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नेक्रोटाइजिंग फैसीसाइटिस एक दुर्लभ और घातक जीवाणु संक्रमण है जो पूरे शरीर के सॉफ्ट टिश्यृ को प्रभावित करता है। इस बीमारी के कारण मुख्य रूप से त्वचा के नीचे के ऊतक और मसल फेशिया प्रभावित होती हैं। संक्रमण पैदा करने वाले बैक्टीरिया छोटे कट, चोट और यहां तक कि इंजेक्शन लगे स्थानों के माध्यम से भी शरीर में प्रवेश कर सकते हैं और तेजी से फैलने लगते हैं। नेक्रोटाइजिंग फैसीसाइटिस को इसके शाब्दिक अर्थ के माध्यम से आसानी से समझा जा सकता है। नेक्रोटाइज़िंग का मतलब है मौत का कारण और ​फेशिया का अर्थ है त्वचा के नीचे और मांसपेशियों, नसों तथा रक्त वाहिकाओं के आसपास के ऊतक। नेक्रोटाइजिंग फैसीसाइटिस की स्थिति में आस-पास के ऊतक संक्रमित होकर मृत होने लग जाते हैं, इसी वजह से इसे फ्लेश ईटिंग डिजीज के नाम से भी जाना जाता है।

नेक्रोटाइजिंग फैसीसाइटिस कई अलग-अलग बैक्टीरिया के कारण हो सकता है। हालांकि, स्ट्रेप्टोकोकस ऑरियस या स्ट्रेप्टोकोकस प्योजेनेस बैक्टीरिया को इसका मुख्य कारक माना जाता है। चूंकि इस बीमारी के प्रारंभिक लक्षण अस्पष्ट होते हैं, इस वजह से इसका निदान करना काफी मुश्किल हो जाता है। नेक्रोटाइजिंग फैसीसाइटिस का संक्रमण किसी को भी हो सकता है। हालांकि, जिन लोगों को मधुमेह, किडनी की बीमारी, लिवर सिरोसिस और कैंसर की समस्या होती है, उन लोगों में इसका खतरा अधिक होता है। इसके अलावा बहुत अधिक शराब पीने वाले अथवा इंट्रावेनस ड्रग्स (नशीली दवाओं का इस्तेमाल) करने वालों में भी संक्रमण होने का खतरा अधिक होता है।

इस लेख में हम नेक्रोटाइजिंग फैसीसाइटिस के लक्षण, कारण और इसके इलाज की प्रक्रियाओं के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे।

  1. नेक्रोटाइजिंग फैसीसाइटिस के लक्षण - Necrotizing Fasciitis Ke kya symptoms ho sakte hain?
  2. नेक्रोटाइजिंग फैसीसाइटिस का कारण - Necrotizing Fasciitis kyon hota hai?
  3. नेक्रोटाइजिंग फैसीसाइटिस का निदान - Necrotizing Fasciitis ka diagnosis kaise kiya jata hai?
  4. नेक्रोटाइजिंग फैसीसाइटिस का इलाज - Necrotizing Fasciitis ka treatment kaise hota hai?
  5. नेक्रोटाइजिंग फैसीसाइटिस के डॉक्टर

नेक्रोटाइजिंग फैसीसाइटिस के लक्षण - Necrotizing Fasciitis Ke kya symptoms ho sakte hain?

आमतौर पर नेक्रोटाइजिंग फैसीसाइटिस के शुरुआती लक्षण हल्के और सामान्य होते हैं। संक्रमितों को लगता है कि उन्हें फ्लू है और घाव के आसपास हल्के दर्द जैसा अनुभव हो सकता है। हालांकि, इसके लक्षण तेजी से बढ़ते हैं। नेक्रोटाइजिंग फैसीसाइटिस के रोगियों में निम्न लक्षण देखे जा सकते हैं।

  • संक्रमण वाली जगह लाल और गर्म हो जाती है
  • घाव के आसपास दर्द बढ़ जाता है
  • घाव या चोट की जगह से तरल पदार्थ निकलना
  • संक्रमित हिस्सा नीले या बैंगनी रंग का हो जाना
  • बुखार
  • जी मिचलाना
  • चक्कर आना
  • थकान

मरीज की स्थिति बिगड़ने पर लक्षण और भी गंभीर हो जाते हैं। जैसे :

  • लो ब्लड प्रेशर
  • कमजोरी महसूस होना
  • भ्रम की स्थिति
  • दिल की धड़कन तेज होना
  • त्वचा काली होने लगती है
  • बेहोशी
  • रोगी पेशाब करना बंद कर देता है (एनौरिया)
  • झटके लगना

नेक्रोटाइजिंग फैसीसाइटिस के कारण जटिलताओं का गंभीर होना और सूजन होना आम है। इसके अलावा रोगी को सेप्सिस, शॉक और अंगों के खराब होने का भी खतरा रहता है। समय पर इलाज न होन की स्थिति में संक्रमण घातक हो सकता है। इसमें जान जाने का भी खतरा अधिक रहता है।

नेक्रोटाइजिंग फैसीसाइटिस का कारण - Necrotizing Fasciitis kyon hota hai?

