की गंध को भी हल्का बदल देता है। इडली, डोसा, जलेबी, भटूरा आदि खाद्य पदार्थ बनाने के लिए जो बैटर तैयार किया जाता है उसे रात भर रूम टेम्परेचर पर रखने से वे फूल जाते हैं, और उसके बाद ही उसे पकाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि अगर फर्मेंटेशन के लिए बैटर को रात भर छोड़ने का समय न हो तो यीस्ट, सोडा, फ्रूट सॉल्ट आदि का इस्तेमाल करके भी बैटर को फर्मेंट किया जाता है। 

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फर्मेंटेशन या खमीरीकरण की प्रक्रिया के दौरान खाद्य पदार्थों में कुछ फायदेमंद बैक्टीरिया पनपते हैं जिन्हें प्रोबायोटिक कहा जाता है। ये प्रोबायोटिक्स पेट को ठीक रखने, हमारी इम्यूनिटी को बेहतर बनाने आदि तरीके से शरीर को ठीक रखने में मदद करते हैं। इसलिए अपनी डाइट में प्रो-बायोटिक फूड को शामिल करने से आपकी पूरी सेहत बेहतर हो सकती है। इसके अलावा फर्मेन्टेड फूड में विटामिन बी12 भी अच्छी मात्रा में होता है। इसके साथ ही कुछ आहार में खमीरीकरण की प्रक्रिया के बाद मैग्नीशियम, आयरन, कैल्शियम और जिंक जैसे पोषक तत्वों की मात्रा में भी बढ़ोत्तरी देखने को मिलती है।

फर्मेन्टेड फूड के फायदे पेट के लिए - Fermented food for Gut Health in Hindi

जैसा कि हमने पहले ही बताया है कि इन फर्मेन्टेड फूड में प्रोबायोटिक काफी अच्छी मात्रा में होते हैं, इसलिए ये पेट में मौजूद बैक्टीरिया के संतुलन को ठीक रखने में मदद करते हैं। यदि आपको काफी दिनों से कब्ज, पेट में गैस या पेट फूलने जैसी शिकायत है तो ऐसी स्थिति में ये फर्मेन्टेड फ़ूड काफी लाभदायक साबित हो सकते हैं। ऐसी समस्याओं के दौरान, सप्ताह में 2 बार दही-चावल या रोजाना छाछ का सेवन अवश्य करें।

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फर्मेन्टेड फूड के फायदे इम्यूनिटी मजबूत बनाने के लिए - Fermented food for Immunity in Hindi

आपकी इम्यूनिटी का सीधा रिश्ता आपके पेट से होता है और प्रोबायोटिक गट यानी आंत की लाइनिंग (परत) को मजबूत बनाने का काम करते हैं, जिससे हमारी इम्यूनिटी और मजबूत हो जाती है। यदि पेट में इन हेल्थी बैक्टीरिया की संख्या कम हो तो तो पेट में इन्फेक्शन और इन्फ्लेमेशन दोनों के आसार बढ़ जाते हैं। तो यदि आपको जल्दी जल्दी इन्फेक्शन की समस्या हो रही हो, तो एक बार नियमित तौर पर फर्मेन्टेड फ़ूड का सेवन करके जरूर देखें।

फर्मेन्टेड फूड के फायदे वजन कम करने के लिए - Fermented food for weight loss in Hindi

फर्मेन्टेड फ़ूड हमारे शरीर में मेटाबोलिज्म/ चयापचय को ठीक से काम करने में मदद करता है। इसके साथ ही इनमें मौजूद प्रोबायोटिक, आपके आंत में मौजूद बैक्टीरिया को संतुलन में रखता है, जिससे आपका पेट स्वस्थ रहता है और प्रतिरक्षा तंत्र को भी अच्छे से काम करने में मदद करता है, और ये सभी स्थितियां आपके वजन कम करने व स्वस्थ वजन मेन्टेन करने में काफी अहम भूमिका निभाती हैं।

किण्वित भोजन के लाभ पीसीओडी के लिए - Fermented food for PCOD in Hindi

सामान्यतः पीसीओडी से ग्रसित महिलाओं में पेट के बैक्टीरिया का कम होना व ठीक प्रकार से काम न करना देखा गया है। चूंकि ये पेट के बैक्टीरिया मेटाबोलिज्म को भी ठीक रखते हैं और पेट को भी ठीक रखने मदद करते हैं लिहाजा इनका कम होना पीसीओडी में वजन बढ़ाने और हार्मोन की स्थिति बिगाड़ने जैसी समस्यांए उत्पन्न कर सकता है। लिहाजा इनमें संतुलन बनाये रखने लिए अपने रोज के आहार में एक फर्मेंटेड फूड अवश्य शामिल करें।

