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  1. हिस्टेरेक्टॉमी (गर्भाशय-उच्छेदन) क्या है?
  2. हिस्टेरेक्टॉमी (गर्भाशय-उच्छेदन) की ज़रुरत कब होती है?
  3. हिस्टेरेक्टॉमी (गर्भाशय-उच्छेदन) के लिए तैयारी
  4. हिस्टेरेक्टॉमी (गर्भाशय-उच्छेदन) कैसे की जाती है?
  5. हिस्टेरेक्टॉमी (गर्भाशय-उच्छेदन) के बाद देखभाल
  6. हिस्टेरेक्टॉमी (गर्भाशय-उच्छेदन) के बाद संभव जटिलताएं और जोखिम
  7. हिस्टेरेक्टॉमी (गर्भाशय-उच्छेदन) के बाद ठीक होने में कितना समय लगता है?

हिस्टेरेक्टॉमी (गर्भाशय-उच्छेदन) क्या है? - What is Hysterectomy in Hindi?

हिस्टेरेक्टॉमी (Hysterectomy) वह सर्जिकल प्रक्रिया है जिसका उपयोग करके महिला के शरीर से गर्भाशय को निकाला जाता है। गर्भाशय के साथ अंडाशय, फैलोपियन ट्यूब, योनि और सर्विक्स को भी हटाया जा सकता है। या तो पूरे गर्भाशय को हटा दिया जाता है या इसके कुछ हिस्से को छोड़ दिया जाता है। सर्जरी मरीज़ की उस स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करती है जिसके लिए यह प्रक्रिया की जा रही  है।

हिस्टेरेक्टॉमी ओपन पद्धति या लैप्रोस्कोपी द्वारा की जा सकती है। प्रक्रिया लगभग 1-2 घंटे तक चलती है। यह सर्जरी पेट या योनि से की जा सकती है। यह सर्जरी गाइनोकोलोजिस्ट (Gynaecologist; स्त्री रोग विशेषज्ञ) द्वारा की जाती है।

हिस्टेरेक्टॉमी (गर्भाशय-उच्छेदन) की ज़रुरत कब होती है? - When is Hysterectomy required in Hindi?

गर्भाशय महिला प्रजनन प्रणाली का एक बहुत महत्वपूर्ण अंग है। यह कई वजहों से रोगग्रस्त हो सकता है। गर्भाशय को सर्जरी द्वारा हटाना आमतौर पर उपचार का आखिरी विकल्प होता है। लेकिन यह संभव है कि कभी-कभी अन्य कोई भी उपचार पद्धति से राहत न मिल पा रही हो। ऐसे मामलों में, गर्भाशय को हटाने के लिए सर्जरी ही एकमात्र विकल्प रह जाता है। निम्न स्थितिओं में हिस्टेरेक्टॉमी करवाने की ज़रुरत पद सकती है:

