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मुंह में बहुत अधिक मात्रा में लार बनने की स्थिति को हाइपरसेलिवेशन कहा जाता है, इस स्थिति को “सिलोरिया” (Sialorrhea)  “टिलिज्म” (Ptyalism) के नाम से भी जाना जाता है। इसमें मुंह के अंदर की लार होठों पर आ जाती है या बाहर निकलने लग जाती है, जिस स्थिति को “लार टपकना” भी कहा जाता है।

अधिक लार आने की समस्या स्थायी हो सकती है या फिर ठीक होकर बार-बार होती रहती है, यह पूरी तरह से इसके कारण पर निर्भर करता है। अक्सर इस समस्या से व्यक्ति को बाहर निकलने से संबंधित चिंता होने लग जाती है।

अधिक लार आना कोई रोग नहीं है लेकिन आमतौर पर यह किसी अन्य समस्या के लक्षण के रूप में विकसित हो सकता है। ये कारकों में आसानी से ठीक होने वाली समस्याओं से  लेकर दुर्लभ बीमारियां शामिल हो सकती हैं।

  1. अधिक लार आना क्या है - Types of Hypersalivation in Hindi
  2. अधिक लार आने के लक्षण - Hypersalivation Symptoms in Hindi
  3. अधिक लार आना के कारण - Hypersalivation Causes in Hindi
  4. हाइपरसेलिवेशन से बचाव - Prevention of Hypersalivation in Hindi
  5. अधिक लार आने का परीक्षण - Diagnosis of Hypersalivation in Hindi
  6. अधिक लार आने का इलाज - Hypersalivation Treatment in Hindi
  7. अधिक लार आने की जटिलताएं - Hypersalivation Risks & Complications in Hindi
  8. अधिक लार आना के डॉक्टर

अधिक लार आना क्या है - Types of Hypersalivation in Hindi

हाइपरसेलिवेशन क्या है?

अधिक लार बनने की स्थिति को हाइपरसेलिवेशन कहा जाता है। मुंह में अधिक लार जमा होने की स्थिति को भी हाइपरसेलिवेशन कहा जाता है, जो मुंह में मौजूद लार साफ ना होने के कारण जमा होती रहती है।

यदि किसी व्यक्ति को मुंह की मांसपेशियों संबंधी समस्या है, जिस वजह से वह मुंह बंद नहीं रख पा रहा है, तो ऐसे में हाइपरसेलिवेशन के मामलों में अधिक लार टपकने लग जाती है। यदि हाइपरसेलिवेशन से ग्रस्त किसी व्यक्ति को डिस्फेजिया (निगलने में कठिनाई) है, तो उसके मुंह से भी लार टपकने लग जाती है या उसे बार-बार थूकने की जरूरत पड़ती है।

अधिक लार आने के लक्षण - Hypersalivation Symptoms in Hindi

हाइपरसेलिवेशन के क्या लक्षण हैं?

हाइपरसेलिवेशन में लार टपकना, बार-बार थूकना या लार निगलना आदि जैसे लक्षण होते हैं। इसके अलावा कुछ अन्य लक्षण भी हैं, जो अधिक लार आने के साथ देखे जा सकते हैं:

अधिक लार आना या मुंह से लार टपकने से सामाजिक चिंता विकार (Social anxiety disorder) और अन्य मानसिक रोग व समस्याएं हो सकती हैं और साथ ही साथ बोलने व खाने की क्षमता पर भी काफी प्रभाव पड़ता है।

जिन लोगों को अधिक लार आती है वे अक्सर सांस लेने के दौरान लार, भोजन व फल आदि को फेफड़ों में खींच लेते हैं जिनके कारण उन्हें “एस्पिरेशन निमोनिया” हो सकता है। यह समस्या ठीक से खांसी ना करने या गले में घुटन होने के कारण भी हो सकते हैं।

अधिक लार आना के कारण - Hypersalivation Causes in Hindi

अधिक लार क्यों आती है?