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किण्वित भोजन के लाभ मूड को बेहतर बनाने के लिए - Fermented food for good mood in Hindi

बहुत सारी रिसर्च स्टडी में प्रोबायोटिक फूड और मूड को अच्छा रखने के बीच सम्बन्ध दिखाया गया है। मूड को अच्छा रखने के लिए जिम्मेदार सेरोटोनिन का प्रोडक्शन भी ज्यादातर डाइजेस्टिव ट्रैक में ही होता है किन्तु इसके लिए पेट का ठीक होना आवश्यक है। अतः मूड को अच्छा रखने के लिए भी आप किण्वित भोजन का सेवन अवश्य करें।

(और पढ़ें- मूड को ठीक करने के तरीके)

किण्वित भोजन के लाभ विटामिन बी12 की कमी दूर करने के लिए - Fermented food for vitamin B12 in Hindi

भारत में ज्यादातर जनसंख्या विटामिन बी12 की कमी से ग्रसित है। साथ ही शाकाहारी आहार में विटामिन बी12 की मात्रा काफी कम होती है। ऐसे में ये फर्मेन्टेड फ़ूड कुछ हद तक आपकी विटामिन बी12 की आवश्यकता को पूरा कर सकते हैं। कोशिश करिये की दिन में एक आहार इन फर्मेन्टेड फ़ूड में से अवश्य हो। इसे आप चाहें तो नाश्ते में इडली सांभर या शाम के समय ढोकला आदि के रूप में पूरा कर सकते हैं।

जैसा कि फर्मेंटेशन यानि खमीरीकरण का बहुत पुराना इतिहास है, इस प्रक्रिया से देश-विदेश में अलग अलग तरह के भोजन तैयार किए जाते हैं। भारत के लगभग हर भाग में बहुत सारे आहार फर्मेंटेशन की प्रकिया के द्वारा बनाये जाते हैं और सभी के द्वारा पसंद भी किये जाते हैं। इनमें शामिल है-
  • अचार
  • इडली-डोसा
  • ढोकला
  • ब्रेड
  • मठ्ठा
  • दही
  • कांजी
  • पारम्परिक दही चावल
  • अम्बाली
  • अंदुरि पीठा
  • हवाईजर
  • एखोनी
  • मीसो आदि 
भारत के अलग अलग इलाकों में बनने वाले ये आहार अपने अलग अलग स्वाद और गुणों के लिए प्रचलित हैं। चूंकि खमीरीकरण की प्रक्रिया काफी पुरानी है, इस प्रक्रिया को देश के साथ साथ विदेश में भी अलग अलग तरह के भोजन तैयार करने के लिए उपयोग किया जाता है। इनमें शामिल हैं-
  • किमची
  • योगर्ट
  • टेम्प
  • केफिर आदि 
भोजन के अलावा, शराब के निर्माण में भी इस प्रक्रिया का बहुत महत्वपूर्ण योगदान है। गेहूं, जौ, अंगूर, सेब, गुलाब आदि के द्वारा बनने वाली शराब जैसे की बियर, वाइन आदि भी इसी प्रकिया द्वारा बनायी जाती है।
  • फर्मेन्टेड फूड ज्यादातर सभी के लिए स्वास्थ्यवर्धक माने जाते हैं। लेकिन कुछ लोगों को इससे एलर्जी हो जाती है। अगर आपको ऐसी एलर्जी हो रही हो तो डॉक्टर को अवश्य दिखाएं और इन प्रोडक्ट्स से परहेज करें।
  • कुछ लोगों को प्रोबायोटिक की अधिक मात्रा एवं नियमित तौर पर हजम नहीं होती। इस वजह से उन्हें गैस और पेट फूलने की समस्या हो जाती है।
  • ज्यादा पुराना एवं बासी फर्मेंटेड फ़ूड लेने से बचें, कई बार यह फ़ूड पॉयजनिंग और इंफेक्शन का भी कारण बन जाते हैं।

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Dt. Rajni Sharma

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संदर्भ

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