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पेडू में दर्द (पैल्विक पेन) पेट के निचले हिस्से (नाभि के नीचे और कमर के ऊपर) में होने वाले दर्द को संदर्भित करता है। वैसे तो यह पुरुषों और महिलाओं दोनों को प्रभावित करता है, लेकिन महिलाओं में यह समस्या अधिक देखी जाती है। इसमें प्रजनन अंगों में किसी तरह की समस्या, संक्रमण या पेडू की हड्डी में दर्द शामिल है। यह दर्द कुछ मिनटों तक या कुछ दिनों तक भी रह सकता है।

महिलाओं और पुरुषों में पेडू में दर्द के कारण भिन्न होते हैं। मूत्राशय, हर्निया, अपेन्डिसाइटिस (अपेंडिक्स की सूजन), किडनी में संक्रमण, श्रोणि की टूटी हुई हड्डी, आंतों में समस्या और तंत्रिका संबंधी स्थिति को प्रभावित करने वाले रोग महिलाओं और पुरुषों दोनों में श्रोणि वाले हिस्से दर्द के संभावित कारण हैं। इसके अलावा कुछ महिलाओं में गर्भपात, गर्भावस्था, मासिक धर्म के दौरान ऐंठन, फाइब्रॉएड, इंडोमेट्रिओसिस, गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर या गर्भाशय के कैंसर, श्रोणि में सूजन की बीमारी, ओव्यूलेशन इत्यादि कारणों से पेडू में दर्द की समस्या होती है। पैल्विक या पेडू में दर्द अंतर्निहित स्थितियों के कारण होने वाला लक्षण है। यदि यह कम से कम 6 महीने तक रहता है, तो इसे क्रोनिक पैल्विक पेन कहते हैं।

आमतौर पर पैल्विक पेन मासिक धर्म में दर्द, बुखार, कब्ज, योनि से ब्लीडिंग, ठंड लगना, कमर या कूल्हे वाले हिस्से में दर्द, सूजन, पेशाब के दौरान दर्द और संभोग करने और कभी-कभी दस्त जैसे अन्य लक्षणों से भी जुड़ा होता है।

परंपरागत रूप से, दर्द का इलाज अंतर्निहित कारण का इलाज करके किया जाता है। उपचार दर्द की आवृत्ति और तीव्रता पर भी आधारित हैं।

होम्योपैथिक उपचार न सिर्फ लक्षणों को ठीक करता है बल्कि यह अंतर्निहित स्थितियों को भी ठीक करके रोगी को राहत प्रदान करता है। हालांकि, होम्योपैथी चिकित्सा एक व्यक्तिगत प्रणाली है। भले ही किन्हीं दो व्यक्तियों को एक जैसी समस्या या दर्द हो, लेकिन होम्योपैथी में ऐसे दोनों मरीजों को एक जैसी दवा नहीं दी जाती है। एक होम्योपैथिक डॉक्टर किसी मरीज के लिए दवा निर्धारित करने से पहले उसकी शारीरिक, मानसिक और बीमारी की लक्षणों की जांच करता है। 

कुछ होम्योपैथिक उपचार जो कि पेल्विक पेन के इलाज के लिए उपयोग किए जाते हैं उनमें शामिल हैं : 

