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गर्भावस्था में एसिडिटी और उसकी वजह से सीने में जलन होना भी गर्भवती महिलाओं की आम शिकायत है। इसमें सीने के बीच में जलन होती है।

यह शिकायत प्रेग्नेंसी में ज़रूर होती है क्योंकि प्रोजेस्टेरोन हार्मोन जो, गर्भावस्था में मांसपेशियों को आराम देता है और फैलने में मदद करता है, पेट के वाल्व को भी आराम देता है जो एसिड को भोजन नली (Esophagus) से बाहर रखता है। लेकिन चूंकि मासपेशियां आराम की अवस्था में होती हैं इसलिए वोल्वे थोड़ी खुली रह जाती है जिससे बढ़ते गर्भाशय की वजह से एसिड भोजन नली में चला जाता है और पेट अत्यधिक भर जाता है जिस वजह से एसिडिटी होती है जो सीने में जलन का कारण बनती है। लेकिन इसे रोकने के सुरक्षित और प्रभावी तरीके हैं। जिनके बारे में इस लेख में चर्चा की गयी है।

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एसिडिटी और हार्टबर्न में अंतर -

'एसिडिटी' शब्द का उपयोग आमतौर से पेट या भोजन नली में किसी जलन का अनुभव होने पर किया जाता है। चिकित्सकीय रूप से एसिडिटी, सीने में जलन होने से भिन्न है।

एसिडिटी तब होती है जब आपका पेट, भोजन को पचाने के लिए आवश्यक मात्रा से अधिक एसिड का उत्पादन करता है। ऐसे में आपको पेट में जलन या इससे भी अधिक कुछ महसूस हो सकता है। यह हल्का या कभी कभी काफी दर्दनाक भी हो सकता है।

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हार्टबर्न या सीने में जलन का अनुभव तब होता है जब पेट के एसिड, भोजन नली से गुज़रते समय पाइप में जलन उत्पन्न करते हैं। ये जलन की उत्तेजना काफी दर्दनाक हो सकती है और कभी कभी तो ये पेट में होने वाली जलन या एसिडिटी से भी कहीं ज्यादा होती है।

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  2. गर्भावस्था में एसिडिटी और सीने में होने वाली जलन से बचने के तरीके - Acidity and heartburn prevention during pregnancy in Hindi
  3. प्रेगनेंसी में एसिडिटी और छाती में जलन की समस्या का इलाज - Acidity and heartburn treatment during pregnancy in Hindi
  4. गर्भावस्था में सीने में जलन और एसिडिटी के डॉक्टर

हार्टबर्न अर्थात सीने में जलन तब होती है जब पेट और भोजन नली के बीच का वाल्व, पेट में एसिड को वापस जाने से रोकने में असमर्थ होता है। गर्भावस्था के दौरान, प्रोजेस्टेरोन हार्मोन, वाल्व के इस आराम का कारण होता है, जिससे सीने में जलन अधिक बार हो सकती है। इससे पेट का एसिड भोजन नली में आसानी से प्रवेश कर जाता है और परेशानी का कारण बनता है।

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गर्भावस्था की तीसरी तिमाही के दौरान सीने में जलन और अपच की समस्या होना अधिक आम है क्योंकि बढ़ता गर्भाशय आंतों और पेट पर दबाव डालता है। पेट पर पड़ने वाला दबाव भोजन नली में पेट की सामग्रियों को वापस भेज सकता है।

आपको ये समस्या गर्भावस्था के 30वें सप्ताह से 36वें सप्ताह के दौरान शुरू होती है। इस बढ़ती दिक्कत को आप तब महसूस करेंगी, जब आपका बढ़ा हुआ गर्भाशय आपके पेट में होने वाली इस समस्या को आपके गले तक पहुंचा देता है।

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गर्भावस्था के दौरान आप क्या खा रही हैं और नहीं इसका सीधा संबंध एसिडिटी से होता है जो आपके सीने में जलन की समस्या पैदा करता है। इसके बचने के लिए कुछ टिप्स इस प्रकार हैं:

अपनाने योग्य सुझाव:

