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गुदा नलिका मलाशय के अंत में एक छोटी सी नली होती है। इस नली से मल बाहर निकलता है। इस नली में कैंसर को गुदा कैंसर कहते हैं। हालांकि आजकल कैंसर होना काफी आम हो गया है, लेकिन गुदा कैंसर के मामले कम ही होते हैं।

(और पढ़ें - कैंसर के लक्षण)

मलाशय और गुदे से खून निकलना इसके मुख्य लक्षण है। ज़्यादातर गुदा कैंसर रोगियों का इलाज कीमोथेरपी और विकिरण (रेडिएशन थेरेपी) से होता है। दोनों प्रकार के इलाज साथ में करने से, रोगी के ठीक होने की संभावना बढ़ जाती है पर इससे कुछ नुकसान भी हो सकते हैं।

आगे इसके लक्षण, कारण और इलाज के बारे में विस्तार से बताया गया है।

  1. गुदा कैंसर के चरण - Stages of Anal Cancer in Hindi
  2. गुदा कैंसर के लक्षण - Anal Cancer Symptoms in Hindi
  3. गुदा कैंसर के कारण और जोखिम कारक - Anal Cancer Causes & Risk Factors in Hindi
  4. गुदा कैंसर से बचाव - Prevention of Anal Cancer in Hindi
  5. गुदा कैंसर का परिक्षण - Diagnosis of Anal Cancer in Hindi
  6. गुदा कैंसर का उपचार - Anal Cancer Treatment in Hindi
  7. गुदा कैंसर की जटिलताएं - Anal Cancer Complications in Hindi
  8. गुदा कैंसर की दवा - Medicines for Anal Cancer in Hindi
  9. गुदा कैंसर के डॉक्टर

गुदा कैंसर के चरण - Stages of Anal Cancer in Hindi

 गुदा कैंसर के चरण क्या होते हैं? 

अन्य किसी भी कैंसर की तरह, डॉक्टर को यह जानना जरूरी होता है कि रोगी का गुदा कैंसर किस चरण तक पहुँच चुका है, ताकि वह रोगी के लिए उचित इलाज का चयन कर सकें। 

गुदा कैंसर के चरण का अनुमान लगाने के लिए निम्नलिखित टेस्ट इस्तेमाल किये जाते हैं:

गुदा कैंसर के चरण :

  1. पहला चरण:
    गुदा कैंसर का ट्यूमर 2 सेंटीमीटर या उससे कम का होता है। ये लगभग एक मूंगफली के जितना होता है।
     
  2. दूसरा चरण:
    गुदा कैंसर का ट्यूमर 2 सेंटीमीटर से बड़ा हो चुका होता है परन्तु गुदा नलिका (anal canal) के बाहर नहीं फैला होता है। 
     
  3. तीसरा चरण:
    (अ ) इस चरण में गुदा कैंसर का ट्यूमर किसी भी आकार का हो सकता है। ये मलाशय के आस-पास के लिम्फ़ नोड्स, ब्लैडर, मूत्रमार्ग या योनि में फ़ैल चुका होता है।
    (ब ) गुदा कैंसर तीसरे(अ) चरण से बढ़के अब श्रोणि  के आस पास के लिम्फ़ नोड्स में फ़ैल चुका होता है।
     
  4. चौथा चरण:
    गुदा कैंसर श्रोणि से शरीर के अन्य हिस्सों में फ़ैल चुका होता है। 

(और पढ़ें - प्रोस्टेट कैंसर का इलाज)

गुदा कैंसर के लक्षण - Anal Cancer Symptoms in Hindi

गुदा कैंसर के लक्षण इस प्रकार हैं:

  • मलाशय या गुदा से खून बहना। (और पढ़ें - मल में खून आना)
  • गुदा के आस पास दर्द होना।
  • गुदा की नली में माँस बढ़ना। 
  • गुदा में खुजली होना। (और पढ़ें - खुजली की दवा)

चिकित्सक को कब दिखाएं?

इनमें से कोई भी लक्षण दिखे तो चिकित्सक को तुरंत दिखाएं।

(और पढ़ें - एनल फिशर का इलाज)

गुदा कैंसर के कारण और जोखिम कारक - Anal Cancer Causes & Risk Factors in Hindi

गुदा कैंसर क्यों होता है?

