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शरीर के लिए नियमित रूप से व्यायाम बहुत जरूरी है। मांसपेशियों के विकास, उनकी शक्ति बढ़ाने के साथ लचीलेपन में भी व्यायाम की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। हालांकि, कई परिस्थितियों में व्यायाम से लंबे समय का अंतराल हो जाता है। कोविड-19 महामारी के दौरान हुआ देशव्यापी लॉकडाउन इसका एक उदाहरण है। लंबे अंतराल के बाद दोबारा व्यायाम की शुरुआत करना कई मामलों में चुनौती पूर्ण होता है। चूंकि शरीर की निष्क्रियता के कारण मांसपेशियां शिथिल पड़ जाती हैं, ऐसे में अंतराल के बाद व्यायाम की शुरुआत करने में काफी समस्याएं आ सकती हैं।

कोविड-19 महामारी के कारण हुए देशव्यापी लॉकडाउन के बाद सरकार ने इसे चरणबद्ध तरीकों से खोलना शुरू कर दिया है। इसी के तहत मार्च में बंद हुए जिम और योग सेंटर भी अब दोबारा खोले जाने लगे हैं। लोगों के मन में सवाल लगातार बना हुआ है कि करीब 6 माह के अंतराल के बाद आखिर किस तरीके से शरीर को दोबारा फिट किया जा सकता है? लंबे अंतराल के बाद व्यायाम करने से मांसपेशियों में खिंचाव होना स्वाभाविक है। इसके अलावा मांसपेशियों में ऐंठन और दर्द की भी शिकायत हो सकती है, ऐसे में इन समस्याओं को कैसे दूर किया जा सकता है?

लॉकडाउन के दौरान जिमों के बंद होने के बावजूद कुछ लोग घर पर ही खुद को प्ररित कर योग और व्यायाम कर रहे थे। लंबे समय तक घर में बंद रहने के कारण शरीर पर होने वाले प्रभावों को लेकर मई 2020 में जर्नल ऑफ स्पोर्ट साइंस में एक अध्ययन प्रकाशित हुआ। इसमें बताया गया कि सिर्फ दो दिनों की ही गतिहीन या सुस्त जीवनशैली कई प्रकार की समस्या जैसे मांसपेशियों की क्षति, एरोबिक क्षमता में कमी, फैट एकत्रित होने आदि का कारण बन सकती है। अध्ययन करने वाले शोधकर्ताओं ने बताया कि निष्क्रिय जीवनशैली के कारण मांसपेशियों को होने वाली क्षति इतनी तेजी से होती है कि इसके प्रभावों को मात्र दो दिनों के भीतर ही देखा जा सकता है।

देश में जैसे-जैसे फिटनेस सेंटरों का दोबारा खुलना शुरू हो गया है, जल्द ही लोगों की भीड़ एक बार फिर से यहां होनी शुरू हो जाएगी। फिटनेस विशेषज्ञों का मानना है कि जो लोग लॉकडाउन के दौरान बिल्कुल भी व्यायाम और शारीरिक गतिविधियां नहीं कर सके हैं, वह जब अचानक से जिम की शुरुआत करेंगे तो उनमें वर्कआउट इंजरी का खतरा रहेगा। इसके अलावा ऐसे लोगों को दोबारा व्यायाम की गति पकड़ने और शरीर को फिट कर पाने में समय लग सकता है। ऐसे लोगों को लंबे अंतराल के बाद दोबारा जिम में जाने से पहले कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

इस लेख में हम आपको बताएंगे कि लंबे अंतराल के बाद दोबारा फिटनेस सेंटरों में जाने से पहले किन बातों का ध्यान रखकर आप वर्कआउट इंजरी से बचने के साथ शरीर को फिट और तंदुरुस्त बना सकते हैं।

