एलिसा टेस्ट के द्वारा यह पता लगाया जाता है, कि शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली सूक्ष्म रोगाणुओं के प्रति क्या प्रतिक्रिया कर रही है। इस टेस्ट के द्वारा प्रतिरक्षा प्रणाली में उपस्थित केमिकल व अन्य तत्वों की जांच की जाती है। एलिसा टेस्ट में एक एंजाइम होता है (एक प्रोटीन जो बायोकेमिकल रिएक्शन को बढ़ाता है)।
एलिसा टेस्ट की मदद से शरीर में एंटीबॉडीज या एंटीजन की जांच की जाती है। एंटीबॉडीज शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली द्वारा किसी रोग या संक्रमण से लड़ने के लिए बनाए जाते हैं और एंटीजन एक बाहरी पदार्थ होता है तो प्रतिरक्षा प्रणाली को संक्रमण या रोगों के खिलाफ उत्तेजित (जैसे एंटीबॉडीज बनाने के लिए उत्तेजित करना) करता है।
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आगे इस लेख में आपको एलिसा टेस्ट के बारे में बताया जा रहा है। आप जानेंगे कि एलिसा टेस्ट को कब, क्यों और कैसे किया जाता है, और साथ ही इसका खर्च कितना होता है। आप यह भी जानेंगे कि इस टेस्ट से पहले क्या तयारी करनी होती है और एलिसा टेस्ट के बाद सावधानियां क्या बरतनी होती है।
- एलिसा टेस्ट क्या होता है? - What is ELISA Test in Hindi?
- एलिसा टेस्ट क्यों किया जाता है - What is the purpose of ELISA Test in Hindi
- एलिसा टेस्ट से पहले - Before ELISA Test in Hindi
- एलिसा टेस्ट के दौरान - During ELISA Test in Hindi
- एलिसा टेस्ट के बाद - After ELISA Test in Hindi
- एलिसा टेस्ट के क्या जोखिम होते हैं - What are the risks of ELISA Test in Hindi
- एलिसा टेस्ट के परिणाम का क्या मतलब होता है - What do the results of ELISA Test mean in Hindi
- एलिसा टेस्ट कब करवाना चाहिए? - When to get tested with ELISA Test in Hindi
एलिसा टेस्ट क्या होता है? - What is ELISA Test in Hindi?
एलिसा टेस्ट क्या होता है?
एलिसा का मतलब “एंजाइम-लिंक्ड इम्यूनोऐेसे ” (Enzyme-linked immunoassay) होता है। इसका मुख्य लक्ष्य खून के सेंपल में एंटीबॉडीज या एंटीजन की उपस्थिति दर्शाना होता है, जो शरीर में कोई रोग या संक्रमण विकसित होने पर बनते हैं।
एलिसा टेस्ट का उपयोग मुख्य रूप से एक ऐसे प्रोटीन का पता लगाने के लिए किया जाता है जो ग्लूकोज और पोटेशियम की तरह अणुओं और आयनों का विरोधी होता है। एलिसा टेस्ट के द्वारा हार्मोन, वायरल एंटीजन (जैसे डेंगू बुखार), बैक्टीरियल एंटीजन (जैसे टीबी) और एंटीबॉडीज का पता लगाया जा सकता है।
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एलिसा टेस्ट क्यों किया जाता है - What is the purpose of ELISA Test in Hindi
एलिसा टेस्ट क्यों किया जाता है?
एलिसा टेस्ट को कई बार “इआईए टेस्ट” (EIA test) के नाम से भी जाना जाता है, जो खून में एंटीबॉडीज और एंटीजन की उपस्थिति का पता लगाता है। यदि आपको संक्रमण हो गया है तो उसके खिलाफ आपका शरीर एंटीबॉडीज बना रहा है या नहीं, यह पता लगाने के लिए एलिसा टेस्ट का इस्तेमाल किया जा सकता है। एंटीबॉडीज एक प्रकार का प्रोटीन होते हैं, जिन्हे प्रतिरक्षा प्रणाली हानिकारक पदार्थों (एंटीजन) के खिलाफ प्रतिक्रिया करने के लिए बनाती है।
निम्न रोगों व अन्य स्थितियों का परीक्षण करने के लिए डॉक्टर एलिसा टेस्ट करवाने को कह सकते हैं:
- एचआईवी (एड्स का कारण बनने वाला वायरस)
- लाइम रोग
- पर्निसियस एनीमिया
- रोटावायरस
- निपाह वायरस
- स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा (और पढ़ें - मुंह का कैंसर के लक्षण)
- सिफलिस
- जीका वायरस
- टोक्सोप्लाज़मोसिज़
- वेरिसेला जोस्टर वायरस, यह चिकन पॉक्स और शिंगल्स पैदा करता है।
डॉक्टर अक्सर किसी जटिल टेस्ट को करने के दौरान स्थिति पर नजर रखने के लिए एलिसा टेस्ट का इस्तेमाल कर सकते हैं। यदि आपको उपरोक्त स्थितियों से जुड़े लक्षण व संकेत महसूस हो रहे हैं तो डॉक्टर आपको एलिसा टेस्ट करवाने का सुझाव दे सकते हैं। इसके अलावा यदि डॉक्टर उपरोक्त में से किसी भी समस्या का पता लगाना चाहते हैं तो वे एलिसा टेस्ट का उपयोग सकते हैं।
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एलिसा टेस्ट से पहले - Before ELISA Test in Hindi
एलिसा टेस्ट से पहले क्या किया जाता है?
