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बसाईटिस की स्थिति में बर्सेक्‍टोमी सर्जरी की जाती है। बर्साइटिस बर्सा की सूजन या जलन है। बर्सा एक थैली है जो लूब्रिकेटिंग तरल पदार्थ से भरी होती है। ये थैली आपकी हड्डियों, मांसपेशी, टेंडन और त्वचा जैसे ऊतकों के बीच स्थित होती है, जो रगड़, घर्षण और जलन को कम करती है। अधिक उम्र में बसाईटिस होने का खतरा ज्‍यादा रहता है। ये समस्‍या सबसे ज्‍यादा कंधे को प्रभावित करती है। बसाईटिस होने पर प्रभावित हिस्‍से में दर्द महसूस होता है।

इसके अलावा भारी सामान उठाने से जोड़ों पर दबाव पड़ता है, जिससे बसाईटिस की समस्या पैदा हो सकती है। अगर आप ऐसा कोई काम करते हैं जिसमें आपको रोज भारी सामान उठाना पड़ता है या एक ही तरह का काम करना पड़ता है तो आपको बर्साइटिस हो सकता है। दौड़ने, कूदने या कोई तेज खेल खेलने जैसे कि टेनिस, बेसबॉल में भी बर्साइटिस का खतरा हो सकता है। एक्‍सरसाइज के दौरान शरीर पर ज्‍यादा दबाव डालने से भी ये स्थिति उत्‍पन्‍न हो सकती है।

प्रमुख तौर पर बसाईटिस को ठीक करने के लिए बर्सेक्‍टोमी सर्जरी की जाती है।

  1. बर्सा निकालने की सर्जरी क्या है - Bursectomy kya hai
  2. बर्सा निकालने की सर्जरी क्यों की जाती है - Bursectomy kab ki jati hai
  3. बर्सेक्टोमी सर्जरी से पहले की तैयारी - Bursectomy se pehle ki taiyari
  4. बर्सा निकालने की सर्जरी कैसे होती है - Bursectomy kaise hoti hai
  5. बर्सा निकालने की सर्जरी के बाद देखभाल और सावधानियां - Bursectomy hone ke baad dekhbhal aur savdhaniya
  6. बर्सेक्टोमी सर्जरी की जटिलताएं - Bursectomy me jatiltaye

बर्सा में सूजन होने की स्थिति में बर्सेक्‍टोमी की जाती है। एक या इससे ज्‍यादा बर्सा निकालने की सर्जरी को बर्सेक्‍टोमी कहते हैं। शरीर में विभिन्‍न हिस्‍सों में बर्सा की सूजन हो सकती है। ये अक्‍सर घुटनों, कोहनी, कंधों या कूल्‍हों के जोड़ों को प्रभावित करता है।

जब हिलने-डुलने या कोई शारीरिक गतिविधि करने पर विभिन्‍न ऊतक एक-दूसरे से रगड़ और घर्षण करते हैं, तब बर्सा गद्दीदार और चिकनी परत के रूप में काम करता है। ये अधिकतर जोड़ों के आसपास स्थित होते हैं। ये घुटने और कोहनी के जोड़ के अंदर की त्‍वचा में होते हैं। कंधों या कूल्‍हों के जोड़ में छूने पर बर्सा को महसूस नहीं किया जा सकता है।

बर्सा में सूजन आने को बर्साइटिस कहते हैं। बर्सा एक थैली है जो लूब्रिकेटिंग तरल पदार्थ से भरी होती है। ये थैली आपकी हड्डियों, मांसपेशी, टेंडन और त्वचा जैसे ऊतकों के बीच स्थित होती है, जो रगड़, घर्षण और जलन को कम करती है। बर्सा में सूजन होने पर इसमें फ्लूइड भरने लगता है जिससे दर्द होता है और समय के साथ बर्सा में कैल्‍शियम जम (कैल्सिफिकेशन) जाता है। ज्‍यादातर घुटने के कैप के सामने घुटने के बर्सा में, घुटने के कैप में और कोहनी में सूजन होती है। अगर किसी व्‍यक्‍ति को बार-बार या लंबे समय से बर्साइटिस है तो इसे बर्सेक्‍टोमी सर्जरी से ही हमेशा के लिए ठीक किया जा सकता है।

बर्सा मांसपेशियों और टेंडन को आसानी से मूव (हिलने-डुलने) करने में मदद करता है। अगर इसमें चोट लग जाए या ये क्षतिग्रस्‍त हो जाए तो चलने-फिरने में दर्द हो सकता है। इस दर्द के कारण रोजमर्रा के काम करने में भी दिक्‍कत आ सकती है।

दवा और कुछ बातों का ध्‍यान रखकर बर्साइटिस का इलाज किया जा सकता है। इसमें प्रभावित हिस्‍से पर कम दबाव डालना भी शामिल है। किसी अन्‍य उपचार के बेअसर होने या बार-बार बसाईटिस के वापिस आने पर सर्जरी की सलाह दी जाती है।

बर्सा का सबसे सामान्‍य उपचार है आराम और सूजन-रोधी दवाओं का सेवन करना। इस उपचार से अमूमन अधिकतर स्थितियों का इलाज हो जाता है। हालांकि, अगर किसी को बहुत ज्‍यादा या लंबे समय से बसाईटिस की समस्‍या हो रही है और इस वजह से चलने-फिरने और कुछ काम करने में भी दिक्‍कत आ रही है तो सर्जरी लंबे समय तक आराम पहुंचाने में कारगर साबित हो सकती है।

