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17-अल्फा हाइड्रोक्सी प्रोजेस्टेरोन टेस्ट (17-ओएच) क्या है?

17-अल्फा हाइड्रोक्सी प्रोजेस्टेरोन टेस्ट को 17-ओएच प्रोजेस्टेरोन भी कहा जाता है। यह किडनी के ऊपर मौजूद एक छोटी ग्रंथि एड्रिनल ग्रंथि द्वारा बनाया जाता है। यह हार्मोन मुख्य रूप से स्ट्रेस हार्मोन कोर्टिसोल बनाने में एक प्रीकर्सर (पहले बनने वाला) के रूप में कार्य करता है। कोर्टिसोल मेटाबॉलिज्म को ठीक प्रकार से बनाए रखने में और प्रतिरक्षा प्रणाली को नियंत्रित रखने में मदद करता है। हालांकि, कुछ लोगों में कुछ विशेष एंजाइम की कमी होती है जिसके कारण कोर्टिसोल का उत्पादन कम हो जाता है

और परिणामस्वरूप व्यक्ति में कोर्टिसोल की कमी हो जाती है। इस स्थिति में रक्त में 17-ओएच प्रोजेस्टेरोन का जमाव हो जाता है। 

17-ओएच प्रोजेस्टेरोन के उच्च स्तर का सबसे सामान्य कारण कंजेनिटल एड्रिनल हाइपरप्लासिया (सीएएच) है। यह एक अनुवांशिक स्थिति है इसमें कोर्टिसोल की कमी हो जाती है और एण्ड्रोजन (पुरुष सेक्स हार्मोन) का स्तर बढ़ जाता है।

17-अल्फा हाइड्रोक्सी प्रोजेस्टेरोन टेस्ट सीएएच की पहचान करने में मदद करता है।

  1. 17-अल्फा हाइड्रोक्सी प्रोजेस्टेरोन टेस्ट (17 -ओएच) क्यों किया जाता है - 17-alpha Hydroxyprogesterone (17-OHP) Test Kyu Kiya Jata Hai
  2. 17-अल्फा हाइड्रोक्सी प्रोजेस्टेरोन टेस्ट (17 -ओएच) से पहले - 17-alpha Hydroxyprogesterone (17-OHP) Test Se Pahle
  3. 17-अल्फा हाइड्रोक्सी प्रोजेस्टेरोन टेस्ट (17 -ओएच) के दौरान - 17-alpha Hydroxyprogesterone (17-OHP) Test Ke Dauran
  4. 17-अल्फा हाइड्रोक्सी प्रोजेस्टेरोन टेस्ट (17 -ओएच) के परिणाम का क्या मतलब है - 17-alpha Hydroxyprogesterone (17-OHP) Test Ke Parinam Ka Kya Matlab Hai

17-अल्फा हाइड्रोक्सी प्रोजेस्टेरोन टेस्ट (17-ओएच) क्यों किया जाता है?

यह टेस्ट नवजात शिशुओं में करना जरूरी होता है। इसके अलावा यदि किसी व्यक्ति में सीएएच के लक्षण दिखाई देते हैं तो भी ये टेस्ट किया जा सकता है। नवजात शिशुओं में सीएएच के मुख्य लक्षण निम्न हैं:

जवान लड़कियों या महिलाओं में इसके लक्षण निम्न हैं:

जवान लड़कों और पुरुषों में इसके लक्षण निम्न हैं:

  • प्यूबर्टी जल्दी शुरू होना
  • अच्छी व स्वस्थ मांसपेशियां
  • पेनिस का बड़ा होना लेकिन टेस्टिकल का छोटा होना 
  • बांझपन

17-अल्फा हाइड्रोक्सी प्रोजेस्टेरोन टेस्ट (17-ओएच) की तैयारी कैसे करें?

टेस्ट से आठ घंटे पहले तक कुछ भी खाने पीने से मना किया जा सकता है। डॉक्टर आपसे कुछ ऐसी दवाएं लेने से भी मना कर सकते हैं जो टेस्ट के परिणामों को प्रभावित कर सकती हैं। हालांकि, यदि यह टेस्ट किसी नवजात शिशु पर किया जा रहा है तो ऐसा करना जरूरी नहीं है।

17-अल्फा हाइड्रोक्सी प्रोजेस्टेरोन के स्तर दिन में हर समय अलग-अलग हो सकते हैं। इसीलिए डॉक्टर यह टेस्ट दिन में किसी निश्चित समय पर करेंगे।

यदि बच्चे का टेस्ट किया जा रहा है तो यह जरूरी है कि बच्चे ने टी-शर्ट पहनी हो ताकि टेस्ट आसानी से किया जा सके।

17-अल्फा हाइड्रोक्सी प्रोजेस्टेरोन टेस्ट  (17 -ओएच) कैसे किया जाता है?

परीक्षण के लिए ब्लड सैंपल की थोड़ी सी मात्रा ली जाएगी। डॉक्टर बांह की नस में सुई लगाकर नस से पर्याप्त मात्रा में रक्त निकाल लेंगे। जिस जगह इंजेक्शन लगाया जाना है उस जगह को अल्कोहॉल युक्त दवा से साफ किया जाएगा। ऐसा हो सकता है कि सुई लगने से आपको बिलकुल भी दर्द न हो या चुभन जैसी संवेदना भी हो सकती है। 

ब्लड टेस्ट से जुड़े कुछ सामान्य जोखिम निम्न हैं:

  • ब्लड सैंपल लेने में कठिनाई 
  • रक्त निकाली गई जगह पर अत्यधिक रक्त स्त्राव 
  • बेहोश होना 
  • हीमेटोमा (त्वचा में रक्त का जमना)
  • सुई लगी जगह पर संक्रमण 

उचित सावधानियां बरतने पर इनमें से अधिकतर खतरों को कम किया जा सकता है।

17-अल्फा हाइड्रोक्सी प्रोजेस्टेरोन टेस्ट (17 -ओएच) के परिणाम का क्या मतलब है?

बच्चों, नवजात शिशुओं और वयस्कों में सामान्य और असामान्य वैल्यू अलग होगी। 

सामान्य परिणाम:
आमतौर पर निम्न वैल्यू को सामान्य माना जाता है:

  • बच्चे: 400-600 नैनोग्राम प्रति डेसीलिटर (ng/dL) से कम 
  • प्यूबर्टी से पहले की अवस्था के बच्चे: 100 ng/dL
  • व्यस्क: 200 ng/dL से कम 

असामान्य परिणाम:

17-अल्फा हाइड्रोक्सी प्रोजेस्टेरोन टेस्ट (17 -ओएच) के उच्च स्तर एड्रिनल ग्रंथि के ट्यूमर या सीएएच की तरफ संकेत कर सकते हैं। असामान्यता का सही कारण जानने के लिए आगे अन्य टेस्ट भी किए जा सकते हैं।

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References

  1. Wu A. Tietz Clinical Guide to Laboratory Tests. 4thed.St Louis, MO:Saunders Elsevier. 2006.. Pp:588-591.
  2. MedlinePlus Medical Encyclopedia: US National Library of Medicine; 17-OH progesterone
  3. MedlinePlus Medical Encyclopedia: US National Library of Medicine; Congenital adrenal hyperplasia
  4. Rey RA, Josso N. Diagnosis and Treatment of Disorders of Sexual Development. In: Jameson JL, De Groot LJ, de Kretser DM, et al., eds. Endocrinology: Adult and Pediatric. 7th ed. Philadelphia, PA: Elsevier Saunders. 2016.Chap 119.
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