  1. फाइब्रॉएड (Fibroids)
    गर्भाशय के अंदर फाइब्रॉएड पैदा हो सकते हैं हालाँकि ये कैंसरजनक नहीं होते। ये गर्भाशय की गुहा के आंतरिक आकार को बदल देते हैं, इनकी वजह से भारी मासिक स्त्राव, पेट में दर्द, सामन्य गर्भधारण में कठिनाई, गर्भावस्था में परेशानी हो सकती है। दवाओं द्वारा इन्हें कम किया जा सकता है।लेकिन गंभीर स्थितियों में या जब कई बड़े फाइब्रॉएड मौजूद होते हैं, तो गर्भाशय को हटाने की आवश्यकता हो जाती है।
  2. एंडोमेट्रिओसिस (Endometriosis)
    गर्भाशय गुहा की लाइनिंग पर उपस्थित कोशिकाएं विशेष कोशिकाएं होती हैं जो शरीर में और कहीं स्थित नहीं होतीं। एंडोमेट्रियोसिस में, ये कोशिकाएं गर्भाशय से बाहर निकल जाती हैं और अन्य अंगों पर जमा हो जाती हैं। नए स्थान पर भी कोशिकाएं विकसित होंगी, टूटेंगी और इनसे रक्तस्त्राव होगा, जैसे गर्भाशय की लाइनिंग की कोशिकाओं में होता है। चिकित्सा या सर्जिकल उपचार के बावजूद भारी मासिक स्त्राव, गर्भाशय में ऐंठन जैसे लक्षण पाए जा सकते हैं। इसके बाद गर्भाशय को हटाना ही आखरी विकल्प होता है। (और पढ़ें – एंडोमेट्रिओसिस ट्रीटमेंट)
  3. प्रोलैप्सेड (Prolapsed; आगे की ओर बढ़ा हुआ) गर्भाशय
    गर्भाशय मज़बूत और टाइट मांसपेशियों और लिगामेंट द्वारा अपनी जगह पर स्थित रहता है। कई बार गर्भधारण करने, बार बार गर्भपात, प्रसव में कठिनाई जैसी स्थितियां गर्भाशय और उसको सँभालने वाले ऊतकों पर तनाव डालती हैं। इससे गर्भाशय अपनी सामान्य स्थिति से विस्थापित हो सकता है। यदि सामान्य स्थिति पर वापिस आने के लिए की जाने वाली सर्जरी नहीं की जाती या ये सर्जरी होने पर भी विफल हो जाए तो सर्जरी द्वारा गर्भाशय को हटवा दिया जा सकता है।
  4. गर्भाशय का कैंसर 
    गर्भाशयी कैंसर गर्भाशय में भी बन सकता है और शरीर के किसी और अंग में उत्पन्न होकर भी गर्भाशय तक पहुँच सकता है। किसी भी स्थिति में, इसका परिणाम घातक हो सकता है। यदि दवाओं और विकिरण चिकित्सा से उपचार से कैंसर नहीं नियंत्रित हो पाता तो ऐसे में सर्जरी का सहारा लेना पड़ सकता है। (और पढ़ें – कैंसर की दवा)
  5. ग्रंथिपेश्यर्बुदता (Adenomyosis)
    इस स्थिति में, गर्भाशय की लाइनिंग और मोटी हो जाती है। इससे अत्यधिक मासिक स्त्राव, गर्भाशय में ऐंठन और पेट में सूजन हो जाती है। यदि लक्षण अन्य उपचार विधियों से ठीक नहीं हो पाते हैं, तो गर्भाशय को निकालने के लिए सर्जरी की जा सकती है।

यह सर्जरी उन महिलाओं में नहीं की जाती है जो गर्भधारण करने में सक्षम हैं या जिनकी उम्र माँ बनने योग्य है। इस सर्जरी के बाद आप गर्भ धारण नहीं कर सकेंगे।

हिस्टेरेक्टॉमी (गर्भाशय-उच्छेदन) के लिए तैयारी - Preparing for Hysterectomy in Hindi

सर्जरी की तैयारी के लिए आपको निम्न कुछ बातों का ध्यान रखना होगा और जैसा आपका डॉक्टर कहे उन सभी सलाहों का पालन करना होगा: 

  1. सर्जरी से पहले किये जाने वाले टेस्ट्स/ जांच (Tests Before Surgery)
  2. सर्जरी से पहले एनेस्थीसिया की जांच (Anesthesia Testing Before Surgery)
  3. सर्जरी की योजना (Surgery Planning)
  4. सर्जरी से पहले निर्धारित की गयी दवाइयाँ (Medication Before Surgery)
  5. सर्जरी से पहले फास्टिंग (खाली पेट रहना) (Fasting Before Surgery)
  6. सर्जरी का दिन (Day Of Surgery)
  7. सामान्य सलाह (General Advice Before Surgery)
  8. ध्यान देने योग्य अन्य बातें (Other Things To Be Kept In Mind Before Surgery)
    सर्जरी से पहले पेट और प्यूबिस की त्वचा पर से सारे बाल हटाए (शेव) जाते हैं। फिर उस त्वचा को एंटी-सेप्टिक सोल्यूशन से साफ़ किया जाता है।

इन सभी के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए इस लिंक पर जाएँ - सर्जरी से पहले की तैयारी

हिस्टेरेक्टॉमी (गर्भाशय-उच्छेदन) कैसे की जाती है? - How is Hysterectomy done?