  • एस्कुलस हिप्पोकैस्टेनम जो टूटी या उखड़ी हुई पेल्विक हड्डियों की वजह से होने वाले दर्द से राहत दिलाने में मदद करता है। 
  • आर्सेनिकम एल्बम और बेलाडोना जो जलन जैसे दर्द से राहत दिलाता है।
  • एगरिकस म्यूसकेरियस, एकोनिटम नेपलस और गॉसीपियम जो कोलिकी पेन (दर्द जो अचानक शुरू होता है और अचानक खत्म हो जाता है) और ऐंठन को कम करता है।
  • मैग्नीशियम फॉस्फोरिकम और सेपिया ओफिसिनेलिस जो दबाव या संकुचन से होने वाले दर्द को कम करता है।
  1. पेडू में दर्द के लिए होम्योपैथिक दवाएं - Pelvic pain ke liye homeopathic medicine
  2. होम्योपैथी के अनुसार पेडू में दर्द के लिए आहार और जीवन शैली में बदलाव - Pelvic pain ke liye khanpan aur jeevan shaili me badlav
  3. पेडू में दर्द के लिए होम्योपैथिक दवाएं और उपचार कितने प्रभावी हैं - Pelvic pain ki homeopathic medicine kitni effective hai
  4. पेडू में दर्द के लिए होम्योपैथिक दवा के नुकसान और जोखिम - Pelvic pain ki homeopathic medicine ke nuksan
  5. पेडू में दर्द के लिए होम्योपैथिक उपचार से संबंधित टिप्स - Pelvic pain ki homeopathic treatment se jude tips

एस्कुलस हिप्पोकैस्टेनम
सामान्य नाम :
हॉर्स चेस्टनट
लक्षण : एस्कुलस हिप्पोकैस्टेनम पीठ और निचल आंत पर काम करता है। यह उपाय उन लोगों में अच्छी तरह से काम करता है जो अक्सर पीठ दर्द और शरीर के विभिन्न हिस्सों में भारीपन महसूस करते हैं। यह एक पेडू की टूटी हुई हड्डी या पेडू वाले हिस्से में खरोंच के कारण पैल्विक पेन को कम करने में मदद करता है। यह अन्य लक्षणों को प्रबंधित करने में भी मदद करता है जैसे:

  • पेडू वाले हिस्से में थ्रोबिंग पेन (धमक जैसा दर्द)
  • सैक्रोलिएक ज्वॉइंट (गुदा की हड्डी के पास पीठ के निचले हिस्से में जोड़) के पास पीठ में कमजोरी 
  • मूत्रनली के बाईं ओर दर्द
  • सिम्फिसिस प्यूबिस (बाएं और दाएं जघन हड्डी को जोड़ने वाला एक जोड़) में थ्रोबिंग पेन
  • किडनी में दर्द
  • नाभि वाले हिस्से में दर्द

यह लक्षण चलने के बाद, सुबह में, किसी तरह की गतिविध करने पर, खाने या खड़े होने पर बिगड़ जाते हैं जबकि ठंडी और खुली हवा में रहने पर इनमें सुधार होता है।

आर्सेनिकम एल्बम
सामान्य नाम :
आर्सेनिक एसिड
लक्षण : आर्सेनिक एसिड उनमें अच्छा असर करता है जो लोग बहुत चिंता करते हैं और छोटी से छोटी गतिविधियां करने पर भी अत्यधिक थकान महसूस करते हैं। यह उपाय पेडू में दर्द को कम करने में मदद करता है। इसका उपयोग निम्नलिखित लक्षणों के उपचार के लिए भी किया जाता है :

  • पेडू में सिलाई वाला दर्द जो जांघों तक फैलता है
  • पेट वाले हिस्से में सूजन और दर्द
  • अत्यधिक मासिक धर्म
  • खांसने पर पेट में दर्द
  • पेशाब करने के बाद पेट में एक कमजोरी लगना
  • पीठ में जलन के साथ दर्द

यह लक्षण ठंड और बरसात के मौसम में, ठंडे भोजन और पेय का सेवन करने के बाद और आधी रात के बाद बदतर हो जाते हैं, जबकि गर्म मौसम में, गर्म पेय लेने और सिर ऊंचा रखने पर इन लक्षणों से राहत मिलती है।

बेलाडोना
सामान्य नाम :
डेडली नाइटशेड
लक्षण : बेलाडोना बच्चों के लिए सबसे अच्छा उपाय है। यह उपाय तंत्रिका संबंधी दर्द, शरीर में मरोड़ और दर्द को कम करने में मदद करता है। इसके अलावा यह निम्नलिखित लक्षणों से भी राहत दिलाता है :