गुदा कैंसर तब होता है जब आपके जीन्ज़ (genes) की बनावट में ऐसा बदलाव आता है - जिसे चिकित्सीय भाषा में "जेनेटिक म्यूटेशन" (genetic mutation) कहते हैं - जो तंदरुस्त कोशिकाओं को असामान्य बना देता है।

तंदरुस्त कोशिकाएं सामान्य गति से बढ़ती हैं और ख़तम हो जाती हैं। लेकिन कैंसर की कोशिकाएं खत्म नहीं होती और बढ़ती ही रहती हैं। इनके संचयन से ट्यूमर बनता है। कैंसर कोशिकाएं जहाँ बननी शुरू हुई थीं, वहां से आस-पास के ऊतकों तक फैल जाती हैं। इससे नए ट्यूमर बन जाते हैं। इस तरह कैंसर शरीर में फैल जाता है। 

गुदा कैंसर "ह्यूमन पेपिलोमा वायरस" (एचपीवी) से भी होता है। कई पीड़ितों में ये कैंसर का मुख्य कारण पाया गया है। 

(और पढ़ें - एचपीवी टीका)

गुदा कैंसर होने की सम्भावना बढ़ाने वाले कारक -

  • उम्र बढ़ना - जो लोग 50 वर्ष या उससे ज़्यादा के होते हैं, उन्हें गुदा का कैंसर होने की ज़्यादा संभावना है। 
  • कई लोगों के साथ यौन सम्बन्ध - जिन लोगों के कई लोगों के साथ यौन संबंध होते हैं उनमें गुदा कैंसर होने की सम्भावना बढ़ जाती है। 
  • गुदा मैथुन (एनल सेक्स) - जो लोग एनल सेक्स करते हैं उन्हें भी गुदा कैंसर होने की संभावनाएं होती हैं।
  • धूम्रपान - धूम्रपान करने से भी गुदा का कैंसर होने का जोखिम बढ़ जाता है। (और पढ़ें - धूम्रपान के नुकसान)
  • पहले कभी कैंसर हुआ हो - जिसे सर्वाइकल कैंसर, वलवर कैंसर या फिर योनि का कैंसर हो चुका हो, उन्हें गुदे का कैंसर होने की ज़्यादा संभावना है।
  • ह्यूमन पैपिलोमा वायरस - एच.पी.वी. संक्रमण कई प्रकार के कैंसर का कारण बन सकता है। जैसे गुदा कैंसर और सर्वाइकल कैंसर। एच.पी.वी. संक्रमण से जननांग मस्से भी हो सकते हैं।
  • रोग प्रतिरोधक शक्ति (immunity)  कम करने वाली दवाइयां - जो लोग ऐसी दवाइयों का सेवन करते है या फिर जिनके अंगों का प्रत्यारोपण हुआ हो, उन्हें भी गुदा कैंसर होने की संभावनाएं हैं।  एचआईवी (HIV: एड्स करने वाला वायरस) भी रोग प्रतिरोधक शक्ति कम कर देता है और गुदा कैंसर होने की संभावनाएं बढ़ा देता है। (और पढ़ें - रोग प्रतिरोधक शक्ति कैसे बढ़ाएं )

गुदा कैंसर से बचाव - Prevention of Anal Cancer in Hindi

गुदा कैंसर से कैसे बचें?

इससे पूरे तरीके से नहीं बचा जा सकता पर बचने की पूरी कोशिश की जा सकती है। निम्नलिखित तरीकों से इसके जोखिम को घटाया जा सकता है -

  • सुरक्षित यौन सम्बन्ध -
    सुरक्षित यौन क्रिया अपनाएं या यौन क्रिया से बचें। इससे एचपीवी और एचआईवी वायरस से बचा जा सकता है। कंडोम का प्रयोग करें। (और पढ़ें - सुरक्षित सेक्स कैसे करें)
     
  • एचपीवी के लिए टीकाकरण -
    गार्डासिल (Gardasil) और सर्वरिक्स (Cervarix) के टीके एचपीवी के खिलाफ सुरक्षा के लिए लगाए जाते हैं। ये टीके लड़के और लड़कियां दोनों को ही लगाए जा सकते हैं। 
     
  • धूम्रपान करना छोड़ दें और अगर आप धूम्रपान नहीं करते हैं तो शुरू न करें। (और पढ़ें - धूम्रपान छोड़ने के घरेलू उपाय)

गुदा कैंसर का परिक्षण - Diagnosis of Anal Cancer in Hindi

क्या आपको गुदा कैंसर है? 

