महामारी का रूप धारण कर चुकी डायबिटीज के खतरे से महिलाएं और बच्चें भी नहीं बच पा रहे हैं। मोटे बच्चे इसका ज्यादा शिकार हो रहे हैं। नेशनल सेंटर ऑफ बायोटेक्नोलॉजी इंफोर्मेशन (एनसीबीआई) की 2018 की स्टडी के अनुसार, ‘भारत में वयस्कों में डायबिटीज के इतने अधिक मामले हैं कि बच्चों में इस बीमारी के असर पर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है।’ विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, ‘अब तक टाइप 2 डायबिटीज के मामले वयस्कों में ही होते थे, लेकिन अब यह बीमारी बच्चों में भी तेजी से घर कर रही है।’ वहीं गर्भावस्था के दौरान महिला का इम्‍यून सिस्टम कमजोर हो जाता है। इससे रक्‍त में ग्लूकोज बनना कम हो जाता है, जो कि डायबिटीज का संकेत होता है। इसका असर महिला के साथ ही उसके गर्भ में पल रहे शिशु पर भी पड़ता है। महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान होने वाली डायबिटीज के टाइप-2 डायबिटीज में बदलने का अंदेशा रहता है।

(और पढ़ें - डायबिटीज में क्या परहेज करें )

  1. बच्चों में इन लक्षण को न करें नजरअंदाज
  2. गर्भावस्था और डायबिटीज
  3. दो सबसे अहम बातें

बच्चों में टाइप 1 डायबिटीज के लक्षण कुछ ही सप्ताह में तेजी से बढ़ जाते हैं। टाइप 2 डायबिटीज के लक्षण धीरे-धीरे बढ़ते हैं और कई मामलों में महीनों या सालों तक इनका इलाज नहीं हो पाता। डॉक्टर कहते हैं, ‘बच्चों में थकान, सिरदर्द, ज्यादा प्यास लगना, ज्यादा भूख लगना, व्यवहार में बदलाव, पेट दर्द, बेवजह वजन कम होना, रात के समय बार-बार पेशाब आना टाइप-2 डायबिटीज के लक्षण हैं।’

(और पढ़ें - छोटे बच्चों में थकान के लक्षण ऐसे पहचानें)

डायबिटीज से पीड़ित बच्चों के इलाज में कुछ मुश्किलें भी आती हैं। इलाज के शुरुआत में इंसुलिन की थोड़ी खुराक दी जाती है। इसे 'हनीमून पीरियड' कहा जाता है। बहुत छोटे बच्चों को रात में इंजेक्शन नहीं दिए जाते, लेकिन उम्र बढ़ने के साथ रात को इंसुलिन शुरू किया जाता है। 

बच्चों में ज्यादा चीनी से बने खाद्य पदार्थों के सेवन से वजन बढ़ता है, जो शरीर में इंसुलिन स्तर के लिए खतरनाक है। ऐसे बच्चों को विटामिन और फाइबर युक्त संतुलित, पोषक आहार दिया जाए। नियमित इलाज के साथ ही ऐसे पोषण से टाइप 2 डायबिटीज को नियंत्रित किया जा सकता है।

महिलाओं में गर्भावस्था के दौरान डायबिटीज बहुत खतरनाक होती है। ऐसी महिलाओं के लिए समाधान यही है कि उनके खानपान का ध्‍यान रखा जाए। समय-समय पर डॉक्टरी सलाह ली जाए। गर्भावस्‍था के दौरान नियमित रूप से हल्‍का व्‍यायाम किया जाए। वजन संतुलित रखें। रिफाइन्ड और दूसरे प्रोसेस्ड आहार की बजाए फाइबर से भरपूर आहार लें। रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को समय-समय पर जांचते रहें। आंखों और पैरों का खास ख्याल रखें।

डॉक्टर कहते हैं, ‘गर्भवती महिलाओं को भी समय-समय पर ब्लड टेस्ट करना चाहिए। ए1सी टेस्ट से शुगर को कंट्रोल रखने में मदद मिलती है।’ कई तरह के योगासन हैं जो डायबिटीज में महिलाओं और बच्चों को मदद करते हैं। जैसे - कपालभाती प्राणायाम, सुप्त मत्स्येन्द्रासन, पश्चिमोत्तानासन, धनुरासन, शवासन। ये योगासन निरंतर करेंगे तो जरूर लाभ होगा। यदि समस्या बढ़ती है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क साधना चाहिए।’

(और पढ़ें - प्रेगनेंसी में कोल्ड ड्रिंक पीना चाहिए या नहीं)

डायबिटीज के मरीजों के लिए डॉक्टर डाइट प्लान बनाकर देते हैं। इसका सख्ती से पालन जरूरी है। इसमें ऐसे खाद्य पदार्थों को शामिल किया जाता है, जो हानिकारक नहीं होते और शुगर को भी कंट्रोल करते हैं।

(और पढ़ें - मिलिट्री डाइट प्लान क्या है)

चाइनीज अकेडमी ऑफ मेडिकल साइंसेस के साथ ही यूएस में एमोरी यूनिवर्सिटी के अध्ययन में इस बात की पुष्टि हुई है कि प्रदूषण भी डायबिटीज को बढ़ाता है। इस रिपोर्ट के अनुसार, जो लोग 10 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर प्रदूषण वाले स्थानों पर रहते हैं, उनमें डायबिटीज का जोखिम 15.7 फीसदी अधिक होता है। इसलिए प्रदूषण से खुद को बचाएं।


शुगर (डायबिटीज) को रोकने का डॉक्टर द्वारा सुझाया पैकेज


cross
डॉक्टर से अपना सवाल पूछें और 10 मिनट में जवाब पाएँ