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कोलोनोस्कोपी एक ऐसा टेस्ट है जिसका इस्तेमाल बड़ी आंत या गुदा में किसी प्रकार की खराबी या अन्य असामान्यताओं का पता लगाने के लिए किया जाता है। 

कोलोनोस्कोपी के दौरान मरीज की बड़ी आंत में गुदा के माध्यम से एक लंबी और लचीली ट्यूब डाली जाती है इस ट्यूब को कोलोनोस्कोप (Colonoscope) कहा जाता है। इस ट्यूब के अगले सिरे पर एक छोटा सा कैमरा लगा होता है जिसकी मदद से डॉक्टर गुदा के अंदर देख पाते हैं। 

यदि कोलन (बड़ी आंत) या गुदा में कोई असाधारण ऊतक या मांस बढ़ा हुआ है तो कोलोनोस्कोप की मदद से उसको हटाया जा सकता है। इसके अलावा कोलोनोस्कोपी के दौरान ऊतकों के सेंपल भी लिये जा सकते हैं। इन सेंपल को लेबोरेटरी में टेस्टिंग के लिए भेजा जाता है।

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  1. कोलोनोस्कोपी क्यों किया जाता है - What is the purpose of Colonoscopy in Hindi
  2. कोलोनोस्कोपी से पहले - Before Colonoscopy in Hindi
  3. कोलोनोस्कोपी के दौरान - During Colonoscopy in Hindi
  4. कोलोनोस्कोपी के बाद - After Colonoscopy in Hindi
  5. कोलोनोस्कोपी के क्या जोखिम होते हैं - What are the risks of Colonoscopy in Hindi
  6. कोलोनोस्कोपी के परिणाम का क्या मतलब होता है - What do the results of Colonoscopy mean in Hindi

कोलोनोस्कोपी किस लिए की जाता है?

निम्न जांच करने के लिए डॉक्टर कोलोनोस्कोपी टेस्ट करवाने का सुझाव दे सकते हैं:

  • आंत संबंधी लक्षण व संकेतों का पता लगाने के लिए - यदि आपको पेट में दर्द, गुदा से खून आना, लंबे समय से कब्ज या दस्त या फिर आंतों संबंधी कोई अन्य समस्या है, तो कोलोनोस्कोपी की मदद से डॉक्टर इन समस्याओं के कारण का पता लगा सकते हैं।
  • कोलन कैंसर की जांच करने के लिए - यदि आपकी उम्र 50 साल या उससे अधिक हो गई है और आप सामान्य रुप से स्वस्थ हैं तो कोलन कैंसर की जांच करने के लिए डॉक्टर 10 साल में एक या अधिक बार कोलोनोस्कोपी करवाने का सुझाव देते हैं। कोलन कैंसर की जांच करने के लिए कोलोनोस्कोपी ही एकमात्र विकल्प नहीं है, आपके लिए उपलब्ध अन्य विकल्पों का पता करने के लिए अपने डॉक्टर से बात करें।
  • पोलीप्स (बढ़ा हुआ मांस) की जांच करने के लिए - यदि आपके कोलन में पहले भी मांस बढ़ चुका है, तो डॉक्टर कोलोनोस्कोपी टेस्ट करवाने का सुझाव दे सकते हैं ताकि किसी नए पोलीप्स का पता लगाया जा सके और उसे निकाला जा सके। इससे कोलन कैंसर के जोखिम को कम करने में भी मदद मिलती है।

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कोलोनोस्कोपी करने से पहले क्या किया जाता है?

कोलोनोस्कोपी टेस्ट करवाने से पहले आपको अपनी बड़ी आंत को अच्छे से साफ करने के लिए कहा जाता है। यदि बड़ी आंत ठीक से साफ ना हो पाए तो कोलोनोस्कोपी के दौरान बड़ी आंत और गुदा का क्षेत्र साफ नहीं दिखाई दे पाता।

कोलन को अच्छे से साफ करने के लिए डॉक्टर निम्न तरीके सुझाते हैं:

