कोविड-19 को लेकर हुए एक नए अध्ययन में लॉस ऑफ स्मेल एंड टेस्ट यानी सूंघने और स्वाद लेने की क्षमता के खोने को कोरोना वायरस के संक्रमण का सबसे विश्वसनीय संकेतक अथवा लक्षण बताया गया है। यूनाइटेड किंगडम (यूके) में हुए इस अध्ययन के बाद वहां के वैज्ञानिकों ने यहां तक कहा है कि पूरी दुनिया में अब स्वाद और सूंघने की क्षमता खत्म होने को कोरोना वायरस से जुड़े सेल्फ-आइसोलेशन, टेस्टिंग और कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग के अनुपालन का क्राइटेरिया बनाए जाने पर विचार किया जाना चाहिए।
खबर के मुताबिक, इस अध्ययन से जुड़े परिणाम 'प्लोस मेडिसिन' नामक मेडिकल पत्रिका में प्रकाशित हुए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, वैज्ञानिकों ने लंदन स्थित अलग-अलग प्राइमरी हेल्थकेयर सेंटरों के आंकड़ों का मूल्यांकन किया था। इसमें उन्होंने पाया है कि कोविड-19 महामारी के दौरान सार्स-सीओवी-2 वायरस की चपेट में आने वाले लगभग 78 प्रतिशत लोगों ने अपनी सूंघने और स्वाद लेने की क्षमता अचानक खत्म होने की शिकायत की थी। इनमें से करीब 40 प्रतिशत मरीजों में खांसी या बुखार जैसे लक्षण नहीं थे। इस जानकारी को मेडिकल एक्सपर्ट ने अपनी तरह का पहला आंकड़ा बताया है।
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वहीं, अध्ययन के प्रमुख लेखक और यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन की प्रोफेसर रेचल बैटरहम ने कहा है, 'हम जैसे ही (कोरोना वायरस की) दूसरी लहर की चपेट में आएंगे तो कोविड-19 के लक्षणों की जल्दी पहचान करना बीमारी के फैलाव को सीमित करने की दिशा में काफी महत्वपूर्ण काम होगा। इसमें लोगों की भूमिका अहम होगी, जिन्हें लक्षणों की जल्दी पहचान कर तेजी से सेल्फ आइसोलेशन में जाकर टेस्ट कराना होगा।'
प्रोफेसर रेचल ने आगे कहा, 'हमारे परिणाम बताते हैं कि लॉस ऑफ स्मेल एंड टेस्ट किसी व्यक्ति के कोविड-19 से ग्रस्त होने का काफी विश्वसनीय संकेत है और अगर हमें इस महामारी को कम करना है तो विश्व भर की सरकारों को इसे सेल्फ-आइसोलेशन, टेस्टिंग और कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग का क्राइटेरिया बनाए जाने पर विचार करना चाहिए। यूके में जिन लोगों को सूंघने और स्वाद लेने की अपनी क्षमता के खत्म होने का एहसास होता है, उन्हें तुरंत खुद को आइसोलेट करने और टेस्ट कराने की सलाह दी जाती है। वैश्विक स्तर पर कुछ अन्य देश भी इस लक्षण को कोविड-19 संकेतक के रूप में देखते हैं। लेकिन ज्यादातर देश बुखार और श्वसन संबंधी लक्षणों पर फोकस कर रहे हैं।'
यह अध्ययन ऐसे में किया गया था, जब यूके में कोविड-19 महामारी तेजी से फैलती दिख रही थी। वैज्ञानिकों ने 23 अप्रैल से 14 मई के बीच ऐसे लोगों को टेक्स्ट मैसेज किए जो सूंघने या स्वाद लेने की क्षमता के अचानक खत्म होने के चलते प्राइमरी केयर सेंटरों में गए थे। इस प्रक्रिया के तहत कुल 590 प्रतिभागियों का नामांकन किया गया और उनसे कोविड-19 संबंधी लक्षणों पर सवाल किए गए। इनमें लॉस ऑफ स्मेल एंड टेस्ट से जुड़े प्रश्न भी शामिल थे। इस दौरान पता चला कि 590 प्रतिभागियों में से 567 में कोरोना संक्रमण के लक्षण दिखे थे। इन लोगों ने इस पुष्टि के लिए कि उनमें वायरस के खिलाफ रोग प्रतिरोधक विकसित हुए हैं या नहीं एंटीबॉडी टेस्ट भी कराया था।
वैज्ञानिकों को पता चला है कि इन 567 संक्रमितों में से 77.6 प्रतिशत में सार्स-सीओवी-2 के खिलाफ एंटीबॉडी पैदा हुए थे और उनके सूंघने और स्वाद लेने की क्षमता को अचानक नुकसान हुआ था। दिलचस्प जानकारी यह पता चली कि इन करीब 78 प्रतिशत लोगों में 39.8 प्रतिशत को कोरोना संक्रमण की वजह से न तो खांसी हुई और न ही बुखार आया। इसके अलावा यह भी देखने में आया एंटीबॉडी वाले संक्रमितों में लॉस ऑफ स्मेल के मामले लॉस ऑफ टेस्ट वाले संक्रमितों से तीन गुना ज्यादा थे।
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गौरतलब है कि यह पहले ज्ञात है कि कोरोना वायरस के संक्रमण की चपेट में आने वाले लोगों में सूंघने और स्वाद लेने की क्षमता कम या खत्म हो सकती है। दुनियाभर के अध्ययनों के आधार शोधकर्ताओं ने इसकी पुष्टि की है, जिसे शीर्ष अमेरिकी हेल्थ एजेंसी सीडीसी ने भी स्वीकार किया है और अपने कोविड-19 लक्षणों की सूची में लॉस ऑफ स्मेल एंड टेस्ट को शामिल किया है। हालांकि यहां बता दें कि सूंघने और स्वाद लेने की क्षमता केवल अस्थायी रूप से प्रभावित होती है। ज्यादातर कोविड-19 मरीज इससे समस्या से उबर जाते हैं। यह पहली बार है जब किसी अध्ययन के तहत यह बताया गया है कि इस लक्षण को कोविड-19 होने का सबसे भरोसेमंद संकेत बताया गया है।
इस वैज्ञानिक अध्ययन आधारित तथ्य का पता चलने के बाद प्रोफेसर रेचल और उनकी टीम ने कहा, 'हमारा शोध एक जरूरी सार्वजनिक स्वास्थ्य संदेश देता है: जिन लोगों को घर में रखे लहसुन, प्याज, कॉफी और अन्य प्रकार की चीजों की गंध नहीं आ रही हो, उन्हें अपने आपको आइसोलेट कर लेना चाहिए और कोरोना वायरस का पीसीआर स्वैब टेस्ट कराना चाहिए।'
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