लिवर फंक्शन टेस्ट, आपके रक्त में प्रोटीन, लिवर एंजाइम या बिलीरूबिन के स्तर को मापकर, लिवर के स्वास्थ्य को निर्धारित करने में मदद करता है।

लिवर फंक्शन टेस्ट अक्सर निम्नलिखित स्थितियों में किया जाता है -

  1. लिवर के संक्रमण को देखने के लिए, जैसे हेपेटाइटिस सी
  2. लिवर को प्रभावित करने वाली कुछ दवाओं के साइड इफेक्ट की निगरानी करने के लिए,
  3. अगर आपको पहले से ही लिवर की बीमारी है तो बमारी पर नजर रखने के लिए और यह जानने के लिए कि आपका इलाज अच्छे से काम कर रहा है या नहीं।
  4. लिवर में घाव (सिरोसिस) को मापने के लिए,
  5. यदि आप एक लिवर संबधी किसी विकार के लक्षण अनुभव कर रहे हैं
  6. अगर आप गर्भवती होने की योजना बना रही हैं। (और पढ़ें - गर्भावस्था के लक्षण)
  1. लिवर फंक्शन टेस्ट क्या होता है? - What is Liver Function Test in Hindi?
  2. लिवर फंक्शन टेस्ट क्यों किया जाता है - What is the purpose of Liver Function Test in Hindi
  3. लिवर फंक्शन टेस्ट से पहले - Before Liver Function Test in Hindi
  4. लिवर फंक्शन टेस्ट के दौरान - During Liver Function Test in Hindi
  5. लिवर फंक्शन टेस्ट के बाद - After Liver Function Test in Hindi
  6. लिवर फंक्शन टेस्ट के क्या जोखिम होते हैं - What are the risks of Liver Function Test in Hindi
  7. लिवर फंक्शन टेस्ट के परिणाम का क्या मतलब होता है - What do the results of Liver Function Test mean in Hindi

लिवर पर कई टेस्ट किए जा सकते हैं, लेकिन उनमें से ज्यादातर लिवर के सभी फंक्शन की जांच नहीं करते। लिवर फंक्शन टेस्ट करने के लिए आम तौर पर इस्तेमाल किये जाने वाले टेस्ट एलानिन ट्रांज़ैमिनेज (ALT), एस्पेरेटेट एमिनोट्रांस्फेरेज़ (AST), अल्कालाइन फॉस्फेट (ALP), एल्बूमिन, और बिलीरुबिन टेस्ट हैं। ALT और AST टेस्ट उन एंजाइम को मापते हैं, जो किसी रोग या क्षति का संकेत देने के लिए लिवर द्वारा जारी किया जाते हैं। एल्बुमिन और बिलीरुबिन टेस्ट यह निर्धारित करते हैं कि यह कितनी अच्छी तरह से एल्बूमिन (एक प्रोटीन) को बनाता है, और बिलीरुबिन का समाप्त करता है ( बिलीरुबिन रक्त का एक अपशिष्ट उत्पाद होता है)।

किसी भी लिवर फंक्शन टेस्ट के असामान्य परिणाम होने का यह मतलब नहीं है कि आपको कोई लिवर रोग या क्षति है। अपने लिवर फंक्शन टेस्ट के परिणामों के बारे में अपने डॉक्टर से बात करें।

खून में विशिष्ट एंजाइमों और प्रोटीन को मापने के लिए लिवर फ़ंक्शन टेस्ट का उपयोग किया जाता है। टेस्ट के आधार पर, इन एंजाइम या प्रोटीन सामान्य से उच्च या निम्न स्तर होना लिवर की समस्या का संकेत कर सकते हैं।

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कुछ सामान्य लिवर फंक्शन टेस्ट जिनमें निम्न शामिल हैं:

1. एलानिन ट्रांज़ैमिनेज (एएलटी) टेस्ट

एलेनिन ट्रांसमिनेज (एएलटी) का उपयोग आपके शरीर द्वारा प्रोटीन को चयापचय करने के लिए किया जाता है। यदि लिवर क्षतिग्रस्त है या ठीक से काम नहीं कर रहा है, तो ALT रक्त में रिलीज़ होता है, और इस कारण से ALT स्तर बढ़ जाता है। इस टेस्ट का रिजल्ट उच्च आना लिवर की क्षति का संकेत हो सकता है। मेयो क्लिनिक के मुताबिक, ALT के लिए सामान्य सीमा प्रति लीटर 7-55 यूनिट (U/L) है। ALT ता निम्न स्तर किसी भी स्वास्थ्य समस्या का संकेत नहीं देता।