  • परीक्षण से एक दिन पहले विशेष प्रकार का भोजन खाना -
    डॉक्टर आमतौर पर कोलोनोस्कोपी टेस्ट करने से एक दिन पहले किसी भी प्रकार के कठोर आहार खाने से मना कर देते हैं। इसके अलावा पीने के लिए पानी बिना दूध व क्रीम की चाय और कॉफी आदि जैसे तरल पदार्थ ही लेने चाहिए। लाल रंग के तरल पेय पदार्थों को ना पिएं क्योंकि ये कोलोनोस्कोपी टेस्ट के दौरान खून जैसे दिखाई देते हैं। डॉक्टर परीक्षण से पहली रात में 12 बजे के बाद कुछ भी खाने से मना कर देते हैं। 
     
  • लैक्सेटिव्स (Laxative: पेट साफ करने की दवा) लेना -
    डॉक्टर अक्सर आपको लैक्सेटिव दवाएं लेने का सुझाव भी दे सकते हैं, जो टेबलेट या क्रीम के रूप में मिल जाती हैं। डॉक्टर आपको परीक्षण से पहली रात या टेस्ट की सुबह लैक्सेटिव लेने के लिए कह सकते हैं।
     
  • एनिमा किट का इस्तेमाल करना -
    कुछ मामलों में डॉक्टर आपको एनिमा किट का इस्तेमाल करने का सुझाव भी दे सकते हैं, जिसकी मदद से कोलन को खाली किया जाता है। एनिमा किट का इस्तेमाल या तो कोलोनोस्कोपी से एक रात पहले किया जाता है या फिर सिर्फ कुछ घंटे पहले ही किया जाता है। यह आमतौर पर कोलन के निचले भाग को खाली करने में ही प्रभावी होता है। एनिमा किट कोलन को खाली करने का मुख्य तरीका नहीं है। 
     
  • दवाओं को एडजस्ट करना -
    यदि आपको किसी भी प्रकार की दवा लेते हैं तो कोलोनोस्कोपी टेस्ट होने से कम से कम एक सप्ताह पहले डॉक्टर को उन सभी दवाओं के बारे में बता दें। खासकर यदि आपको डायबिटीजहाई बीपी या हृदय संबंधी समस्याएं हैं या फिर यदि आप ऐसी दवाएं खा रहे हैं जिनमें आयरन हो, तो निश्चित रूप से डॉक्टर को बता दें।

कुछ और दवाएं भी हैं जिनके बारे में डॉक्टर को बताना बहुत जरूरी होता है, जैसे:

  • एस्पिरिन या वारफेरिन जैसी खून को पतला करने वाली दवाएं
  • खून का थक्का जमने से रोकने वाली दवाएं, जिन्हे एंटीकॉग्युलेंट्स कहते हैं
  • हृदय के लिए इस्तेमाल की जाने वाली कुछ प्रकार की दवाएं जो प्लेटलेट्स की संख्या को प्रभावित करती हैं जैसे क्लोपिडोडोग्रेल (Plavix)

इन सभी दवाओं के बारे में कोलोनोस्कोपी टेस्ट होने से करीब एक हफ्ता पहले ही डॉक्टर को बता देना चाहिए।

आपको कुछ सिर्फ कुछ ही समय के लिए अपनी दवाएं व उनको खुराक को एडजस्ट करना पड़ सकता है। 

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कोलोनोस्कोपी कैसे किया जाता है?

कोलोनोस्कोपी प्रक्रिया के दौरान मरीज को सिर्फ एक विशेष प्रकार का गाउन पहनना होता है। इस प्रक्रिया के दौरान मरीज को आमतौर पर बेहोश करना जरूरी होता है। यदि मरीज को पूरी तरह से बेहोश करने की जरूरत नहीं है तो उनको टेबलेट या कैप्सूल के रूप में एक हल्का "सिडेटिव" (हलकी बेहोशी की अवस्था में ले जाने वाली दवा) दिया जाता है। अन्य मामलों में सिडेटिव और दर्द को कम करने वाली अन्य दवाओं को मिलाकर इंजेक्शन के द्वारा दिया जाता है ताकि कोलोनोस्कोपी के दौरान होने वाले दर्द या तकलीफ को कम किया जा सके।

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परीक्षण की प्रकिया के दौरान मरीज को मेज पर करवट से लेटाया जाता है और उसके घुटनों को आमतौर पर छाती की तरफ मोड़ दिया जाता है। इसके बाद डॉक्टर कोलोनोस्कोप को धीरे-धीरे गुदा के अंदर डालते हैं।