  • पेट को छूने के प्रति अति संवेदनशीलता
  • खांसते समय पेट के बाईं ओर चुभने जैसा दर्द होना
  • कूल्हे की हड्डी में एक तरफ से दूसरी तरफ चुभने जैसा दर्द होना
  • मासिक धर्म में ज्यादा डिस्चार्ज होना
  • प्रसव पीड़ा जैसा एहसास होना जो अचानक से आता और जाता है
  • सैक्रम (पूंछ वाली जगह की हड्डी) में दर्द

यह लक्षण दोपहर के बाद, लेटने या प्रभावित हिस्से को छूने पर बदतर हो जाते हैं, लेकिन सेमी इरेक्ट पोजिशन (लेटने व बैठने के बीच वाली स्थिति) में रहने पर इनमें सुधार होता है।

गॉसीपियम
सामान्य नाम : कॉटन प्लांट
लक्षण :
यह उपाय उन लोगों के लिए अच्छा है जो लंबे हैं और हीमोग्लोबिन की कमी से ग्रस्त हैं। यह मासिक धर्म और गर्भाशय के अनियमित कार्यों में सुधार करके पेडू में दर्द को कम करता है। कॉटन प्लांट निम्नलिखित लक्षणों से छुटकारा पाने में मदद करता है :

  • अंडाशय में दर्द जो अनियमित अंतराल पर होता है
  • मासिक धर्म में पतला पानी जैसा डिस्चार्ज होना
  • पीठ में दर्द के साथ पेडू वाले हिस्से में भारीपन लगना
  • मासिक धर्म में देरी
  • मासिक धर्म के दौरान भूख की कमी और बेचैनी का एहसास
  • आमाशय में कमजोरी और दर्द

एगरिकस म्यूसकेरियस
सामान्य नाम :
टोड स्टूल
लक्षण : एगरिकस म्यूसकेरियस का उपयोग पैल्विक पेन को कम करने के लिए किया जाता है जो सुन्न, ठंड और झुनझुनी जैसे सनसनी के साथ होता है। इस उपाय से निम्नलिखित लक्षणों का इलाज किया जा सकता है :

  • तेज दर्द होना जो भारीपन के एहसास के साथ जुड़ा हुआ है
  • लिवर वाले हिस्से में तेज दर्द के साथ पेट संबंधित समस्याएं
  • मासिक धर्म के दौरान तेज ब्लीडिंग
  • पीठ में दर्द
  • कूल्हों में दर्द और जकड़न

यह लक्षण ठंड और खुली हवा में और खाने के बाद बदतर हो जाते हैं, जबकि धीरे-धीरे आगे बढ़ने से इनमें सुधार होता है।

एकोनिटम नेपेलस
सामान्य नाम :
मॉन्कसूड
लक्षण : यह उपाय उन लोगों को दिया जाता है जो लोग शरीर के अंदर ठंड और झुनझुनी महसूस करते हैं। यह पेरिटोनिटिस को कम करने में मदद करता है। इसके अलावा यह उपाय निम्नलिखित लक्षणों को प्रबंधित करने में भी मदद करता है :

  • नाभि वाले हिस्से में जलन; संवेदनशील पेट
  • मासिक धर्म देर से होना व ज्यादा डिस्चार्ज होना
  • अंडाशय में दर्द और भारीपन
  • लेटने के बाद जांघ की हड्डी और कूल्हे के जोड़ में अत्यधिक कमजोरी
  • पीठ में झुनझुनी और कुछ रेंगने जैसा महसूस होना 
  • बिना दर्द के जोड़ों में दरार

सूखे और ठंडी हवा में, शाम और रात में, धूम्रपान करने और प्रभावित हिस्से के बल लेटने से लक्षण बिगड़ जाते हैं। जब मरीज खुली हवा में कुछ समय बिताता है तो इन शिकायतों से राहत मिलती है।