2. एस्पार्टेट एमिनोट्रांसफरेज़ (AST) टेस्ट

एस्पार्टेट एमिनोट्रांसफरेज़ (AST) दिल, लिवर और मांसपेशियों सहित आपके शरीर के कई हिस्सों में पाए जाने वाला एंजाइम होता है। चूंकि AST स्तर लिवर की क्षति के लिए विशिष्ट वजह नहीं हैं, इसलिए आमतौर पर यह लिवर की समस्याओं की जांच के लिए ALT के साथ मिलकर मापा जाता है। डॉक्टर निदान में मदद करने के लिए एक ALT-to-AST अनुपात का उपयोग कर सकते हैं। जब लिवर क्षतिग्रस्त हो जाता है, तो AST को ब्लड सट्रीम (रक्तधारा) में रिलीज़ कर दिया जाता है। AST टेस्ट का उच्च परिणाम लिवर या मांसपेशियों की समस्या का संकेत दे सकता है। AST के लिए सामान्य श्रेणी 8-48 (U/L) है। AST का कम स्तर किसी भी स्वास्थ्य समस्या का संकेत नहीं देता।

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3. एल्कलाइन फॉस्फेटस (ALP) टेस्ट

एल्कलाइन फॉस्फेटस (एएलपी) आपकी हड्डियों, पित्त नलिकाओं और लिवर में पाए जाने वाला एंजाइम होता है। एक ALP टेस्ट आमतौर पर कई अन्य टेस्टों के साथ संयोजन में किया जाता है। ALP का उच्च स्तर लिवर की क्षति, पित्त नलिकाओं की रुकावट या हड्डी की बीमारी के बारे में संकेत कर सकता है।

बच्चों और किशोरों के ALP का स्तर बढ़ सकता है क्योंकि उनकी हड्डियां बढ़ रही होती हैं। गर्भावस्था में भी ALP का स्तर बढ़ सकता है। ALP के लिए सामान्य सीमा 45-115 यू / एल (U/L) होती है।

खून चढ़ने या हार्ट बाईपास सर्जरी के बाद ALP का स्तर निम्न हो सकता है। कम ALP भी विभिन्न प्रकार की परिस्थितियों से उत्पन्न हो सकता है, जिसमें जिंक की कमी, कुपोषण और विल्सन रोग आदि शामिल हैं।

4. एल्बुमिन टेस्ट

एल्बुमिन आपके लिवर द्वारा बनाया गया मुख्य प्रोटीन है। यह कई महत्वपूर्ण शारीरिक कार्यों को भी करता है। जैसे:

  1. रक्त वाहिकाओं से बहने वाले द्रव को रोकना
  2. ऊतकों में पोषण प्रदान करना।
  3. शरीर में हार्मोन, विटामिन और अन्य पदार्थों का संचार करना।

एल्बुमिन टेस्ट यह मापता है कि आपका लिवर इस विशेष प्रोटीन को कितने अच्छे से बना रहा है। इस टेस्ट का रिजल्ट निम्न होना यह संकेत करता है कि आपका लिवर ठीक से काम नहीं कर रहा है। एल्बुमिन की सामान्य श्रेणी 3.5-5.0 ग्राम प्रति डेसीलीटर (g/dL) है।

5. बिलीरुबिन टेस्ट

बिलीरुबिन लाल रक्त कोशिकाओं के टूटने से बनने वाला एक अपशिष्ट उत्पाद (Waste Product) है। यह आमतौर पर लिवर द्वारा प्रक्रमणित (Processed) होता है। यह आपके मल के साथ उत्सर्जित होने से पहले लिवर के अंदर से होकर गुजरता है।

एक क्षतिग्रस्त लिवर बिलीरुबिन की सही ढंग से प्रक्रिया नहीं कर सकता है। इससे खून में बिलीरुबिन का असामान्य रूप से उच्च स्तर होता जाता है। बिलीरुबिन टेस्ट का रिजल्ट में उच्च स्तर आना, यह संकेत देता है कि लिवर ठीक से काम नहीं कर रहा है। बिलीरुबिन के लिए सामान्य सीमा 0.1-1.2 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर (mg/dL) है।

लिवर टेस्ट यह निर्धारित करने में मदद कर सकता है कि आपका लिवर ठीक से काम कर रहा है या नहीं। लिवर कई महत्वपूर्ण शारीरिक कार्यों को करता है, जैसे कि -