कोलोनोस्कोप इतना लंबा होता है जो बड़ी आंत के दूसरे सिरे तक पहुंच सकता है। इस उपकरण में एक ट्यूब लगी होती है जिसकी मदद से डॉक्टर कोलन में हवा या कार्बन डाइऑक्साइड पंहुचाते हैं। कोलन में हवा या कार्बन डाइऑक्साइड भर कर उसको फुला दिया जाता है जिससे कोलन की परतें स्पष्ट दिखाई देती हैं। 

जिस दौरान आपके कोलन में हवा भरी जाती है या कोलोनोस्कोप को हिलाया जाता है, उस दौरान पेट में मरोड़ या मल त्याग करने की एक तीव्र इच्छा हो सकती है। 

कोलोनोस्कोप के अगले सिरे में एक छोटा सा कैमरा लगा होता है। यह कैमरा बाहर लगी स्क्रीन में कोलन के अंदर की तस्वीरें भेजता है, जिन्हे देखकर डॉक्टर कोलन के अंदर की जांच करते हैं। 

डॉक्टर कोलन में कोलोनोस्कोप की ट्यूब के अंदर से एक उपकरण भी डाल सकते हैं जिसकी मदद से कोलन के ऊतक का सेंपल निकाला जाता है। यदि कोलन के अंदर मांस बढ़ा हुआ हो, तो इस उपकरण की मदद से उसको भी निकाला जा सकता है। 

कोलोनोस्कोपी टेस्ट में आमतौर पर 30 से 60 मिनट का समय लगता है। 

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कोलोनोस्कोपी के बाद क्या किया जाता है?

कोलोनोस्कोपी का टेस्ट पूरा होने के बाद मरीज को होश आने में एक घंटा लग सकता है। मरीज को अस्पताल से घर तक जाने के लिए एक साथी की आवश्यकता पड़ती है क्योंकि सीडेटिव दवाओं का असर पूरी तरह से उतरने में एक दिन तक का समय लग जाता है। जिस दिन कोलोनोस्कोपी का टेस्ट किया जाता है, उस दिन मरीज को ड्राइव नहीं करना चाहिए और ना ही कोई अन्य महत्वपूर्ण काम करना चाहिए। 

यदि कोलोनोस्कोपी के दौरान कोलन के अंदर से बढ़े हुए मांस को हटाया गया है, तो डॉक्टर मरीज के लिए भोजन का एक विशेष प्लान बना सकते हैं।

हो सकता है कि कोलोनोस्कोपी के बाद आपको पेट फूला हुआ महसूस हो और आप कुछ घंटों तक गैस पास करते रहें। यदि ऐसा हो तो थोड़ा बहुत चलने से आराम मिल सकता है।

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टेस्ट के बाद जब आप पहली बार मल त्याग करते हैं तो उस दौरान आपके मल में थोड़ा बहुत खून आ सकता है। आमतौर पर यह कोई हानिकारक स्थिति का संकेत नहीं होता। यदि आपको हर बार मल त्याग करने के बाद खून आ रहा है और पेट में दर्द या बुखार जैसे लक्षण महसूस हो रहे हैं तो डॉक्टर को इस बारे में बताएं। हालांकि यह स्थिति कोलोनोस्कोपी के तुरंत बाद या कुछ दिन के बाद हो सकती है, लेकिन कुछ मामलों मे यह एक या दो हफ्तों तक रह सकती है।

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कोलोनोस्कोपी के क्या जोखिम होते हैं?

कोलोनोस्कोपी टेस्ट के किओ खास जोखिम नहीं होते। कुछ गिने-चुने मामलों में निम्न परेशानियां हो सकती हैं:

  • परीक्षण के दौरान इस्तेमाल की गई सिडेटिव दवा का उल्टा रिएक्शन होना (और पढ़ें - एलर्जिक शॉक क्या है)
  • कोलोनोस्कोपी के दौरान जहां से ऊतक का सेंपल लिया गया था या बढ़े हुऐ मांस को निकाला गया था, उस जगह से खून आना
  • बड़ी आंत या गुदा की परत में कोई छिद्र या दरार बनना

कोलोनोस्कोपी से जुड़े सभी जोखिमों पर चर्चा करने के बाद डॉक्टर इस प्रक्रिया को करने से पहले आपको सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करने के लिए कहेंगे।

कोलोनोस्कोपी के रिजल्ट का क्या मतलब होता है?