कुछ स्थितियां हैं, जिनके कारण कुछ समय के लिए अधिक लार बनने लग सकती है:

  • कैविटी (मुंह की त्वचा में खाली जगह बन जाना)
  • मुंह में संक्रमण
  • गर्ड (गेस्ट्रोइसोफेजियल रिफ्लक्स)
  • गर्भावस्था
  • कुछ प्रकार की ट्रैंक्विलाइज़र (शांति प्रदान करने वाली) और एंटीकन्वल्सेंट्स (आक्षेपरोधी) दवाएं
  • विषाक्त पदार्थों के संपर्क में आना जैसे पारा

ऊपरोक्त मामलों में अंदरुनी कारणों का इलाज करने पर ही हाइपरसेलिवेशन की समस्या ठीक हो जाती है। जिन गर्भवती महिलाओं को अधिक लार आने की समस्या हो रही है, आमतौर पर बच्चे को जन्म देने के बाद इसके लक्षण कम होने लग जाते हैं।

यदि स्थायी रूप से अधिक लार बनने सी समस्या है, इसका कारण कोई दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्या हो सकती है, जो मुंह की मांसपेशियों को प्रभावित करती है। यदि आपको स्वास्थ्य संबंधी ऐसी कोई समस्या है, जिसके कारण आप मुंह की मांसपेशियों की कंट्रोल नहीं कर पा रहे हैं। ऐसा होने पर आपके निगलने की प्रक्रिया प्रभावित हो जाती है और मुंह में लार जमा होने लग जाती है। यह समस्या निम्न के परिणामस्वरूप हो सकती है:

यदि हाइपरसेलिवेशन स्वास्थ्य संबंधी किसी दीर्घकालिक बीमारी के कारण हुआ है, तो उसके लक्षणों का इलाज करना बहुत जरूरी होता है। यदि इसको बिना इलाज किए छोड़ दिया जाए तो अधिक आने के कारण व्यक्ति ठीक से बोल भी नहीं पाता है और खाद्य व पेय पदार्थ उसके गले में अटकने लग जाते हैं।

हाइपरसेलिवेशन से बचाव - Prevention of Hypersalivation in Hindi

अधिक लार आने की रोकथाम कैसे करें?

च्युइंग गम चबाने से दिन के समय अधिक लार आने की समस्या को कम करने में मदद मिल सकती है। रात के समय सिर के नीचे तकिया लगाकर सिर को ऊपर उठाने और तकियो को तौलिए से ढक कर सोने से रात के समय अधिक लार आने की समस्या से निपटा जा सकता है। इस स्थिति से निपटने के लिए शरीर में पानी की पर्याप्त मात्रा रखना भी जरूरी है।

अधिक लार आने का परीक्षण - Diagnosis of Hypersalivation in Hindi

हाइपरसेलिवेशन का परीक्षण कैसे होता है?

हाइपरसेलिवेशन का परीक्षण करने के लिए डॉक्टर आपके स्वास्थ्य संबंधित लक्षण व संकेतों की जांच करते हैं। इसके अंदरुनी कारणों का पता लगाने के लिए कुछ टेस्ट भी करवाने पड़ सकते हैं।

आपके स्वास्थ्य संबंधी पिछली सारी जानकारी के बारे में जानकार अन्य लक्षणों की जांच करने के लिए डॉक्टर आपके मुंह के अंदर की जांच कर सकते हैं, इस दौरान निम्न की जांच की जाती है:

  • मुंह, दांत व आस-पास की त्वचा की जांच करना
  • जीभ का कंट्रोल, निगलने की क्षमता और जबड़े की स्थिरता की जांच करना
  • टॉन्सिल और नाक के वायुमार्गों की जांच करना
  • सतर्कता और भावनात्मक स्थिति का का परीक्षण करना

जब अधिक लार आने के कारण का पता लगा लिया जाता है, तो उपचार प्रक्रिया तैयार करते समय डॉक्टर निम्न बातों का ध्यान रख सकते हैं।

  • गंभीरता व जटिलताएं
  • उम्र व मानसिक स्थिति
  • हाइपरसेलिवेशन स्थायी है या अस्थायी यह पता लगाना
  • संबंधित न्यूयरोलॉजिकल समस्याएं
  • सुधार होने की संभावनाओं का पता लगाना

अधिक लार आने का इलाज - Hypersalivation Treatment in Hindi

अधिक लार आने का इलाज कैसे करें?

