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हीमोग्लोबिन लाल रक्त कोशिकाओं में पाए जाने वाला प्रोटीन का एक प्रकार होता है, जिसमें आयरन (लोह) का एक अणु मौजूद होता है।

हीमोग्लोबिन फेफड़ों से शरीर के ऊतकों तक ऑक्सीजन ले जाने और कार्बन डाइऑक्साइड को वापस फेफड़ों तक पहुंचाने का काम करता है। ऑक्सीजन के बिना सक्रिय शरीर की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। रक्त संचार और शरीर के सभी अंगों के कार्यों के लिए ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है, जिसमें हीमोग्लोबिन अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है।

हीमोग्लोबिन के इसी महत्व के चलते आपको हीमोग्लोबिन के बारे में विस्तार से बताया जा रहा है। साथ ही आप जानेंगे कि हीमोग्लोबिन क्या है और इसके कार्य, हीमोग्लोबिन का स्तर, हीमोग्लोबिन की अधिकता के नुकसान, हीमोग्लोबिन के स्त्रोत, आदि।

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  1. हीमोग्लोबिन क्या है और कार्य - Hemoglobin kya hai aur karya
  2. हीमोग्लोबिन का स्तर कितना होना चाहिए - Hemoglobin ka level kitna hona chahiye
  3. हीमोग्लोबिन की अधिकता - Hemoglobin ki adhikta
  4. हीमोग्लोबिन के स्त्रोत - Hemoglobin ke srot

हीमोग्लोबिन लाल रक्त कोशिकाओं में मौजूद प्रोटीन अणु होता है। एक सामन्य वयस्क में साथ जुड़े हुए चार प्रोटीन अणुओं से हीमोग्लोबिन बनता है - दो अल्फा-ग्लोबुलिन अणु और दो बीटा-ग्लोबुलिन अणु। लेकिन भ्रूण और शिशुओं में बीटा श्रृखंला वाले प्रोटीन नहीं होते हैं। इसके बजाय भ्रूण और शिशुओं के हीमोग्लोबिन में दो अल्फा और दो गामा प्रोटीन होते हैं। जैसे-जैसे शिशु बढ़ता है, गामा प्रोटीन धीरे-धीरे बीटा श्रृंखला में बदल जाते हैं।

हीमोग्लोबिन में मौजूद आयरन रक्त के लाल रंग का मुख्य कारक होता है। इसके साथ ही हीमोग्लोबिन लाल रक्त कोशिकाओं के आकार के लिए भी जरूरी होता है। लाल रक्त कोशिकाएं गोल आकार की होती हैं, जिनके बीच का हिस्सा थोड़ा दबा हुआ होता है। इन कोशिकाओं का आकार बिगड़ने से कई शारीरिक कार्यों और रक्त संचार में बाधा आ सकती है। 

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हीमोग्लोबिन फेफड़ों से ऑक्सीजन को शरीर के ऊतकों तक ले जाता है और ऊतकों से कार्बन डाइऑक्साइड को फेफड़ों में वापस पहुंचाता है, यही हीमोग्लोबिन का मुख्य कार्य होता है। हीमोग्लोबिन​ ही लाल रक्त कोशिकाओं का वो भाग है जिसमें ऑक्सीजन होता है।

ऑक्सीजन फेफड़ों में, जहाँ ऑक्सीजन काफी मात्रा में होता है, हीमोग्लोबिन से जुड़ जाता है। और जब हीमोग्लोबिन शरीर के किसी ऐसे ऊतक में होता है जहां ऑक्सीजन की कमी होती है, तो वहां हीमोग्लोबिन से जुड़ा हुआ ऑक्सीजन अणु उससे अलग हो जाता है ताकि उस ऊतक को ऑक्सीजन मिल सके।

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हीमोग्लोबिन की मात्रा को रक्त के 100 मिलीलीटर के आधार पर मापा जाता है। चिकित्सीय परीक्षण में इसको डेसीलीटर में व्यक्त किया जाता है, यानी एक डेसीलीटर (DL) का मतलब 100 मिलीलीटर होता है। हीमोग्लोबिन का सामान्य स्तर उम्र और आपके महिला या पुरुष होने पर निर्भर करता है।

हीमोग्लोबिन का सामान्य स्तर इस प्रकार होता है -

आयु   सामान्य स्तर
नवजात शिशु 17 से 22 ग्राम/100 मिलीलीटर
एक सप्ताह का शिशु 15 से 20 ग्राम/100 मिलीलीटर
एक महीने का शिशु 11 से 15 ग्राम/100 मिलीलीटर
बच्चे 11 से 13 ग्राम/100 मिलीलीटर
वयस्क पुरुष 14 से 18 ग्राम/100 मिलीलीटर
वयस्क महिलाएं 12 से 16 ग्राम/100 मिलीलीटर
मध्यम आयु के पुरुष 12.4 से 14.9 ग्राम/100 मिलीलीटर
मध्यम आयु की महिलाएं 11.7 से 13.8 ग्राम/100 मिलीलीटर

यह सभी आंकडे प्रयोगशालाओं के अनुसार थोड़े भिन्न हो सकते हैं। कुछ प्रयोगशालाएं वयस्क और मध्यम आयु के लोगों के बीच अंतर नहीं करती हैं। डॉक्टरों द्वारा गर्भवती महिलाओं को हीमोग्लोबिन के कम और ज्यादा दोनों ही स्थितियों से बचने की सलाह दी जाती है, ताकि गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को उच्च रक्तचाप, समय से पहले बच्चे का जन्म और जन्म के समय बच्चे का वजन कम होने जैसी समस्याओं का सामना ना करना पड़ें।