  1. शरीर को व्यायाम के लिए दोबारा कैसे तैयार करें? - Long gap ke baad Exercise ke liye body ko kaise ready karein?
  2. व्यायाम की तीव्रता और रैप को कम करने के साथ करें शुरुआत - Shuruwat me high intensity workout se bachein
  3. शरीर को दोबारा ताकतवर कैसे बनाएं? - Shareer ko dobara strength kaise dein?
  4. पौष्टिक आहार और पर्याप्त नींद भी है जरूरी - healthy diet aur Need bhi hai jaroori
  5. लंबे अंतराल के बाद व्यायाम के कारण होने वाला दर्द और कठोरता - Post-workout pain and soreness se kaise bachein?
  6. निष्कर्ष - Takeaways
लंबे अंतराल के बाद व्यायाम के टिप्स के डॉक्टर

लंबे अंतराल के बाद जिम में दोबारा जाने से पहले आपको अपने फिटनेस गोल को फिर से निर्धारित करने की आवश्यकता है। यानी, अगर आप अंतराल से पहले भारी वजन उठाने वाला व्यायाम करते थे तो इसका मतलब यह नहीं है कि आप अंतराल के बाद दोबारा जिम में पहुंचते ही उसी क्षमता के साथ अपनी शुरुआत करें। जिस तरह से कुछ दिनों की ट्रेनिंग के बाद मांसपेशियों का विकास और मानसिक रूप से आनंद की अनुभूति होती है उसी प्रकार से कुछ दिनों तक शारीरिक गतिविधियों को बंद कर देने के बाद मांसपेशियां शिथिल भी होने लगती हैं।

इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए कुछ लोगों ने लॉकडाउन के दौरान घर में ही ऐसी व्यवस्थाएं कर ली थीं, जिससे वह आसानी से व्यायाम कर सकें। हालांकि, जिन लोगों को इस तरह की सुविधाएं नहीं मिल पाईं, उनको व्यायाम के अभाव के कारण शारीरिक मुद्रा में गड़बड़ी, वजन बढ़ने और मांसपेशियों को क्षति जैसी कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। वजन कम करना या मांसपेशियों का निर्माण करना जितना मुश्किल काम है, वजन बढ़ाना और मांसपेशियों की क्षति होना उतना ही आसान। यही कारण है कि सबसे पहले हमें अपने शरीर की सीमाओं को समझना होगा।

लंबे समय तक शरीर की निष्क्रियता के प्रभाव को देखने वाली एक निजी कंपनी द्वारा 2013 में पेशेवर रग्बी और अमेरिकी फुटबॉल खिलाड़ियों पर एक सर्वे किया गया। इसमें पाया गया कि 10-16 सप्ताह तक कोई ट्रेनिंग न करने के कारण खिलाड़ियों के कंधों की ताकत में 40 फीसदी जबकि शरीर की समग्र शक्ति में 19 फीसदी की कमी दर्ज की गई। इस आधार पर विशेषज्ञों की सलाह है कि भले ही आप अधिक वजन उठाने वाले व्यायाम करते रहे हों लेकिन लंबे अंतराल के बाद दोबारा जिम में लौटने के बाद सबसे पहले हल्के व्यायामों के साथ शुरुआत करें। एक बार क्षमता विकसित हो जाने के बाद ही अधिक भार वाले व्यायामों की ओर बढ़े। व्यायाम में निरंतरता बनाए रखने का भी प्रयास किया जाना चाहिए।

लंबे अंतराल के बाद ही सही व्यायाम की शुरुआत और उसकी निरंतरता बनी रहनी चाहिए। लेकिन शुरुआत हमेशा हल्के स्तर वाले व्यायामों से ही करें, वरना लाभ से अधिक इसके दुष्प्रभाव देखने को मिल सकते हैं। लॉकडाउन के चलते लंबे समय के अंतराल के बाद शुरू हुए फुटबॉल के मैचों में ऐसा ही कुछ देखने को मिला। मई-जून में जब दोबारा खेल शुरू हुए तो जर्मन फुटबॉल लीग में भाग लेने वाले फुटबॉलरों के चोटों के जोखिम में 300% की वृद्धि दर्ज की गई। विशेषज्ञों का कहना है कि भले ही हम पेशेवर फुटबॉल खिलाड़ियों के स्तर का प्रशिक्षण नहीं ले रहे होते हैं, फिर भी एक अंतराल के बाद सामान्य इंसान का शरीर भी पहले की तरह चुस्त और ताकतवर नहीं रह जाता है। ऐसे में जिम के शुरुआत में ही अगर मांसपेशियों और जोड़ों पर अधिक दबाव डाला जाए तो उससे चोट लगने का खतरा हो सकता है।