सामान्य तौर पर एक या कई प्रकार के बैक्टीरिया के कारण संक्रमण हो सकता है। ये बैक्टीरिया त्वचा के माध्यम से शरीर में प्रवेश करते हैं। संक्रमण पैदा करने वाले कुछ बैक्टीरिया आंत में भी मौजूद होते हैं, लेकिन वह हानिकारक नहीं होते हैं। रोगजनक मुख्य रूप से निम्न माध्यमों से शरीर में प्रवेश करते हैं।

  • घाव या कट
  • सर्जरी वाले घाव, हालांकि इस माध्यम से संक्रमण होने का खतरा बहुत ही कम होता है
  • कीटाणुओं के काटने वाले स्थान
  • जले हुए हिस्से

स्ट्रेप्टोकोकस पी (ग्रुप ए स्ट्रेप्टोकोकस) के अलावा कुछ अन्य बैक्टीरिया जो नेक्रोटाइज़िंग फैसीसाइटिस का कारण बन सकते हैं, वे हैं एरोमोनस हाइड्रोफिला, क्लोस्ट्रीडियम, ई कोलाई, क्लेबसिएला, स्टेफिलोकोकस ए और विब्रियो वुल्निस्पस।

यह संक्रमण एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भी हो सकता है। हालांकि, यह अत्यंत दुर्लभ है। वैसे तो यह संक्रमण किसी को भी हो सकता है, लेकिन जिन लोगों को डायबिटीज है, उन्हें इसका खतरा अधिक होता है। चूंकि, डायबिटीज रोगियों की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होती है ऐसे में उन्हें संक्रमण होने का खतरा अधिक होता है। कुछ दुर्लभ मामलों में बच्चों में चिकनपॉक्स के साइड इफेक्ट के कारण भी नेक्रोटाइजिंग फैसीसाइटिस हो सकता है।

नेक्रोटाइजिंग फैसीसाइटिस का निदान - Necrotizing Fasciitis ka diagnosis kaise kiya jata hai?

नेक्रोटाइजिंग फैसीसाइटिस की अंतर्निहित समस्या को समझने के लिए कई प्रकार के उपायोंं को प्रयोग में लाया जा सकता है।

  • चोट या संक्रमण की जांच। यदि घाव से रिसाव हो रहा हो और त्वचा का रंग बैंगनी हो जाए तो यह संक्रमण का संकेत हो सकता है।
  • स्थिति के कारक रोगजनकों का पता लगाने के लिए ऊतकों की बायोप्सी की जा सकती है।
  • संक्रमण और मांसपेशियों की क्षति का पता लगाने के लिए ब्लड टेस्ट किया जा सकता है।
  • यदि संक्रमण फैल गया है, तो प्रभावित हिस्से का इमेजिंग परीक्षण (सीटी स्कैन, एमआरआई, अल्ट्रासाउंड) किया जा सकता है।

संक्रमण को नियंत्रण में लाने और उसे फैलने से रोकने के लिए इसका तुरंत इलाज शुरू करना बहुत आवश्यक होता है।

नेक्रोटाइजिंग फैसीसाइटिस का इलाज - Necrotizing Fasciitis ka treatment kaise hota hai?

नेक्रोटाइजिंग फैसीसाइटिस का निदान होते ही इसका इलाज प्रारंभ कर दिया जाता है। इलाज जितनी जल्दी शुरू हो जाए, संक्रमण को नियंत्रित करना उतना ही आसान होता है। इलाज के लिए निम्न उपायों को प्रयोग में लाया जाता है।

  • मृत ऊतकों को हटाने के लिए सर्जरी : संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए सर्जरी के माध्यम से मृत ऊतकों को हटाने की आवश्यकता होती है। इस प्रक्रिया को डिब्रिडमेंट के नाम से भी जाना जाता है। गंभीर मामलों में यदि संक्रमण खत्म न हो रहा हो तो कई बार सर्जरी की आवश्यकता होती है।
  • एंटीबायोटिक्स का कोर्स : बैक्टीरिया को खत्म करने के लिए अन्य सभी उपचारों के साथ एंटीबायोटिक दवाएं भी दी जाती हैं। आमतौर पर नसों के माध्यम से एंटीबायोटिक्स दी जाती हैं, ताकि वे तेजी से कार्य करें और पूरे शरीर तक पहुंच सकें। हालांकि, यदि रोग के कारण आस-पास के ऊतक नष्ट हो गए हों तो यह उपाय प्रभावी नहीं होता है। ऐसी स्थिति में दवाएं अपने स्थान तक ठीक से पहुंच नहीं पाती हैं।

चूंकि, रोगी धीरे-धीरे ठीक हो रहा होता है ऐसे में उपचार कुछ हफ्तों तक चल सकता है।

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References

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  4. Patcharin Khamnuan, et al. Necrotizing fasciitis: risk factors of mortality Risk Manag Healthc Policy. 2015; 8: 1–7. PMID: PMID: 25733938
  5. Paul Patapis, et al. Current Concepts in the Management of Necrotizing Fasciitis Front Surg. 2014; 1: 36. PMID: 25593960
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