शिशु और बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने के कारण उनको कई तरह के रोग होने की संभावनाएं रहती है। इस दौरान शिशु और बच्चों को रोगों से बचाने के लिए टीकाकरण अभियान के तहत कई टीके लगाएं जाते हैं। इन टीकों के माध्यम से बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को रोगों से लड़ने के लिए सक्षम बनाया जाता है। सामान्यतः नवजात शिशुओं को डिप्थीरिया, पर्टुसिस, टेटनस, हेपेटाइटिस बी और हेमोफिलस इन्फ्लुएंजा टाइप बी जैसे घातक रोग कभी भी अपनी चेपट में ले सकते हैं। शिशु और बच्चों को एक ही वैक्सीन से इन पांचों रोगों से बचाव करने के लिए ही पेंटावैलेंट वैक्सीन का उपयोग किया जाता है।
(और पढ़ें - शिशु का टीकाकरण चार्ट)
डिप्थीरिया, पर्टुसिस, टेटनस, हेपेटाइटिस बी और हेमोफिलस इन्फ्लुएंजा टाइप बी की गंभीरता को देखते हुए इस लेख में आपको पेंटावैलेंट वैक्सीन के बारे में विस्तार से बताया गया है। साथ ही इसमें आपको पेंटावैलेंट टीका क्या है, पेंटावैलेंट टीका कब लगाया जाता है, पेंटावैलेंट टीका किस समय दिया जाता है, पैंटावैलेंट टीके की कीमत और पैंटावैलेंट टीके से होने वाले साइड इफेक्ट आदि के बारे में भी बताने का प्रयास किया गया है।
(और पढ़ें - शिशु और बच्चों की देखभाल)
- पेंटावैलेंट टीका क्या है - Pentavalent tika kya hai
- पेंटावैलेंट टीके की खुराक और कीमत - Pentavalent tike ki khurak aur kimat
- पेंटावैलेंट वैक्सीन से होने वाले साइड इफेक्ट - Pentavalent vaccine se hone vale side effects
- पेंटावैलेंट टीका किन शिशुओं को नहीं देना चाहिए - Pentavalent tika kin shishon ko nahi dena chahiye
पेंटावैलेंट टीका क्या है - Pentavalent tika kya hai
पेंटावैलेंट वैक्सीन को पांच अलग-अलग वैक्सीन के संयोजन से बनाया जाता है। इस वैक्सीन की मदद से बच्चे का पांच तरह के रोगों से बचाव होता है। जिन पांच रोगों से पेंटावैलेंट वैक्सीन (पेंटा टीका) द्वारा बचाव होता है, उनको नीचे विस्तार से बताया जा रहा है।
- डिप्थीरिया (Diptheria):
इसके कारण सांस लेने में परेशानी, लकवा और हार्ट फेल हो सकता है। (और पढ़ें - सांस लेने में परेशानी का इलाज)
- टेटनस (Tetanus):
टिटनेस या टेटनस एक गंभीर बैक्टीरियल बीमारी होती है, जो शरीर के तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करती है। इससे मांसपेशियां संकुचित (सिकुड़ना) होने लगती हैं, जिससे काफी दर्द होता है। टिटनेस विशेष रूप से जबड़े और गर्दन की मांसपेशियों को ही प्रभावित करती है। टिटनेस को लॉकजॉ (Lockjaw) के रूप में जाना जाता है, इसमें व्यक्ति ना तो मुंह खोल पाता है और ना ही किसी चीज को निगल पाता है। (और पढ़ें - टिटनेस इंजेक्शन कब लगवाना चाहिए)
- पर्टुसिस (Pertussis: Whooping cough):
इसको काली खांसी के नाम से भी जाना जाता है। इस खांसी की वजह से शिशु और बच्चों को खाने, पीने और सांस लेने में मुश्किल होती है। इसके साथ ही कांली खांसी बच्चों या शिशुओं में मिर्गी, निमोनिया और मस्तिष्क क्षति का भी कारण होती है। यहां तक की कुछ मामलों में इसकी वजह से शिशु की मृत्यु भी हो सकती है। (और पढ़ें - नवजात शिशु में निमोनिया के लक्षण)
