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सिस्टोसील क्या है?

सिस्टोसील को एंटेरीयर वेजाइनल प्रोलैप्स और प्रोलैपस्ड ब्लैडर के नाम से जाना जाता है। यह एक स्त्री रोग है, जिसमें मूत्राशय अपनी सामान्य जगह से हिल जाता है। ऐसा आमतौर पर तब होता है, जब मूत्राशय के आस-पास की मांसपेशियां कमजोर पड़ जाती हैं या फिर किसी कारण से पेल्विस में दबाव बढ़ जाता है।

पेल्विस के मुख्य अंग जिनमें मूत्राशय, गर्भाशय और आंतें आदि पेल्विस की मांसपेशियों और संयोजी ऊतकों की मदद से अपनी जगह पर रहते हैं। जब कोई भी मांसपेशी या संयोजी ऊतक कमजोर पड़ जाते हैं या ठीक से काम नहीं कर पाते हैं, तो ऊपरी अंग मूत्राशय पर दबाव डालने लगते हैं। ऐसी स्थिति में मूत्राशय का कुछ हिस्सा योनि से बाहर की तरफ निकलने लग जाता है।

सिस्टोसील के लक्षण क्या हैं?

सिस्टोसील के लक्षण उसकी गंभीरता पर निर्भर करते हैं। यदि सिस्टोसील गंभीर नहीं है, तो हो सकता है कि इससे कोई भी लक्षण विकसित न हो। हालांकि, यदि स्थिति गंभीर है, तो कुछ लक्षण देखे जा सकते हैं, जिनमें निम्न शामिल हैं -

  • योनिद्वार से शरीर का अंदरुनी हिस्सा बाहर निकला हुआ महसूस होना या दिखना
  • बार-बार पेशाब आना या मन करना या ऐसा महसूस होना जैसे अधिक मात्रा में पेशाब जमा हो गया है
  • पेल्विस फूला हुआ महसूस होना, साथ ही दर्द व अन्य तकलीफें होना
  • महिला के लंबे समय तक खड़े रहने, सीढ़ीयां चढ़ने या वजन उठाने पर लक्षण गंभीर होना
  • टेम्पोन आदि लगाने में दिक्कत होना
  • मूत्राशय खाली करने में दिक्कत होना
  • बार-बार मूत्र पथ संक्रमण होना
  • सेक्स के दौरान दर्द होना

डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?

सिस्टोसील एक परेशान कर देने वाली स्थिति हो सकती है, लेकिन बहुत ही कम मामलों में इससे किसी प्रकार का दर्द महसूस होता है। इससे मूत्राशय को खाली करने में काफी परेशानी होने लगती है, जिस कारण मूत्राशय में संक्रमण होने का खतरा भी काफी बढ़ जाता है। ऐसी स्थितियां विकसित होने से बचाव करने के लिए जल्द से जल्द डॉक्टर से इस बारे में बात करना एक बेहतर होता है। यदि आपको पेल्विस में किसी प्रकार की तकलीफ या दर्द महसूस होता है या फिर लगता है कि योनि से कुछ बाहर की तरफ निकल या लटक रहा है, तो डॉक्टर को दिखा लेना चाहिए।

सिस्टोसील के क्या कारण हो सकते हैं?

पेल्विक का निचला हिस्सा कई मांसपेशियों, लिगामेंट और संयोजी ऊतकों से मिलकर बना होता है, जो मूत्राशय व अन्य पेल्विस अंगों को सहारा प्रदान करता है। उम्र बीतने के साथ-साथ इन अंगों और लिगामेंट का संबंध कमजोर पड़ने लग जाता है। इसके अलावा जन्म के दौरान किसी असामान्यता होने या फिर कोई भी ऐसी स्थिति जिसमें पेल्विस की मांसपेशियों पर अधिक जोर पड़ा हो उनसे भी यह समस्या हो सकती है। ऐसी स्थिति में मूत्राशय अपनी सामान्य स्थिति से थोड़ा नीचे चला जाता है और उसका कुछ हिस्सा योनिद्वार से बाहर की तरफ लटक जाता है।

निम्न कुछ स्थितियों के बारे में बताया गया है, जिनसे पेल्विस की मांसपेशियों पर दबाव पड़ सकता है -

कुछ अन्य स्थितियां भी हैं, जो सिस्टोसील या उसका कारण बनने वाली समस्याएं विकसित होने का खतरा बढ़ा सकती हैं -

सिस्टोसील का परीक्षण कैसे किया जाता है?