  1. गुदे की नली और मलाशय की असामन्यताओं की जाँच करना -
    डिजिटल मलाशय जाँच के दौरान, चिकित्सक एक दस्ताना पेहेनते हैं और ऊँगली को चिकना करके मलाशय के अंदर घुसाते हैं। अगर आपको गुदा कैंसर है तो उन्हें कुछ असामान्य मांस का बढ़ा हुआ टुकड़ा महसूस हो सकता है। 
     
  2. गुदे की नली और मलाशय की देखके जांच करना -
    चिकित्सक एक छोटी रौशनदार नली (एनोस्कोप: anoscope) की मदद से गुदे और मलाशय की असमान्यतों की जांच कर सकते हैं। 
     
  3. गुदे की नली का अल्ट्रासाउंड -
    गुदा की नली का चित्र निकालने के लिए, चिकित्सक एक मोटे थर्मामीटर जैसा यंत्र मलाशय और गुदा की नली में घुसाते हैं। वो यंत्र अल्ट्रासाउंड तरंगे भेजता है। जब ये तरंगे किसी भी ऊतक या अंग से टकराती हैं, तो वो इन्हे प्रतिबिम्ब (रिफ्लेक्ट) करके इनका एक चित्र तैयार कर लेते हैं। चिकित्सक इन चित्रों की मदद से असामन्यताओं की जांच करते हैं। (और पढ़ें : अल्ट्रासाउंड टेस्ट)
     
  4. प्रयोगशाला जांच के लिए ऊतक से टुकड़ा निकालना -
    असामान्यताएं पाए जाने पर, चिकित्सक कैंसर ऊतकों में से टुकड़े निकालके (बायोप्सी) प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजते हैं। माइक्रोस्कोप के भीतर जांचने पर ऊतकों का पता लगाया जा सकता है कि उनसे कैंसर होगा या नहीं। (और पढ़ें - बायोप्सी जांच)

गुदा कैंसर का उपचार - Anal Cancer Treatment in Hindi

संयुक्त कीमोथेरपी और विकिरण -

चिकित्सक अक्सर गुदा कैंसर का इलाज कीमोथेरेपी और विकिरण की संयुक्ति से करते हैं। ऐसा करने से कैंसर ठीक होने के आसार बढ़ जाते हैं, लेकिन साथ ही इनसे होने वाली परेशानियाँ भी बढ़ सकती हैं। 

  • कीमोथेरपी (chemotherapy) -
    गुदा कैंसर रोगी को टीके लगाए जाते हैं या फिर टैबलेट्स खाने के लिए दी जाती है। ऐसा करने से कैंसर कोशिकाओं का नाश होता है। परन्तु इससे रोगी के बाल झड़ते हैं, जी मिचलता है और उल्टी आती है।
     
  • विकिरण थेरेपी (radiation therapy) -
    विकिरण थेरेपी तेज़ ऊर्जा वाली रौशनी जैसे की एक्स-रेज़ का प्रयोग करती है। ये रौशनी कैंसर कोशिकाओं का खात्मा करती है। परन्तु इससे आपकी त्वचा लाल होने लगती है, गुदा के आस-पास सूजन आ जाती है और गुदा की नली सख्त हो जाती है। (और पढ़ें - एक्स रे क्या है)

विकिरण थेरेपी 4-5 हफ़्तों तक चलती है। कीमोथेरपी पांचवे या छठे हफ्ते में की जाती है। पूर्ण स्वास्थ्य और कैंसर के चरण को देखकर ही चिकित्सक गुदा कैंसर का इलाज करते हैं। 

