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डिकंप्रेसिव क्रेनिएक्‍टोमी एक सर्जिकल प्रक्रिया है। सबसे पहले डिकंप्रेसिव क्रेनिएक्‍टोमी सर्जरी सन् 1901 में कोचर, 1903 में कुशिंग और 1906 में होर्सले ने पेश की थी। यदि स्‍ट्रोक, मस्तिष्क में किसी गंभीर चोट के कारण मस्तिष्‍क में सूजन आ जाए तो इस स्थिति को ठीक करने के लिए डि‍कंप्रेसिव क्रेनिएक्‍टोमी सर्जरी की जाती है। स्‍ट्रोक, ब्रेन डैमेज या मस्तिष्‍क की चोट के कारण उत्‍पन्‍न हुई आपातकालीन स्थिति में इस सर्जरी से मरीज की जान बचाई जा सकती है।

  1. डिकंप्रेसिव क्रेनिएक्‍टोमी सर्जरी क्या है - Decompressive craniectomy kya hai
  2. डिकंप्रेसिव क्रेनिएक्‍टोमी सर्जरी क्यों की जाती है - Decompressive craniectomy kab ki jati hai
  3. डिकंप्रेसिव क्रेनिएक्‍टोमी सर्जरी से पहले की तैयारी - Decompressive craniectomy se pehle ki taiyari
  4. डिकंप्रेसिव क्रेनिएक्‍टोमी सर्जरी कैसे होती है - Decompressive craniectomy kaise hoti hai
  5. डिकंप्रेसिव क्रेनिएक्‍टोमी सर्जरी के बाद देखभाल और सावधानियां - Decompressive craniectomy hone ke baad dekhbhal aur savdhaniya
  6. डिकंप्रेसिव क्रेनिएक्‍टोमी सर्जरी की जटिलताएं - Decompressive craniectomy me jatiltaye

क्रेनिएक्‍टोमी सर्जरी में मस्तिष्‍क में सूजन आने पर उस हिस्‍से में दबाव को कम करने के लिए खोपड़ी के एक हिस्‍से को निकाला जाता है। मस्तिष्‍क में किसी गंभीर चोट लगने के बाद ही यह सर्जरी की जाती है। ये मस्तिष्‍क में सूजन या ब्‍लीडिंग पैदा करने वाली स्थितियों के इलाज के लिए भी की जाती है।

क्रेनिएक्‍टोमी सर्जरी से एमेरजेंसी की स्थिति में मरीज की जान बचाई जा सकती है। मस्तिष्‍क में सूजन को कम करने के लिए जब सर्जरी की जाती है तो उसे डिकंप्रेसिव क्रेनिएक्‍टोमी कहते हैं।

ये एक न्‍यूरोसर्जिकल (नसों से संबंधित) प्रक्रिया है जिसमें बोन फ्लैप नामक खोपड़ी के एक हिस्‍से को निकाला जाता है।

कुंछ गंभीर मामलों में मस्तिष्‍क में कोई गहरी चोट लगने पर डिकंप्रेसिव क्रेनिएक्‍टेमी करने की जरूरत पड़ सकती है, जिससे मस्तिष्‍क की सूजन के कारण खोपड़ी पर कोई दबाव न पड़े। मस्तिष्‍क में गंभीर चोट, संक्रमण, ब्रेन ट्यूमर या स्‍ट्रोक की स्थिति में मस्तिष्‍क की सूजन से राहत दिलाने के लिए डिकंप्रेसिव क्रेनिक्‍टोमी का इस्‍तेमाल किया जाता है।

क्रेनिएक्‍टोमी से खोपड़ी में इंट्राक्रेनिअल प्रेशर (ट्यूमर, मस्तिष्‍क में ब्‍लीडिंग या आसपास फ्लूइड होने या सूजन की वजह से अपने आप ही खोपड़ी में दबाव बनना), इंट्राक्रेनिअल हाइपरटेंशन (गंभीर मस्तिष्‍क की चोट, स्‍ट्रोक या ब्रेन में फोड़ा बनने से खोपड़ी पर पड़ने वाला दबाव) या ब्रेन हेमरेज (बहुत ज्‍यादा ब्‍लीडिंग) को कम किया जाता है।