  • अगर आप किसी दवा, जड़ी बूटी या सप्‍लीमेंट का सेवन कर रहे हैं तो डॉक्‍टर को इसके बारे में जरूर बताएं। सर्जरी से एक हफ्ते पहले ही आपको कुछ दवाएं लेना बंद करना पड़ सकता है।
  • सर्जरी से एक रात पहले कुछ भी न खाने और पीने के लिए कहा जा सकता है।
  • सर्जरी के लिए मरीज को ढीले कपड़े पहनाए जाते हैं।
  • प्रभावित जोड़ और सर्जरी की गंभीरता के आधार पर जनरल, लोकल और स्‍पाइनल एनेस्‍थीसिया दिया जाता है। जनरल एनेस्‍थीसिया में मरीज बेहोश रहता है, लोकल में प्रभावित हिस्‍से को सुन्‍न कर दिया जाता है और स्‍पाइन में शरीर के बड़े हिस्‍से को सुन्‍न कर दिया जाता है।

बर्सेक्‍टोमी सर्जरी आर्थोस्‍कोपी के जरिए होती है। प्रभावित जोड़ पर एक छोटा कट लगाया जाता है जिसमें से स्‍कोप को शरीर के अंदर डाला जाता है। इस स्‍कोप में कैमरा होता है जिसकी मदद से डॉक्‍टर शरीर के अंदरूनी हिस्‍सों को देख पाते हैं।

अब स्‍कोप के जरिए सर्जिकल उपकरणों (सर्जरी के दौरान इस्‍तेमाल होने वाले) को प्रभावित हिस्‍से में डाला जा सकता है। इससे डॉक्‍टर बर्सा और किसी स्‍कार टिश्‍यू (रेशेदार ऊतकों का इकट्ठा होना) निकाल लेंगे।

इसके बाद टांका लगाकर कट को बंद कर दिया जाता है। सूजन और खून के थक्‍के जमने से रोकने के लिए कट पर पट्टी बांध दी जाती है। जोड़ को सहारा देने के लिए ब्रेस या स्लिंग की जरूरत पड़ सकती है।

इस सर्जरी में 30 मिनट से लेकर 2 घंटे तक का समय लग सकता है। सर्जरी में कितना समय लगेगा, ये प्रभावित बर्सा की स्थिति और अंग पर निर्भर करता है।

  • सर्जरी के बाद दर्द दूर करने के लिए दर्द निवारक दवाएं लेनी होती हैं।
  • कुछ दिनों तक कठिन शारीरिक गतिविधि करने से बचें।
  • अस्‍पताल से घर जाने से पहले जल्‍दी रिकवरी के लिए डॉक्‍टर फिजियोथेरेपी से जुड़े कुछ निर्देश देंगे।
  • सर्जरी के बाद कुछ ही हफ्तों में दर्द ठीक हो जाता है, लेकिन सूजन को पूरी तरह से खत्‍म होने में लंबा समय लग सकता है।
  • रिकवर करने में कितना समय लगेगा, ये इस बात पर निर्भर करता है कि बसाईटिस किस हिस्‍से में हुआ है।
  • इस सर्जरी के बाद मरीज को पहले चार से छह सप्‍ताह तक कोई कठिन शारीरिक कार्य नहीं करना है। प्रभावित जोड़ के आधार पर व्‍यक्‍ति को ऑफिस से दो से चार हफ्ते की छुट्टी लेनी पड़ सकती है।
  • अस्‍पताल में होने पर मरीज की सांस लेने की गति, हार्ट रेट और ब्‍लड प्रेशर पर नजर रखी जाती है। जोड़ पर बर्फ की सिकाई की जाती है, जिससे सूजन कम होने में मदद मिलती है।
  • प्रभावित जोड़ को पूरी तरह से ठीक होने में कुछ हफ्तों का समय लग सकता है। पहले कुछ हफ्तों तक आपको प्रभावित जोड़ को बहुत कम हिलाना है।
  • अगर संक्रमण (बुखार और ठंड लगने), प्रभावित हिस्‍से का लाल होना, सूजन, दर्द बढ़ना, बहुत ज्‍यादा ब्‍लीडिंग होने या चीरे वाली जगह से रिसाव हो रहा है तो तुरंत डॉक्‍टर को बताएं।
  • जी मितली या उल्‍टी, दवाओं से दर्द कम न होने, प्रभावित जोड़ या मांसपेशियों में सुन्‍नपन या कमजोरी होने, किसी नए लक्षण के दिखने की स्थिति में तुरंत डॉक्‍टर से बात करें।

बर्सेक्टोमी सर्जरी के बाद किसी तरह की जटिलता या समस्‍या के होने की आशंका बहुत कम ही होती है लेकिन सभी सर्जरी के बाद कुछ जटिलताएं आना आम बात है। सर्जरी के बाद आपको निम्‍न समस्‍याएं हो सकती हैं :

  • बहुत ज्‍यादा ब्‍लीडिंग होने
  • संक्रमण
  • खून के थक्‍के जमना
  • रक्‍त वाहिका या नसों को नुकसान पहुंचना
  • अगर आप धूम्रपान, शराब का सेवन करते हैं तो डॉक्‍टर को सर्जरी से पहले जरूर बताएं। इनकी वजह से जटिलताएं होने का खतरा बढ़ सकता है। मोटापे या डायबिटीज जैसी स्थितियां भी इसमें शामिल हैं।
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