सेपिया आफिसिनेलिस
सामान्य नाम :
इंकी जूस ऑफ कटलफिश
लक्षण : यह उपाय ऐसे लोगों में अच्छा असर करता है, जिन्हें गर्म वातावरण में भी ठंड लगती है। यह महिलाओं में कमजोरी को दूर करने में प्रभावी है। यह पेडू वाले हिस्से को रिलेक्स करता है और निम्नलिखित लक्षणों से राहत दिलाता है :

  • मासिक धर्म में देरी व साथ में न्यूनतम ब्लीडिंग
  • मलाशय वाले हिस्से में दर्द जो ऊपर की ओर बढ़ता है
  • पीरियड्स के दौरान अनियमित और तेज दर्द
  • पीठ में दर्द और ठंड लगना

यह लक्षण नम क्षेत्र में, ठंडी हवा में और शाम को खराब हो जाते हैं। रोगी व्यायाम करने के बाद, ठंडे पानी से नहाने के बाद, प्रभावित हिस्से में गर्म सिकाई और दबाव डालने के बाद अच्छा महसूस करता है।

मैग्नीशियम फॉस्फोरिकम
सामान्य नाम :
फॉस्फेट ऑफ मैग्नेशिया
लक्षण : यह उपाय उन लोगों को दिया जाता है जो अक्सर थका हुआ और सुस्त महसूस करते हैं और मानसिक थकान के कारण बीमार पड़ जाते हैं। इस उपाय से पेडू में दर्द को कम करने में मदद मिलती है। इस उपाय से जिन अन्य लक्षणों का इलाज किया जा सकता है वे हैं :

  • पेट फूलना
  • समय से पहले मासिक धर्म और इस दौरान दर्द होना
  • रेडिएटिंग पेन (एक स्थान से दूसरे स्थान तक फैलने वाला दर्द) और ऐंठन
  • पेट में गैस और पेट फूलना

यह लक्षण रात में, दाईं तरफ लेटने और प्रभावित हिस्से को छूने से बदतर हो जाते हैं, जबकि प्रभावित हिस्से पर दबाव डालने और गर्म सिकाई से इनमें सुधार होता है।

होम्योपैथिक चिकित्सा के संस्थापक डॉ. हैनिमैन ने होम्योपैथिक दवाओं से पूर्ण चिकित्सीय लाभ प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित आहार और जीवनशैली दिशानिर्देशों का पालन करने की सिफारिश की है। 

क्या करना चाहिए

  • क्रोनिक पै​ल्विक पेन (धीरे धीरे या लंबे समय से पेडू में दर्द) के मामले में, सक्रिय जीवन शैली का पालन करना चाहिए। इसके अलावा गर्म मौसम में लिनेन के कपड़े पहनें और स्वच्छ परिस्थितियों में रहें।
  • एक्यूट पैल्विक पेन (अचानक या तेज पेडू में दर्द) के मामले में ध्यान रखना जरूरी है कि मरीज को खाने-पीने से संतुष्टि मिलनी चाहिए। इसके अलावा सुविधा के अनुसार कमरे के तापमान को समायोजित करें।

क्या नहीं करना चाहिए

  • क्रोनिक पै​ल्विक पेन के मामले में गंधयुक्त पानी, हर्बल चाय और मसालों का सेवन न करें। अधिक मीठे और मसालेदार खाने से बचें।
  • एक्यूट पैल्विक पेन के मामले में घबराने वाली परिस्थितियों व मानसिक रूप से थकने से बचें।

होम्योपैथिक डॉक्टर दर्द की संवेदनशीलता और रोगी के स्वभाव और मानसिकता के आधार पर एक्यूट पेन के लिए उपचार का निर्धारण करते हैं। क्रोनिक पेन के लिए, चिकित्सक रोगी की प्रकृति और बीमारी के कारणों की जांच करने के बाद दवा निर्धारित करते हैं।

