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इंटससेप्शन क्या है?

स्वानुशील को मेडिकल भाषा में इंटससेप्शन के नाम से जाना जाता है। यह आंत संबंधी एक गंभीर रोग है, जिसमें आंत का एक हिस्सा साथ वाले हिस्से के अंदर धंस जाता है। ऐसी स्थिति में आंत के अंदर मौजूद भोजन व द्रव आगे नहीं जा पाते है। इस स्थिति में भोजन व द्रव आंत में ही जमा होने लगते हैं और परिणामस्वरूप प्रभावित हिस्से में संक्रमण हो जाता है। गंभीर मामलों में आंत के प्रभावित हिस्से के ऊतक क्षतिग्रस्त होने लग जाते हैं। स्वानुशील जीवन के लिए घातक स्थिति बन सकती है, क्योंकि इससे प्रभावित ऊतकों में रक्त नहीं पहुंच पाता है और शरीर के अंदर खून बहने लगता है।

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इंटससेप्शन के लक्षण क्या हैं?

कुछ देर के लिए पेट दर्द या गंभीर ऐंठन होना और फिर कुछ देर बाद फिर से ठीक हो जाना स्वानुशील का सबसे प्रमुख लक्षण माना जाता है। इसमें होने वाला दर्द हर 20 से तीस मिनट के अंतराल में होता है और लगातार 10 से 15 मिनट तक बना रहता है। बार-बार दर्द रहने के कारण मरीज को थकान, बुखार, बदन दर्द और चिड़चिड़ापन जैसे लक्षण भी देखे जा सकते हैं।

इसके अलावा स्वानुशील रोग की गंभीरता और उसके अंदरूनी कारण के अनुसार कुछ अन्य लक्षण भी हो सकते हैं। इंटससेप्शन के साथ-साथ निम्न लक्षण भी आमतौर पर देखे जा सकते हैं -

इंटससेप्शन के लक्षण आमतौर पर किसी वायरल संक्रमण के कुछ दिनों या सप्ताह के बाद अचानक से शुरू होते हैं।

डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?

यदि आपको कई दिन से पेट में दर्द हो रहा है और मल भी कम आ रहा है, तो आपको डॉक्टर से जांच करवा लेनी चाहिए। मल में खून या बलगम आने पर भी जल्द से जल्द डॉक्टर से बात कर लेनी चाहिए। इसके अलावा यदि आपको संदेह हो रहा है कि आपको आंतों संबंधी समस्या है, तो भी एक बार डॉक्टर के पास जाकर उचित जांच करवा लेनी चाहिए।

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इंटससेप्शन क्यों होता है?

अधिकतर मामलों में डॉक्टर स्वानुशील के अंदरूनी कारण का पता नहीं लगा पाते हैं। हालांकि, कुछ अध्ययनों के अनुसार डॉक्टर इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि गैस्ट्रोएंटेराइटिस के कारण इंटससेप्शन रोग विकसित हो सकता है। हालांकि, इस पर कोई पुष्टि नहीं हो पाई है। इसके अलावा गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल संक्रमण (बैक्टीरियल या वायरल) के कारण आंतों व लिम्फ नोड के ऊतकों में सूजन आ जाती है, जिसके कारण भी आंत का एक हिस्सा दूसरे के अंदर धंस जाता है।

3 महीने से कम और 5 वर्ष से अधिक उम्र के बच्चों में लिम्फ नोड्स के ऊतक बढ़ने लगते हैं। इसके अलावा आंत में ट्यूमर होना या फिर रक्त वाहिकाओं से संबंधित कोई असामान्यता होना भी इंटससेप्शन होने का कारण बन सकता है।

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इंटससेप्शन का इलाज कैसे होता है?

स्वानुशील का इलाज मुख्य रूप से स्थिति के अंदरूनी कारणों के अनुसार किया जाता है। साथ ही मरीज की उम्र और स्वास्थ्य संबंधी अन्य स्थितियों के अनुसार भी इलाज निर्धारित किया जाता है। स्वानुशील का इलाज मुख्य रूप से दो प्रक्रियाओं के अनुसार किया जाता है, नोन-सर्जिकल और सर्जिकल ट्रीटमेंट।

  • नोन-सर्जिकल ट्रीटमेंट -
    इसमें दबाव वाले इंजेक्शन की मदद से आंत में बेरियम या सेलाइन डाला जाता है। इंजेक्शन की मदद से आंत में हवा का दबाव बढ़ाया जाता है, जिससे आंत का धंसा हुआ भाग वापस अपनी जगह पर आ जाता है। यह प्रक्रिया ठीक उसी प्रकार काम करती है, जिस प्रकार से सिकुड़े हुए गुब्बारे में हवा भरने पर वह वापस अपनी आकृति ले लेता है। इसके अलावा गुदा के माध्यम में आंतों में विशेष प्रकार का द्रव भरा जाता है, जिसके दबाव से आंत वापस अपनी आकृति में आ जाती है।
     
  • सर्जिकल ट्रीटमेंट -
    यदि बेरियम व हवा के दबाव वाली प्रक्रिया काम नहीं कर पाई है, तो स्थिति का इलाज करने के लिए सर्जरी का सहारा लेते हैं। ऑपरेशन शुरू करने से पहले मरीज को बेहोश करने वाली दवा दी जाती है, क्योंकि इस सर्जरी में पेट में चीरा लगाना पड़ता है। उसके बाद चीरे में से उपकरणों के माध्यम से आंत के अंदर धंसे हुए हिस्से को बाहर निकाला जाता है। इस दौरान यदि आंत के ऊतक क्षतिग्रस्त हुए मिलते हैं, तो उस हिस्से को बीच से हटा दिया जाता है। बीच के हिस्से को हटाकर आंत के दोनों हिस्सों को जोड़कर टांके लगा दिए जाते हैं।

यह रोग अक्सर बच्चों में अधिक होता है, इसलिए जिन बच्चों की हालत गंभीर हो जाती है उनके लिए सर्जरी ही सबसे उत्तम इलाज माना जाता है।

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