  1. पूरे दिन में तीनों समय ढेर सारा भोजन करने के बजाय थोड़ी थोड़ी मात्रा में भोजन करें।
  2. दोपहर के समय मुख्य भोजन अर्थात ज्यादा खाना खा सकती हैं क्योंकि इससे दिन के अंत में अर्थात रात में जब आप सोने जा रही होती हैं तब पाचन क्रिया होने पर पाचन तंत्र पर दबाव पड़ता है तो आप आराम कर सकती हैं। रात में ज्यादा भोजन करना हानिकारक हो सकता है।
  3. हो सके तो सोने या झपकी लेने से कुछ घंटे पहले कुछ भी न खाएं तो बेहतर होगा।
  4. खाना खाने के बाद कुछ समय तक सीधे बैठें, क्योंकि तुरंत लेटने से पेट में मौजूद खाना वापस ऊपर आ सकता है।
  5. जब आप सोएं, कुछ तकियों से सिर को सहारा दें ऐसा करने से पाचन क्रिया में मदद मिलती है।
  6. हाइड्रेटेड रहें (पानी की कमी न होने दें) अर्थात पूरे दिन में, पानी और तरल पदार्थों का अधिक मात्रा में सेवन करें।
  7. खाने के बाद चूइंगम चबाने की कोशिश करें। क्योंकि चबाने से लार ग्रंथियां उत्तेजित होती हैं जो स्वाभाविक रूप से एसिड को निष्क्रिय (Neutralize) कर देती है।
  8. गर्भावस्था के दौरान सीने में जलन की शिकायत होने पर ढाले कपड़े पहनें। टाइट कपड़े बिलकुल न पहनें। यह आपके अंगों पर और भी दबाव डालते हैं।
  9. खाने के बीच में तरल पदार्थ न पिएं।

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आहार जो एसिडिटी और सीने में होने वाली जलन से राहत दिला सकते हैं:

  1. बादाम
  2. एवोकाडो
  3. हरी पत्तेदार सब्ज़ियां
  4. हरी सब्ज़ियों के जूस जिनसे पोषक तत्व और हाइड्रेशन दोनों मिलती है।
  5. हर्बल चाय पिएं, जैसे पेपरमिंट चाय, कैमोमाइल चाय और नींबू चाय।
  6. लहसुन - लहसुन की रोज़ाना एक फांक खाने से सीने में जलन से रहत रहती है और अगर आप लहसुन के कैप्सूल लेती हैं तो ये सुनिश्चित करें कि उनमें एल्लीसिन (Allicin- लहसुन से निकला एक ऑयली पदार्थ जो हार्ट बर्न में रहत पहुंचाता है) मौजूद हो ताकि सीने में जलन में वो प्रभावी हो। हमेशा की तरह कोई भी सप्पलीमेंट लेने से पहले डॉक्टर की सलाह ज़रूर लें।

इन सभी के अलावा अपनी दैनिक दिनचर्या में भी संतुलन बनाये रखें।

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आहार जिनका एसिडिटी और सीने में जलन होने पर सेवन नहीं करना चाहिए:

  1. चॉकलेट
  2. चीनी
  3. शराब
  4. चाय, कॉफी, सोडा आदि, कैफीन और चीनी युक्त पेय पदार्थ
  5. प्याज
  6. टमाटर
  7. खट्टे फल
  8. सरसों
  9. मसालेदार, वसायुक्त और टेल हुए खाद्य पदार्थ
  10. गैस उत्पन्न करने वाले पेय (Fizzy drinks)
  11. अत्यधिक मात्रा में मांस का सेवन।
  12. आयरन सप्प्लिमेंट्स से भी सीने में जलन होती है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से परामर्श लें।

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कुछ ओवर-द-काउंटर एंटेसिड (Antacids) इन लक्षणों का सामना करने में सहायता कर सकते हैं। कैल्शियम कार्बोनेट या मैग्नीशियम से बने एंटेसिड अच्छे विकल्प माने जाते हैं। हालांकि, गर्भावस्था के अंतिम तिमाही के दौरान मैग्नीशियम का सेवन नहीं करना चाहिए। मैग्नीशियम प्रसव के दौरान संकुचन में समस्या उत्पन्न कर सकता है।

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ज्यादातर डॉक्टर ऐसे एंटेसिड (Antacids) से बचने की सलाह देते हैं जिसमें सोडियम का स्तर उच्च होता है। आपको लेबल पर लिखे "एल्यूमीनियम हाइड्रॉक्साइड" या "एल्यूमीनियम कार्बोनेट" वाले एंटेसिड का भी सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि ये कब्ज की दिक्कत पैदा कर सकते हैं।

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सबसे अच्छा विकल्प जानने के लिए डॉक्टर से पूछें। डॉक्टर आपको कुछ एसिड-कम करने वाली दवाइयां लिख सकते हैं। शोधों के अनुसार, एच2 ब्लॉकर्स (H2 blockers) कही जाने वाली दवाएं, एसिड बनने को रोकने में मदद करती हैं, सुरक्षित होती हैं। एक अन्य प्रकार की दवा, जिसे प्रोटॉन पंप इन्हिबिटर (Proton pump inhibitors) कहा जाता है, का उपयोग हार्टबर्न की समस्या से ग्रस्त लोगों के लिए किया जाता है।

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