गुदा कैंसर की सर्जरी -

कैंसर के चरण को देखकर चिकित्सक गुदा कैंसर के ट्यूमर को निकालने के लिए सही प्रक्रिया का चयन करते हैं। 

  • शुरुआती चरण के गुदा कैंसर के लिए सर्जरी -
    अगर ट्यूमर छोटा हो तो उसे सर्जरी से ही निकाल दिया जाता है।  इस प्रक्रिया के दौरान चिकित्सक ट्यूमर के साथ उसके पास के सामान्य ऊतकों को भी निकाल देते हैं। 

    ट्यूमर छोटा होने के कारण उसे बिना गुदा की नली या फिर "गुदा स्फिंक्टर मांसपेशियों" (anal sphincter muscles) को हानि पहुंचाए बिना ही निकाला जा सकता है। गुदा स्फिंक्टर मांसपेशियाँ शरीर से मल बाहर निकालने में मदद करती हैं इसलिए उन्हें हानि नहीं पहुंचाई जानी चाहिए। कैंसर का चरण देखकर, चिकित्सक सर्जरी के बाद कीमोथेरपी और विकिरण का भी सुझाव दे सकते हैं।  
     
  • गुदा कैंसर बढ़ने पर सर्जरी जब यह अन्य इलाज से ठीक नहीं हो रहा हो -
    अगर आपका कैंसर कीमोथेरपी और विकिरण से ठीक नहीं हो पा रहा है तो इसका अर्थ ये है कि आपका कैंसर काफी हद तक बढ़ चुका है। ऐसे में आपके चिकित्सक "अब्डॉमिनोपेरिनाल रिसेक्शन" (abdominoperineal resection: ख़ास गुदा कैंसर के लिए एक सर्जरी) का सुझाव दे सकते हैं। इस प्रक्रिया के दौरान, आपके गुदा की नली, मलाशय और कोलन का एक हिस्सा निकाल दिया जाता है।  कोलन का बचा हुआ हिस्सा पेट से जोड़ दिया जाता है। इससे मल और मूत्र एक "कोलस्टॉमी बैग" में इकठ्ठा हो जाता है। 

(और पढ़ें - कॉलोरेक्टल कैंसर सर्जरी)

गुदा कैंसर की जटिलताएं - Anal Cancer Complications in Hindi

गुदा कैंसर की जटिलताएं:

गुदा कैंसर शरीर के अन्य हिस्सों में बहुत कम फैलता है। अगर गुदा कैंसर फैलता भी है तो ये लिवर और फेफड़ों तक ही फैलता है। अगर गुदा कैंसर फ़ैल जाये तो इसका इलाज करना बहुत मुश्किल है। 

(और पढ़ें - लिवर कैंसर और फेफड़ों का कैंसर)

 

Dr. Ashok Vaid

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गुदा कैंसर की दवा - Medicines for Anal Cancer in Hindi

गुदा कैंसर के लिए बहुत दवाइयां उपलब्ध हैं। नीचे यह सारी दवाइयां दी गयी हैं। लेकिन ध्यान रहे कि डॉक्टर से सलाह किये बिना आप कृपया कोई भी दवाई न लें। बिना डॉक्टर की सलाह से दवाई लेने से आपकी सेहत को गंभीर नुक्सान हो सकता है।

Medicine Name
Cizumab खरीदें
5 Flucel खरीदें
Chemoflura खरीदें
Fivocil खरीदें
Fivoflu खरीदें
Flocil खरीदें
Florac खरीदें
Fluonco खरीदें
Fluracil खरीदें
Kucil खरीदें
Oncoflour खरीदें
Bevatas खरीदें
Flonida खरीदें
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References

  1. Dr. Sajad Ahmad Salat, Dr. Azzam Al Kadi. Anal cancer – a review. Int J Health Sci (Qassim). 2012 Jun; 6(2): 206–230. PMID: 23580899
  2. Americas: OMICS International. Anal Cancer . [internet]
  3. Robin K.S Phillips,Sue Clark. Colorectal Surgery. Elsevier Health Sciences, 2013;346 pages
  4. Mayo Foundation for Medical Education and Research. Anal cancer.[internet]
  5. Cancer Reserch UK. [internet];Risks and causes of anal cancer
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