2016 में पेडू में दर्द के प्रति होम्योपैथिक दवाओं के असर को जानने के लिए 24 सप्ताह के लिए एक डबल ब्लाइंडेड स्टडी की गई। डबल ब्लाइंडेड स्टडी का मतलब न तो प्रतिभागियों और न ही प्रयोगकर्ताओं को पता होता है कि मरीज कौन-सा उपचार प्राप्त कर रहा है। फिलहाल, इस शोध में 50 महिलाओं को शामिल किया गया था। इन रोगियों को दिन में तीन बार 12C, 18C और 24C की खुराक में पोटेंटाज्ड एस्ट्रोजन दिया गया। यहां पोटेंटाज्ड का मतलब उस प्रक्रिया से है जिसके द्वारा होम्योपैथिक उपचार तैयार किया जाता है और एस्ट्रोजन महिलाओं में पाए जाने वाला मुख्य सेक्स हार्मोन है। अध्ययन के नतीजों ने निष्कर्ष निकला कि एंडोमेट्रियोसिस नामक विकार से जुड़े पैल्विक पेन को कम करने के लिए पोटेंटाज्ड एस्ट्रोजन काफी प्रभावी है।

होम्योपैथिक उपचार को उपयोग के लिए सुरक्षित माना जाता है, क्योंकि वे प्राकृतिक पदार्थों से तैयार की जाती हैं। इनका इस्तेमाल करने से पहले इन्हें घुलनशीन रूप दिया जाता है। यही वजह है कि इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है।

हालाकि, होम्योपैथी ट्रीटमेंट एक व्यक्तिगत उपाय है, इसलिए किसी योग्य होम्योपैथिक चिकित्सक द्वारा निर्धारित दवा का सेवन करना ही उचित होता है।

पेडू में दर्द किसी चोट, संक्रमण या किसी अंतर्निहित स्थिति के कारण हो सकता है। पारंपरिक रूप से, चिकित्सक रोगी को दर्द से राहत देने के लिए अंतर्निहित स्थिति का इलाज करते हैं।

जबकि, होम्योपैथिक उपचार का उद्देश्य अंतर्निहित बीमारी का इलाज करने के साथ रोगी के मानसिक और शारीरिक स्थिति के आधार पर दर्द को कम करना है।

होम्योपैथिक उपचार के दौरान मरीजों को क्या करना चाहिए व क्या नहीं करना चाहिए जैसे टिप्स को ध्यान में रखने की सख्त जरूरत होती है। क्योंकि इन सुझावों के माध्यम से मरीज को तेज रिकवर होने में मदद मिलती है।

चूंकि, होम्योपैथिक उपचार प्राकृतिक पदार्थों से तैयार किए जाते हैं इसलिए यह सुरक्षित होते हैं। खास बात यह है कि इन दवाओं का उपयोग हर आयु वर्ग के लोग कर सकते हैं।

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References

  1. William Boericke. Homoeopathic Materia Medica. Kessinger Publishing: Médi-T 1999, Volume 1
  2. British Homeopathic Association. https://www.britishhomeopathic.org/charity/how-we-can-help/articles/conditions/p/pain/. London; [Internet]
  3. Teixeira MZ, Podgaec, Baracat. Protocol of randomized controlled trial of potentized estrogen in homeopathic treatment of chronic pelvic pain associated with endometriosis.. 2016 Aug;105(3):240-249. PMID: 27473545
  4. Cleveland Clinic. [Internet]. Cleveland, Ohio. Pelvic Pain: Possible Causes
  5. International Scholarly Research. Complementary and Alternative Medicine in the Treatment of Chronic Pelvic Pain in Women: What Is the Evidence?. Volume 2013, Article ID 469575, 8 pages
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