इस टेस्ट को करने से पहले कोई विशेष तैयारी करने की आवश्यकता नहीं पड़ती। टेस्ट के लिए खून का सेंपल निकालने के लिए नस में सुई लगाई जाती है, जिससे कुछ सेकेंड के लिए थोड़ी तकलीफ या चुभन सी महसूस होती है। यदि आपको लगता है कि सेंपल निकालने से आपको बेहोशी या सिर घूमने जैसा महसूस हो सकता है, तो टेस्ट होने से पहले ही अपने डॉक्टर को इस बारे मे बता दें।
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एलिसा टेस्ट के दौरान - During ELISA Test in Hindi
एलिसा टेस्ट कैसे किया जाता है?
टेस्ट करने के लिए आपके खून का सेंपल लिया जाता है, जो आमतौर पर बाजू की नस से निकाला जाता है। सबसे पहले डॉक्टर त्वचा को उस जगह पर एंटिसेप्टिक से साफ करते हैं जहां से खून निकालना होता है। उसके बाद डॉक्टर बाजू के ऊपरी हिस्से पर एक पट्टी बांध देते हैं, जिससे नसों में खून का बहाव रुक जाता है और नसें फूलने लग जाती हैं। नसें फूलने पर वे स्पष्ट दिखाई देने लग जाती हैं और डॉक्टर एक नस में सुई लगा देते हैं। सुई के साथ एक सीरिंज या शीशी जुड़ी होती है जिसमें खून को इकट्ठा किया जाता है।
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एलिसा टेस्ट के बाद - After ELISA Test in Hindi
एलिसा टेस्ट के बाद क्या किया जाता है?
जब टेस्ट के लिए पर्याप्त मात्रा में सेंपल निकाल लिया जाता है, तो डॉक्टर सुई को निकाल लेते हैं और उस जगह पर रुई का एक छोटा सा टुकड़ा या बैंडेज लगा देते हैं। डॉक्टर आपको सुई निकालने के बाद कुछ देर तक उस जगह पर हल्का दबाव डालने के लिए भी कह सकते हैं, जिससे खून बहने और निशान पड़ने से रोकथाम की जाती है। इस टेस्ट प्रक्रिया अन्य कई टेस्टों के मुकाबले काफी दर्द रहित होती है, लेकिन टेस्ट के बाद आपकी बाजू में कुछ देर के लिए थरथराहट या हल्की तकलीफ महसूस हो सकती है।
सेंपल निकालने के बाद उसको परीक्षण के लिए लेबोरेटरी में भेज दिया जाता है। लेबोरेटरी में खून के सेंपल को एक कांच की प्लेट में डाला जाता है, जिसमें कुछ विशेष प्रकार के एंटीजन होते हैं। यदि खून में एंटीबॉडीज होते हैं, तो वे एंटीजन के साथ जुड़ने लग जाती हैं। उसके बाद जांच करने वाले तकनीशियन उसमें एक विशेष प्रकार का एंजाइम मिलाते हैं और यह जांच करते हैं कि आपका खून और एंटीजन इस विशेष प्रकार के एंजाइम के प्रति कैसा रिएक्शन करते हैं।
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एलिसा टेस्ट के क्या जोखिम होते हैं - What are the risks of ELISA Test in Hindi
एलिसा टेस्ट से क्या जोखिम हो सकते हैं?
एक व्यक्ति की नसें व धमनियां अपने आकार व बनावट में दूसरे व्यक्ति से अलग हो सकती हैं। यहां तक कि व्यक्ति के शरीर के एक हिस्से की नसें व धमनियां आकार व बनावट में स्वयं अपने शरीर के दूसरे हिस्से से अलग हो सकती हैं। इसलिए किसी व्यक्ति की नसों से खून का सेंपल निकालना दूसरे व्यक्तियों के मुकाबले कठिन हो सकता है।
खून का सेंपल निकालने से जुड़े जोखिम मामूली होते हैं, जिनमें निम्न शामिल हो सकते हैं:
- अत्यधिक खून बहना
- बेहोशी या सिर घूमने जैसा महसूस होना
- हीमेटोमा (त्वचा के नीचे खून जमना)
- संक्रमण (त्वचा में सुई से छेद होने से संक्रमण के कुछ मामूली जोखिम हो सकते हैं)
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एलिसा टेस्ट के परिणाम का क्या मतलब होता है - What do the results of ELISA Test mean in Hindi
एलिसा टेस्ट के रिजल्ट का क्या मतलब होता है?