अगर स्थितियों का समय पर इलाज न किया जाए तो दबाव या ब्‍लीडिंग मस्तिष्‍क को नुकसान पहुंचा सकते हैं और ये ब्रेन स्‍टेम (सेरेब्रम को रीढ़ की हड्डी से जोड़ने वाला हिस्‍सा) तक पहुंच सकता है। ये स्थिति खतरनाक हो सकती है या इसकी वजह से हमेशा के लिए ब्रेन डैमेज (मस्तिष्‍क को नुकसान) हो सकता है।

  • सर्जरी से पहले डॉक्‍टर को अपनी सेहत के बारे में कुछ जरूरी बातें बतानी हैं जैसे कि आपको कोई बीमारी तो नहीं है।
  • आप सर्जरी के लिए फिट हैं या नहीं, ये जानने के लिए सर्जन कुछ शारीरिक परीक्षण कर सकते हैं। आपके ब्‍लड टेस्‍ट या अन्‍य डायग्‍नोस्टिक टेस्‍ट किए जा सकते हैं।
  • सर्जरी से पहले न्‍यूरोलॉजिक परीक्षण किया जाएगा, जिसकी तुलना सर्जरी के बाद के परीक्षण से की जाएगी।
  • ऑपरेशन की एक रात पहले कुछ भी न खाने और पीने के लिए कहा जाता है।
  • यदि आपको किसी दवा या लोकल या जनरल एनेस्‍थीसिया (बेहोश करने के लिए दिया जाता है) से एलर्जी है तो डॉक्‍टर को इस बारे में जरूर बताएं।
  • कोई दवा, हर्बल सप्‍लीमेंट ले रहे हैं तो उसकी भी जानकारी डॉक्‍टर को दें।
  • अगर आपको पहले कभी कोई ब्‍लीडिंग से संबंधित विकार हुआ है या आप खून के थक्‍के जमने से रोकने की दवा, एस्पिरिन या खून के थक्‍के जमने को प्रभावित करने वाली कोई भी दवा ले रहे हैं तो उसके बारे में डॉक्‍टर को जरूर बताएं। सर्जरी से पहले आपको इन दवाओं का सेवन बंद करना पड़ सकता है।
  • धूम्रपान करते हैं तो सर्जरी से पहले तुरंत इसे छोड़ दें। इससे सर्जरी के बाद रिकवरी और सेहत में सुधार आने में मदद मिलेगी।
  • सर्जरी से एक रात पहले आपको किसी विशेष एंटीसेप्‍टिक शैंपू से बाल धोने के लिए कहा जा सकता है।
  • सर्जरी के लिए ले जाने से पहले बेहोशी की दवा दी जा सकती है।
  • जिस हिस्‍से की सर्जरी करनी है, उसे शेव किया जाएगा।

डिकंप्रेसिव क्रेनिएक्‍टोमी दो तरह से की जाती है – पहली हेमीक्रेनिएक्‍टोमी और दूसरी बाइलेट्रल क्रेनिएक्‍टोमी। हेमीक्रेनिएक्‍टोमी में खोपड़ी के एक हिस्‍से से बोन फ्लैप निकाली जाती है जबकि बाइलेट्रल में खोपड़ी के दोनों तरफ के हिस्‍सों से बोन फ्लैप निकाली जाती है।

मस्तिष्‍क में कोई गंभीर चोट लगने या स्‍ट्रोक के बाद सूजन से होने वाली किसी तरह की जटिलता को रोकने के लिए जब तुरंत खोपड़ी को खोलने की जरूरत होती है तो उस स्थिति में एमेरजेंसी प्रक्रिया के तौर पर क्रेनिएक्‍टोमी की जाती है।

क्रेनिएक्‍टोमी से पहले मस्तिष्‍क में ब्‍लीडिंग या दबाव के बारे में पता लगाने के लिए डॉक्‍टर कुछ टेस्‍ट बताएंगे। इन टेस्‍ट की मदद से सर्जन को ये पता चलेगा कि क्रेनिएक्‍टोमी के लिए सही हिस्‍सा कौन-सा है।

