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अपने मुँह को स्वस्थ रखने के लिए आप ब्रश करते हैं या फिर दाँत साफ करने वाले धागे से दातों की सफाई करते हैं। क्या आप सोच सकते हैं इसके सिवा और ऐसा आप क्या कर सकते हैं जो आपके मुँह को स्वस्थ रखने में मदद कर सकता है।

जी हाँ, आप अपने मुँह को स्वस्थ रखने के लिए आयल पुल्लिंग कर सकते हैं। आयुर्वेद में इसे कवलग्रह के नाम से जानते हैं। आयल पुल्लिंग पारंपरिक रूप से भारतीय तकनीक है जो दाँत की सड़न, बदबूदार सांस, मसूड़ों से रक्तस्राव और फटे हुए होंठ की समस्या से छुटकारा पाने के लिए इस्तेमाल की जाती है। इसका उल्लेख चरक संहिता में मौखिक स्वच्छता और रखरखाव के लिए किया गया है।

आयल पुल्लिंग का एक प्रकार और भी है जिसे गंडुशा के नाम से जाना जाता है। इसका उपयोग भी आयुर्वेद में मुँह की सफाई के लिए किया जाता है। गंडुशा में अपने मुंह को पूरी तरह से तेल से भरना पड़ता है और थोड़े समय बाद इसे बाहर थूकना पड़ता है। इसमें और कवलग्रह में बस इतना अंतर है कि कवलग्रह में मुंह को पूरी तरह तेल से भरा नहीं जाता है। यहाँ मुँह से तेल को थूकने से पहले मुँह में हिलने की जगह होती है। आम तौर पर आयल पुल्लिंग के लिए तिल के तेल का उपयोग किया जाता है पर आप नारियल और सूरजमुखी तेल जैसे अन्य खाद्य तेलों का उपयोग भी कर सकते हैं।

तो चलिए जानते हैं यह प्राचीन उपचार (आयल पुल्लिंग) हमारे लिए कैसे फायदेमंद है।

  1. आयल पुल्लिंग कैसे करे - Oil pulling kaise kare in hindi
  2. आयल पुल्लिंग के नुकसान - Oil pulling ke nuksan in hindi
  3. आयल पुल्लिंग के फायदे - Oil pulling ke fayde in hindi

आयल पुल्लिंग करने के आयुर्वेद में विशेष निर्देश दिए गए हैं। सर्वोत्तम परिणाम के लिए सुबह जल्दी उठकर खाली पेट आराम से बैठ कर अपनी ठोड़ी (chin) को ऊपर कर लें। अब एक बड़ा चम्मच तिल का तेल अपने मुंह में लें। आप अपने मुँह के चारो तरफ 10 से 15 मिनट तक तेल को हिलाते रहें। जब तेल पतला और दूधिया सफेद तो जाए तो उसे बाहर थूक दें। ध्यान रहे तेल मुँह के अंदर ना जाए। क्योंकि इसमें बैक्टीरिया और विषाक्त पदार्थ होते हैं जो आपके लिए हानिकारक हैं। अब आप अपने दातों को ब्रश करके अच्छी तरह कुल्ला कर लें। आप प्रतिदिन इस प्रक्रिया को तीन बार कर सकते हैं। पांच साल से कम उम्र के बच्चो को इस प्रक्रिया को नहीं करना चाहिए। 

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जैसा कि हम सभी जानते हैं कि आयल पुल्लिंग हमें स्वास्थ्य लाभ प्रदान करता है। पर इसके कुछ दुष्प्रभाव भी हैं। तो चलिए जानते हैं आयल पुल्लिंग के दुष्प्रभावों के बाड़े में -

आयल पुल्लिंग के सबसे खतरनाक साइड इफेक्ट्स में से एक लिपोइड न्युमोनिया (lipoid pneumonia) है। बहुत से लोग मुंह के अंदर तेल को सांस-द्वारा अंदर खींच लेते हैं जो बैक्टीरिया और विषाक्त पदार्थों से भरा होता है। यह दूषित तेल फेफड़े में प्रवेश करता है जिससे लिपॉइड न्यूमोनिया होता है। इस तथ्य को अमेरिकन डेंटल एसोसिएशन और अमेरिकी नेशनल लाइब्रेरी ऑफ साइंस द्वारा भी सूचित किया गया है।