पेट या योनि के माधयम से सर्जरी द्वारा गर्भाशय को हटाया जा सकता है। गर्भाशय को पूरा या आधा भी हटाया जा सकता है और ये भी हो सकता है कि महिला प्रजनन प्रणाली के किसी अन्य अंग को भी हटाया जाए। इस सर्जरी की तकनीकें निम्नलिखित हैं:

पेट की हिस्टेरेक्टॉमी (Abdominal Hysterectomy)

पेट के निचले भाग में एक 5 इंच लम्बा चीरा (सीधा या आड़ा) काटा जाता है। पेट की मांसपेशियों, प्रावरणी और रक्त वाहिकाओं को ध्यान से अलग किया जाता है। गर्भाशय को अपनी जगह पर रखने वाले लिगामेंट्स को काटा जाता है। इस बात का ख्याल रखा जाता है कि स्वस्थ अंगों, तंत्रिकाओं और रक्त वाहिकाओं को नुकसान न पहुंचे। 

गर्भाशय को हटा दिया जाता है। मांसपेशियों और अन्य अंगों को पहले की तरह लगाया जाता है और सर्जिकल धागे से चीरा को सिल दिया जाता है। अगर गर्भाशय का आकर बड़ा है तो सर्जरी के इस को चुना जाता है क्योंकि इसमें चीरे इतना बड़ा होता है कि एक बड़े गर्भाशय को आसानी से निकाला जा सके।

योनि हिस्टेरेक्टॉमी (Vaginal Hysterectomy)

योनि हिस्टेरेक्टॉमी के लिए, त्वचा पर कोई सर्जिकल चीरा नहीं काटा जाता। पेट की हिस्टेरेक्टॉमी, जो एक ओपन विधि है, के मुकाबले यह एक कम चीड़कर या काटकर की जाने वाली प्रक्रिया है। योनि के माध्यम से सर्जिकल उपकरणों को डाला जाता है। योनि के छिद्र को सर्जिकल तरीके से बढ़ाया जा सकता है। गर्भाशय के संलग्नक काट दिए जाते हैं, और योनि के छिद्र के माध्यम से गर्भाशय को हटा दिया जाता है। इस पद्धति को आसानी से किया जा सकता है क्योंकि केवल गर्भाशय और सर्विक्स को ही निकला जाता है।

योनि के माध्यम से अंडाशय और फैलोपियन ट्यूबों को हटाना असंभव नहीं है, लेकिन यह मुश्किल है।पेट की हिस्टेरेक्टॉमी में यह आसानी से किया जा सकता है। सर्जरी से पहले दिए गए योनि के चीरे को सर्जिकल धागों से बंद किया जाता है। इसमें हलके निशान पड़ते हैं जो जल्दी हट भी जाते हैं।

लैप्रोस्कोपिक हिस्टेरेक्टॉमी (Laparoscopic Hysterectomy)

इस कम चीड़कर या काटकर की जाने वाली (Minimally Invasive) प्रक्रिया में पेट की त्वचा पर कई छोटे चीरे काटे जाते हैं। सर्जिकल उपकरणों को इन चीरों के माध्यम से डाला जाता है। एक चीरे के माध्यम से एक लचीली ट्यूब (लैप्रोस्कोप; Laparoscope) से जुड़ा एक वीडियो कैमरा डाला जाता है। यह आंतरिक अंगों को देखने में मदद करता है और प्रक्रिया के दौरान सर्जन को मदद करता है।

लैप्रोस्कोपिक मार्गदर्शन से योनि हिस्टेरेक्टॉमी भी की जा सकती है। आंतरिक अंगों को देखने के लिए योनि के माध्यम से लैप्रोस्कोप डाला जा सकता है। रोबोटिक लैप्रोस्कोपी भी की जा सकती है। सर्जन रोबोटिक आर्म्स (Robotic Arms) का प्रयोग करके सर्जरी को नियंत्रित करते हैं। सर्जरी को 3D व्यू में एक स्क्रीन पर देखा जा सकता है। इस प्रकार की सर्जरी ज़्यादा सटीक होती है। 