सिस्टोसील का परीक्षण करने के लिए डॉक्टर सबसे पहले योनि की करीब से जांच करते हैं। इस दौरान मरीज से उसके लक्षणों व स्वास्थ्य संबंधी पिछली जानकारी से जुड़े कुछ सवाल भी पूछे जा सकते हैं। इससे जो भी निष्कर्ष निकलता है उसके अनुसार ही डॉक्टर कुछ अन्य टेस्ट करवाने की सलाह दे सकते हैं।

सिस्टोसील के परीक्षण में आमतौर पर ब्लड व यूरिन टेस्ट किए जाते हैं साथ ही मूत्राशय की स्थिति का अंदाजा लगाने के लिए एक्स रे परीक्षण भी किया जा सकता है। हालांकि, कुछ अन्य टेस्ट भी हैं, जिन्हें डॉक्टर सिस्टोसील की पुष्टि करने के लिए परीक्षण करवाने की सलाह दे सकते हैं -

  • यूरोडायनेमिक -
    इस टेस्ट की मदद से मूत्राशय के पेशाब जमा करके रखने और पेशाब को निकालने की क्षमता की जांच करता है।
     
  • सिस्टोस्कोपी -
    इस प्रक्रिया में नली जैसे एक उपकरण को मूत्रमार्ग में डाला जाता है, जिससे मूत्राशय के स्वास्थ्य की जांच की जाती है। सिस्टोस्कोपी की मदद से मूत्र पथ में किसी प्रकार की असामान्यता, ब्लॉकेज, ट्यूमर या पथरी आदि का पता लगाया जा सकता है।

सिस्टोसील का इलाज कैसे किया जाता है?

यदि सिस्टोसील गंभीर नहीं है और इससे दर्द या अन्य किसी भी प्रकार की तकलीफ नहीं हो रही है, तो इसका इलाज कराने की जरूरत नहीं पड़ती है। इसके इलाज के तौर पर डॉक्टर मरीज को सिर्फ अधिक वजन न उठाने और अपनी जीवनशैली में सुधार करने की सलाह देते हैं, ताकि लक्षणों को बदतर होने से रोका जाए।

हालांकि, यदि सिस्टोसील के कारण दर्द या अन्य तकलीफ हो रही है, तो डॉक्टर इसका इलाज करने पर विचार कर सकते हैं। सिस्टोसील का इलाज करने के लिए डॉक्टर निम्न विकल्पों की सलाह देते हैं -

  • एस्ट्रोजन रिप्लेसमेंट थेरेपी -
    इससे एस्ट्रोजन हार्मोन में कुछ उचित बदलाव किए जाते हैं।
     
  • वेट लॉस थेरेपी -
    इस थेरेपी की मदद से शरीर का बढ़ा हुआ वजन कम करने में मरीज की मदद की जाती है।
     
  • कीगल एक्सरसाइज -
    डॉक्टर आपको कीगल एक्सरसाइज सिखा सकते हैं, जिससे योनि, मूत्रमार्ग और गुदा की मांसपेशियों को मजबूत किया जाता है।

इसके अलावा सिस्टोसील के इलाज में कुछ प्रकार की दवाएं भी शामिल की जा सकती हैं, जो मुख्य रूप अलग-अलग स्थितियों पर निर्भर करती हैं। संक्रमण होने पर एंटीबायोटिक, एंटीफंगल और एंटीवायरल दवाएं दी जाती हैं। इसके अलावा यदि मरीज को दर्द या अन्य तकलीफ हो रही है, तो उन्हें दर्द व मांसपेशियों में ऐंठन से आराम देने वाली दवाएं भी दी जा सकती हैं।

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