लंबे अंतराल के पश्चात हफ्ते में दो से तीन दिन जिम जाने के साथ शुरुआत की जा सकती है। चूंकि मांसपेशियों को दोबारा सक्रिय होने में समय लगता है ऐसे में व्यायाम के साथ शरीर को पर्याप्त रूप से आराम देना भी जरूरी है। इसके अलावा आप पहले जितना वजन उठा रहे थे शुरुआत उससे आधे वजन के साथ करें। अभ्यास के सेट और रैप, दौड़ने या साइकिल चलाने की दूरी और गति को भी कम कर दें। यहां जिस बात पर सबसे ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है वह है व्यायाम के साथ शरीर को पूरा आराम। मांसपेशियों को पूरा वक्त दें, जिससे वह स्वयं को सक्रिय कर सकें।

जैसा कि ऊपर उल्लेख किया गया है कि व्यायाम की दिनचर्या में वापस आने के लिए अपने फिटनेस लक्ष्यों को फिर से सेट करें और हल्के स्तर वाले व्यायाम के साथ शरुआत करते हुए आगे बढ़ें। शरीर को दोबारा ताकतवर और चुस्त बनाने के पहले तरीकों में से एक है कि अच्छे से वार्मअप करना। आप चाहें तो शुरुआत के ​कुछ दिन सिर्फ वार्म अप वाले व्यायाम भी कर सकते हैं। इससे एक तो मांसपेशियां खुल जाती हैं दूसरा ऐसे व्यायामों का मांसपेशियों पर दबाव भी कम पड़ता है। सुनिश्चित करें कि सभी जोड़ों और मांसपेशियों का ठीक से वार्म-अप किया गया हो। अच्छे से वार्मअप के बाद आपको जोड़ों और मांसपेशियों में स्वयं अधिक लचीलेपन का अनुभव होगा। वहीं वेट ट्रेनिंग की शुरुआत करने से पहले केवल खाली बार के साथ पुश-अप या बेंच प्रेस के एक से दो सेट किए जा सकते हैं।

यह समझना भी महत्वपूर्ण है कि लॉकडाउन या लंबे अंतराल के कारण न केवल दिन-प्रतिदिन के जीवन में सुस्ती और निष्क्रियता आ जाती है, साथ ही यह तनाव में वृद्धि, नींद में समस्या आदि का कारण भी बन सकती है। लंबे समय तक शारीरिक निष्क्रियता और थकान भी इंजरी का कारण बन सकती है। हल्के स्तर के व्यायाम से इन समस्याओं को भी दूर किया जा सकता है।

प्लीमेट्रिक मूवमेंट्स या विभिन्न प्रकार के बॉडी वेट और फुर्तीले स्तर के व्यायामों को करते समय जंपिंग, स्किपिंग या हूपिंग जैसी गतिविधियां भी जोखिम भरी हो सकती हैं। यदि लंबे समय के अंतराल के बाद आप इन अभ्यासों को कर रहे हैं तो इससे संतुलन खोने और टखनों के मुड़ने का भी खतरा रहता है। अंतराल के बाद इन व्यायामों की शुरुआत सप्ताह में एक या दो बार से करनी चाहिए। जैसे-जैसे शरीर इसका दोबारा अभ्यस्त हो जाए इनकी क्षमता और रैप को फिर से बढ़ाया जा सकता है।