यदि गर्भाशय का केवल एक भाग निकाल दिया जाता है, तो इसे आंशिक हिस्टेरेक्टॉमी (Partial Hysterectomy) कहा जाता है। सर्विक्स नहीं हटाया जाता। इसका अन्य प्रकार है कुल हिस्टेरेक्टॉमी (टोटल हिस्टेरेक्टॉमी; Total Hysterectomy), जिसमें सर्विक्स के साथ पूरा गर्भाशय हटा दिया जाता है। रेडिकल हिस्टेरेक्टॉमी (Radical Hysterectomy) में गर्भाशय, फैलोपियन ट्यूब, सर्विक्स और योनि के कुछ हिस्से हटाए जाते हैं।

अंडाशय को हटाने के लिए भी कहा जा सकता है। वे आमतौर पर पूरी तरह से नहीं हटाए जाते। अंडाशय का एक हिस्सा आमतौर पर रखा जाता है। ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि अंडाशय एस्ट्रोजेन (Estrogen) और प्रोजेस्टेरोन (Progestrone) उत्पन्न करते हैं जो महिला प्रजनन प्रणाली के दो सबसे महत्वपूर्ण हार्मोन हैं। सर्जरी का मार्ग और गर्भाशय को किस हद तक हटाना है यह सर्जरी के कारण, रोगी की उम्र और सामान्य स्वास्थ्य पर निर्भर करता है। 

हिस्टेरेक्टॉमी (गर्भाशय-उच्छेदन) के बाद देखभाल - What to do after Hysterectomy?

सर्जरी के बाद मरीज़ को ऑब्ज़र्वेशन और रिकवरी के लिए एक कमरे में रखा जाता है। जब तक एनेस्थीसिया का असर नहीं ख़त्म होता तब तक मरीज़ बेहोश रहता है।

सर्जरी के बाद जांच
एक बार होश आने के बाद मरीज़ की शारीरिक जांच की जाती है। सर्जिकल घाव की जांच की जाती है। मरीज़ को 2-3 दिनों के लिए अस्पताल में ही रखा जाता है। उसके बाद उसे घर भेज दिया जाता है।

घर में देखभाल 
ऐसे कार्य न करें जिनसे पेट में या श्रोणि में तनाव हो। 4-6 हफ़्तों तक घरेलु काम जैसे बर्तन धोना, कपडे धोना, सफाई, सीढ़ियां चढ़ना आदि बिलकुल न करें। सर्जरी के बाद एक महीने तक कोई भी व्यायाम न करें। अपने से पूछकर आप हलके शारीरिक कार्य जैसे धीरे धीरे चलना, घर में इधर उधर टहलना आदि कर सकते हैं।

घाव की देखभाल 
पेट की हिस्टेरेक्टॉमी में किया गया चीरा लम्बा होता है इसलिए इसे भरने में लैप्रोस्कोपी में किये गए छोटे चीरों से ज़्यादा समय लगता है। घाव को साफ़ और सूखा रखें। घाव को रूई और पट्टियों से कवर (ढक) करके रखा जायेगा। घाव से रक्तस्त्राव, सूजन, संक्रमण आदि जैसी परेशानियां होने पर तुरंत अपने डॉक्टर को बताएं। एक बार घाव पूरी तरह भर जाए फिर उसके टाँके खोल दिए जायेंगे। घाव की जगह पर एक निशान रह जाता है जो हटने में बहुत ज़्यादा समय लगाता है।

शारीरिक गतिविधि
इस सर्जरी के बाद थकाने वाले काम न करें। गर्भाशय निकल जाने के बाद, मरीज की श्रोणिक (पैल्विक) गुहा के अंदर एक खाली जगह बन जाती है। पेट पर ज़्यादा दबाव पड़ने से खाली जगह में हर्निया हो सकता है। (और पढ़ें – थकान दूर करने के घरेलू उपाय)
हालांकि कोई भी शारीरिक गतिविधि न होना भी सही नहीं है। हल्का शारीरिक काम रक्त संचार बनाए रखने में मदद करता है। यह नसों के भीतर रक्त के थक्कों के गठन को रोक देता है।  

हिस्टेरेक्टॉमी (गर्भाशय-उच्छेदन) के बाद संभव जटिलताएं और जोखिम - Risks and Complications of Hysterectomy in Hindi

इस सर्जरी से जुड़े कुछ जोखिम निम्नलिखित हैं। हालांकि अगर सावधानी बरती जाए तो इन जोखिमों से बचा जा सकता है। अगर फिर भी ये हो जाएँ तो दवाओं या सर्जिकल उपचार से इन्हे ठीक किया जा सकता है।

