पेरीफेरल ब्लड स्मीयर टेस्ट क्या है?

पेरीफेरल ब्लड स्मीयर टेस्ट को ब्लड स्मीयर टेस्ट, पेरीफेरल ब्लड फिल्म, ब्लड स्मीयर एनालिसिस या स्मीयर टेस्ट भी कहा जाता है। यह टेस्ट लाल व सफेद रक्त कोशिकाओं (आरबीसी और डब्लूबीसी) और प्लेटलेट्स के आकार व संख्या की जांच करता है। यह दूसरी संख्याओं का पता लगाने में भी मदद करता है जैसे डब्लूबीसी या ल्यूकोसाईट के विभिन्न प्रकारों के आकार और संख्या की जांच करना। ल्यूकोसाइट में न्यट्रोफिल्स, इओसिनोफिल्स, बासोफिल्स, मोनोसाइट्स और लिम्फोसाइट्स शामिल हैं। इस टेस्ट से रक्त कोशिकाओं के आकार, संरचना और संख्या के बारे में पता चलता है। 

विभिन्न कोशिकाएं शरीर में विभिन्न महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाती हैं।

  • सफेद रक्त कोशिकाएं संक्रमण के खिलाफ लड़ती हैं और प्रतिरक्षा प्रणाली का एक भाग होती हैं। 
  • लाल रक्त कोशिकाएं या एरिथ्रोसाइट्स शरीर के विभिन्न ऊतकों तक ऑक्सीजन ले जाते हैं 
  • प्लेटलेट्स कोशिकाओं के छोटे टुकड़े या फ्रेगमेंट होते हैं जो कि थक्के जमाने के लिए जरूरी होते हैं 

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  1. पेरीफेरल ब्लड स्मीयर टेस्ट क्यों किया जाता है - What is the purpose of Peripheral Blood Smear test in Hindi
  2. पेरीफेरल ब्लड स्मीयर टेस्ट से पहले - Before Peripheral Blood Smear test in Hindi
  3. पेरीफेरल ब्लड स्मीयर टेस्ट के दौरान - During Peripheral Blood Smear test in Hindi
  4. पेरीफेरल ब्लड स्मीयर टेस्ट के परिणाम का क्या मतलब है - Peripheral Blood Smear test result and normal range in Hindi

पेरीफेरल ब्लड स्मीयर टेस्ट किसलिए किया जाता है?

पेरिफेरल ब्लड स्मीयर टेस्ट उन लोगों में किया जाता है जिनमें निम्न लक्षण दिखाई देते हैं:

कभी-कभार ही यह टेस्ट परजीवी या उसके कैरियर (जहां अधिक परजीवी हों) से संपर्क का पता लगाने में मदद करता है। उदाहरण के लिए यदि कोई व्यक्ति किसी ऐसी जगह पर रहता है जहां अधिक मात्रा में मच्छर हो तो उसे मलेरिया होने का अधिक खतरा होगा। (और पढ़ें - मलेरिया में क्या खाएं)

ऐसी कई सारी बीमारियां हैं जो रक्त कोशिकाओं की दिखावट को प्रभावित कर सकती हैं। इसीलिए यह टेस्ट विभिन्न स्थितियों के परीक्षण में भी मदद करता है, जैसे:

यह टेस्ट कीमोथेरेपी के बाद ब्लड सेल काउंट को निर्धारित करने में भी मदद करता है।

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पेरीफेरल ब्लड स्मीयर टेस्ट की तैयारी कैसे करें?

इस टेस्ट के लिए किसी विशेष तैयारी करने की आवश्यकता नहीं पड़ती है। हालांकि कभी-कभी इस टेस्ट के दौरान व्यक्ति को भूखा रहने की आवश्यकता भी पड़ सकती है, इसलिए टेस्ट से पहले ही इस बारे में डॉक्टर से बात कर लें। यह ध्यान रहे कि आप जो भी दवाएं, हर्ब्स, विटामिन और न्यूट्रिशनल सप्लीमेंट ले रहे हैं तो उनके बारे में आपके डॉक्टर को पता हो। यदि आप कोई ऐसी दवा ले रहे हैं जिसकी सलाह डॉक्टर द्वारा नहीं दी गई है या कोई गैर-कानूनी दवा ले रहे हैं तो इसके बारे में भी डॉक्टर को बता दें।

(और पढ़ें - डॉक्टर से संपर्क करें)

पेरीफेरल ब्लड स्मीयर टेस्ट कैसे किया जाता है?