लॉकडाउन जैसे लंबे अंतराल जिसमें आपको ज्यादा से ज्यादा समय घर पर बिताना पड़ता हो उसमें जीवन के कई हिस्सों के साथ आहार और नींद के पैटर्न पर भी बुरा असर पड़ता है। महीनों की शारीरिक रूप से निष्क्रियता के कारण पहले ही वजन बढ़ने और मांसपेशियों की क्षति से संबंधित समस्याएं होती हैं। इसके अलावा खान-पान में अनियमितता स्वास्थ्य संबंधी कई और विकारों को जन्म दे सकती है। इसका असर आपके संपूर्ण फिटनेस पर पड़ता है।

नींद के साथ भी ऐसा ही है। मांसपेशियों को व्यवस्थित होने और शरीर से थकान को दूर करने के लिए कम से कम 7 से 8 घंटे की अच्छी नींद जरूरी होती है। ऐसे में यदि आप एक अंतराल के बाद दोबारा जिमों और फिटनेस सेंटरों का रुख कर रहे हैं तो आपको अपने खान-पान और पर्याप्त नींद पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। इन दोनों में ही किसी प्रकार की कमी कई प्रकार से शरीर को नुकसान पहुंचा सकती है।

लंबे अंतराल के बाद दोबारा जिम में जाने के बाद आपको दर्द और मांसपेशियों में कठोरता का अनुभव हो सकता है। इसे डिलेड ऑनसेट मसल सोरनेस कहा जाता है। शुरुआत के कुछ दिनों में मांसपेशियों और जोड़ों में होने वाला यह दर्द स्वाभाविक है। हालांकि, जैसे-जैसे व्यायाम करते रहते हैं, समय के साथ यह दर्द और मांसपेशियों की कठोरता स्वत: ही कम होती जाती है।

कुछ लोगों को पर्याप्त आराम करने के बाद भी कुछ दिनों तक दर्द या अकड़न का अनुभव हो सकता है। यदि आपको सामान्य से अधिक दर्द का अनुभव हो रहा हो तो डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट से इस बारे में सलाह लेनी चाहिए। अंतराल के बाद जिन अभ्यासों और गतिविधियों के कारण दर्द और परेशानी का अनुभव हो रहा हो उन अभ्यासों को न करें या फिर उसके वैकल्पिक अभ्यासों को प्रयोग में ला सकते हैं।

नियमित व्यायाम से शरीर अच्छे आकार में और स्वास्थ्य रहता है। व्यायाम का असर मानसिक स्वास्थ्य पर भी देखने को मिलता है। नियमित रूप से व्यायाम करके दिमाग को तनाव से मुक्त रखा जा सकता है। बेशक, लंबे समय के अंतराल के बाद उच्च तीव्रता वाले व्यायामों को करने में जोखिम है, लेकिन नियमित रूप से व्यायाम करना इससे कहीं अधिक लाभकारी हो सकता है। थोड़ी सी सावधानी और धैर्य के साथ, आप अपने सामान्य व्यायाम दिनचर्या में वापस आ सकते हैं।

दोबारा जिम की शुरुआत से पहले अपने प्रशिक्षक से सहायता अवश्य लें। उनसे उन व्यायामों के बारे में पूछें, जिनसे दोबारा शुरुआत की जा सकती हो। अगर लॉकडाउन के बाद व्यायामों को नए सिरे से शुरू करने की बात करें तो महामारी से बचने के सभी नियमों का सही से पालन सुनिश्चित करें। फिजिकल डिस्टेंसिंग, हाथों की स्वच्छता और आसपास साफ-सफाई का भी विशेष ध्यान रखना आवश्यक होता है। उपरोक्त सभी नियमों का पालन करके आप दोबारा से बिना किसी चोट के खतरे के, व्यायाम की शुरुआत कर सकते हैं। ध्यान रखें व्यायाम से पहले शरीर का अच्छे से वार्मअप और व्यायाम के बाद मांसपेशियों की स्ट्रेचिंग करना बहुत जरूरी होता है।

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संदर्भ