- हेमोफिलस इन्फ्लुएंजा टाइप बी (Haemophilus influenzae type b): हेमोफिलस इन्फ्लुएंजा टाइप बी एक तरह का बैक्टीरियल संक्रमण होता है, जो मुख्य रूप से पांच साल से कम उम्र के बच्चों को होता है। इस संक्रमण से बच्चों को मेनिनजाइटिस, सांस लेने में मुश्किल, निमोनिया, गले में सूजन की समस्या हो सकती है। (और पढ़ें - गले में दर्द के उपाय)
- हेपेटाइटिस बी (Hepatitis B):
अन्य रोगों की तरह हेपेटाइटिस बी भी संक्रामक रोग है, जो बच्चों को किसी भी समय हो सकता है। हेपेटाइटिस बी वायरस सीधे रूप से लीवर पर दुष्प्रभाव डालता है। इसमें पीलिया, बुखार, थकान, जी मिचलाना और जोड़ों में दर्द आदि कई समस्याएं होने लगती हैं। (और पढ़ें - गर्भावस्था के दौरान टीकाकरण चार्ट)
इन पांच रोगों से बच्चों के बचाव के लिए पेंटावैलेंट वैक्सीन का उपयोग किया जाता है।
पेंटावैलेंट टीके की खुराक और कीमत - Pentavalent tike ki khurak aur kimat
शिशु को जन्म के शुरुआती सप्ताह में ही पेंटावैलेंट टीका लगाया जाता है। पेंटावैलेंट वैक्सीन की तीन खुराक शिशु को दी जाती है, जबकि कुछ मामलों में इसकी चार खुराक भी दी जा सकती है। भारत में 6 सप्ताह से एक साल तक के शिशु को पेंटावैलेंट वैक्सीन दी जा सकती है। पेंटावैलेंट टीके को लगाने की सही उम्र के बारे में नीचे विस्तार से जानें-
पहली खुराक – शिशु के जन्म के छह सप्ताह में, (और पढ़ें - बीसीजी का टीका क्यों लगाया जाता है)
दूसरी खुराक – शिशु के जन्म के 10वें सप्ताह में, (और पढ़ें - पोलियो का टीका क्यों लगवाना चाहिए)
तीसरी खुराक – शिशु के जन्म के 14वें सप्ताह में। (और पढ़ें - प्राथमिक चिकित्सा क्या है)
भारत में मिलने वाली कुछ पेंटावैलेंट वैक्सीन और उनकी कीमत को नीचे बताया गया है-
| पेंटावैलेंट वैक्सीन | अनुमानित कीमत |
| कोमवैक 5 (Comvac5) | 600 |
| ईजीफाइव- टीटी पीडियाट्रिक वैक्सीन (Easyfive-TT Paediatric Vaccine) |
382.59 |
पेंटावैलेंट वैक्सीन से होने वाले साइड इफेक्ट - Pentavalent vaccine se hone vale side effects
सामान्यतः पेंटावैलेंट टीके से होने वाले साइड इफेक्ट बेहद कम होते हैं और यह कुछ ही दिनों में ठीक हो जाते हैं। इस वैक्सीन से गंभीर साइड इफेक्ट बेहद कम मामलों में देखने को मिलते हैं। इस वैक्सीन को लगाना सुरक्षित होता है, लेकिन कई मामले ऐसे भी सामने आते हैं, जिसमें इस वैक्सीन की प्रतिक्रियाएं गंभीर हो सकती हैं।
पेंटावैलेंट टीके से होने वाले सामान्य साइड इफेक्ट को निम्न तरह से बताया गया है-
- इंजेक्शन के स्थान पर सूजन, लालिमा और दर्द होना, (और पढ़ें - सूजन कम करने के उपाय)
- इंजेक्शन की जगह पर गांठ या खुजली होना, (और पढ़ें - डीपीटी वैक्सीन कब लगाई जाती है)
- चिड़चिड़ापन,
- भूख कम लगना, (और पढें - बच्चों में भूख ना लगने के कारण)
- बेचैनी होना।
(और पढ़ें - जापानी इन्सेफेलाइटिस टीकाकरण)
पेंटावैलेंट टीका किन शिशुओं को नहीं देना चाहिए - Pentavalent tika kin shishon ko nahi dena chahiye
हालांकि इस वैक्सीन के गंभीर दुष्परिणाम नहीं होते हैं, लेकिन जिन शिशुओं के शरीर में पेंटावैलेंट टीके की पिछली खुराक से गंभीर प्रतिक्रिया हुई हो उनको इस टीके की अन्य खुराक नहीं देनी चाहिए, या डॉक्टर की सलाह के बाद ही शिशु को पेंटावैलेंट की अगली खुराक देनी चाहिए।
(और पढ़ें - हेपेटाइटिस बी टीका कब लगाएं)