डॉक्टर टेस्ट की रिपोर्ट पढने के बाद आपको उसका मतलब समझाएंगे। टेस्ट का रिजल्ट नेगेटिव आता है (यानी आपका स्वास्थ्य सामान्य है) या पॉजिटिव आता है (यानी कुछ प्रॉब्लम है)।

1. नेगेटिव रिजल्ट -

यदि टेस्ट के दौरान डॉक्टर को कोलन में किसी भी प्रकार की खराबी या असामान्यता ना मिले तो टेस्ट को नेगेटिव माना जाता है। 

डॉक्टर आपको फिर से कोलोनोस्कोपी टेस्ट करवाने का सुझाव इन परिस्थितियों में दे सकते हैं:

  • दस साल में - यदि आप में उम्र अधिक होने के अलावा कोलन कैंसर के कोई और जोखिम नहीं है तो डॉक्टर आपको 10 साल में एक बार कोलोनोस्कोपी टेस्ट करवाने की सलाह दे सकते हैं।
  • पांच साल में - यदि कोलोनोस्कोपी के दौरान आपके कोलन में बढ़ा हुआ मांस या कुछ असामान्य ऊतक मिले हैं तो डॉक्टर आपको पांच साल के बाद फिर से कोलोनोस्कोपी टेस्ट करवाने का सुझाव दे सकते हैं।
  • एक साल में - यदि कोलोनोस्कोपी करने के दौरान आपके कोलन में मल के अवशेष दिखाई देते हैं जो टेस्ट को ठीक से होने नहीं दे रहे, तो डॉक्टर अगले साल कोलोनोस्कोपी टेस्ट करवाने की सलाह देते हैं।

2. पॉजिटिव रिजल्ट - 

यदि कोलोनोस्कोपी के दौरान कोलन में किसी प्रकार का असाधारण ऊतक या बढ़ा हुआ मांस पाया जाता है तो इस टेस्ट के रिजल्ट को पॉजिटिव माना जाता है।

ज्यादातर कोलन में बढ़े हुऐ मांस के टुकड़े कैंसर युक्त नहीं होते लेकिन उनमें से कुछ ऐसे टुकड़े हो सकते हैं जिनमें बाद में कैंसर हो सकता है। इसलिए बढ़े हुऐ मांस का सेंपल निकाला जाता है और उसे टेस्टिंग के लिए लेबोरेटरी भेज दिया जाता है। लेबोरेटरी में सेंपल की यह जांच की जाती है कि वह कैंसर से ग्रस्त है या कैंसर मुक्त है।

यदि कोलन में बढ़े हुऐ मांस के टुकड़े अधिक संख्या में पाए जाते हैं तो नियमित रूप से जांच करना आवश्यक होता है। 

यदि टेस्ट के दौरान कोलन में बढ़े हुए मांस के एक या दो टुकड़े पाए जाते हैं जो 1 सेंटीमीटर से छोटे हैं, और कोलन कैंसर के अन्य जोखिम कारक नहीं हैं, तो डॉक्टर 5 या 10 साल के बाद फिर से कोलोनोस्कोपी करवाने का सुझाव देते हैं।

यदि आपको निम्न समस्याएं है तो डॉक्टर आपको और जल्दी कोलोनोस्कोपी टेस्ट करवाने का सुझाव दे सकते हैं:

  • कोलन में बढ़े मांस के दो या उससे अधिक टुकड़े होना
  • कोलन में 1 सेंटीमीटर से ज्यादा मांस बढ़ जाना
  • कोलन में बढ़े हुए मांस या मल के अवशेष होने के कारण कोलोनोस्कोपी ठीक से ना हो पाना
  • बढ़े हुए मांस में कुछ विशेष असामान्यताएं दिखाई देना जो भविष्य में कैंसर का कारण बन सकती हैं
  • कोलन में कैंसर युक्त मांस के टुकड़े

अगर आपके कोलन में कुछ ऐसे मांस के टुकड़े या अन्य असाधारण ऊतक हैं जो कोलोनोस्कोपी के दौरान नहीं निकाले जा सकते, तो ऐसे गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट (Gastroenterologist) डॉक्टर से परीक्षण करवाने की जरूरत होती है जो मांस के बढ़े हुए टुकड़ों को हटाने और ऑपरेशन के विशेषज्ञ डॉक्टर होते हैं।

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