हीमोग्लोबिन की अधिकता पहाड़ों पर रहने वाले और घुम्रपान करने वाले लोगों में अधिक देखी जाती है। निर्जलीकरण के कारण भी हीमोग्लोबिन का स्तर अधिक हो जाता है, लेकिन तरल पदार्थ अधिक  अधिक लेने से यह दोबारा सामान्य स्तर पर आ जाता है। हीमोग्लोबिन की अधिकता के कुछ ऐसे ही अन्य कारणों के बारे में नीचे बताया जा रहा है। 

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  • फेफड़ों की बीमारी (उदाहरण के लिए एम्फीसिमा/ Emphysema)
  • कई तरह के ट्यूमर। (और पढ़ें - फेफड़ों का कैंसर)
  • रीढ़ की हड्डी संबंधी विकार, जो पॉलीसिथेमिया रूबरा वेरा के रूप में जाना जाता है। (और पढ़ें - रीढ़ की हड्डी के लिए योगासन)
  • खिलाड़ियों द्वारा रक्त में ऑक्सीजन की मात्रा को बढ़ाने के लिए एरिथ्रोपोइटीन/ Erythropoietin (Epogen/ एपोजेन) दवा का इस्तेमाल करना। इससे खिलाड़ी लाल रक्त कोशिकाओं के उत्पादन को रासायनिक रूप से बढ़ाकर शरीर में उपलब्ध ऑक्सीजन की मात्रा में वृद्धि कर अपने प्रदर्शन को बेहतर बनाते हैं।  

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हीमोग्लोबिन को बढ़ाने के लिए आप अपने आहार में कुछ खाद्य पदार्थों को शामिल कर सकते हैं। इसके अलावा कुछ विशेष तरह की दवाओं को खाने से भी आप रक्त में हीमोग्लोबिन के स्तर को आसानी से बढ़ा सकते हैं। लेकिन आहार के माध्यम से इसके स्तर को बढ़ाना ज्यादा उपयोगी माना जाता है। नीचे आपको ऐसे ही कुछ खाद्य पादर्थों के बारे में बताया जा रहा है, जिनसे आप हीमोग्लोबिन के स्तर को आसानी से सामान्य बना सकते हैं। (और पढ़ें - संतुलित आहार किसे कहते हैं)

  • मीट – जानवरों के लिवर के मीट से आपको आयरन, विटामिन बी 12 और फोलेट आदि मिलते हैं। इसके अलावा चिकन से भी आपको आयरन प्राप्त होता है। 100 ग्राम चिकन से आपको करीब 0.7 मिलीग्राम आयरन मिलता है।
  • फलियां – राजमा और चने आदि फलियों वाले खाद्य पदार्थों से आपको सही मात्रा में आयरन मिलता है। इसमें शामिल सोयाबीन की 100 ग्राम मात्रा से आपको 15.7 ग्राम आयरन मिलता है। इसके अलावा सोयाबीन से आपको विटामिन सी और फोलेट भी प्राप्त होता है। (और पढ़ें - सोया मिल्क के फायदे)
  • अनाज -  गेहूं और जौ आयरन के बढ़िया स्त्रोत माने जाते हैं। ब्राउन राइस आयरन ग्रहण करने का बेहतरीन विकल्प माना जाता है। 100 ग्राम ब्राउन राइस से आपको 0.4 मिलीग्राम आयरन मिलता है। जौ और ओटमील भी आयरन की कमी को पूरा करते हैं।
  • फल – आयरन के अवशोषण के लिए शरीर में विटामिन सी की आवश्यकता होती है, इससे आपके रक्त में हीमोग्लोबिन का स्तर बढ़ता है। संतरे, नींबू और लीची आदि फलों से आपको विटामिन सी भरपूर मात्रा में मिलता है। इसके अलावा खुबानी, खजूर और किशमिश आदि के सेवन से आपको आयरन प्राप्त होता है। 100 ग्राम सूखे मेवे खाने से आपको करीब 0.8 मिलीग्राम आयरन मिलता है। इनके साथ ही स्ट्रॉबेरी भी आयरन का अच्छा स्त्रोत मानी जाती है। रक्त में हीमोग्लोबिन की मात्रा बेदह कम होने पर डॉक्टर आपको सेब, अनार, धूप में सूखे टमाटर, काले शहतूत और तरबूज खाने की सलाह देते हैं।
  • सब्जियां – सब्जियां हीमोग्लोबिन के स्तर को सामान्य बनाने के साथ ही अन्य रोगों से आपकी सुरक्षा करती हैं। इनसे आपको आयरन, विटामिन और कई तरह के खनिज मिलते हैं। ब्रोकली की 100 ग्राम मात्रा से आपको करीब 2.7 मिलीग्राम आयरन मिलता है। इसके अलावा ब्रोकली में मैग्नीशियम, विटामिन ए और विटामिन सी भी होता है। चुकंदर, आलू, पालक, मटर, टमाटर, काली मिर्च, शतावरी और टोफू भी आयरन प्रदान करने वाली सब्जियों में शामिल हैं। (और पढ़ें - स्वास्थ्य के लिए क्या बेहतर है - टोफू या पनीर)
  • अन्य स्त्रोत – अंडा, कद्दू के बीज, डार्क चॉकलेट, नट्स, दही, मूंगफली आदि से भी आयरन लिया जा सकता है।
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