अमेरिकन डेंटल एसोसिएशन ने यह भी रिपोर्ट दी है कि आयल पुल्लिंग से पेट की परेशानी या दस्त की समस्या हो सकती है। जब तेल पेट के अंदर जाता है, उसके कारण बैक्टीरिया पेट में प्रवेश कर जाते हैं, जिसके कारण दस्त की समस्या होती है। चूंकि आयल पुल्लिंग खाली पेट किया जाता है, इससे कुछ उपयोगकर्ताओं ने मतली का अनुभव किया है। यदि तेल की थोड़ी मात्रा भी अंदर चली जाती है जो बैक्टीरिया और विषाक्त पदार्थों से भरी हुई होती है जो आपके पेट में हलचल पैदा होती है, जिससे मतली हो जाती है।

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नारियल तेल का उपयोग करने वाले लोग हैंगओवर जैसी सनसनी का अनुभव कर सकते हैं। यह मुख्य रूप से तेल में मौजूद मध्यम-श्रृंखलित ट्राइग्लिसराइड्स के कारण होता है।

कुछ लोगों को आयल पुल्लिंग में उपयोग किए जाने वाले तेल से एलर्जी होती है। इसमें इस्तेमाल किए जाने वाले सबसे आम तेल कुसुम का तेल, तिल का तेल, नारियल का तेल, जैतून का तेल और सूरजमुखी का तेल होते हैं इसलिए यदि आप को इनमें से किसी भी तेल से एलर्जी हो तो तेल पेट के अंदर जाने से पेट में ऐंठन और उल्टी की समस्या हो सकती है।

जब हम 10 से 15 मिनट तक आयल पुल्लिंग की प्रक्रिया करते हैं तो बहुत से लोग जबड़े में अकड़न का अनुभव करते हैं। जब हम लगातार अपने मुँह में तेल को चारों तरफ हिलाते हैं तो हमारे जबड़े की मांसपेशियों और स्नायुबंधन में खिंचाव होता है जिसके परिणामस्वरूप दर्द और अकड़न होती है। आपको यह भी ध्यान रखना होता है कि जबड़े के दर्द के कारण कहीं तेल अंदर ना चला जाए। जबड़े के दर्द के कारण दाँत पीसने की आदत हो सकती है और जबड़े कठोर हो जाते हैं।

कनेक्टिकट स्वास्थ्य केंद्र विश्वविद्यालय में इम्यूनोलॉजी और चिकित्सा के एक सहायक प्रोफेसर डॉ अमाला गुहा का कहना है कि जो लोग तेल खींचने की सही पद्धति का उपयोग नहीं करते हैं वे मुंह का स्वाद खो सकते हैं। मुँह का स्वाद खोने के कारण आपको भूख नहीं लगती जिसके कारण शरीर में पोषक तत्वों की कमी होती है और चयापचय कम हो जाता है।

आयल पुल्लिंग बेनिफिट्स फॉर बेटर हैल्थ - Oil pulling for a brighter smile and better health in hindi

दांतों के स्वास्थ्य में सुधार के अलावा आयल पुल्लिंग के और भी कई लाभ हैं। नियमित रूप से उपयोग किए जाने पर यह फिर से युवा दिखने में मदद करता है। यह बुद्धि की बढ़ता है, स्वाद बढ़ाने में मदद करता है, कमजोर दृष्टि को सुधार सकता है और ताजगी और शुद्धता की भावना प्रदान करता है

आयल पुल्लिंग अस्थमा से लेकर मधुमेह तक कई विकारों के लिए लाभदायक माना जाता है।आयुर्वेद के अनुसार आयल पुल्लिंग के दौरान हमारे शरीर से विषाक्त पदार्थ (ama) बाहर निकल जाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आयल पुल्लिंग से हानिकारक रोगाणु और क्षति पहुँचाने वाले पदार्थों को हटाया जा सकता है जो दंत समस्याओं को जन्म दे सकते हैं। 

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आयल पुल्लिंग का उपयोग दिलाए सूखे मुंह से छुटकारा - Oil pulling good for dry mouth in hindi