क्रेनिएक्‍टोमी सर्जरी के दौरान सर्जन सिर की त्‍वचा यानी स्‍कैल्‍प पर एक छोटा-सा कट लगाएंगे, जहां से खोपड़ी का एक हिस्‍सा निकाला जाना है। आमतौर पर ये कट उस जगह के पास लगाया जाता है जहां पर सबसे ज्‍यादा सूजन होती है। अब खोपड़ी के जिस हिस्‍से को निकालना है उसके ऊपर की किसी त्‍वचा या ऊतक को हटाया जाता है।

मेडिकल ग्रेड ड्रिल से खोपड़ी में छोटे छेद किए जाते हैं। इस चरण को क्रेनिओटोमी कहा जाता है। छेदों को बीच में से काटने के लिए एक छोटे सॉ (कट लगाने का एक उपकरण) का इस्‍तेमाल किया जाता है। ऐसा तब तक किया जाता है जब तक कि खोपड़ी का पूरा हिस्‍सा निकालने के लिए जगह न बन जाए।

खापेड़ी के निकाले गए हिस्‍से को फ्रिज या एक छोटे पाउच में रखा जाता है। रिकवरी के बाद इसे वापिस खोपड़ी में लगाया जाता है। सूजन या ब्‍लीडिंग को कंट्रोल करने के बाद सिर की त्‍वचा पर जो कट लगाया था उसे बंद कर दिया जाता है।

  • मस्तिष्‍क में लगी चोट या मरीज की स्थिति की गंभीरता के आधार पर ही ये तय किया जाता है कि उसे सर्जरी के बाद अस्‍पताल में कितने दिन रहना पड़ेगा।
  • मस्तिष्‍क में लगी गंभीर चोट या स्‍ट्रोक की स्थिति में मरीज को कुछ हफ्ते या इससे ज्‍यादा समय तक अस्‍पताल में रहना पड़ सकता है ताकि डॉक्‍टर मरीज की स्थिति को मॉनिटर कर सकें।
  • सर्जरी के बाद अगर खाने, बोलने में दिक्कत या चलने में दिक्‍कत आ रही है तो डॉक्‍टर मरीज को रिहैबिलिटेशन सेंटर भेज सकते हैं। कुछ मामलों में आपको दो महीने या इससे ज्‍यादा समय तक अस्‍पताल में रहना पड़ सकता है।
  • रिकवरी के दौरान नीचे बताए गए काम न करें -
    • सर्जरी के बाद कुछ दिनों तक नहाना
    • कोई भारी वजन उठाना
    • व्‍यायाम या कोई मेहनत वाला काम करना
    • धूम्रपान या शराब पीना
    • गाड़ी चलाना

रिकवरी के बाद खोपड़ी के निकाले गए हिस्‍से को वापिस लगाया जाता है। कुछ मामलों में सिंथेटिक स्‍कल इंप्‍लांट यानी जो हिस्‍सा निकाला गया था, उसकी जगह नकली पार्ट लगाया जाता है। इस प्रक्रिया को क्रेनिओप्‍लास्‍टी कहते हैं।

डिकंप्रेसिव क्रेनिएक्‍टोमी की सर्जरी के बाद निम्‍न जोखिम सामने आ सकते हैं -

  • स्‍ट्रोक
  • दौरे पड़ना
  • नसों को नुकसान पहुंचना
  • मानसिक कार्यों की क्षति होना
  • मस्तिष्‍क को हमेशा के लिए कोई नुकसान होना
  • संक्रमण
  • हाइड्रोसेफलस (दिमाग में पानी भर जाना)

सर्जरी के बाद मरीज को रिकवर यानी पूरी तरह से ठीक होने में कितना समय लगेगा, ये सर्जरी करने के कारण पर निर्भर करता है। कुछ मामलों में चोट की गंभीरता, चोट की जगह और मरीज की उम्र एवं स्‍वास्‍थ्‍य स्थिति के आधार पर कोई विकलांगता या जटिलता आ सकती है। हर मरीज में ये जटिलताएं अलग-अलग प्रकार की हो सकती हैं।

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