  1. खून में से दूषित पदार्थ को हटाना 
  2. खाने वाले खाद्य पदार्थों से पोषक तत्वों को परिवर्तित करना
  3. खनिज और विटामिन को जमा करना
  4. खून के थक्कों को नियमित करना
  5. प्रोटीन, एंजाइम और पित्त का निर्माण
  6. खून से बैक्टीरिया को बाहर निकालना
  7. उन पदार्थ का प्रसंस्करण जो आपके शरीर को नुकसान पहुंचा सकते हैं
  8. हार्मोन संतुलन बनाए रखना

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आपके डॉक्टर आपको टेस्ट के ब्लड सैंपल तैयार करने के बारे में पूरी जानकारी देंगे। कुछ दवाएं और खाद्य पदार्थ भी खून में इन एंजाइमों और प्रोटीन के स्तर को प्रभावित कर सकते हैं। आपके डॉक्टर आपको कुछ प्रकार की दवाओं से बचने के लिए कह सकते हैं या वे आपको परीक्षण से पहले कुछ समय के लिए कुछ भी न खाने के लिए भी कह सकते हैं।

आप स्लीव वाली शर्ट पहन सकते हैं जो ब्लड सेंपल लेने के दौरान आसानी से मोड़ी जा सके।

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निम्न टेस्ट देने के लिए अस्पताल या स्पेश्लाइज टेस्टिंग फेसिलिटी में ब्लड सेंपल दिया जाता है: 

  1. टेस्ट करने से पहले त्वचा को साफ किया जाता है, ताकि त्वचा पर स्थित सूक्ष्म जीवों को हटाया जा सके और टेस्ट सेंपल को दूषित होने से बचाया जा सके।
  2. संभावित रूप से बांह पर एक टाइट पट्टी को लपेटा जाता है, इससे नसें उभर आती हैं और आसानी से मिल जाती हैं। सेंपल लेने के लिए त्वचा में एक सुई लगाई जाती है।
  3. रक्त निकालने के बाद, सुई वाली जगह पर पट्टी या रूई टुकड़ा लगा दिया जाता है। और सेंपल के लिए निकाले गये खून को जांच के लिए लेबोरेटरी में भेज दिया जाता है।

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टेस्ट के बाद आप आमतौर पर हमेशा की तरह अपना दैनिक कार्य कर सकते हैं। हालांकि, यदि खून निकालने के दौरान आपको चक्कर या सिर में भारीपन महसूस हो तो आपको टेस्ट के बाद कुछ देर आराम करना चाहिए।

इन टेस्ट के नतीजे, डॉक्टर को बिल्कुल वैसी ही स्थिति नहीं बता पाते हैं जो आपको है या लिवर में क्षति कहा तक हुई हैं, इसका पता। लेकिन ये डॉक्टर को अगले कदम उठाने में मदद कर सकते हैं।

सामान्य तौर पर, यदि आपके टेस्ट के परिणाम आपके लिवर के कार्यों की समस्या का संकेत करते हैं, तो आपके डॉक्टर कारण निर्धारित करने के लिए आपकी दवाओं और आपके पिछले मेडिकल इतिहास के बारे में पता करेंगे। जो लोग शराब का पीते हैं, उन्हें टेस्ट करवाने के लिए शराब का सेवन बंद करना होगा।

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डॉक्टर, हेपेटाइटिस की जांच करने के लिए टेस्ट कर सकते हैं। फाइब्रोसिस या फैटी लिवर रोग के लिए लिवर का मूल्यांकन करते हैं जिसके लिए, वे कुछ इमेजिंग टेस्ट भी चुन सकते हैं, जैसे कि अल्ट्रासाउंड या सीटी स्कैन

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टेस्ट के लिए खून का सेंपल निकालना एक सामान्य और नियमित प्रक्रिया होती है और शायद ही कभी इससे कोई गंभीर दुष्प्रभाव होता है। हालांकि, ब्लड सैंपल देने में निम्नलिखित होने की संभावना होती है -

  1. त्वचा के नीचे खून बहना
  2. अत्यधिक रक्तस्राव
  3. बेहोशी
  4. संक्रमण 

यदि आपके परिणाम सामान्य नहीं हैं, तो आपको अधिक टेस्ट करवाने होंगे। लिवर फंक्शन टेस्ट अकेले ही यह सुनिश्चित नहीं कर पाता है कि आपको कोई निश्चित बीमारी है। डॉक्टर आपके टेस्ट के रिजल्ट का मतलब समझाने में भी आपकी मदद करेंगे।

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