हाइपरसेलिवेशन के इलाज की प्रक्रिया उसके अंदरुनी कारण के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। हालांकि यदि अधिक लार आने की समस्या कुछ ही समय के लिए है तो कुछ घरेलू उपचार की मदद से इसका इलाज किया जा सकता है। लेकिन दीर्घकालिक स्थितियों के कारण होने वाली अधिक लार बनने की समस्या के लिए विशेष प्रकार के इलाज की आवश्यकता पड़ सकती है। आमतौर पर अधिक लार आने का इलाज कई उपचार विकल्पों से किया जा सकता है, जैसे थेरेपी, दवाएं और घरेलू उपचार आदि।

  • थेरेपी:
    इसमें बिहेवियरल मोडिफिकेशन (स्वभाव में बदलाव) और स्पीच थेरेपी आदि शामिल हैं। जिन लोगों को अधिक लार आती है, वे शरीर की मुद्रा को सही रख कर और सिर को कंट्रोल में रख कर इसके लक्षणों को कम कर सकते हैं। इसके द्वारा थेरेपी के दौरान होठों को बंद रखने, जीभ को ठीक से कंट्रोल करने और निगलने की सही तकनीक सिखाई जा सकती है।
     
  • दवाएं:
    हाइपरसेलिवेशन के लिए उपयोग की गई दवाओं का मुख्य लक्ष्य मुंह में लार बनने की मात्रा को कम करना होता है। इस दौरान आमतौर पर एंटीकोलिनर्जिक दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है, हालांकि इससे कई साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं जैसे उनींदापन, बेचैनी, चिड़चिड़ापन, यूरिनरी रिटेंशन और कब्ज आदि। इसके अलावा इलाज में बीटा-ब्लॉकर और बोटुलिनम टॉक्सिन (बोटोक्स) आदि शामिल भी हो सकते हैं।
  • घरेलू उपचार:
    पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहने से भी लार बनने की प्रक्रिया कम हो सकती है। नियमित रूप से टूथब्रश करना और माउथवॉश के साथ कुल्ला करने से कुछ समय के लिए हाइपरसेलिवेशन के लक्षण कम हो जाते हैं। 

यदि हाइपरसेलिवेशन व उसके कारण होने वाली लार टपकने का सफल रूप से इलाज हो जाए, तो मरीज का हौसला व आत्मविश्वास बना रहता है।

 

अधिक लार आने की जटिलताएं - Hypersalivation Risks & Complications in Hindi

अधिक लार बनने से क्या जटिलताएं होने लगती हैं?

हाइपरसेलिवेशन व उसके कारणों से संबंधित कुछ समस्याएं हो सकती हैं, जैसे:

  • कुछ मामलों में हाइपरसेलिवेशन बिना इलाज किए कुछ समय में अपने आप ठीक हो जाता है, इसमें गर्भावस्था, चिंता व छोटी-मोटी चोट लगने के कारण होने वाला हाइपरसेलिवेशन शामिल है।
  • हाइपसेलिवेशन के कुछ गंभीर कारण भी हो सकते हैं, जिसमें कैंसर और नसों संबंधी कुछ विकार भी शामिल हो सकते हैं। 
  • यदि अधिक लार आना के का कारण कोई दीर्घकालिक रोग है, तो इसका इलाज भी काफी लंबे समय तक या जीवन भर चल सकता है। 

यह याद रखना बहुत जरूरी है कि यह समस्या काफी आम है और सिर्फ आपको ही यह रोग नहीं है। अपने किसी प्रियजन से अपनी समस्या व उससे आपको हो रही परेशानी के बारे में बात करने से आपको अच्छा महसूस होगा और वे आपको सहारा भी दे पाएंगे।

Dr. Chintan Nishar

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कान, नाक और गले सम्बन्धी विकारों का विज्ञान

Dr. K. K. Handa

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