रक्तस्त्राव: सर्जरी के दौरान किसी सर्जिकल उपकरण से गर्भाशय के आसपास की कोई रक्त वाहिका में क्षति पहुँच सकती है। इससे रक्तस्त्राव हो सकता है। सर्जरी के दौरान क्षतिग्रस्त अंग को देखने में रक्त रूकावट दाल सकता है इसलिए उसे हटा दिया जाता है। रक्त की अत्यधिक हानि होने पर ऐसी स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पहले से ही आपके ब्लड ग्रुप का रक्त तैयार रख लिए जाता है जो ज़रुरत पड़ने पर आपके शरीर में डाला जा सकता है।

अंगों को क्षति: सर्जिकल उपकरणों से गर्भाशय के आसपास के अंगों को भी क्षति पहुँच सकती है। अगर क्षति गंभीर है तो सर्जरी की आवश्यकता हो सकती है।

मूत्र/ मल असंयमिता (रोक न पाना): प्रक्रिया के दौरान मूत्राशय को चोट लगने से ऐसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है। मूत्र के पारित होने पर कोई नियंत्रण नहीं होता। व्यक्ति को बार बार मूत्र त्याग करने की इच्छा हो सकती है। सर्जरी के दौरान अगर मलाशय को क्षति पहुंचे तो भी ऐसा ही हो सकता है। मल असंयम हो जाएगा और इससे मल का अनैच्छिक त्याग या मल त्याग करने में कठिनाई हो सकती है। इनका इलाज करने के लिए सर्जिकल उपचार का प्रयोग करना पद सकता है। 

हर्निया का गठन हो जाना (हर्नियेशन; Herniation): हर्नियेशन का अर्थ है किसी अंग के फलाव का प्राकृतिक या कृत्रिम रूप से निर्मित स्थान में निकालना। जो अंग हेर्निएट होता है वह अपने सामान्य स्थान से हट जाता है। इस सर्जरी के बाद श्रोणिक गुहा में एक खाली स्थान रह जाता है। आंत इस स्थान पर हेर्निएट हो सकते हैं। इसे दर्द या पाचन क्रिया में बदलाब आदि परेशानियां हो सकती हैं। हर्निया के उपचार के लिए सर्जरी करनी पड़ सकती है।

संक्रमण: घाव की जगह पर संक्रमण हो सकता है। इससे घाव पर सूजन, दर्द या घाव लाल हो सकता है। अगर सर्जरी के दौरान किसी अन्य अंग को क्षति पहुँच जाती है तो उससे अंधरूनी संक्रमण भी हो सकता है। इसके उपचार के लिए एंटीबायोटिक दवाएं दी जाती हैं। दर्द से निजात पाने हेतु दर्द निवारक दिए जाते हैं।

हार्मोनल दिक्कत: कई बार इस सर्जरी में दोनों अंडाशय को निकाल दिया जाता है। अंडाशय में एस्ट्रोजन (Estrogen) और प्रोजेस्ट्रोन (Progestrone) का उत्पादन होता है। अंडाशय के हट जाने से शरीर में इन होर्मोनेस का स्तर भी घट जायेगा। इससे हॉट फ्लैशेस (चेहरे, गर्दन, कान और धड़ में गर्मी का महसूस होना), मूड में परिवर्तन, अवसाद (डिप्रेशन), त्वचा के विकार, पाचन सम्बन्धी विकार हो सकते हैं। ऐसे में हॉर्मोन प्रतिस्थापन चिकित्सा से काफी मदद मिल सकती है।

प्राकृतिक रूप से गर्भ धारण न कर पाना: इस सर्जरी के बाद आप गर्भधारण नहीं कर सकतीं। इसलिए ये तब तक नहीं की जाती जब तक इसके आलावा उपचार का और कोई विकल्प न बचे। 

हिस्टेरेक्टॉमी (गर्भाशय-उच्छेदन) के बाद ठीक होने में कितना समय लगता है? - What is the recovery time for Hysterectomy?

हिस्टेरेक्टॉमी के बाद करीब 8 हफ्ते लगते हैं पूरी तरह रिकवरी होने में।  

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