शोध के अनुसार आयल पुल्लिंग सूखे मुंह को नमी देने में मदद करता है। आपका मुँह सूख जाता है जब आप निर्जलित या नर्वस होते हैं या फिर आपकी नाक बंद होती है और आप मुँह से सांस लेते हैं या मधुमेह जैसी स्थिति होती है। इसके उपयोग से आपके मुँह में नमी वनी रहती है। गर्दन या सिर पर रेडियोथेरेपी भी मुंह सूखने का कारण होती है क्योंकि इसमें लार ग्रंथिय सूज जाती हैं जिससे मुंह सूखने लगता है। उदाहरण के लिए एक अध्ययन में सिर और गर्दन के कैंसर के रोगियों को रेडियोथेरेपी दी गई और उन्हें आयल पुल्लिंग करने को कहा गया। इससे उनको शुष्क मुँह से राहत मिली। शोधकर्ताओं ने पाया कि कृत्रिम लार के उपयोग करने जितना ही आयल पुल्लिंग प्रभावी था।

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तेल से कुल्ला करने के फायदे दातों की सड़न में - Oil pulling heals tooth decay in hindi

दातों की सड़न आपके दांतों की संरचना को नुकसान पहुंचा सकती है, जिससे दर्द, दांत की हानि और संक्रमण हो सकता है। इस समस्या से बचने के लिए आयल पुल्लिंग एक अच्छा उपचार है। इससे दांतों की रक्षा होती है। एक अध्ययन के अनुसार 40 दिनों के लिए तिल के तेल का उपयोग करने के बाद मुंह में जीवाणुओं की औसत 20 प्रतिशत तक कम हो गई थी। अध्ययन से यह भी पता चला कि तिल के तेल में जीवाणुरोधी शक्ति होती है जो S. मुटान्स (S. mutans) और L. एसिडोफिलस (L. acidophilus) जैसे जीवाणुओं से लड़ने में मदद करते हैं। तिल का तेल दंत चिकित्सा के लिए के लिए फायदेमंद हैं। इस अध्ययन में भाग लेने वाले लोगों के दाँत गिरने की समस्या कम हो गई। 40 अन्य खाद्य तेल जैसे नारियल और सूरजमुखी तेल भी मौखिक सूक्ष्मजीवों पर प्रभावी पाए गए हैं। 

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आयल पुलिंग के लाभ सांस की बदबू के लिए - Oil pulling benefits for bad breath in hindi

बुरी सांस एक आम समस्या है। हर चार लोगों में एक इस समस्या से पीड़ित है। बैक्टीरिया विषाक्त पदार्थों को उत्पन्न करते हैं और खाद्य कणों को तोड़ते हैं, जिससे बदबूदार गंध आती है। आयल पुल्लिंग से इस बदबू से छुटकारा मिल सकता है। एक अध्ययन में पाया गया कि खराब सांस को कम करने और बैक्टीरिया (T. denticola, P. gingivalis and B. forsythus) को नष्ट करने में यह क्लोरहेक्सिडाइन के जितना ही प्रभावी है।

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आयल पुल्लिंग मेथड मसूड़े की सूजन के लिए - Oil pulling cures gum disease in hindi

जिंजीवाइटिस जो मसूड़े की सूजन और मसूड़ों से रक्तस्राव की समस्या है, चिपचिपे बैक्टीरिया के कारण होती है जिसे प्लाक (plaque) कहा जाता है। जब इसका उपचार नहीं किया जाता है तो मसूड़े की सूजन और जबड़े की हड्डी को नुकसान पहुंच सकता है। यह उन ऊतकों को भी नुकसान पहुंचा सकती है जो आपके दांतों को जगह पर रखने में मदद करते हैं। इसके कारण दांत उखड भी सकता है। हालांकि शोध ने इसके उपचार के लिए आयल पुल्लिंग को प्रभावी बताया है। दो समूह पर एक विशेष अध्ययन किया गया। एक समूह को आयल पुल्लिंग के लिए कहा गया और दूसरे समूह को क्लोरहेक्सिडिन (क्लोरहेक्सिडाइन, एक रोगाणुरोधी माउथ वाश है जिसे गम रोग का इलाज करने के लिए डिज़ाइन किया गया था) का प्रयोग करने को कहा गया। आयल पुल्लिंग करने वाले समूह 10 दिनों तक तिल के तेल को अपने मुँह में रख कर 10 से 15 मिनट कुल्ला करते थे और दूसरा समूह सुबह में 1 मिनट के लिए क्लोरहेक्साइडिन से कुल्ला करअपने दांतों को ब्रश करते थे। अध्ययन में यह पाया गया कि आयल पुल्लिंग क्लोरहेक्साइडिन जितना ही प्रभावशाली था और इसका कि क्लोरहेक्साइडिन की तरह दुष्प्रभाव भी नहीं था जैसे दाँत का दाग और क्लोरहेक्सिडिन से जुड़े स्वाद का बदला। 

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