यह एक सामान्य टेस्ट है जिसमें आपकी बांह या हाथ की नस में सुई लगाकर ब्लड सैंपल लिया जाता है। वयस्कों के ब्लड का सैंपल उंगली में हल्का सा चीरा लगा कर भी लिया जा सकता है। बच्चों या नवजात शिशुओं का ब्लड सैंपल एड़ी से लिया जाता है। 

इस टेस्ट से कुछ सामान्य खतरे होते हैं। इनमें चक्कर आना, संक्रमण, बेहोशी जैसा महसूस होना या नील पड़ना शामिल हैं। सुई लगने से आपको हल्की चुभन या दर्द हो सकता है। कभी-कभार सुई लगी जगह पर बाद में हल्का-सा घाव हो सकता है।

(और पढ़ें - घाव सुखाने के घरेलू उपाय)

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पेरीफेरल ब्लड स्मीयर टेस्ट के परिणाम क्या बताते हैं?

इस टेस्ट के परिणाम उम्र, लिंग, व्यक्ति के पिछले स्वास्थ्य और वर्तमान मेडिकल स्थितियों के अनुसार अलग हो सकते हैं। ऐसे कई कारक हैं जो टेस्ट के परिणामों को प्रभावित कर सकते हैं। इसीलिए यह जरूरी है कि आप रिजल्ट की सही जानकारी के लिए डॉक्टर से मिलें। डॉक्टर परिणामों और व्यक्ति में दिख रहे लक्षणों के अनुसार रिजल्ट बताएंगे।

ऐसा जरूरी नहीं कि ब्लड स्मीयर टेस्ट हमेशा किसी स्थिति का पता लगाए कभी-कभी यह किसी स्थिति के होने की संभावना के बारे में भी बताता है। इसीलिए परीक्षण की पुष्टि के लिए अन्य टेस्ट भी किए जा सकते हैं। इस टेस्ट के परिणाम रक्त कोशिकाओं की दिखावट और कोशिकाओं में मौजूद किसी भी प्रकार की असामान्यता के बारे में बता सकते हैं।

सामान्य परिणाम:

रक्त कोशिकाएं

कोशिका का आकार

विवरण

आरबीसी

    1. माइक्रोमीटर  (µm) डायमीटर (व्यास)

सामान्य विकसित एरिथ्रोसाइट्स में न्यूक्लियस नहीं होता। यह गुलाबी या लाल होता है। यह गोल होता  है और बीच में से थोड़ा सा  दबा होता है 

डब्लूबीसी: ये दो प्रकार के होते हैं:

हर सफेद रक्त कोशिका में अलग होता  है

न्यूक्लियस मौजूद होता है 

ग्रेन्युलोसाइट्स

 

ग्रैन्यूल्स मौजूद होते हैं 

  • बेसोफिल्स 

10-15 µm

ये ल्यूकोसाइट्स का एक प्रतिशत भाग होते हैं और कभी-कभी ही दिखाई देते हैं। इसमें बैंगनी और काले ग्रैन्यूल्स होते हैं।

  • न्यूट्रोफिल्स 

10-18 µm

इस कोशिका में बैंगनी और गुलाबी ग्रैन्यूल्स होते हैं। स्वास्थ लोगों में ये अधिक मात्रा में पाए जाते हैं। 

  • इओसिनोफिल्स 

10-15 µm

ये ल्यूकोसाईट का 1-3% भाग होता हैं। इसमें बड़े लाल और संतरी ग्रैन्यूल्स होते हैं। 

नॉन-ग्रेन्युलोसाइट्स

 

ग्रैन्यूल्स नहीं होते। 

  • मोनोसाइट्स

-

सबसे बड़ी सफेद रक्त कोशिकाएं 

  • लिम्फोसाइट 

10-12 µm

लिम्फोसाइट में एक गोल और मुलायम या चिकना न्यूक्लियस मौजूद होता है।

 

असामान्य परिणाम:
आरबीसी की संख्या या दिखावट में कोई भी बदलाव निम्न स्थितियों की ओर संकेत करता है:

ऐसी स्थितियां जो डब्लूबीसी के विभिन्न प्रकारों की दिखावट या संख्या को प्रभावित करती हैं, वे निम्न हैं:

  • संक्रमण या सूजन, जिससे ल्यूकोसाइट्स के कुछ विशेष प्रकारों की संख्या बढ़ जाती है। 
  • एलर्जी की प्रतिक्रिया जो इओसिनोफिल्स की संख्या को प्रभावित करती है 
  • बोन मेरो के विकार जिससे ल्यूकोसाइट्स की संख्या में कमी आती है 
  • ब्लड कैंसर 

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