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एंटमीबा हिस्टोलिटिका (एमोबिआसिस) एंटीबॉडी टेस्ट क्या है?

एंटमीबा हिस्टोलिटिका एक परजीवी सूक्ष्मजीव है जो कि अमीबियासिस या अमीबिक डीसेंट्री नामक रोग फैलाते हैं। यह परजीव शरीर में सिस्ट के रूप में जाता है जो कि संक्रमित भोजन व पानी लेने के कारण बनती है और आंतों में जमा हो जाती है। इसके बाद यह आंतों की कोशिकाओं को नष्ट करने लगती हैं और इससे दस्त, पेट में दर्द और बुखार जैसे लक्षण दिखाई देने लगते हैं। जिन लोगों को अमीबिक डीसेंट्री होता है उनके शरीर में इ-हिस्टोलिटिका के विरोध में विशेष प्रकार के एंटीबॉडीज बनने लगते हैं जो कि शरीर द्वारा खतरनाक जीवों को नष्ट करने के लिए बनाए जाते हैं।

एंटमीबा हिस्टोलिटिका एंटीबॉडी टेस्ट एंटी एंटमीबा हिस्टोलिटिका एंटीबॉडीज की जांच करता है और उनकी संख्या का पता लगाता है। हालांकि, आपका शरीर इन रोगजनकों के विरोध में भिन्न प्रकार के एंटीबॉडीज बनाता है, लेकिन यह टेस्ट केवल आईजीजी एंटीबॉडीज के बारे में ही पता लगाता है क्योंकि ये मरीज के रोग की स्थिति का सटीक आकलन करते हैं।

  1. एंटमीबा हिस्टोलिटिका (एमोबिआसिस) एंटीबॉडी टेस्ट क्यों किया जाता है - Entamoeba histolytica (amoebiasis) antibody kyu kiya jata hai
  2. एंटमीबा हिस्टोलिटिका (एमोबिआसिस) एंटीबॉडी टेस्ट से पहले - Entamoeba histolytica (amoebiasis) antibody se pahle
  3. एंटमीबा हिस्टोलिटिका (एमोबिआसिस) एंटीबॉडी टेस्ट के दौरान - Entamoeba histolytica (amoebiasis) antibody ke dauran
  4. एंटमीबा हिस्टोलिटिका (एमोबिआसिस) एंटीबॉडी टेस्ट के परिणाम का क्या मतलब है - Entamoeba histolytica (amoebiasis) antibody ke parinam ka kya matlab hai

एंटमीबा हिस्टोलिटिका टेस्ट द्वारा तब दी जाती है जब माइक्रोस्कोप द्वारा देखे जाने पर भी स्टूल सैंपल में परजीवी की जांच नहीं हो पाती है जबकि व्यक्ति के शरीर में एमोबिआसिस के लक्षण लगातार दिखाई दे रहे होते हैं। यह स्थिति आमतौर पर तब पैदा होती है, जब संक्रमण आंत के बाहर किसी अंग जैसे लिवर, फेफड़ों या मस्तिष्क में होता है।

निम्न लक्षण दिखाई देने पर डॉक्टर इस टेस्ट की सलाह दे सकते हैं -

एक संपूर्ण परीक्षण के लिए और लिवर, फेफड़ों व मस्तिष्क में पैथोजन के फैलाव की पुष्टि करने के लिए डॉक्टर कुछ अन्य टेस्ट करवाने की सलाह दे सकते हैं जिनमें कम्पलीट ब्लड काउंट, एरीथ्रोसाइट सेडीमेंटशन रेट, कंप्यूटेड टोमोग्राफी और मैग्नेटिक रेसोनेंस इमेजिंग टेस्ट आदि शामिल हैं।

एंटमीबा हिस्टोलिटिका (एमोबिआसिस) एंटीबॉडी टेस्ट की तैयारी कैसे करें?

एंटमीबा हिस्टोलिटिका (एमोबिआसिस) एंटीबॉडी टेस्ट के लिए किसी भी विशेष तैयारी की जरूरत नहीं है।

लैब टेक्नीशियन आपकी बांह में सुई लगाकर रक्त का सैंपल ले लेंगे। इस टेस्ट के लिए रक्त के सैंपल को एक सुनहरे रंग के ढक्कन वाली ट्यूब में रखा जाता है। यह एक विशेष ट्यूब है, जिसमें ऐसे रसायन (क्लॉट एक्टिवेटर) होते हैं जो कि लाल रक्त कोशिकाओं को द्रव से अलग कर देते हैं और बाद में एंटीबॉडीज को पहचानने की प्रक्रिया को आसान कर देते हैं। सैंपल लेने के बाद ट्यूब को लैब में टेस्टिंग के लिए भेज दिया जाता है।