एलिसा टेस्ट के सैंकड़ों प्रकार हो सकते हैं, इसलिए इस टेस्ट का रिजल्ट और उसका मतलब भी टेस्ट के प्रकार पर ही निर्भर करता है।
किसी अकेले एलिसा टेस्ट के रिजल्ट को नेगेटिव या पॉजिटिव नहीं माना जाता। क्योंकि एलिसा टेस्ट बहुत ही ज्यादा संवेदनशील होता है और कुछ लोगों में इसका रिजल्ट वास्तव नेगेटिव होने पर भी पॉजिटिव दिखाई देता है।
लुपस, लाइम रोग और अन्य यौन संचारित संक्रमण के कारण भी एलिसा टेस्ट कई बार एचआईवी एड्स के लिए पॉजिटिव रिजल्ट दे देता है। इसलिए यदि एलिसा टेस्ट का रिजल्ट पॉजिटिव आता है, तो किसी दूसरे टेस्ट के साथ उसकी पुष्टि करने की जरूरत पड़ती है।
हालांकि, यदि एलिसा व उसकी पुष्टि के लिए किया गया दूसरा टेस्ट दोनों वायरस को ढूंढ लेते हैं, तो वायरस के उपस्थित होने की संभावना होती है।
- यदि दोनों परीक्षणों के रिजल्ट नेगेटिव हों - यदि आप पिछले 3 महीनों के भीतर ही एचआईवी वायरस के संपर्क में आए हैं तो वह आपके शरीर में उपस्थित तो होता है, लेकिन टेस्ट के रिजल्ट में नहीं मिलता। ऐसे मामलों में व्यक्ति को अगले तीन महीनों के भीतर एक बार फिर से टेस्ट करवा लेना चाहिए। इस दौरान उन्हें वायरस को फैलने से रोकथाम करने के लिए सावधानियां बरतनी चाहिए।
- यदि दोनों में से एक टेस्ट पॉजिटिव हो तो - ऐसे में आपको तुरंत डॉक्टर की मदद लेना बहुत जरूरी होता है। रिजल्ट के पुष्टि करने के लिए डॉक्टर अन्य प्रकार के टेस्ट करवाने का सुझाव भी दे सकते हैं। जरूरत पड़ने पर विशेष प्रकार की उपचार व्यवस्था भी तैयार की जा सकती है।
एलिसा टेस्ट कब करवाना चाहिए? - When to get tested with ELISA Test in Hindi
एलिसा टेस्ट कब करवाना चाहिए?
यदि आपको निम्न में से कोई भी जोखिम हो, तो आपको साल में कम से कम एक बार एलिसा टेस्ट करवा लेना चाहिए:
- यदि आपने आखरी बार एचआईवी टेस्ट करवाने के बाद एक से अधिक यौन साथियों के साथ सेक्स किया है
- यदि आपके बिना कंडोम के सेक्स किया है खासकर ऐसे सेक्स पार्टनर के साथ जिसके एचआईवी ग्रस्त होने या ना होने की जानकारी नहीं है
- यदि आप नशीली दवाओं के इंजेक्शन लगाते हैं और सुई दूसरों के साथ शेयर करते हैं
- यदि टेस्ट के दौरान आप में यौन संचारित रोगों की पुष्टि की गई है
- यदि आपने किसी ऐसे यौन साथी के साथ सेक्स किया है, जिसके बारे में आपको मालूम नहीं है कि उसने पहले किस-किस के साथ सेक्स किया है। (और पढ़ें - सेक्स पावर कैसे बढ़ाएं)
अन्य कई स्थितियां हैं जो आप में एचआईवी संक्रमण होने के जोखिम को बढ़ाती हैं, तो अपने डॉक्टर से इस बारे में पूछ लें कि आपको कितने समय में एचआईवी टेस्ट करवाना चाहिए।
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संदर्भ
- Murray PR. The clinician and the microbiology laboratory. In: Bennett JE, Dolin R, Blaser MJ, eds. Mandell, Douglas, and Bennett's Principles and Practice of Infectious Diseases, Updated Edition. 8th ed. Philadelphia, PA: Elsevier Saunders; 2015:chap 16.
- National Health Service [internet]. UK; Diagnosis - HIV and AIDS
- Aoyagi K, Ashihara Y, Kasahara Y. Immunoassay and immunochemistry. In: McPherson RA, Pincus MR, eds. Henry's Clinical Diagnosis and Management by Laboratory Methods. 23rd ed. St Louis, MO: Elsevier; 2017:chap 44.