लैब के अंदर सैंपल में फ्लोरोसेंट एंजाइम डाल दिए जाते हैं जो कि एंटी-ई हिस्टोलिटिका एंटीबॉडीज के साथ प्रतिक्रिया करके रंग बदल लेते हैं। ब्लड सैंपल में एंटीबॉडीज की पहचान करने के लिए इस नियम और कुछ अन्य घटकों पर आधारित भिन्न तकनीकों का प्रयोग किया जाता है। इनमें हेमाेग्ल्यूटीनेशन ऐसे, काउंटरइम्यूनोइलेक्ट्रोफोरेसिस, अमीबिक जेल डिफ्यूशन टेस्ट, कॉम्प्लीमेंट फिक्सेशन, इनडायरेक्ट फ्लोरोसेंस ऐसे, लेटेक्स एग्ल्यूटीनेशन और एंजाइम लिंक्ड इम्यूनोसॉरबेन्ट (एलिसा) ऐसे शामिल हैं।

एलिसा सबसे अधिक प्रयोग में लाया जाने वाला टेस्ट है, क्योंकि इसमें समय कम लगता है और यह अधिक खर्चीला भी नहीं है। कभी-कभी एंजाइम इम्यूनोएसे (ईआईए) तकनीक को भी ई हिस्टोलिटिका एंटीबॉडीज की जांच करने के लिए किया जा सकता है जो कि एलिसा तकनीक के जैसी ही होती है।

एलिसा टेस्ट के साथ इस पूरी प्रक्रिया में एक से पांच दिन का समय लगता है और ईआईए तकनीक के साथ इसमें दो घंटे का समय लगता है। यदि आपके शरीर में एमोबिआसिस के लक्षण लगातार दिखाई देने के बावजूद भी एंटीबॉडीज की पहचान नहीं हो पा रही है तो सात दिनों में यह टेस्ट फिर से किया जा सकता है।

सामान्य परिणाम -

  • नेगेटिव टेस्ट - <1 : 32 या 8 U या <8 U परिणाम यह संकेत देते हैं शरीर में आईजीजी ई हिस्टोलिटिका एंटीबॉडीज नहीं पाए गए हैं।

  • एक्विवोकल - 9-11 U इस बात का संकेत है कि एंटीबॉडीज की उपस्थिति के लिए टाइटर पर संदेह है। ऐसे में टेस्ट को दस से चौदह दिनों में दोबारा किया जाता है।

असामान्य परिणाम -

  • पॉजिटिव टेस्ट - >1 : 128 या 12 U या > 12 U परिणाम यह संकेत देते हैं कि आपके शरीर में आईजीजी इ-हिस्टोलिटिका एंटीबॉडीज की पहचान की गई है और आपको अमीबियासिस है।

हालांकि, पॉजिटिव परिणाम यह नहीं बताते हैं कि संक्रमण वर्तमान में सक्रिय है या फिर पहले सक्रिय था। एंटीबॉडीज रक्त में लंबे समय तक बने रह सकते हैं, उदाहरण के रूप में ये एंटीबॉडीज संक्रमण ठीक होने के एक साल बाद तक भी शरीर में मौजूद रह सकते हैं।

यह टेस्ट 95 प्रतिशत तक उन संक्रमण के मामलों में आईजीजी इ-हिस्टोलिटिका एंटीबॉडीज की पहचान कर लेता है जो कि आंतों के अलावा अन्य अंगों जैसे लिवर, फेफड़ों या मस्तिष्क में हुए होते हैं। इसके अलावा 70 प्रतिशत तक उन मामलों में जिनमें संक्रमण सक्रिय होता है और आंत में होता है। इसके साथ ही यह 10 प्रतिशत तक उन लोगों में जो इसके वाहक होते हैं, लेकिन जिनमें अमीबियासिस के लक्षण दिखाई नहीं देते हैं।

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References

  1. Center for Disease Control and Prevention [internet], Atlanta (GA): US Department of Health and Human Services; Amebiasis
  2. Stanford University [Internet]; Diagnostic Tests
  3. University of Rochester Medical Center [Internet]. Rochester (NY): University of Rochester Medical Center; Entamoeba Histolytica Antibody
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  6. Fischbach FT. A Manual of Laboratory and Diagnostic Tests. Amebiasis (Entamoeba histolytica) Antibody Test. 7th ed. July 2003. Pp:366.
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